Vichar Manthan

Mere vicharon ka sangrah

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"बापू आप देख रहे हैं ? "

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एक एरिया में सीवर बनने लगा वहाँ के रहने वाले बहुत खुश थे |चलो सफाई रहेगी खुदाई शुरू हुई जमीन से मिट्टी के ढेर निकले ,अफ़सोस ठेकेदार के ट्रक आये देखते-देखते मिट्टी ट्रकों में भर कर बिकने चली गई | जमीन पर फुर्ती से सीवर लाइन बिछा दी गई उस पर बची खुची मिट्टी डाल कर ठेकेदार का काम खत्म हो गया | कुछ ही दिनों में पटरी भी बन गई और किनारे पर जरा सा सीमेंट डाल कर नाली भी बन गई जिससे बरसात का पानी निकल सके| पब्लिक को सीवर के ढक्कन पर छेदों से जिससे गैस निकलनी जरूरी है उससे बदबू आती थी अच्छे नागरिकों ने उस पर सीमेंट चढ़ा दी | अपने घर की नाली के लिए कौन सीवर डिपार्टमेंट जाए इसलिए खुद ही सीवर का ढक्कन तोड़ कर उसमें अपने घर की नालियां जोड़ देते है टूटे ढक्कन के रास्ते लोग थेली में डाल कर कूड़ा फेक देते हैं इस तरह सीवर बंद हो गया उससे आस पास के घरों की दीवारे और फर्श सीलने लगे घर में बू आने लगी इससे पहले सीवर का पानी घर में आये सीवर डिपार्टमेंट में शिकायत की गई डिपार्टमेंट काफी मुस्तैद था वह सीवर की सफाई भी कर गये अंदर से निकली गंदगी और कूड़े का ढेर बन गया सीवर का टूटा ढक्कन भी लगा गये परन्तु ढक्कन के छेद बंद करने पर उन्होंने ऐतराज किया फिर खुद ही छेद खोल गये जबकि छेद बंद करना अपराध है |क्या करे छेद बंद करने वाला गरीबी की दुहाई देने लगेगा आजकल दिल्ली में एक अमोघ शस्त्र चलता है हम गरीब आदमी हैं |
री सेटेलमेंट कलोनिया झुग्गी खाली करवाने के एवज में दिल्ली सरकार बसाती है | २६ गज के प्लाट में लैट्रिन के लिए गड्डा तैयार कर उसके उपर पॉट फिट कर प्लाट दिए जाते हैं जब बस्ती बसती है बाशिंदे सबसे पहले पॉट को निकाल कर फेक देते हैं और गड्ढे को पाट कर दो कमरे का घर बना लेते हैं शोचालय उनके हिसाब से जगह खराब करना है हाँ छत पर जरा सी आड़ कर शौचालय बना कर गंदगी सीधी घर के बाहर की नाली में डाल देते हैं यदि घर के सामने से नाला गुजर रहा है तो पटरी को तोड़ कर प्लास्टिक की पाईप के सहारे नाले में सीधी गंदगी डाल देते है| आज भी पानी की बोतल हाथ में लेकर शौच के लिए लोग बाहर जाते है जबकि घर में शौचालय है उन्हें खुले में जाने की आदत है आप को बुरा लगता है इसके लिए वह अपनी आदत क्यों बदलें अब जगह की बहुत कमी हो गई हैं फिर भी गंदगी फैलाते हैं |लोग बहुत समझ्दार हैं जमीन पर कब्जा करना नही छोड़ते घर के बाहर तीन फुट की दो दीवारे उठा कर उस पर लेंटर डाल कर एक प्लेटफार्म बना लेते हैं | जबकि सामने से सरकारी नाली गुजरती है उस प्लेट फार्म पर रसोई घर बन जाता हैं बाकी जगह धूप सकने या बैठने के काम आती हैं कईयों नें बिना नक्शे के पांच मंजिल तक घर बना कर नाली के ऊपर से के सीढ़िया चढ़ा ली हैं आठ फुट की सड़क को तो दोनों तरफ के निवासी चाहते हैं उस पर छत बना कर अपने कब्जे में ले लें| कहीं नाली ढकी कहीं खुली, उसमें भी कूड़ा प्लास्टिक की बोतले और चप्पलें पड़ी रहती हैं सफाई कहाँ से हो, पूरी भरी हुई नालियों में से गंदा पानी बहता है लोगों की चप्पले जूते भीगते रहते है |रहा सवाल सफाई कर्मचारी का उनकी बंधी तनखा है वह सरकारी कर्मचारी हैं काम क्यों करे ?यदि कोइ सफाई के लिए प्रार्थना करता वह कूड़े निकालने बाला डंडा हाथ में पकड़ा कर कहते है खुद कर लो और कमर पर हाथ रख कर खड़े हो जाते हैं| एक बार एक समझदार ने सफाई करते समय अपनी बीबी से कहा सेल पर वीडियो वना लो मैं इसके डिपार्टमेंट में भेज देता हूँ बस गरीबी की बड़ी- बड़ी दुहाई शुरू हो गई |
जनता ब्लाकों का हाल और भी खराब है मकान के मालिक नाली पर पत्थर या लेंटर डाल कर उसे ढक देते हैं उस पर से आगे बढ़ कर आधी सड़क पर कब्जा कर एक कमरा निकाल लेते हैं पहली मंजिल पर रहने वाले सरकारी सड़क पर पिलर लगा कर उस पर छत डाल कर आगे अपनी जगह बढ़ा लेते हैं सब पुलिस और नगरपालिका के कर्मचारियों को पुजापा चढ़ा कर होता है |सड़क इतनी छोटी कर देते हैं जिससे निकलना मुश्किल होता है| जब बारिश आती है नाली से पानी कैसे निकले बुरी तरह पानी भर जाता है घर के अंदर तक पानी आ जाता है| गालियाँ सरकार को दी जाती है पानी के निकास के बारे में जब जमीन घेरी कभी नही सोचा अब अपने क्षेत्र के विधायक को पकड़ा जाता है उसे भला बुरा भी कहा जाता है वह भी चुनाव के समय ही दर्शन देते हैं |जब चुनाव आता है हर शिकायत दूर करने का वादा करते हैं पर यह नही कहते जब कब्जा करते हो सोचते हो बरसात में पानी कहाँ से निकलेगा |
नाले ढकने के लिए मजबूत लेंटर डाले गये है पानी के निकास के लिए मजबूत रास्ते भी बनाये गये परन्तु पहले वहाँ ईटें रख कर रास्ता बंद कर देते है फिर कूड़ा डालना शुरू हो जाता हैं बरसात आती है सडकों में पानी से भर जाती हैं राहगीर कितने परेशान होते है यह वही जानते हैं| कुछ अच्छे नागरिक पानी से भरी सडकें देख कर और राहगीरों की परेशानी देख समझ कर निकास का मुहं खोलते हैं तब जाकर पानी निकलता है सड़क खाली होती है बरसात से पहले नगरपालिका भी नालों के मुहं खुलवाकर कूड़ा निकलवाती है परन्तु कितने दिन के लिए फिर वही जनता की और से लापरवाही शुरू हो जाते है |
किसी को अपने घर के आसपास कूड़ा दान नहीं चाहिए एक तो कूड़ा उठता ही नहीं चारो तरफ गंदगी फैली रहती है कूड़ा उठाने कोइ नहीं आता महीनों सड़ता रहता है| जानवर कूड़े में मुहं देकर चारो और फैला देते हैं चरों और मक्खियाँ भिनभिनाती रहती हैं |इससे बचने के लिए कूड़ेदान को ही लोग हटवा देते हैं अब कूड़े का क्या हो? किसी के भी घर के बाहर कूड़ेदान को उल्ट जाते हैं| कुछ लोग हर महीनें पैसा लेकर कूड़ा उठाने का काम करते हैं वहाँ सफाई नजर आती है |
हमारे यहाँ न्यूजीलैंड लैंड से मेहमान आये उनके आने जाने के लिए हमने एक टैक्सी वाला तय कर दिया वह जब घर लौटते बहुत गुस्से में होते थे उनको शिकायत थी उनका टैक्सी वाला दिल्ली में सुलभ शौचालय होते हुए भी सड़क पर गंदगी फैलाता है|
आजादी के बाद हमें हर बात की शिकायत सरकार से होती हैं सरकार हमारी ही बनाई हुई हैं देश भी हमारा है मोदी जी ने २ अक्तूबर के दिन को सफाई अभियान शुरू किया उन्होंने स्वयं भी इस काम में हिस्सा लिया उन्होने जापान के स्कूलों में देखा टीचर और विद्यार्थी मिल कर अपने स्कूल की सफाई करते हैं | हर व्यक्ति की इच्छा शक्ति से ही साफ़ सफाई रह सकती हैं | हमें सोचना है अपने परिवेश को साफ़ सुथरा बनाने के लिए हम क्या करें? और हम क्या करते हैं हम सब जानते हैं स्वच्छ परिवेश स्वास्थ्य के लिए लाभ कारी है |
डॉ शोभा भारद्वाज

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
October 3, 2014

शोभा जी बहुत सरल और सहज तरीके से आपने देश की सफाई व्यवस्था पर लिखा है और सच है कि हम भी कटघरे में खडे हैं । 

Shobha के द्वारा
October 3, 2014

आदरणीय बिष्ट जी आपने लेख पढ़ा बहुत ख़ुशी हुई असल में मोदी जी ने स्वच्छता अभियान चलाया मै काफी समय बाहर रही हूँ मेरी आखों में जो बाते खटकती थी वःह मैने लिख दी |आपने पढ़ भी ली साभार शोभा

Neelam के द्वारा
October 6, 2014

शोभा जी मोदी जी ने ठीक कहा है सफाई के लिए जनता की भी जिम्मेदारी है | लोग पानी के भराव की शिकायतें करते हैं कभी नही सोचते उन्होंने पानी के निकास के रास्ते खुद ही कम कर दिए | नीलम

sadguruji के द्वारा
October 6, 2014

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! एक अच्छी सुबह ! दिन मंगलमय हो ! ये वेबसाइट दिन में जल्दी खुलती ही नहीं है ! इधर कुछ दिनों से मैं बहुत व्यस्त भी था ! आपका पूरा लेख मैं ध्यान से पढ़ा ! मुझे ये लेख बहुत अच्छा लगा ! शहर और बस्ती के गलियों की गन्दी स्थिति और लोंगो की लालची मनःस्थिति का बहुत व्यावहारिक और यथार्थ वर्णन ! सीवर के मेनहोल का लोहे का ढक्कन लोग चुरा के बेच देते हैं ! गाय भैस पालने वाले गोबर बहाकर सीवर जाम करते हैं और बाकी लोग उसमे कूड़ा फेककर ! गली मोहल्लों के साथ साथ लोंगो के गंदगी भरे दिमाग की सफाई करना भी जरुरी है ! मोदी जी इस दिशा में भरपूर प्रयास कर रहे हैं ! हम सबको अपना समर्थन और सहयोग उन्हें देना चाहिए ! एक बहुत अच्छा और अतिसम्मानित जीवन जीते हुए भी आप को इस विषय का इतनी बारीकी से ज्ञान है,मेरे लिए ये वाकई बहुत सुखद और हैरत वाली बात है ! इतनी उपयोगी और विचारणीय प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार !

Shobha के द्वारा
October 6, 2014

आदरणीय सद्गुरु जी आपने मेरा लेख पढ़ा आपको कारगर लगा मुझे दिल्ली का ज्ञान था आपने मेरे ज्ञान में बढ़ोतरी कर दी \ हमारा घर सड़क पर है थी यह सब मैने अपनी आखों से देखा है शुरू में ध्यान नही गया बाद में बरसात में पूरी सड़क पानी से लबालब भर गई जब कारण जाना तो बड़ी हैरानी हुई मेरे लडके ने और आस पास के लोगों ने पानी के निकास से ईटें हटाई पानी निकला नहीं तो पूरा जाम लग गया था मोदी जी ने ऐसा विषय उठाया है जिससे जवान प्रभावित हो रहा है यह स्वच्छता अभियान अब नही रुकेगा सद्गुरु जी यदि हम आस पास के परिवेश पर नजर घुमाएं देख कर बड़ी हैरानी होती है हम कैसे होते जा रहें हैं | आज कल एक नारा बहुत फेमस है अजी हम गरीब हैं ना इसआड़ में सब कुछ छिपा लिया जाता है फिर से धन्यवाद सहित शोभा

Shobha के द्वारा
October 6, 2014

नीलम जी आपने ठीक कहा सफाई के लिए जनता जागरूक हो जाए गंदगी नाम मात्र की रह जायेगी शोभा

Bhola nath Pal के द्वारा
October 7, 2014

आदरणीय शोला जी ! लेख बहुत अच्छा लगा | सफाई के प्रति बहुत जागरूक होना चाहिए | प्रतिज्ञा तो नहीं कोशिश अवश्य करूँगा कि आपको ऐसी शिकायत का मौका न दूँ व्यक्तिगत स्तर पर चेतना जगाने के लिए आभार |

Ravinder kumar के द्वारा
October 7, 2014

शोभा जी, सादर नमन. आपका लेख भारत की सफाई व्यवस्था का १०० प्रतिशत सच है. हमारे आस-पास यही सब हो रहा है. सफाई न तो हम चाहते हैं ना ही प्रशासन. अगर सफाई हो गई तो हमारे कुत्तों का क्या होगा ? सुबह-सुबह दातुन करते हुए, हम थूकें गे कहाँ ? स्वच्छ्ता सामूहिक कर्म है. हमारा समाज यदि चाहेगा तो ही स्वच्छ भारत का सपना साकार होगा. अकेले मोदी के झाड़ू मार देने से यह संभव नहीं. बेहतरीन लेख के लिए आपको बधाई.

Shobha के द्वारा
October 7, 2014

आदरणीय भोला नाथ जी लेख पढने का आभार वाकई मोदी जी के सफाई अभियान से जागरूकता बढ़ रही है हम सब जब जागरूक हो जायेंगे कूड़ा करकट फेकने वालों को टोकने लगेंगे स्वच्छता बढने लगेगी डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
October 7, 2014

श्री रविन्द्र जी आप ठीक कह रहें है गंदगी फैलाने की भावना सामजिक चेतना की कमी ही गंदगी को जन्म देती है हम सब जब जागरूक हो जायेंगे सफाई की भावना अपने आप बढ़ जायेगी मुह में गुटका भर कर उसकी पीक लोग कही भी थूकते है दीवारे तक गंदी करते हैं मोदी जी ने सबको जगाने की कोशिश की हैं हम सब टोकेंगे स्वच्छ भारत का अपने आप निर्माण हो जाएगा डॉ शोभा

jlsingh के द्वारा
October 8, 2014

हमें सोचना है अपने परिवेश को साफ़ सुथरा बनाने के लिए हम क्या करें? और हम क्या करते हैं हम सब जानते हैं स्वच्छ परिवेश स्वास्थ्य के लिए लाभ कारी है |- बिलकुल सही और आती विचार और उदहारण रक्खे हैं आपने …हमें अपने आप में सुधर लाना ही होगा साथ ही व्यस्थापक और सरकार को भी अपना कर्तव्य निभाना होगा. कूड़ेदान की ब्यवस्था और उसका सही निस्तारण अत्यंत ही आवश्यक है.

Shobha के द्वारा
October 8, 2014

श्री जवाहर जी आपने ठीक कहा हम तो सफाई महत्व समझ जायेगे परन्तु नगरपालिका को भी नियमित रूप से कूड़ा उठवाना चाहिए कूड़ा इकट्ठा करने के लिए कूड़ादान भी होना चाहिए परन्तु यदि सफाई पर ऐसे ही जोर पड़ता रहा एक दिन स्वच्छ भारत का सपना पूरा हो जायेगा लेख पढने का आभार डॉ शोभा

yamunapathak के द्वारा
October 8, 2014

आदरणीय शोभा जी आपके इस ब्लॉग की बातों से सहमत हूँ कई बार ऐसे दृश्य बस्ती में देखे गए हैं सब को अपनी पडी होती है औरों के विषय में कोई नहीं सोचता और कोई भी सेमे फ़ैल हो जाती है. बहुत ही स्पष्ट ब्लॉग …आपको अतिशय धन्यवाद

Shobha के द्वारा
October 8, 2014

प्रिय यमुना जी आपने मेरा लेख पढ़ा आपको अच्छा लगा धन्यवाद बरसात के दिन हर बात की पोल खोलते हैं पर हां जब सलिब्रिती किसी बात की अपील करते हैं असर होता है डॉ शोभा

ABHISHEK OJHA के द्वारा
October 12, 2014

Vivekanand ji ne kha tha tum badlo yug badlega. Shobhaji thank u so much Jo apne ye badlaw ki starting ki hai. Mai bhi aj se apne makan ke aaspas koi gandagi nhi rhne dunga and noukarshaho ko unka kam yaad dilaunga apne tarike se Good morning all

Shobha के द्वारा
October 12, 2014

श्री अभिषेक जी आपने मेरा लेख पढ़ा उसको समझा बहुत ख़ुशी हुई जब हम स्वयं परिवेश साफ रखेंगे अपने आप सफाई की शुरुआत हो जायेगी लेख पढने का बहुत शुक्रिया डॉ शोभा


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