Vichar Manthan

Mere vicharon ka sangrah

242 Posts

3118 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15986 postid : 807479

' फिजी ' में भारतीय मूल के लोग एवं भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी

  • SocialTwist Tell-a-Friend

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी फिजी गये इनसे पहले १९८१ में स्वर्गीय इंदिरा जी भी फिजी की यात्रा पर गई थी और अब तैतीस वर्ष बाद भारतीय मूल के ३७% लोगों ने भारत के प्रधान मंत्री को देखा और सुना | फिजी से मेरा भी नाता है मेरी कई यादे ताजा हो गई मेरा जब विवाह हुआ उन्ही दिनों मेरी नन्द का रिश्ता फिजी निवासी राम रक्खा परिवार से आया था यह वहाँ का बहुत प्रतिष्ठित परिवार है जो राजधानी सूबा में रहता है इस परिवार के एक महानुभाव राजनीति में हैं ,शिव काका उनके भतीजे से मेरी नन्द का रिश्ता आया था भारत की कई लडकियां फिजी ब्याही थी मेरी नन्द मनीषा हिंदी एवं अर्थशास्त्र में एम.ए. थी फिजी में हिंदी का बहुत महत्व था | विवाह के अवसर पर फिजी से होने वाले ससुर, लड़का सुभाष एवं कुछ रिश्तेदार उपस्थित हुये | सुभाष की माँ का परिवार हिमाचल कांगड़ा से और पिता के बाबा रामरक्खा बनारस से फिजी गये थे वह फिजी की राजधानी सूबा में पुलिस अधिकारी थे मेरे लिए फिजी के बारे में जानने का सुनहरा अवसर था |
फिजी प्रशांत महासागर में ३३२ द्वीपों का समूह हैं केवल ११० द्वीप ऐसे हैं जिनमें लोग रहते हैं १८७४ से यह ब्रिटिश उपनिवेश था १९७० में विजय दशमीं के दिन यह आजाद हो गया |इस दिन प्रथम बार हिन्दुओं ने स्वतन्त्रता दिवस और विजय दशमी एक साथ मनाई राम कथा की ३० झांकियां और १२ घोड़ों पर राम जी की सवारी निकाली गई| यहाँ सबसे अधिक क्रिश्चन हैं यहाँ के मूल निवासियों ने भी इसी धर्म को स्वीकार कर लिया था, दूसरा नम्बर हिन्दू धर्मावलम्बियों का हैं ‘मुस्लिम बोद्ध धर्म को मानने वाले लोग और कुछ सिख भी रहते हैं सिखों का एक गुरुद्वारा हैं ,धर्म के नाम पर कोई झगड़ा नही है | यहाँ आग पर चलने(firewalker) और चाकुओं पर नंगे पावँ चलने का उत्सव भी होता है |श्रद्धा यह हाल है मन्नत मांगने के लिए मन्दिर, मस्जिद और चर्च सब जगह माथा टेक लेते हैं |

Walking-On-Fire (1)

Walking-Barefoor-on-Knives (1)

यहाँ मुख्यतया गन्ने की खेती होती है |टूरिज्म के लिहाज से फिजी में बड़ी मात्रा में टूरिस्ट आते हैं टूरिज्म भी यहाँ की आमदनी का साधन है, कारखाने हैं वन सम्पदा की भी कमी नहीं हैं यह एक विकसित देश है फिजी की करंसी फिजियन डालर कहलाती हैं जो मजबूत करंसी है |
अंग्रेजी राज में भारत में गरीबी का यह हाल था लोग रोजी रोटी की खोज में अपना देश छोड़ने के लिए विवश थे ब्रिटिश साम्राज्य इतना विस्तृत था जिसमें सूरज नहीं डूबता था १८७९ से १९१६ के बीच अंग्रेज ठेकेदार ६१००० मजदूरों को यह कह कर पानी के जहाजों से लेकर गये थे बस पास के ही द्वीप पर जाना हैं वहाँ काम है| फिजी के मूल निवासी कवीची मौजू प्रकृति के थे समुद्र में मछलियों की भरमार थी ,वन सम्पदा की कमी नहीं थी वह काम क्यों करते | अंग्रेज भी जानते थे भारतीय बहुत मेहनती हैं | यह ऐसी यात्रा थी जो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी जहाज में एक दूसरे का दुःख बांटते –बांटते सब यात्री जहाजी भाई हो गये| लम्बे सफर में यात्री बेदम हो रहे थे अंत में खूबसूरत द्वीप के किनारे जहाज नें लंगर डाला चारो और पानी ही पानी था परन्तु जमीन बहुत उपजाऊ थी |इसके मूल निवासी कवीची थे परन्तु उनका व्यवहार मित्रता पूर्ण था |आज भारतीय मजदूरों की पांचवी पीढ़ी वहाँ रहती हैं | यह मजदूर बेहद दुखों दे गुजरे इनका सहारा रामायण और हनुमान चालीसा थी जिसे यह साथ ले कर गये थे | |इनकी दशा में धीरे –धीरे सुधार आया घर द्वार बन गये | अगली पीढ़ी ने शिक्षा की और ध्यान दिया यह लोग प० बिबेकानन्द शर्मा जी का बहुत समान करते थे उनकी रचनाओं से इनमें जाग्रति आई | यह अवधि भोजपुरी और हिंदी बोलते हैं अब अंग्रेजी का प्रचलन है लेकिन वह अपनी संस्कृति को कभी नहीं भूले भारतीय मूल के हिन्दू , शादी विवाह अपने ही लोगों में करना चाहते हैं जाति प्रथा लगभग खत्म हो चुकी हैं ज्यादातर लोग सम्मान के तौर पर अपने पूर्वज का नाम अपने नाम के साथ लगाते हैं हमारे रिश्तेदार सुभाष के मामा बड़े उच्च पद पर आसीन हैं परन्तु ब्राह्मण होने के नाते वह पंडिताई भी करते हैं फिजी में उनका बहुत मान था उन्ही के संस्कारों का फल था सुभाष भारत में शादी कर अपने परिवार को भारत के कल्चर से जोड़ना चाहते थे जबकि उनके परिवार में हर कल्चर ,विदेशी और हर जाति के रिश्तेदार थे |
विवाह में भी वह कोई रस्म छोड़ना नहीं चाहते थे उन्होंने हर रस्म को कैमरे में उतारा विवाह भी बहुत धूमधाम से हुआ वह भारत की कुरीति दहेज प्रथा को भी वह जानते थे| जिस समय हमारा उनसे सम्बन्ध जुड़ा फिजी की अर्थ व्यवस्था पर भारतीय मूल के लोगो का अघिकार था भारतीय मूल के लोग कुल जनसंख्या का ४४ % थे |वहाँ के मूल निवासी क्वीचियों से उनका कोई झगड़ा नहीं था कवीची लोग कहते थे हमारे वंशजों ने श्री राम रावण युद्ध में भगवान राम का साथ दिया था हमें भी युद्ध के लिए श्री राम जी के पक्ष से युद्ध के लिए आमंत्रित किया गया था |भारतीय मूल का खानपान वहीं है जो हमारा हैं परन्तु वह बार-बार चोखा नामक सब्जी का जिक्र करते थे पता चला वह आलू बैंगन का भर्ता या भुने आलू और पनीर की सूखी सब्जी है | वह अक्सर कहते थे हमारे यहाँ डालो नामक कंद होता है यदि उसे भारत में उगाया जाये देश में प्रोटीन युक्त भोजन की समस्या काफी मात्रा में हल हो जाए वह गोश्त खाते थे परन्तु बीफ नहीं खाते थे | सुभाष शाकाहारी थे |
१९७० में फिजी आजाद हो गया और राष्ट्र मंडल का सदस्य बन गया ब्रिटिश सरकार ने भारतीय मूल के लोगों को आश्वासन दिया था किसी समस्या के आने पर उन्हें नागरिकता भी दी जाएगी |१९८७ तक फिजी में लोकतान्त्रिक शासन था |१९८७ के चुनाव में महेंद्र चोधरी के दल की सरकार चुनी गई लेकिन जल्दी ही सरकार को अपदस्त कर दिया गया कर्नल रम्बूका ने बिना रक्त पात के तख्ता पलट दिया, महेंद्र चोधरी और उनकी सरकार को बंधक बना कर रखा गया |१९९० में नये संविधान का गठन किया गया नये संविधान के अंदर चुनाव हुए १९९२ में रम्बूका देश के प्रधान मंत्री बने यह दो सैनिक विद्रोह थे एक भारतियों के प्रभुत्व के खिलाफ , दूसरा ब्रिटिश गवर्नर जनरल के स्थान पर कार्य पालिका अध्यक्ष की नियुक्ति की गई और फिजी का नाम फिजी गणराज्य कर दिया | लेकिन जनमत के दबाब में संविधान के लिए एक आयोग का गठन किया गया और इस नये संविधान को भारतीय मूल और स्वदेशी समुदाय के नेताओ ने स्वीकार किया फिजी को फिर से राष्ट्र मंडल की सदस्यता मिल गई |१९९७ में फिजी को फिजी द्वीप समूह गण राज्य कर दिया गया | अंतर्राष्ट्रीय समुदायों ने भी तख्ता पलट का विरोध किया गया था परन्तु महेंद्र चोधरी की मदद के लिए कोइ प्रयास नही किया | १९९७ के चुनाव में महेंद्र चौधरी की फिर सरकार बनी लेकिन २००० में उन्हें जार्ज स्पीत ने हटा दिया एक फिर से सैनिक विद्रोह हुआ |२००१ में उच्च न्यायालय के आदेश से फिर से संविधान को लागू किया, फिर से चुनाव हुए इन कूपों से भारतीय मूल के लोग फिजी में अपने भविष्य के प्रति चिंतित हो गये सम्पन्न भारतीय मूल के लोगों ने आस्ट्रेलिया न्यूजीलैंड और अमेरिका के लिए पलायन करना शुरू कर दिया| फिजी की आर्थिक दशा को झटका लगा पर्यटन भी कम हो गया अब वहाँ फिजी के क्वीचियों का बहुमत हो गया फिजी के मूल बाशिन्दों का सत्ता पर अधिकार हैं फिजी में संसदीय प्रणाली की सरकार है |राष्ट्रपति कार्यपालिका अध्यक्ष और राष्ट्र का अध्यक्ष है प्रधान मंत्री सरकार का प्रमुख | फिजी की जनसंख्या के हिसाब से आर्मी हैं परन्तु इनकी सुरक्षा का आस्ट्रेलिया ध्यान रखता हैं चीन की इस क्षेत्र में सदैव निगाह रहती है|
भारतीय बच्चे पढने की और बहुत ध्यान देते हैं विदेश जा कर पढने के इच्छुक रहते है शिक्षा के क्षेत्र में बहुत प्रतिस्पर्धा है हमने जब फिजी में रम्बूका का कूप हुआ अपने रिश्ते दरों को भारत आने का आग्रह किया परन्तु वह भारत में बसने के इच्छुक नहीं थे ,वह न्यूजीलैंड आस्ट्रेलिया और अमेरिका बस गये केवल मेरी नन्द एक बेटे के साथ सूवा में रहती हैं| विवाह के बाद उन्होंने हमसे सूबा के मन्दिर में लगाने के लिए देवी की मूर्ति मंगवाई वहाँ के मन्दिर में पेंटिंग की | उनका घर लटोका में है वहाँ वह आर्यसमाज के स्कूल में हिंदी टीचर थी परन्तु उन्होंने वहाँ बहुत तरक्की की |वह वहाँ सीनियर एजुकेशन आफिसर बनी आगे तरक्की कर उन्होंने हिंदी का पाठ्यक्रम लागू किया हिंदी की पुस्तकें लिखवाई और भारत से भी मंगवाई उनमे भारतीयता से सम्बन्धित लेख दिए | उनके द्वारा किये कामों की पूरी लिस्ट है वहाँ अपने बल पर सम्मान अर्जित किया बच्चे ऊचे पदों पर विदेशों में आसीन हैं परन्तु वह फिजी से जुडी हैं|
नरेंद्र मोदी ने आस्ट्रेलिया के बाद फिजी की यात्रा की, उनका वहाँ परम्परागत ढंग से स्वागत किया गया उन्होंने फिजी संसद में भाषण दिया उनका भारतीय मूल के लोगों ने हार्दिक स्वागत किया | वहाँ के प्रधान मंत्री वैनिमरामा से द्वीय पक्षीय वार्तालाप में अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों ,रक्षा सहयोग निवेश एवं व्यपार पर सहमती बनी | भारत अन्तरिक्ष , आईटी के क्षेत्र में फिजी की मदद करने का इच्छुक है फिजी के ग्रामीण उद्योग को मदद देने के लिए ५० लाख डालर, एक बिजली संयंत्र के ७० मिलियन डालर की मदद का आश्वासन दिया हैं | भारत में पढने आने वाले विद्यार्थियों का वजीफा दुगना कर दिया | बीजा के नियमों को भी सरल बनाने का प्रयत्न किया जाएगा |फिजी एक प्रकार से छोटा भारत रहा है | वहां के लोग अपने को सदा भारत भूमि से जुड़ा महसूस करते हैं

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

24 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
November 25, 2014

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! बहुत सारी जानकारी से भरा लेख ! आपने सही कहा है कि फिजी एक प्रकार से छोटा भारत रहा है ! वहां के लोग अपने को सदा भारत भूमि से जुड़ा महसूस करते हैं ! आपने फिजी की सुखद यात्रा करा दी ! बहुत बहुत आभार ! आपके सुझाव पर आज मैं नवभारत टाइम्स ब्लॉग पर रजिस्ट्रेशन किया हूँ ! एक दिन बाद ही कोई पोस्ट भेजी जा सकेगी ! इस मंच पर लेखन पूर्वव्रत जारी रखते हुए वहां भी समय निकालकर कुछ लिखजने की कोशिश करूँगा ! आपका हार्दिक धन्यवाद !

Neelam के द्वारा
November 25, 2014

शोभा जी फिजी के विषय में जाना बहुत अच्छा लगा ज्यादातर लोग केवल फिजी को जानते हैं परन्तु इतने विस्तार से नहीं| नीलम

Shobha के द्वारा
November 25, 2014

shree sdguru ji आपने मेरा लेख पढ़ा आपको अच्छा लगा धन्यवाद हमारी सरकारों ने कभी फिजी पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जबकि चीन प्रशांत महासागर पर अपनी नजर गड़ाए हैं आपको किसी नये लेख लिखने की जरूरत नहीं है जो आपने अब तक लिखा हैं उनमें से एक भेज सकते हैं जो भी आप लिखते हैं उस पर आप का अधिकार हैं डॉ शोभा

drashok के द्वारा
November 25, 2014

शोभा जी मैने फिजी पर लिखा लेख पढ़ा दोनों चित्र देखे एक आग पर चलने का दूसरा खड़े चाकुओं पर चलने का मैं हैरान हूँ वहां आज भी वहाँ के भारतीय इन कार्यक्रमों में विश्वास करते हैं वहाँ के भारतियों ने बड़ी तकलीफों उठा कर तरक्की की हैं अच्छा लेख | अशोक

Shobha के द्वारा
November 25, 2014

नीलम जी आपको मेरा लेख अच्छा लगा बहुत धन्यवाद इतना लम्बा लेख पढना आसांन नहीं हैं फिर से धन्यवाद शोभा

Shobha के द्वारा
November 25, 2014

फिजी पर लिखा लेख पढने के लिए बहुत धन्यवाद भारतीय मूल के लोग जहाँ भी जाते हैं अपनी मेहनत से स्थान बना लेते हैं शोभा

Bhola nath Pal के द्वारा
November 26, 2014

फिजी के विषय में प्रथमवार पढ़ा | इच्छा जागी पढता ही जाऊं | सच कहूँ प्रकृति को आप और शामिल कर लेतीं तो देशाटन हो जाता | ढेर सारी शुभ कामनाएं | साभार……

ranjanagupta के द्वारा
November 26, 2014

जीपके पास समृद्ध अनुभव है देशाटन का आदरणीय शोभा जी ! इसी से दूसरे भी लाभान्वित हो रहे है ! बहुत बहुत बधाई ,इतनी सुन्दर जानकारी के लिए !

Shobha के द्वारा
November 26, 2014

श्री भोला नाथ जी मेरी रूचि अंतर्राष्ट्रीय विषय में रहती है अत : में उसी में रमी रही फिजी का समुद्र का किनारा अति खुबसुरत किनारों में माना जाता हैं मैं जल्दी ही फिजी की भागोलिक स्थिति के बारे में लिखुगी मेरा लेख वैसे ही बड़ा होता जा रहा था आपका लेख पढने के लिए धन्यवाद डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
November 26, 2014

प्रिय रंजना जी लेख पढने का बहुत धन्यवाद दुनिया बड़ी ही खुबसुरत हैं कई द्वीप इसे हैं जहां भारतीय लोगों को अंग्रेज मजदूर बना कर ले गये थे बड़ी तकलीफें सहीं गिरमिटिया आन्दोलन आप ने पढ़ा होगा परन्तु हमारे लोगों ने अपनी मेहनत से वहा के कल्चर को ही बदल दिया डॉ शोभा

brijeshprasad के द्वारा
November 26, 2014

शोभा जी , प्रणाम। फ़िजी का ब्यापक चित्रण, अपनी पारिवारिक पृष्ठ के माध्यम से। अत्यंत ज्ञानवर्धन एवं रोचक। आभार।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
November 26, 2014

शोभा जी , फिजी पर आपने इतना लिख लिया है कि मानो हम भी घूम आएं हों । बहुत ज्ञानवर्धक लेख । 

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
November 27, 2014

शोभा जी फिजी पर ज्ञानवर्धक संस्मरण आपकी विद्वता से शांति प्रदान कर रहा है 

Shobha के द्वारा
November 28, 2014

श्री ब्रिज प्रसाद जी आपने मेरा फिजी के विषय में लिखा लेख पढ़ा धन्यवाद आप ठीक कहते हैं वहा के विषय में अंदरूनी जानकारी का कारण वहां में अपने परिवार के अंग का रहना है धन्यवाद सहित शोभा

Shobha के द्वारा
November 28, 2014

बिष्ट जी आपने लेख पढ़ा धन्यवाद फिजी प्राकृतिक रूप से भी बहुत खूबसूरत है मै उसका चित्रं नहीं कर पाई डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
November 28, 2014

श्री हरिश्चन्द्र जी आपने लेख पढ़ा बहुत धन्यवाद आपके विनोदी स्वभाव की भी झलक मिली ईश्वर आपको सदैव खुश रखे डॉ शोभा

jlsingh के द्वारा
November 29, 2014

आदरणीया शोभा जी, सादर नमन! फिजी के बारे में इतना सारा कुछ बतलाने के लिए दरअसल, फिजी, मारिसस, आदि ऐसे देश है जहाँ भारतीयों की सांख्य ज्यादा है. अब मोदी जी के कार्यक्रम से ऐसा लगता है की, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में भी बहुत सारे भारतीय हैं. हम भारतीय अपनी मिहनत और मेधा के कारन काफी जगह अपने आप को स्थापित किये हुए हैं.. सादर अभिनंदन के साथ…आप से नयी नयी जानकारियों भरा आलेख प्रस्तुत करने का निवेदन भी.

Shobha के द्वारा
November 29, 2014

श्री जवाहर जी लेख पढने का बहुत – बहुत धन्यवाद वाकई भारतीय जहाँ भी गये हैं नाम कमाया है और जहाँ भी गये वहाँ के वफादार रहें अपने देश को भी नहीं भूले मोदी जी में उन्हें आशा नजर आई उन्होंने उनका जम कर स्वागत किया डॉ शोभा

abhishek shukla के द्वारा
November 29, 2014

प्रणाम आदरणीया! इस द्वीप से अब तक मैं अनजान था अख़बारों में पढ़ा तो पर कभी जानने का मन नहीं हुआ, अपने विकिपीडिया की तरह सब कुछ समझ दिया। अद्भूत वर्णन, आभार।

Shobha के द्वारा
November 30, 2014

श्री अभिषेख शुक्ला यह बेहद खूबसूरत द्वीप हैं बिलकुल हवाई जैसा वहां के लोकल ( क्वीचियों) को छोड़ कर सब कुछ भारतीय हैं लेख पढने का बहुत धन्यवाद डॉ शोभा

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
December 6, 2014

फ़िजी केविषय में आपने विस्तार से बताया है .हिंदी का महत्व वहां है ये जानकर अति प्रसन्नता हुई .मनीषा जी के हिंदी के क्षेत्र में किये गए योगदान के बारे में जानकर हार्दिक प्रसन्नता हुई .आभार

Shobha के द्वारा
December 6, 2014

प्रिय शिखा जी मुझे भी बड़ा गर्व होता है की मनीषा जी मेरी नन्द हैं कुछ दिन पहले वःह मारीशस में हिंदी सम्मेलन में भाग लेने गई आपने लेख पढ़ा बहुत अच्छा लगा में काफी समय से फिजी के बारे में लिखने की सोच रहीं थी मोदी जी की यात्रा से मुझे प्रसंग मिला फिर से आपको धन्यवाद देती हों शोभा

pkdubey के द्वारा
December 8, 2014

विश्व के अन्य देशों का बहुत सुन्दर और सादा,जमीन से जुड़ा हुआ वर्णन आप हमेशा करती हैं आदरणीया .सादर साधुवाद ,लेख पढ़कर बहुत अच्छा लगा |

Shobha के द्वारा
December 8, 2014

श्री दुबेजी आपने मेरा फिजी से सम्बन्धित लेख पढ़ा मुझे हार्दिक ख़ुशी हुई मैं सदैव फिजी के विषय में लिखना चाहती थी मोदी जी फिजी की यात्रा पर गये लोग फिजी के बारे में काफी कुछ जान गये मुझे भी लिखने का अवसर मिला लेख पढने का अतिशय धन्यवाद डॉ शोभा


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran