Vichar Manthan

Mere vicharon ka sangrah

242 Posts

3118 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15986 postid : 816714

सबको अपना-अपना धर्म मुबारक

  • SocialTwist Tell-a-Friend

सबको अपना-अपना धर्म मुबारक
कपिलवस्तु का राजकुमार सिद्धार्थ सब सुख वैभव छोड़ कर परिव्राजक बन कर दुःख, दुखों का कारण ,दुःख कैसे दूर हों ? ढूंढने निकला इतिहास में वह भगवान गौतम बुद्ध कहलाये उनकी वाणी ने विश्व को अहिंसा का पाठ पढाया |सम्राट अशोक के पुत्र महेंद्र पुत्री संघमित्रा ने बौद्ध भिक्षुओं के साथ उस जमाने की नावों के सहारे बुद्ध के विचारों का प्रचार प्रसार करने के लिए भिक्षु बन कर अनेक यात्रायें की हर खतरे को पार कर बौद्ध भिक्षुक साउथ ईस्ट एशिया ,मिडिल ईस्ट चीन जापान मंगोलिया तक गये कई राह में ही मर गये लेकिन विश्व के बहुत बड़े हिस्से को बौद्ध धर्म में दीक्षित किया| भिक्षुक नागार्जुन ने चीन के रास्ते जापान में प्रवेश कर भगवान बुद्ध का संदेश दिया| भारत से दूर गौतम बुद्ध की वाणी और संदेश गूंजे लेकिन उस समय ईसाई मिशनरियाँ पिछड़ गई |भारत देश आजाद हुआ भारत की विदेश नीति में बुद्ध के सिद्धांत से पंचशील को स्वीकार किया जिसे तटस्थ राष्ट्रों ने भी माना|
सिंधू नदी के तट पर ऋषियों ने वेदों की रचना की वेद ज्ञान का संग्रह ,वैदिक धर्म भारत का प्राचीन धर्म और गीता वेदों का सार| भारत की शस्य श्यामला धरती से आकर्षित हो कर हमलावर आते यहीं के हो कर रह जाते |विश्व में एक समय ऐसा आया इस्लाम का डंका बजा, धर्म युद्ध हुए| धर्मांतरण किसी रूप में उचित नहीं है लेकिन फिर भी विश्व में धर्म परिवर्तन हुए हैं इतिहास इसका गवाह है| विश्व का कौन सा देश है जिसने इसका दंश नहीं झेला, घर्म के नाम पर कई युद्ध हुए कई देशों में राजा ने धर्म बदला नागरिकों का वही धर्म हो गया और वही राष्ट्र धर्म बन गया | पूरे भारत में धर्म के नाम पर क्या नहीं हुआ लेकिन हिन्दू धर्म कैसे बचा हैरानी की बात है ? धर्म को बचाने के लिए कितनी कुरबानियां दी गई इतिहास इसका गवाह है दिल्ली की उस समय की सड़कों पर कितनी बार खून बहा क्या इसका हिसाब है ? देश अंग्रेजों का गुलाम हुआ उसके साथ धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से क्रिश्चन मिशनरियाँ आई प्यार से ,डरा कर अंग्रेजी पढ़ा कर और प्रलोभन दे कर धर्मान्तरण किया गया | भारत से मजदूर के रूप में भारतीय अंग्रेज ठेकेदारों द्वारा खेती के लिए कई द्वीपों में ले जाए गये रोजी रोटी कमाने गये यह लोग अपने साथ राम चरित्र मानस और हनुमान चलीसा ले गये परदेस में उनकी जात प्रथा खत्म हो गई परन्तु ईसाई मिशनरियों के दबाब में भी अपना धर्म नहीं छोड़ा आज भी वह हिन्दू हैं |
देश ने धर्म के नाम पर बहुत कुछ झेला धर्म के नाम पर देश के दो टुकड़े हो गये और पाकिस्तान की स्थापना हुई |आजादी के बाद देश के संविधान ने धर्मनिर्पेक्षता को स्वीकार किया गया ,हिन्दू एक सहिष्णु संस्कृति हैं| देश में आज कल कुछ मुस्लिमों को हिन्दू बनाने पर संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों में शोर मचा हैं क्या धर्म परिवर्तन नई बात है| रोम के वैटिकन चर्च की भारत पर सदैव निगाह रही है खुले रूप में गरीबों और आदिवासियों में खास कर संथालों में ईसाई मिशनरियों की जबर्दस्त पैंठ है उन्हें लालच दे कर बदला जा रहा है उनकी गरीबी का भरपूर फायदा उठाया| इसके लिए विदेशों से प्राप्त कई संस्थाए काम कर रही हैं कई स्थानों पर विदेशी किसी भारतीय के साथ मिल कर कुटीर उद्योग शुरू करते हैं उनमें केवल ईसाईयों को काम पर रखा जाता हे गरीबी से मजबूर लोग काम के लालच में अपना धर्म बदल लेते हैं उनके फोटो खीच कर और धर्म परिवर्तन के आंकड़े चंदा देने वाली संस्थाओं को दिए जाते हैं ,ईसाई धर्म में दीक्षित लोगों को क्रिसमस आदि के मौके पर छोटे मोटे उपहार दे कर उसके बदले विदेशों में मोटी रकमें वसूल की जाती हैं यू कहिये गरीबी जम के बेचीं जाती हैं ,किसी राजनेता के कान पर जूं नहीं रेंगती | बिमारी पूरी तरह ठीक हो जायेगी जैसे मिर्गी , विकलांगता और मंदबुद्धि के बच्चों को धर्म बदलने पर ठीक करने की गारंटी दे कर माता पिता का भी धर्म परिवर्तन कर दिया है | हमारे भारतीय भी धन के इस स्तोत्र को सीख गये हैं पुरे जोश से इस काम में लगे हैं | किसी भी गरीब के बच्चे को देख कर उसमें धन नजर आता हैं मुहँ में पानी आ जाता है उसके माता पिता को आश्वासन दिया जाता है आपके बच्चे को हम मिशनरी स्कूल में दाखिल करवा देंगे आपके घर में अंग्रेजी का मौहौल नहीं है बच्चा हौस्टल में रहेगा उसकी जिन्दगी बन जाएगी कुछ दिन चर्च में बुला कर पूरे परिवार का धर्म बदल दिया जाता है |अनाथों के नाम से सस्ती जगह खरीद कर अनाथालय बनाना जमीन की खरीद से लेकर भवन बनने तक का पूरा खर्चा विदेश से आता है फिर उसमें अनाथ बच्चों के नाम पर भी खर्चा आता है परन्तु सबकी आखें बंद रहती हैं अंदर ही अंदर देश को कुतरा जा रहा कोइ शोर नहीं सभी सरकारें इस गोरख़ धंधे को जानती हैं
मुस्लिम समाज -यदि कोई व्यक्ति या दूसरे धर्म का दोस्त मिल जाए उसके कानों में लगातार धर्म का रस घोला जाता है |स्वर्ग की गारंटी का सर्टिफिकेट दिया जाता हैं |आजकल लड़के नाम बदल कर राजू सोनू बिट्टू पप्पू आदि नाम से घूमते हैं हाथ में लाल रंग का कलावा बाँध लेते हैं | प्रेम करने का सबको अधिकार है आपका अपना जीवन हैं लेकिन यदि विवाह बंधन में बंधना है तो क्या विवाह कोर्ट में नहीं होना चाहिए? इससे लड़की को देश के कानून के अनुसार सुरक्षा मिले निकाह में वह तीन बार तलाक – तलाक कह कर घर से बाहर की जा सकती है या लड़के का दूसरा विवाह हो जाता हैं इस विवाह से उत्पन्न बच्चे भी इस्लाम हैं | हिन्दू माता पिता अपनी बेटी को बुरे वक्त में अपनाने से गुरेज करते हैं, बिचारी लडकी कहाँ जाए ? एक बार फंस जाने पर लडकी को तलाक देने का अधिकार नहीं है यदि हिन्दू लड़का मुस्लिम लड़की से विवाह कर लेता है उसकी ख़ैर नहीं लड़की का पूरा परिवार लड़के पर दबाब देने जुट जाता हैं उसे कुफ्र लगता है |’ बड़े लोगों की बात छोड़ दीजिये’ उनका अपना समाज है यदि कोई प्रतिष्ठित या प्रतिष्ठित घर की लड़की किसी मुस्लिम समाज में विवाह कर लेती है उसकी राजनैतिक हलकों में और इज्जत बढ़ जाती है उसके लिए राजनीति के दरवाजे भी खुल जाते हैं |आम घरों में सबसे बुरा हाल है हिन्दू मुस्लिम शादी से उत्पन्न बच्चों का भविष्य है |यदि लडकियाँ हैं हिन्दू अपनाते नहीं हैं मुस्लिम धर्म बदलने की शर्त रखते हैं |एक और बात है इस्लाम में जात पात की बात न होने की बात की जाती हैं परन्तु जिस पूर्वज ने धर्म बदला था उस समय जो उनकी जाति थी उसका सरनेम भी नाम के साथ जुड़ा रहता है और शादी विवाह के मौके पर इसका ध्यान रखा जाता हैं |
आज कल कई गुरु कबीर दास जी इस दोहे का सहारे- गुरु गोविन्द दोऊ खड़े ,काको लागू पाव,
बलिहारी गुरु आपने , जिन गोविन्द दियो बताय , स्वयं पहले गुरु ,फिर भगवान बन जाते हैं ,वैसे वह सभी धर्मों का अपने मत में आने का आह्वान करते हैं परन्तु हिन्दू सहिष्णु हैं “ ना जाने किस वेश में बाबा मिल जाए भगवान रे “ उनके चक्कर में सबसे अधिक आते हैं | यह गुरु सामाजिक सेवा का कार्य कर प्रसिद्धी पाने लगते हैं धीरे – धीरे माला माल भी होते जाते हैं फिर अपने आप को भगवान, मोक्ष का दाता घोषित करते हैं | पिछले दिनों इस प्रकार के कई गुरु जेल की हवा खा रहे हैं | कई ऐसे धाम हैं जहाँ प्रचार के लिए स्पेशल डिपार्टमेंट बनाये गये हैं, जम कर मार्किटिंग की जाती है इस दरबार में हर मनोकामना पूरी होगी जो दान करोगे दुगना या तिगुना हो कर मिलेगा लोग बढ़ चढ़ कर चढ़ावे चढ़ाते हैं ,यह धाम माला माल हो जाते हैं ,नुकसान हिन्दू धर्म का होता है|
आगरा में कुछ मुस्लिम परिवारों का धर्मांतरण किया गया जिसे घर वापसी का नाम दिया गया |लेकिन मुस्लिम संगठनों के विरोध के कारण वह कलमा पढ़ कर फिर मुस्लिम हो गये | जिस आदमी का जिस धर्म में जन्म हुआ है वही माता पिता द्वारा दिया धर्म बच्चे का धर्म होता हैं उसी में वह संस्कारित होता है, उसका नाम करण संस्कार किया जाता है
हमारे संविधान में धार्मिक स्वतन्त्रता के अधिकार में धर्म के प्रसार का अधिकार केवल अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए दिया गया था जिससे अल्पसंख्यकों के NGO जम कर धर्मांतरण कर रहे हैं यह पूरा व्यवसाय बन गया है यदि यह काम हिन्दुओं द्वारा किया जाता है बेशक यह जबरदस्ती न हो इस पर हंगामा हो जाता है संसद के गलियारों से लेकर सडकों पर हंगामा होता सबको अपना वोट बैंक हिलता नजर आता है| क्या जरूरत नहीं है इस विषय पर बहस हो और २५ (१ ) में दिए प्रसार के अधिकार पर लगाम लगे इसे खत्म किया जाए ? डॉ शोभा भारद्वाज

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 3.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

20 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
December 15, 2014

सादर साधुवाद आदरणीया.आप का आलेख आज के समय की मांग है | हमारा एक ईसाई सीनियर एक बार सेक्शन में मेरी तरफ देखकर बोला ,मुझे बीफ बहुत अच्छा लगता है ,उसे लगा मैं कुछ बोलूंगा ,पर मैं भी उससे चार कदम आगे की सोचता,मुझे क्या ,अपनी करनी -अपनी भरनी,गौ मांस खाने वालों का पूरा कुल नष्ट होता है |

pkdubey के द्वारा
December 15, 2014

हाँ ,आप से एक निवेदन भी है ,मेरे ब्लॉग में प्रतिक्रिया देते वक्त आप श्री और जी न लगाया करें ,आजकल अपने बच्चे तो इतना सम्मान देते नहीं और वैसे भी यह शब्द अपने से बड़ो के लिए लगाये जाने चाहिए ऐसा मैंने सीखा | आप दुबे या प्रवीण ही लिखा करे ,अधिक अच्छा लगेगा मुझे ,सादर |

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
December 16, 2014

SAHMAT HUN

December 16, 2014

shobha ji hindu apne dharm me kisi ko aane hi kahan dete hain .vaise aapki sabhi baton se main poori tarah se sahmat hun .nice article .

Shobha के द्वारा
December 16, 2014

श्री दूबे जी श्री और आप विद्वता को लगाया जाता है हमारे यहाँ संस्कृत का एक श्लोक विदवान की सब जगह पूजा होती है वःह पूज्यन्ते है आगे भी हैं यह श्लोक आपको लिखुगी आप लगातार बहुत अच्छा लिखते हैं मै जब स्टुडेंट थी हमे अंतर्राष्ट्रीय नीति कानून और सम्बन्ध एक लेक्चरर पढाते थे आज भी मेरे लेखों में उनकी चाप है वः उस समय केवल १९ वर्ष के थे बाद में उन्होंने IFS किया एक हस्ती बने हम सब उनके चरण स्पर्श करते थे हमारे लेक्चरर कहते थे हमारा दिल भाटिया जी के चरण स्पर्श करें सम्मान आपका ऐसे ही रहेगा | आप मनसा वाचा कर्मणा सज्जन हैं सम्मान आपके विचारों और सज्जनता का है | डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
December 16, 2014

प्रिय शिखा सहमत होना ही पड़ेगा धर्म संकट का समय हैं आपने लेख पढ़ा धन्यवाद डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
December 16, 2014

प्रिय शालनी जी उसी का असर हैं जिसके कारण वर्षों सजा पाई है अब भी यदि अक्ल नहीं आई अपने ही देश में अल्पसंख्यक बनते देर नही लगेगी आपने लेख पढ़ा आपका धन्यवाद करती हूँ डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
December 17, 2014

श्री दूबेजी आपने मेरा लेख पढ़ा समर्थन किया बहुत अच्छा लगा गाय को हम इस लिए माँ कहते हैं उसका बच्चा दूध पी कर पुष्ट होता है डिब्बे में भी गाय का दूध ही भरा जाता है इन मॉस खोरों के समझ से बाहर है डॉ शोभा

sadguruji के द्वारा
December 19, 2014

आदरणीया डॉक्टर शोभा जी ! सार्थक और विचारणीय रचना ! बहुत बहुत बधाई !

Shobha के द्वारा
December 19, 2014

श्री सद्गुरु जी लेख पढने के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद डॉ शोभा

bhagwandassmendiratta के द्वारा
December 21, 2014

आदरणीय डा. शोभाजी प्रणाम, धर्म के विषय में आपकी व्यथा उचित है , विचारणीय एवं सारगर्भित लेख लिखने के लिय बहुत बहुत धन्यवाद| लेकिन धर्म के नाम पर जो कुछ भी हो रहा है वो धर्म तो बिलकुल नहीं है और जीवन जीने के इस अनिवार्य तत्व को जो कोई जिस किसी राह से ही सीख ले सही है परन्तु धर्म पर चले तो, धर्म की राह पर चलने वाले को कभी भी किसी के धर्म परिवर्तन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी| फिर परिवर्तन कर के भी कौन किसी की आरती उतारता रहता है उसका पहला धर्म या यूँ कहें की जन्म के समय का समुदाय अथवा जाती उसके साथ ही जुड़े रहते हैं| बदलवाने वाले ही उनेह मुख्या धारा से नहीं जोड़ते| भगवानदास मेहंदीरत्ता

Shobha के द्वारा
December 21, 2014

श्री भगवान दास जी पहले आपका धन्यवाद करती हूँ आपने मेरा लेख पढ़ा कई वर्ष विदेश में रही हूँ अपने धर्म का महत्व समझ में आया सबसे अधिक सहिष्णु धर्म है जिसमें सबका आदर करना सिखाया गया है गीता जैसा महान ग्रन्थ जिसमें हर प्रश्न का जबाब है सबसे प्राचीन धर्म | हमारे ही धर्म को कुतरना शुरू कर दिया वह भी विदेशी पैसे के बल पर हमारे अपने ही लोग धर्म का मजाक बनाने लगे हैं बच्चे धर्म से विमुख हो रहे है रोज नये भगवान बन रहें हैं जितना लिखो कम है फिर से धन्यवाद सहित शोभा

Bhola nath Pal के द्वारा
December 22, 2014

आदरणीय डॉ शोभा जी !बहुत सार्थक बहस i छद्म धर्म प्रचार और प्रलोभन प्रेरित धर्म परिवर्तन इस्लाम और ईसाई मिशनरियों का चरित्र है i खुले दिल से आत्म अभिव्यक्ति के लिए बहुत बहुत बधाई i सादर ……………

deepak pande के द्वारा
December 22, 2014

Janm se paya dharm hi vastavik dharm hai sunder lekh shobha jee

Shobha के द्वारा
December 23, 2014

shree भोला नाथ जी बड़ा दुःख होता है जिस धर्म का डंका विवेका नन्द जी ने अमेरिका के बुद्धिजीवी समाज में बजाया था आज हमारे यहाँ धर्मान्तरन का प्रयत्न किया जा रहा है आपने लेख पढ़ा धन्यवाद डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
December 23, 2014

श्री पाण्डेय जी आपको बहुत धन्यवाद आपने लेख पढ़ा आपको पसंद आया डॉ शोभा

yogi sarswat के द्वारा
December 23, 2014

हिन्दू माता पिता अपनी बेटी को बुरे वक्त में अपनाने से गुरेज करते हैं, बिचारी लडकी कहाँ जाए ? एक बार फंस जाने पर लडकी को तलाक देने का अधिकार नहीं है यदि हिन्दू लड़का मुस्लिम लड़की से विवाह कर लेता है उसकी ख़ैर नहीं लड़की का पूरा परिवार लड़के पर दबाब देने जुट जाता हैं उसे कुफ्र लगता है |’ बहुत ही पते की बात लिखी है आपने ! वास्तव में इसी डरकी वजह से लड़कियां मजबूरन “उस नरक ” में पड़ी रहती हैं , क्यूंकि उन्हें लगता है की उनका समाज और माँ बाप उसे अब फिर से अपनाएंगे नही ! लेकिन शायद ये मानसिकता बदलेगी ! बेहतरीन आलेख !

Shobha के द्वारा
December 24, 2014

श्री योगी जी आप काफी समय से जागरण ब्लॉग में दिखाई नही दिए सबसे पहले आपको काफी समय बाद फिर से देख कर बहुत ख़ुशी हुई योगी जी माँ बाप भी क्या करें बेटी के साथ बच्चे होते है वःह मुस्लिम हैं तलाक का अधिकार ऑरत को नहीं है उससे मिलने उसका शौहर कभी भी आ सकता है परिवार समाज का भय फिर यह यही चाहते हैं |इनकी अपनी महिलाओं का बुरा हाल है आज की लड़किया समझती ही नहीं हैं वःह सोचती है मेरे वाला ऐसा नही हैं |आपने मेरा लेख पढ़ा बहुत धन्यवाद डॉ शोभा

jlsingh के द्वारा
December 24, 2014

आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! आपका आलेख पढ़ा ..धर्म की व्याख्या समझने की कोशिश की. कह नहीं सकता कितना समझा. मैं भी मानता हूँ किहिन्दू या सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ है. पर बीच बीच में इस धर्म में खुद में उबाल आया …जैसे सती प्रथा, बाल विवाह पर रोक और विधवा विवाह का प्रारम्भ…. फिर भी कुछ त्रुटियाँ रह गयी ..जाती प्रथा वाली. जाती भी जन्म से ही तय होती है. कुछ जतोयं उच्च हैं और कुछ नीच. नीच जाती वालों के साथ ही हमेशा अन्याय हुआ है. उसे हिन्दू धर्म में सम्मान नहीं मिला, मंदिर में घुसाने नहीं दिया गया, शिक्षा से वंचित रखा गया….अलग बस्ती, में रक्खा गया. उन्हें ही तो इन मिशनरियों ने निशाना बनाया, उसे उठकर गले से लगाया, सम्मान और शिक्षा भी दी. शिक्षा प्राप्त करने के बाद ही तो उन्हें आरक्षण का लाभ मिला.अगर हमारे हिन्दू संगठन उन्हें वंचित न रखते तो वे क्या लालच में आते.? आज भी उन्ही तबकों को पूण: लालच, प्रलोभन देकर घर वापसी करने की बात कही जा रही है. अच्छी बात है अगर उन्हें घर वापस कर पुन: सम्मान प्रदान किया जाता है… पर ऐसा सम्भव है क्या. उनको फिर वही निम्न श्रेणी में ही रक्खा जायेगा . अगर उन्हें शिक्षित कर उन्हें सरकारी सुविधाओं से युक्त कराया जाता है तो बड़ी अच्छी बात होगी. हमारे हिन्दू धर्म के कई टुकड़े हुए, जैन बौद्ध, सिक्ख, और अब कोई साईं भक्त है तो कोई बाबा राम रहीम को पूज रहा है… आशाराम और रामपाल की गति को हम लोग देख चुके हैं…राम रहीम का भी अभ्युदय जिस कदर हो रहा है ..मुझे लगता है अब उनका भी नंबर आनेवाला है…हमें इन बुराइयों से लड़ने की जरूरत है न? काफी दिनों से हिंदू धर्म से जो लोग बहार चले गए, उन्हें हिन्दू परिजन छोड़ देता है. फिर वह क्या करे… ? अगर सचमुच घर वापसी होती है तो अच्छी बात है. पर इसमे जबर्दश्ती तो ठीक नहीं है है मेरे ख्याल से. जो स्वत: दूसरे धर्म में जाना चाहते हैं उन्हें कौन रोकता है? हमारे यहाँ असंख्य देवी देवता हैं, सबको खुश रखना जरूरी है उनके यहाँ सिर्फ एक की ही पूजा/ प्रार्थना होती है वह भी एक विधि से एक ही जगह, मस्जिद में गुरूद्वारे में या गिरिजाघर में. हमारे यहाँ आप भी जानती हैं कितने देवी देवता के मंदिर हैं, उनमे भी बड़ा छोटा है. बहुत सी भ्रांतियां भरी जाती है. फिर भी हम सब में सहिष्णुता, दया और क्षमा की बात है अहिन्सा परमोधर्म कहा गया है …ऐसा दूसरे धर्मों में कहाँ है? फिर हम कजोर क्यों हैं आपसे में बनते क्यों हैं, इस पर बहस होनी चाहिए न. कितनी संस्थाएं हैं जो सभी राम कृष्ण और हिन्दू देवी देवताओं को ही आराध्य मानते हैं पर उनके अलग अलग तरीके हैं. और सबके अपने तरीके दूसरों से बेहतर है. आजकल पूजा के नाम पर भव्य पंडाल बनाये जाते हैं उनमे वो श्रद्धा भाव से आते हैं या कुछ नया देखने की जिज्ञाषा से? मैं खुद संशयग्रस्त हूँ. इस विषय पर के लिखूं और कैसे लिखूं.पर मैं भी यही चाहता हूँ कि हमारे हिंदू धर्म को माननेवाले अच्छे हैं कम से कम इनमे वो कट्टरता नहीं है जो इस्लाम में है. तथास्तु आप मेरी बात समझने का प्रयास करेंगी और मार्गदर्शन भी करंगी ऐसा मैं समझता हूँ…सादर!… दूसरी बात मोदी जी को अभी कुछ समय विकास के काम करने देना चाहिए. ऐसे मुद्दे उठाकर मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकने में ही विपक्ष को मौका मिल जाता है. मोदी जी कह चुके हैं कि सबको अपनी जुबान पर काबू रखनी चाहिए पर उन्ही के दाल से या उन्ही का समर्थक बेकाबू हो जाता है… अब भगवत जी को क्या जरूरत थी इन मुद्दों को अभी उछालने की. अभी सिर्फ सात महीने हुए हैं, कुछ काम तो होने देना चाहिए. विदेशी निवेश को आने देना चाहिए. रोजगार सृजन, स्वच्छता अभियान, शिक्षा और स्वास्थ्य आदि प्राथमिक चीजें हैं न? सुनते हैं मोदी जी भी नहीं चाहते अभी इन मुद्दों को उभारा जाय.इसी लिए तो वे कहते हैं सबका साथ, सबका विकास!

Shobha के द्वारा
December 27, 2014

श्री जवाहर जी आपने लेख पढ़ा धन्यवाद आपके मन में उठने वाला हर प्रश्न हर बुद्धिजीवी जीवी के हृदय में उठता हैं| हमारा देश इतना संपन्न था हमलावर आते थे या लुट कर ले जाते थे या यहीं बस कर यहीं के हो गये लेकिन ऐसे लुटेरे आये जिनके हाथ में तलवार थी धर्म के नाम पर किसी को भी मारने का जज्बा मैं कई वर्ष मुस्लिम देशों में रही हूँ उनकी पुस्तकों में लिखा है काफिर जानवर जैसे होते हैं वह इन्सान को खा जाते हैं हम जब वहां रहे उनको हैरानी हुई यह काफिर तो प्याज भी नहीं खाते | हाँ हमारा धर्म संकट में था ऐसे में तुलसी दास जी की रामायण ने जनता को भगवान राम का आदर्श दिया | अंग्रेज आये उनके पीछे ईसाई मिशनरिया आई जो यह सोचती थी वःह हमें इन्सान बना कर यीशु का बहुत बड़ा काम कर रहीं हैं केवल कुछ सोने के सिक्के के लिए इस देश में जो जुल्म हुआ है बस कह नहीं सकती एक फ्रेंच लेखक की किताब पढ़ रही थी कुछ देर बाद पढ़ नहीं सकी मेरा दम घुटने लगा इन्सान पहले मिडिल ईस्ट में बिका फिर योरूप के बाजारों में किसने नही बेचा जरा जरा से देश हमारे यहाँ से और अफ्रिका से गुलाम ले जाते थे समाज में इतनी दहशत थी बाल विवाह होने लगे लोग अपनी बेटी को किसी घराने से बाँध देते दवाई दारु नही थी पति के मर जाने पर कौन लडकी की जिम्मेदारी ले उसे सती कर दिया जाता इसमें मायका सुसराल सब एक थे हमने लडकी को एक गौरव की मौत दे दी जातीप्रथा का फायदा अपनी सुप्रिमेसी दिखाने के लिए ब्राह्मणों ने किया अपने ही एक हिस्से को अछूत कह कर अपने से अलग कर लिया सजा भी खूब पाई आज ब्राह्मणों का बुरा हाल है बच्चे पढ़ते नहीं हैं बस पंडिताई ही जीने का आधार रह गई है मुस्लिम और ईसाई भी धर्म बदल देते हैं पर विवाह सम्बन्ध अपने ही में करने पड़ते हैं बस खुश हो जाते हैं हम एक हो गये | मोदी जी सबका विकास चाहते हैं परन्तु छुट भईये नेता अपना कद बढ़ाने के लिए जो मन कर रहा है कर रहे हैं आप हम चाहते हैं निवेश बढ़े हम तरक्की करें परन्तु नाम नहीं लिखुगी अपनी राजनितिक रोटियां सेक रहे हैं कुछ समय की बात है सब ठीक हो जा येगा यह परेशानी शुरू में हर नये व्यक्ति के सामने आती है एक समय यहूदी पथ भ्रष्ट हुए थे उनको अपना देश येरुसलम छोड़ना पड़ा था फिर २००० साल बाद अपनी धरती पर लौटे |योरोप में इतने धर्म युद्ध हुए तुर्कमान एम्पायर का समय था मुस्लिम का स्वर्ण काल वः नहीं रहा हां हिन्दी धर्म ऐसा है जिसने अपनी सहिष्णुता से सबको आत्म सात कर लिया अमेरिका में चर्च बिक रहें है और लगभग आठ सौ मन्दिर बने हैं हम तू हर प्रकृति के अंग की पूजा करते हैं हमारे भगवान स्म्बोलिक भी हैं जैसे बुद्धि के दाता गणपति अन्य भी गीता हमारी ऐसी पुस्तक है जिसमें हमारे मन में उठने वाले हर प्रश्न के उत्तर है मन शांत रखें मुझे जिन्दगी में एक बात नही भूलती एक बार में अपनी सुसराल मथुरा गई वहाँ मैने जो भक्ति और शान्ति देखि हैरान रह गई कोइ तर्क नहीं बस एक विशवास शुरू में में कुछ क्म्युनिस्तिक विचारों की थी मैने एक भक्तों के ग्रुप को अपनी समझदारी दिखाते हुए कहा आप पंडों से सावधान रहना यह बड़े ठग हैं साधारण दिखने वाली ओरत नें मेरा मुह बंद कर दिया अरे कन्हैया मक्खन चोर के सब ग्वाल बाल हैं अब जन्म लेकर मथुरा में विचर रहें है मेरी सारी पढाई धरी रह गई आज कुछ लोग गीता की मन घडन्त व्याख्या कर रहे हैं डॉ शोभा


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran