Vichar Manthan

Mere vicharon ka sangrah

242 Posts

3118 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15986 postid : 819533

" श्रीमती आशा रानी व्होरा जी एक ज्योतिर्पुंज " २१ दिसंबर को उनकी पुण्य तिथि पर समर्पित श्रद्धांजलि

  • SocialTwist Tell-a-Friend

“आशा रानी व्होरा, एक ज्योतिर्पुंज” “ 21 दिसम्बर को उनकी पुण्यतिथि पर समर्पित श्रद्धान्जली” स्वर्गवास की तिथी – २१ दिसंबर २००९
आशा रानी व्होरा एक ऐसा नाम है जिनके स्मरण मात्र से मन सम्मान से भर जाता है | सूर्य संस्थान आशा रानी जी की कर्म भूमि थी उनके व्यक्तित्व में ऐसा आकर्षण था जो सामने वाले को अपने प्रभाव में ले लेता था | उनकी ओजस्वी आँखे उनकी बहुर्मुखी प्रतिभा का दर्पण थीं | उन्हें विभाजन के बाद विस्थापन का दुःख झेलना पड़ा था उन्होंने लिखा- वतन से विस्थापित होना, एक सामूहिक दर्द है
जो बट जाता है इसी लिए,धीरे-धीरे कट जाता है
जीवन के दुखों को उन्होंने बड़े पास से देखा था इस लिए उनका मन सर्व साधारण के लिए दर्द से भर गया,यह दर्द उनकी सौ अधिक प्रकाशित रचनाओं में झलकता है| उनकी पुस्तकें पाठकों को सोचने समझने पर विवश कर देती हैं |वह समाज की समस्याओं को उठाती हैं और उनका निदान भी सुझाती हैं| उन्हें अनेक पुरुस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया |
उन्हें इस बात का बहुत गर्व था कि प्राचीन काल में स्त्रियों की गरिमा और स्वतन्त्रता का पूरा सम्मान किया जाता था |विवाह में पाणिग्रहण संस्कार के समय पति-पत्नी का हाथ पकड़ कर कहता था मेरे घर की साम्राज्ञी बनो उन्हें अपनी लिखी यह पंक्तियाँ बहुत प्रिय थी
‘आत्मा का विश्वास और सम्मान हो नीति हमारी ,माँग मत अधिकार नारी ‘
उनके अनुसार नारी की समानता की भावना पश्चिम की देंन है |हमारे यहाँ नारी को पुरुष से श्रेष्ठ मानते हैं माँ हमारे यहाँ सबसे ऊचें सिहांसन के योग्य है वह जन्म दात्री ही नहीं पालक भी है |
कहते हैं ज्यों – ज्यों इन्सान की उम्र बढती है उसकी सोच पुरानी होती जाती है परन्तु इस प्रगतिशील चिंतक की सोच समय से आगे चलती थी ,यह आश्चर्य का विषय है उन्होंने हर वर्ग की औरत अभिजात्य वर्ग (प्रगतिशील ,बुद्धिजीवी ) से लेकर दबी कुचली औरत के दर्द को पास से जानने की कोशिश की है |ज्ञान , कला कोर्पोरेट जगत एवं प्रशासन में लगी महिलाओं का समय पर विवाह क्यों नहीं हुआ या उन्होंने क्यों नहीं किया ? यह उनका निजी मामला है उम्र निकल जाने पर हमारे यहाँ लड़की का विवाह कठिन हो जाता है भले ही वह कितनी योग्य हो लेकिन वह बड़ें ही दुःख के साथ लिखती हैं हमारा समाज यह कहता है जरुर लड़की में कोई खोट होगा इतनी उम्र तक कोई यूँ ही बैठी नहीं होगी | वह समाज की इस मानसिकता से दुखी हो जाती थी |उनके अनुसार इसमें लडकी का क्या दोष है ? यदि दोष है तो पुरुषों की मानसिकता का उन्हें अपने से ऊचे पद पर काम करने वाली पत्नी नही चाहिए इसे वह उनकी हींन भावना मानती थी क्योंकि कामकाजी महिलाओं को वह शक की नजर से से देखते हैं यदि विवाह हो भी जाता है तब भी घर में क्लेश रहता है और नौबत तलाक तक पहुँच जाती है |अब तो घरेलू महिलाओं के घर भी सुरक्षित नहीं हैं उन्हें इस बात का भी दुःख था सस्ते साहित्य सिनेमा और पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से यदि अवैध सम्बन्धों का चलन हो गया तो समाज का विघटन हो जाएगा |
उन्हें इस बात का भी दुःख था आर्थिक कारणों से औरतें भी अपना घर ,गाँव व कस्बा छोड़ कर शहरों की और आ रही हैं | कई औरतों की दशा बहुत सोचनीय हैं इन्हें बहला फुसला कर नौकरी का झांसा दे कर शहरों में लाया जाता है यहीं से इनके शोषण की प्रक्रिया शुरू हो जाती है इन्हें देह व्यापार में धकेल दिया जाता है पीछे लौटना भी संभव नहीं रह जाता |समाजिक कार्यकर्ता पुलिस की मदद से इन्हें छापा मार कर बचा कर लाते हैं इन महिलाओं को सुधार ग्रहों में रखा जाता है परन्तु कई संस्थाओं के अधिकारियों और पुलिस की मिली भगत से यह अवैध व्यापार चलता रहता है यही नहीं विधवा आश्रमों में भी यह कुकृत्य चलता है इन कुत्सित और घिनौनी स्थिति में से इन महिलाओं को निकाल कर उन्हें सुरक्षित स्थान पर रख कर उन्हें नये जीवन की शिक्षा दे कर आर्थिक रूप से मजबूत करना आसान काम नहीं है | कई औरतों की आदतें बिगड़ जाती हैं ,उन्हें पढाई – लिखाई सिलाई – कढ़ाई ,प्रार्थना एवं संगीत में व्यस्त रखा जाए | जिन महिलाओं पर केस चल रहा है , केस का जल्दी निपटारा कर उन्हें उनके परिवारों में वापिस भेजा जाए यदि परिवार उन्हें स्वीकार नही करते उनके विवाह की कोशिश की जाए जिससे उनका भी घर बस जाए |
आशा जी ने काल गर्ल की बढ़ती समस्या को भी नहों छोड़ा | कालगर्ल के नाम से नया व्यवसाय शुरू हो गया है इसमें पढ़ी लिखी सम्पन्न घरों की लड़कियाँ शामिल हो गई हैं रिश्वत के तौर पर जल्दी तरक्की पाने के लिए इन्हें धड़ल्ले से पेश किया जाता है इस पेशे में लगी लड़कियाँ अपने ग्राहकों को ब्वाय फ्रेंड कह कर उनकी संख्या बढ़ा चढा कर बताती हैं |ग्लैमर की दुनिया में अपना स्थान बनाने के लिए, महानगरों में अपना खर्च निकालने के लिए फिल्म थियेटर , गायन ,टी.वी. माडलिंग आदि की कुछ विफल हस्तियाँ भी इस क्षेत्र में आ जाती हैं | उनके पास बहाना होता है क्या करें ? पैसे की जरूरत है झेलना पड़ता है | कई शातिर ट्रेंड कालगर्ल स्कूलों – कालेजों में एडमिशन लेकर भोली भाली जरूरत मंद लड़कियों को फुसलाकर दलालों के चुंगल में फसा देती हैं | वह दलदल से निकलना भी चाहें तो निकल नहीं पाती क्योंकि मेहनत का रास्ता उन्हें मुश्किल लगता है | आशा जी का मानना था परम्पराओं का हम कितना भी विरोध क्यों न किया जाए भारतीय संस्कारों की जड़ें बड़ी गहरी होती हैं |
उनके अनुसार भारतीय नारी की समस्याओं को समान दृष्टि से नहीं देखा जा सकता कुछ आदिवासी समुदाय ऐसे हैं जो आज के आधुनिक समुदाय से भी आगे हैं वहां आसानी से तलाक भी हो जाता हें और दुबारा घर भी बस जाता हैं | आज निम्न वर्गों की स्त्रियाँ आत्मनिर्भर होने और पति से अधिक कमाने के बाद भी उनसे पिटती हैं | स्त्रियाँ मानव जाति से अलग नहीं हैं प्रसव के समय जीवन मृत्यु का संघर्ष सह कर बच्चे को जन्म देती हैं वही शिशु का मुहं देख कर सारा दुःख भूल जाती है
किशोरावस्था में कई किशोर – किशोरियां भटक जाते हैं पढाई में मन नहीं लगता गलत संगत में पड़ कर घर से भाग जाते हैं आशा जी ने एक समाज शास्त्री के समान केवल समस्या ही नहीं उठाई बल्कि उनका समाधान भी खोजने की कोशिश की है उन्हें जवान किशोरों के नशे की गर्त में जाने का बहुत दुःख था जबकि यह राष्ट्र की ऊर्जा हैं | आज के समाज में स्त्रियाँ सुरक्षित नहीं हैं निरंतर बलात्कार की शिकार हो रहीं है असफल प्रेम से निराश हो कर हत्या,आत्महत्या करना वा यौन हिंसा की और प्रवर्त होना विकट समस्या है | उन्हें इस बात का भी दुःख था भोले भाले बालक पर माता पिता अपनी महत्वकांक्षायें लाद देते हैं जो कैरियर वह स्वयं नहीं ले पाए अपने बच्चे को देना चाहते है उसे सब सुविधाएं देते हैं |एक-एक नम्बर कम होने का हिसाब उनसे लिया जाता है जबकि जीवन की दृष्टि से परिवार ,समाज रोजगार तीनों पक्षों का समान महत्व हैं उनकी इस कविता में जीवन का सत्य उजागर होता है –
‘प्रकृति से दूर जाकर ,अपार धन कमा कर ,हम फिर लौट रहे हैं प्रकृति में ,फ़ार्म हाउस संस्कृति में
पद्मश्री शीला झुनझुन के अनुसार आशा जी एक संस्था थीं ,वह कुशल संगठन कर्ता एवं संचालक भी थी आशा जी के अनुसार यदि संस्कार सहीं होंगे तो व्यक्तित्व का भी सही विकास होगा इस लिए उन्होंने नोएडा विकास प्राधिकरण से स्थान लेकर अपनी समस्त पूँजी लगा कर सत्तर वर्ष की अवस्था में सूर्या संस्थान ‘की स्थापना की ,पहले उन्होंने नन्हे बच्चों के लिए अंकुर शिशु संस्कार संस्थान केंद्र ‘,पल्लव बाल भवन (नर्सरी )व बाल पुस्तकालय द्वारा बच्चों में संस्कार डालने का प्रयत्न किया |उन्होंने सूर्या संस्थान के साथ देश भर के बुद्धिजीवियों को जोड़ा ,यहाँ भाषाई आदान- प्रदान के लिए अनुवाद प्रशिक्षण वा भाषा गोष्ठियों का आयोजन किया जाता है , जिसमें विभिन्न भाषाओं के लेखक एकत्रित होकर अपने विषयों की चर्चा करते हैं उन्होंने एक शोध पुस्तकालय भी चलाया
आशा जी ने सूर्या संस्थान को अपना जीवन अर्पित कर दिया |साधन हीनता एवं धन की कमी के बावजूद लडकियों के लिए अनेक योजनायें बनाई गई और उन्हें पूरा करने के लिए वह लगन से जुट गई | वह चाहती थी हर लडकी व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त कर पैरों पर खड़ी हो सकें |यहाँ लडकियों के लिए सूर्याशा पौलीटेक्निक के नाम से एक व्यवसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की गयी जिसमें अनुभवी प्रशिक्षको द्वारा लडकियों को कम्प्यूटर की शिक्षा दी जाती है अभी लडकियों की ट्रेनिग समाप्त भी नहीं होती उन्हें नौकरी का बुलावा आने लगता है यहाँ सिलाई केंद्र इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स ब्यूटीशियन कोर्स भी चलता है कम उम्र से लेकर बड़ी लडकियों को जूडो- कराते की ट्रेनिंग नोएडा पुलिस के सहयोग से दी गई |यहाँ न के बराबर शुल्क पर हुनर सिखाया जाता है यदि कोई परिवार शुल्क देने में असमर्थ है उससे कोई शुल्क नहीं लिया जाता |आशाजी की इच्छा का मूर्त रूप सूर्या संस्थान है |आशा जी के अनुसार –
“बड़ा ही कंजूस होता है बुढ़ापा बच गये समय को,गिन-गिन कर खर्च करता हैं “
| 21 दिसम्बर 2009 अभी सूर्योदय नहीं हुआ था सूर्या संस्थान के हर बच्चे वा बड़ों की माता जी , हर औरत के दुःख में दुखी होने वाली और उनकी भलाई का उपाय सोचने वाली वा अपने पाठकों की आशा रानी व्होरा चिर निद्रा में सदैव के लिए सो गई रह गई उनकी पंक्तियाँ -
“कहते हैं अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता
यहाँ भाड़ नहीं पहाड़ फोड़े हैं , हालात के हाथों के कान मरोड़े हैं ‘
आज वह हमारे बीच नहीं हैं परन्तु उनके संस्थान में 400 लड़कियाँ शिक्षा प्राप्त कर रहीं हैं |
नोट –यह मेरे द्वारा लिखित “लेख पाँचवाँ स्तम्भ” सम्पादक महामहिम गोवा की राज्य पाल मृदुला जी की पत्रिका में छपा था श्रीमती आशा रानी व्योरा की पुण्य तिथी पर इस लेख को पुन:जागरण जंक्शन के पाठकों के लिए लिख रही हूँ| डॉ शोभा भारद्वाज

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (5 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

20 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

neelam bhagi के द्वारा
December 20, 2014

 मै सूर्या संस्थान की मैंबर हु आशा जी को मैने नहीं देखा जब मैं सूर्या संस्थान के सम्पर्क मैं आई उनका स्वर्ग वास हो गया था जो भी उनके सम्पर्क में आया उनका बहुत सम्मान करता हैं मैं भी दिल से उनका सम्मान करती हूँ नीलम

anjanabhagi के द्वारा
December 20, 2014

 आशाजी को मैं जानती हूँ ७० वर्ष की अवस्था में स्त्री जाति के कल्याण की बात सोचना और कर दिखाना वहुत बड़ी बात है कई बुद्धिजीवी उनके संस्थान से जुड़े हैं अंजना

Shobha के द्वारा
December 21, 2014

नीलम जी आशा जी महिलाओं का गर्व हैं डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
December 21, 2014

अंजना जी बारह बाइस के पास सूर्या संस्थान हैं जहाँ हर वर्ष लडकियाँ व्यवसायिक शिक्षा ग्रहण कर अपना भविष्य सवारती हैं डॉ शोभा

jlsingh के द्वारा
December 21, 2014

जिस सस्थान का सिर्फ नाम भर सुना था, आशारानी व्होरा का भी सिर्फ नाम ही मालूम था मुझे. आज आपके आलेख से बहुत साड़ी जानकारी प्राप्त हुई. धन्य हैं ऐसी महिलाएं और धन्य है हमारा भारत देश जिनमे ऐसी महिलाएं जन्म लेती हैं और ताउम्र जनकल्याण में लगे रहती हैं. एक पंक्ति – “बड़ा ही कंजूस होता है बुढ़ापा बच गये समय को,गिन-गिन कर खर्च करता हैं “ बड़ा ही महत्वपूर्ण लगा. और दूसरी पंक्तियाँ – “कहते हैं अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता यहाँ भाड़ नहीं पहाड़ फोड़े हैं , हालात के हाथों के कान मरोड़े हैं ‘ हम सब बड़े सौभाग्यशाली हैं जो आप जैसी विदुषी का सान्निध्य इस मंच पर प्राप्त है. आपका हार्दिक अभिनन्दन आदरणीया डॉ. शोभा जी!

Shobha के द्वारा
December 21, 2014

श्री जवाहर जी आज मैं आशा रानी जी के सूर्या संस्थान से अभी घर आई हु मुझे भी उन पर अपने विचार रखने थे में सूर्या संस्थान की आजीवन मेंबर हूँ आशा जी के पास जो था उन्होंने नोएडा अथोरिटी से चाट हट खरीद कर उसमें लडकियों के लिए काम करना शुरू किया उनका बेटा डोक्टर हैं वःह इन हटों में अकेली रहती थी जब बरसात होती थी छत से पानी टपकता था वःह उसी में रहती थीं उनका नब्बे वर्ष की उम्र में देहांत हुआ उनकी तेरही के दिन इतनी भीड़ थी बता नहीं सकती जिसने सुना भागा आया आज माता जी की श्रधांजली सभा है | बहुत बड़ी हस्तियां संस्थान से जुडी हुई हैं वःह सबको कुछ न कुछ संस्थान का काम सोंप गई वह साहित्य और समाज सेवा से जुडी महिला थी |गोवा की राज्यपाल महामहिम मृदुला सिन्हा सूर्या संस्थान की अध्यक्षा रहीं है आप ने प्रतिक्रिया दी मेरी आँख में पानी आ गया धन्यवाद सहित शोभा भाद्वाज u

pkdubey के द्वारा
December 23, 2014

एक नए नाम और नए संस्थान से परिचित हुआ मई आदरणीया .आज के जहरीले वातावरण में अवश्य ही ऐसे व्यक्तित्व और संस्थान अमृत की बूंदों के समान हैं और जब तक ऐसे कार्यों की भरमार नहीं होगी ,देश नहीं बदल सकता ,सादर आभार आदरणीया ,सादर नमन.

Shobha के द्वारा
December 24, 2014

श्री दूबे जी सुखी सी वृद्ध महिला इतना दिल में जोश इनका बेटाआल इंडिया में स्पेशलिस्ट था यह अकेली संस्थान में रहती थी कई बार बरसात में पानी टपकता था तब भी काम में लगी रहती थी अपना जो था संस्थान को दे दिया ९० वर्ष की अवस्था में इनकी मृत्यु हुई पूरा नोएडा इन्हें माता ही कहता था आज भी सुट्या संस्थान में कोच भी होता है जिसमें सारा बुद्धिजीवी इकट्ठा हो जाता है जिसमें अधिकतर अधिकारी IAS| गोवा की राज्यपाल महामहिम मृदुला सिन्हा इनके संस्थान की अध्यक्षा रही हैं गोवा जाने से पहले अब उनका दायित्व पद्मश्री शिला झुनझुन वाला को सौंप गई |आपके विचार बहुत अच्छे है इसलिए मै उनके बारे में आपको लिख रही हूँ डॉ शोभा भारद्वाज

sadguruji के द्वारा
December 26, 2014

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! सूर्या संस्थान ‘की संस्थापक श्रीमती आशा रानी व्होरा जी के बारे में विस्तृत रूप से जानकार बहुत अच्छा लगा ! इस प्रेरणादायी महान व्यक्तित्व के बारे में सुना तोि था, परन्तु मुझे उनके बारे में इतनी विस्तृत जानकारी नहीं थी ! मंच पर इस प्रेरक प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार !

sadguruji के द्वारा
December 26, 2014

ऐसे प्रेरणादायी लेखों को विशेष महत्व देना चाहिए ! अफ़सोस की बात है कि ये मंच इस दिशा में पूर्णत: असफल है ! एक मशीन की भांति किसी मंच को बना देने की बजाय उसे जीवंत, प्रेरणादायी और सदैव सक्रिय रहने वाला बनाना चाहिए ! बहुत सारी अच्छी चीजे इस मंच पर उपेक्षित रह जा रही हैं ! बहुत सारे बहुत अच्छा लिखने वाले ब्लागरों के निराश होकर चुप हो जाने का मूल कारण भी यही है !

Shobha के द्वारा
December 27, 2014

श्री सद्गुरु जी आशा रानी जी कमाल की महिला थी इनका पुत्र दिल्ली के बहुत प्रतिष्ठित मेडिकल कालेज का स्पेशलिस्ट है यह अकेली नोएडा में ७० वर्ष की अवस्था में आई थी जोभी पूंजी थी उससे चार हट खरीद कर लडकियों के बिकास का काम शुरू किया वः १०० से अधिक पुस्तकें लिख चुकी थी इस लेखन से उनका खर्चा चलता था आज अनेक बच्चियां पढ़ कर अपना जीवन बना चुकी हैं सब उनको माता जी कहते थे जब भी सूर्या में कुछ होता हैं अनेक अधिकारियों बुध्दिजीवियों का जमावड़ा होता है शोभा

Shobha के द्वारा
December 27, 2014

श्री सद्गुरु जी आप ठीक कहते हैं मैने आशा जी के बारे में लिखा लिखने के पांच बाद जब मैने वैसे ही अपना ब्लॉग खोला २५५९ लोग उन्हें पढ़ चुके थे नोएडा के हर अखबार में उन्हें श्रधान्जली दी थी यह न समझे बुद्धिजीवी अपना रास्ता खोज लेता हैं मुझे लिखने से ज्यादा भाषण का शौक है उसमें बस जबान हिलानी पडती है में उसमें खुश रहती हूँ अभी मेरी दो जिम्मेदारिय हैं दो बेटे शादी के लायक हैं मेरे पति आज की माँड लडकियों से घबराते हें उनके विवाह के बाद अपना स्वतंत्र ब्लॉग बना कर लिखूंगी मैने विचार गंगा के नाम से अपना पेज बनाया है आप भी बनाईये एक बार मैने आपके विचार अपने ब्लॉग से दिए थे जानते हैं कितनी प्रतिक्रिया थीं ५५६ आप बहुत अच्छा लिखते हैं अपने विचारों को लिखते रहिये पाठक आपको पढ़ेंगे डॉ शोभा

yogi sarswat के द्वारा
December 28, 2014

महान शख्सियत को विनम्र श्रद्धांजलि !

sadguruji के द्वारा
December 31, 2014

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! आपको और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष की बहुत बहुत बधाई ! नए साल में भी आपकी लेखनी अनवरत चलती रहे !

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
January 1, 2015

शोभा जी, नववर्ष की शुभकामनाएं । शहर से बाहर था इसलिए नियमित पढ लिख न सका । अब आपका यह लेख पढा ।  इतिहास के एक भूले बिसरे पृष्ठ पर आपने बहुत सुंदर लिखा है । इस विषय पर अच्छी जानकारी आपके माध्यम से मिली, इसके लिए आपका आभार ।

Shobha के द्वारा
January 3, 2015

श्री सारस्वत जी नमस्ते लेख पढने का धन्यवाद शोभा

Shobha के द्वारा
January 3, 2015

श्री सद्गुरुजी नव वर्ष मुबाएक आपको एवं आपके अपनों और आपके श्रद्धालुओं ( admirers ) सबको मुबारक आपकी छोटी बेबी को स्नेह भरा आशीर्वाद डॉ शोभा

Shobha के द्वारा
January 3, 2015

श्री बिष्ट जी आपको नयावर्ष मुबारक आपके परिवार के लिए मंगल कामना करती हूँ आपने लेख पढ़ा बहुत ख़ुशी हुई धन्यवाद सहित डॉ शोभा

Jitendra Mathur के द्वारा
September 29, 2015

आशा जी को नमन । देश को उनके जैसी ढेरों पुत्रियों की आवश्यकता है जो अपने जीवन को और साथ ही अपनी असंख्य बहनों के जीवन को भी आलोकित कर दें । आपने इस पुराने आलेख को यहाँ हम सब के साथ बांट कर बहुत अच्छा किया शोभा जी । मैं सद्गुरु जी के विचार से सहमत हूँ कि इस मंच पर प्रेरणादायक लेखों की न्यूनता है । प्रेरणादायी तथा जनोपयोगी लेखों को प्रोत्साहित करने की दिशा में मंच कोई विशेष सफल प्रतीत नहीं होता । इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए । जितेन्द्र माथुर

Shobha के द्वारा
September 30, 2015

श्री जितेन्द्र जी आपने स्वर्गीय आशा रानी वोहरा जी पर लिखे मेरे लेख को पढ़ा बहुत धन्यवाद इन्होने 70 वर्ष की अबस्था में अपनी पूरी पूंजी लगा कर सूर्या संस्थान संस्था बनाई यहाँ गरीब लडकियों को रोजगार के लिए कम्प्यूटर सिलाई कढाई और अनेक काम सिखाये जाते हैं आशा जी ने 90 वर्ष की अवस्था तक काम किया महिलों पर 110 पुस्तकें लिखी संस्थान में एक से एक बढ़ कर अधिकारी आते हैं संस्थान से जुड़े हैं |


topic of the week



अन्य ब्लॉग

latest from jagran