Menu
blogid : 15986 postid : 885228

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस

Vichar Manthan
Vichar Manthan
  • 297 Posts
  • 3128 Comments

१५ मई १९९४ का दिन अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस घोषित किया गया क्योंकि पश्चिम सभ्यता में परिवार टूट कर बिखर रहे हैं |पहले पश्चिम में भी संयुक्त परिवार थे लेकिन धीरे- धीरे पहले संयुक्त परिवार टूट कर एकल परिवार रह गये फिर माँ बाप से शादी के बाद विवाहित जोड़ा अलग हो गया उसने अपना घोसला बसा लिया वृद्धावस्था में बूढ़े या तो अकेले निराश्रित रह जाते या उन्हें वृद्धाश्रम में जाना पड़ा अब वहीं उनको बाकी बचा जीवन काटना है उनके जन्म दिन या पेरेंट डे के दिन माँ बाप को उनका बेटा याद कर ले एक गुलदस्ता भेज दे उससे वह खुश हो जाते हैं दम्पति इस भय से उनका बुढापा कैसे गुजरेगा अपने भविष्य की चिंता करने लगे हैं |लड़के एक उम्र बाद घर छोड़ कर चले जाते हैं उन्हें अपने माता पिता द्वारा की जाने वाली टोका टिप्पणी पसंद नहीं आती |सरकार द्वारा डोल मिलने लगती है पर उससे उनका निर्वाह नही हो सकता कुछ काम कर पैसा जमा करने लगते हैं जिससे वह अपनी आगे की पढ़ाई चला सकें | किसी लडकी से प्रेम विवाह कर लेते हैं अच्छे जीवन की की आशा में लड़की कमाती हैं पति देवता पढ़ते हैं जब कैरियर बन जाता हैं पत्नी को तलाक देकर अपने स्टेट्स की लडकी से शादी कर लेते हैं यदि इस बीच उनकी सन्तान दुनिया में आ गई वह माँ के पल्ले से बाँध दी जाती है यह समझदारी हमारे यहाँ के विदेश पढने जाने लगे लड़के या भारतीय मूल के लोग भी करने लगे हैं इसी लिए बीच का रास्ता लिव-इन निकाला है |
भारत में कुछ अपवादों को छोड़ कर परिवार का सदैव महत्व रहा है |इस लिए ऐसे किसी दिन की जरूरत ही नहीं थी जिसे परिवार दिवस कहा जाये लेकिन धीरे-धीरे पहले संयुक्त परिवार टूटे क्योंकि रोजी रोटी के लिए घर त्यागना पड़ता हैं |शहरों में जाने से एकल परिवार रह गये लेकिन तीज त्योहारों पर अपने घर आते थे और मिल कर त्यौहार मनाये जाते थे दिवाली ,होली और छट पूजा पर सभी अपने घर जा कर त्यौहार सबके साथ मनाना पसंद करते हैं | पश्चिम की हवा ने भारत में भी अपना प्रभाव फैलाना शुरू कर दिया | अब पति पत्नी के आपसी झगड़ों ने घर को भी तोड़ दिया बीच में बेचारा बच्चा कहाँ जाये उसे माँ बाप दोनों चाहियें ऐसा कैसे हो गया ?बच्चे के लिए माँ हर तकलीफ से गुजरती हैं लेकिन पति पत्नी का अहम जिसे ईगो भी कहते हैं आपस में इतना टकराती है वह एक छत के नीचे रह नहीं सकते कई बार पुरुष का अहम बच्चे को माँ से अलग कर संतुष्ट होता है आये दिन कोर्ट में झगड़े आते हैं माँ बच्चे को स्वयं पालना चाहती है नौकरी करती हैं फिर भी उसे पति से बच्चे का एक मुश्त खर्चा चाहती है वह अपनी बर्बाद जिन्दगी का दंड देना चाहती हं यदि बच्चा लडकी है माँ उसे किसी भी कीमत में अपने से अलग नहीं करना चाहती पिता को पता है बच्ची की जिम्मेदारी बहुत होती है पर वह तंग करने के लिए उसको अपनी कस्टडी में लेना चाहता है चाहे वह खुद न पाल कर उसकी दादी को सोंप दे या हास्टल में रख कर पढाये|
जब शादी की थी पत्नी बहुत पसंद थी अब उससे ऊब गये हैं जिन्दगी में कुछ थ्रिल चाहिए जीवन में दूसरी औरत आ जाती है परिणाम पति पत्नी के झगड़े बच्चों की माँ कहाँ जाये कई बार इसके खतरनाक परिणाम भी सामने आते हैं | लड़कियों की शादी की उम्र हो जाती हैं उन्हें ऐसा पति चाहिए जिसके पास सब कुछ हो ऐसे ही उम्र निकलने लगती है कभी – कभी साथ के किसी विवाहित जिसके पास सब कुछ है सम्बन्ध जुड़ जाते हैं | ऐसे सम्बन्धों का परिणाम कभी अच्छा नहीं होता | आजकल महिलायें भी इस दिशा में आगे बढ़ रही हैं | शादी के अवसरों पर कन्या के मित्रों में पुरुष मित्र भी होते हैं पुरुष अपनी पत्नी के पुरुष मित्र को किसी तरह बर्दाश्त नहीं करते |प्रेम भी ऐसे नहीं है जो लम्बे समय तक चले ब्रेकअप हो जाने पर प्रेमी अब दोस्त और सलाहकार बन जाता हैं | प्रेम के किस्से कहानियाँ बस कम उम्र के लडके लडकियों के फसाने रह गये हैं जो एक दूसरे पर मर मिटते थे| कल के प्रेमी आज के पति पत्नी को कोर्ट का दरवाजा खटखटाते देर नहीं लगती |वह एक दूसरे की शक्ल भी देखना पसंद नहीं करते अब किसी दुश्मन की जरूरत नहीं है वह स्वयं ही एक दूसरे के दुश्मन हैं |
पश्चिम की देन लिव- इन रिलेशन, भारत में शादी में अग्नि के फेरे के साथ अतीत जल जाता है अब लिव-इन का लम्बा चौड़ा बखान होता हैं रिश्ते को तोड़ते भी देर नहीं लगती कई बार सेहरे लगा कर लड़का शान से शादी करने जाता हैं अभी बरात पहुचती ही है लड़के की प्रेमिका हंगामा मचा देती है |पति पत्नी में भी बड़े बैलेंस से रिश्ता बनाना पड़ता है दोनों नौकरी करते हैं दोनों थक कर आते हैं दोनों कैरियर के प्रति जागरूक हैं विदेशों में बाहर खाने का रिवाज है यह चलन हमारे देश में भी हो रहा है | अपना पैसा भी अलग रखते हैं ईमानदारी से दोनों खर्चा उठाते है| अब सवाल है वृद्धों का ? बेटियां भी अपने माता पिता का बेटे की तरह ध्यान रखती है वह बर्दाश्त नहीं करती उसके माता पिता का अपमान हो | आप अपने घर में ही घर जवाई होने का अनुभव कर सकते हैं |ऐसा भी देखा गया है माँ बाप पास –पास दो घर खरीदते हैं एक बेटे बहू के लिए एक अपने लिए | बेटे की बड़ी मेहरबानी हैं यदि वह माता पिता का ध्यान रख ले ऐसे रिश्ते की बेटों द्वारा बहुत प्रशंसा की जाती हैं हाँ माता पिता जब तक पोते पोतियाँ बड़े नहीं होते उनका ध्यान रखना उनका होम वर्क करान उनकी जिम्मेदारी हैं |
आज भी गावों में बजुर्ग सम्मानित हैं शहरों में भी कई घरों में सम्मान से रहते हैं | नौकरी पेशा पति पत्नी कुछ समय बाद उनके महत्व को समझ जाते हैं |ऐसे ही परिवार की भावना बनती बिगडती फिर मजबूत हो जाती हैं |

| डॉ शोभा भारद्वाज

Read Comments

    Post a comment

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    CAPTCHA
    Refresh