Vichar Manthan

Mere vicharon ka sangrah

193 Posts

2717 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15986 postid : 951807

" मुझे कुछ कहना है "

  • SocialTwist Tell-a-Friend

“ मैं कुछ कहना चाहती हूँ “क्या आप पढ़ेंगे ?
मुझे लिखने का अधिक शौक नहीं था आकाशवाणी में मेरी वातायें नियमित रूप से आती रहती हैं कभी- कभी पत्रिकाओं में भी लिख लेती थी लेकिन भाषण देना मुझे बहुत प्रिय है कई संस्थाएं बुलाती हैं भाषण देना भी आसान हैं केवल आपमें कला होनी चाहिए आप श्रोताओं को अपने विचारों में बाँध सकते हैं या नहीं | | लिखना आसान नहीं है मेरे गुरु डॉ श्री राम शर्मा जी कहते थे भाषा क्लिष्ट नहीं होनी चाहिए उसमें प्रवाह हो | इस प्रकार लिखना चाहिए पाठकों को ऐसा लगे वह स्वीमिंग पूल में सीधा लेट कर धीरे – धीरे हाथ पैर चला कर तैरने का आनन्द उठा रहें हैं | आपकी लेखनी में पकड़ होनी चाहिए |मैने एक संस्था में कम्प्यूटर सीखना शुरू किया वहा मुझे राकेश जिससे कम्प्यूटर सीखती थी ने कहा आंटी आप नियमित रूप से लिखती क्यों नहीं उसने स्वयं ही जागरण ब्लॉग में मेरे लिए ब्लॉग के लिए अप्लाई किया जिसमें उसने सोभाजी ,शोभा में H नहीं लगाया वह मेरी बहुत इज्जत करता था इसलिए नाम के साथ ‘जी’ लगा दिया मैने भी उसी नाम से लिखना शुरू कर दिया मैने उसकी भावना का ध्यान रखा |दैनिक जागरण हमारे यहाँ नियमित रूप से आता था हमारे परिवार का पसंदीदा हिदी का अखबार था |अब मैने ब्लॉग लिखना शुरू किया जागरण के एक कांटेस्ट में मैंने संसमरण लिखा उसके बाद मुझे पहली प्रतिक्रिया मिली
“प्रिय सोभा जी, पहले तो आपके नाम को देखकर कुछ अटपटा सा लगा ! मेरे ख्याल से शोभा जी होना चाहिए लेकिन आपने अपने नाम को सोभा जी लिखा है ! दूसरी बात आपने १३ रचनाये लिखी है लेकिन एक भी कमेंट नहीं मिला ! आश्चर्य !!! फिर भी आपकी पुरस्कृत रचना के लिए आपको बहुत बहुत बधाई ! राम कृष्ण खुराना”
“यहीं से जागरण जंगशन के लेखकों और पाठकों से मेरा परिचय शुरू हो गया | मैं लगभग हर लेखक की रचना पढ़ती हूँ | मेरी अपनी भाषा में भी सुधार हुआ |कुछ लेखकों की रचनाएँ लाजबाब होती थीं | अपने आप कम्प्यूटर पर उन्हें प्रतिक्रिया देने के लिए हाथ चलते हैं कुछ छोटा लिखते थे परन्तु वह एक ऐसा प्रश्न उठाते थे जो सोचने पर मजबूर कर देता हैं | जागरण जंगशन में लिखा है “ दो साल पहले जागरण जंक्शन ने अपने नियमित पाठकों की रचनाओं को अधिकाधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए एक विशेष पहल आरंभ की थी.” | सभी लिखने पढने के शौकीनों को जब भी अच्छा लेख या कविता पढने को मिल जाती हैं उस पर प्रतिक्रिया लिखने का शौक हो तो सोने में सुहागा हो जाता है |ज्यादातर लोग पहले लेख को अच्छी तरह पढ़ते हैं फिर उसके मर्मस्पर्शी भाग को पढने के बाद प्रतिक्रिया देते हैं प्रतिक्रिया में केवल प्रशंसा ही नहीं की जाती बल्कि सहमत न होने पर अपनी बात को बेबाकी से रखते हुए प्रतिक्रिया देते हैं और आलोचना भी की जाती हैं यही नहीं विषय से सम्बन्धित जो बात अधूरी रह जाती है उस पर भी प्रकाश डाला जाता है |कई बार पाठकों की प्रतिक्रिया में बहुत अच्छे विचार होते हैं उसे मैं आपने कालम से प्रतिक्रिया देने वाले लेखक के नाम से hight light कर देती हूँ उस पर भी पाठक अपनी प्रतिक्रिया देते हैं | आपने ऐसा ही अवसर हम पाठकों और लेखकों को दिया जो अत्यंत सराहनीय रहा है और हमारा मजबूत रिश्ता जागरण ब्लॉग के लेखकों और पाठकों से जुड़ा हैं परन्तु अब ?
Post Your Comment Error:wrong captcha
Duplicate comment detected; it looks as though you’ve already said that!
CAPTCHA CODE
Submit
अब केवल कालम या स्वप्न रह गया है पाठक क्या करे ???
“नोट: प्रतिदिन दो चुनिंदा ब्लॉग रचनाएं दैनिक जागरण के संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित की जाती हैं. ज्ञात हो कि वही लेख प्रकाशित किए जाएंगे जो संपादकीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप होंगे.
तो फिर जागरण जंक्शन पर नियमित लिखें और पाएं दैनिक जागरण में अपना ब्लॉग प्रकाशित होने का शानदार अवसर.” यह सम्पादक महोदय का अधिकार है इस पर मुझे कुछ नहीं कहना |
लेकिन प्रतिक्रिया देने का आपने अधिकार दिया है| यदि आप प्रतिक्रिया देने के लिए पाठकों को हतोत्साहित करना चाहते हैं या आपकी पॉलिसी बदल गई | आप नोट –लिख कर दो पंक्तियों में निर्देश दे दें अति कृपा होगी हम भी बेकार का प्रयत्न नहीं करेंगे | हाँ रीडर ब्लॉग भी इन एड से भरा रहता है
gdg
RSS Feeds
Vashikaran Specialist In Goa +91 7734898057
gbbabaji29 के द्वारा: जनरल डब्बा
डॉ शोभा भारद्वाज

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 4.67 out of 5)
Loading ... Loading ...

17 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
July 22, 2015

जय श्री राम  शोभाजी बहुत टीक कहा.हमने इनको लैटर भेज कर सब बताया उनका फ़ोन आया कहा हम जल्दी टीक कर देगे परन्तु कुछ नहीं हुआ प्रतिक्रिया बिलकुल नहीं जाती.हमने उनको टाइम्स ऑफ़ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स में ब्लॉग के प्रतिक्रिया के बारे में बताया परन्तु लगता है किसी कोई दिलचस्पी नहीं है.इतना बढ़िया कार्य बेकार हो रहा है.भगवन इनको सत्बुधि दे.

Shobha के द्वारा
July 22, 2015

जय श्री राम जी रमेश जी पता नहीं आप अपनी प्रतिक्रिया कैसे पहुचाते हैं | आपने मेरे विचार पढ़े में इसी लिए अपनी शिकायत लेख के रूप में की है मुझे जागरण वालों की उदासीनता समझ ही नहीं आ रही हे कई बहुत अच्छे लेखक आज कल ब्लॉग में कुछ नहीं लिख रहे हैं कभी कभार ही उनका लेख दिखाई देता हैं

sadguruji के द्वारा
July 23, 2015

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सुप्रभात ! आज सुबह सुबह डिस्पले पर आपकी पोस्ट दिखी ! बहुत अच्छे ढंग से आपने ब्लॉगरों की कठिनाइयाँ लिखीं हैं ! कई चीजें छूट भी गई हैं ! सबसे बड़ी शिकायत है कि फीचर ब्लॉग डिस्पले रोज नहीं बदलते हैं ! हफ्ते में एक या दो दिन ! अधिकतर ब्लॉगरों की रचनाएँ फीचर होने से वंचित रह जाती हैं ! ‘बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक’ डिस्पले अक्सर दो हफ्ते तक बदला ही नहीं जाता है ! दैनिक जागरण में जो लेखों के अंश प्रकाशित होते हैं, उसका कोई खास महत्व नहीं है ! मुझे नहीं लगता है कि एक दो पाठक भी वहां दिए लिंक का उपयोग करते होंगे ! अक्सर तो दिया हुआ लिंक काम नहीं करता है ! इसमें ज्यादातर राजनितिक रचनाएँ ही चुनी जाती हैं ! जबतक पूरी पोस्ट प्रकाशित न हो तब तक लेखांश प्रकाशित करने का कोई ख़ास महत्व नहीं ! उससे लाख गुना अच्छा तो पाठक मंच है, जहाँ पर पाठक अपनी राय व्यक्त करते हैं ! आपको शायद यकीन न हो, परन्तु ये सत्य है कि सन २००० से पहले किसी भी अखबार के पाठक मंच में एक चिट्ठी भेज देने पर प्रतिक्रिया स्वरुप पाठकों के तीन चार पत्र घर पर आ जाते थे ! इससे ये बात जाहिर होती है कि पाठक रचनात्मक रूप से अब अखबारों से नहीं जुड़ पा रहे है ! इसमें गलती अखबारों की है ! आधा पेज तक जगह देने वाले पाठक मंच के पर कतरते चले गए और उसकी जगह छोटी करते चले गए ! व्यावसायिकता की अंधी दौड़ में भागते हुए अखबारों ने पाठकों को भुला दिया है ! आपको जानकार आश्चर्य होगा कि दैनिक जागरण के अविस्मरणीय और बहुत विद्वान संपादक स्वर्गीय नरेंद्र मोहन जी को जो भी पत्र मैंने भेजे, उन्होंने मेरी बाते बहुत ध्यान से पढ़ीं और स्वयं उसके जबाब भी दिए ! वो कहीं भी रचनात्मक कार्य हो रहा हो, उसकी सराहना करते थे ! उनके साथ ही वो रचनात्मकता और बुद्धिजीवीपन का स्वर्णिम युग भी चला गया ! दरअसल वो दैनिक जागरण के संघर्ष का दौर था, इसलिए सबको याद रखते थे और सबको ले के चलते थे ! अब मजबूती से स्थापित हो जाने के बाद पाठकों को कौन पूछता है ? इस मंच पर लिखने वाले अधिकतर लोग पाठक ही हैं ! पेशेवर लेखक बहुत कम ही हैं ! वो भला मुफ्त में क्यों लिखेंगे ? मैंने वर्षों से उनके लेख पढ़ें हैं ! वो लोग पेशेवर अंदाज में अखबार के निर्देशों और नीतियों के अनुसार लिखते हैं ! रीडर ब्लॉग पर उनसे भी बेहतर लिखने वाले हैं ! मेरा रिसर्च और पठनीय अनुभव यही कहता है कि उनके पास रीडर ब्लॉग के अनेकों सर्वश्रेष्ठ लेखकों जैसे एक भी लेखक नहीं हैं ! क्या जागरण ब्लॉग पर रीडर ब्लॉग के सिर्फ दो ब्लॉगर आदरणीय संतलाल करुण जी और आदरणीया यमुना पाठक जी के मुकाबले का कोई लेखक है ? मैं तो उनके मुकाबले का कोई लेखक नहीं पाया ! जागरण ब्लॉग पर जितने लेखक लिखते हैं, वो सब धार्मिक ग्रंथो और यहाँ वहां से समाचार लेकर लेख का रूप दे देते हैं ! उनका अपना रिसर्च और अपना विचार लेख में नदारद रहता है, जो किसी भी अच्छे लेख की जान होती है ! विषय भी वो लोग ऐसा चुनते हैं कि हंसी आती है ! भूत-प्रेत, सनसनीखेज ख़बरें, और वही पुराने घिसे-पिटे राजनितिक मुद्दे ! कोई कविता, कहानी या फिर अपने रिसर्च और विचार वाले लेख रचनात्मक लेख वहां पर नहीं लिखता है ! इसलिए मैं रीडर ब्लॉग को जागरण ब्लॉग की तुलना में लाख गुना बेहतर समझता हूँ ! अंत में सीधे कमेंट करने पर जो पाबंदी लगी है, उसके बारे में कुछ कहना चाहूंगा ! दरसल बहुत से कम पढेलिखे और धार्मिक उन्माद से भरे पाठक लेखों पर अश्लील टिप्पणियाँ करते थे, इसलिए जागरण मंच को ऐसा करना पड़ा होगा ! अब कमेंट जा तो रहे हैं, परन्तु सीधे प्रकाशित न होकर स्पैम में जा रहे हैं ! आपको एडिट क्लिक कर दायें ओर दिए बॉक्स में अप्रूव्ड क्लिक कर अंत में अपडेट कमेंट को क्लिक करना, तब जाकर कमेंट आपके ब्लॉग पर प्रकाशित होगा ! जो ये सब नहीं जानते हों, वो ब्लॉगर मित्र ऐसा करके देंखें ! स्पैम में पड़ा कमेंट जरूर प्रकाशित हो जायेगा ! जागरण मंच ने अश्लील कमेंटों पर पाबंदी लगाने के लिए अच्छा कदम उठाया है, परन्तु इसका एक बड़ा नुक्सान भी है ! वो ये कि अब बहुत से लोग इस दुविधा में कमेंट भेज नहीं रहे हैं कि पता नहीं जाएगा या नहीं ? इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा नुक्सान यह है कि अब फीडबैक पर आपकी शिकायतें जल्दी प्रकाशित नहीं होंगी ! पहले फीडबैक पर शिकायते जल्दी सुनी नहीं जाती थीं, अब मित्रों जल्दी प्रकाशित नहीं होंगी ! अंत में जिनका मेरे ह्रदय में बहुत सम्मान है, वो आदरणीया लेखिका निशा मित्तल जी हैं ! उनकी एक बात मुझे नहीं भूलती है ! एक बार स्पेस नहीं बढ़ने पर इस मंच से जाना तय लग रहा था, तब उन्होंने कहा था कि रचनात्मकता अपना मार्ग स्वयं प्रशस्त कर लेती है ! अच्छा लिखने वाले जहाँ जायेंगे, अच्छा लिखेंगे ! उनकी लिए मंच की कमी नहीं है ! सम्मानित दैनिक जागरण इस मंच को बेहतर ओर क्रियाशील बनाये, यही उससे अपेक्षा है ! अच्छे लेखन और पाठकों की रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए समय समय पर रोचक प्रतियोगिताएँ आयोजित करना और अच्छे लेखकों को पुरस्कृत करना फिर से शुरू करे ! उदासीनता और निष्क्रियता से तो अच्छा है कि पाठकों की आवाज रीडर ब्लॉग को ही समाप्त कर दें ! सभी ब्लॉगर मित्रों के लिए आज कि ये नई सुबह बहुत बहुत मंगलमय हो ! आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी, इतने लम्बे कमेंट के लिए क्षमा कीजियेगा ! जा रहा था ‘गुरुपूणिमा’ पर लेख लिखने, परन्तु सरस्वती जी आपके ब्लॉग पर खिंच लाईं ! अपनी मौज में बह गया, किसी को बुरा लगे तो ‘राम राम’ और अच्छा लगे तो भी ‘राम राम’ !

amitshashwat के द्वारा
July 23, 2015

आदरणीय महोदया , जितनी सहजता से आपने बात रखी है ,वासतव मे वशीकरण संदर्भ से लेखकीय क्षमता    प्रकट है।धनयवाद ।

Shobha के द्वारा
July 23, 2015

श्री आदरणीय सद्गुरु जी मैने आपकी प्रतिक्रिया को अपने ब्लॉग से जागरण में भेज दिया

Shobha के द्वारा
July 23, 2015

श्री अमित जी आपने पाठकों की परेशानियों को लेख के रूप में पढ़ा बहुत अच्छा लगा बहुत धन्यवाद मैने लिखना आप सब से सीखा है

pkdubey के द्वारा
July 23, 2015

मन में उठने वाले विचारों और प्रश्नो को ब्लॉग रूप में परिणित करना ,बहुत अच्छा माध्यम है ,आदरणीया | प्रत्येक इंसान के अंदर अनेकों व्यथा और कथाएं है | हर के ब्लॉग से कुछ सीख तो मिलती ही है और लिखने वाले का भी मन हल्का होता | पर आज के इस इलेक्ट्रॉनिक युग में हम स्पैम और वशीकरण को यदि कंट्रोल नहीं कर पा रहे तो डिजिटल इंडिया से हर घर में वशीकरण करने वाले ही पाये जायेंगे | आवश्यक है इसे अच्छे से नियंत्रित किया जाये| सादर साधुवाद एवं नमन |

Shobha के द्वारा
July 23, 2015

श्री दूबे जी काफी समय बाद आपको ब्लॉग पर देखा बहुत ख़ुशी हुई आप नियमित रूप से लिखते रहते थे | काफी समय से जागरण में प्रतिक्रिया नहीं जा रही थी ऐसा लग रहा हैं जैसे जागरण वाले उदासीन हो गये हैं इसीलिए लेख लिखा था | कोइ भी अच्छा लेख देख कर में प्रतिक्रिया अवश्य देती हूँ परन्तु आजकल जा नहीं रही हैं लेख पढने के लिए बहुत धन्यवाद

ashasahay के द्वारा
July 25, 2015

आदरणीया शोभा जी ,नमस्कार .आपकामंच की सार्वजनिक  समस्या  को लेकर लिखा लेख एवम सद्गुरु जी तथा अन्य सहृदय जनो की प्रतिक्रियाएँ , सभी अच्छे लगे। मैं भी कुछ ऐसा ही अनु भव कर रही हूँ। लेख के लिए धन्यवाद  ।

Shobha के द्वारा
July 26, 2015

आदरणीय प्रिय आशा जी आप जानती हैं मुझे आपके लेख बहुत अच्छे लगते हैं अब यह हाल है रीडर ब्लॉग में एड भरे रहते हैं दुसरे ब्लॉग पर कभी दे देते हैं कभी नहीं मैने आपका लेख देखा उसके बाद में मेरा ब्लॉग पर गई अब पढूंगी फिर प्रतिक्रिया दूंगी लेख गायब उसकी जगह ऐड भरे हुए यदि ब्लॉग दिया है उसे सही ढंग से चलाओ अत: वैसे सुनते नहीं है अत: लेख लिखा आपने पढ़ा आप भी सहमत हैं अब जो तरीका अपनाया है उसमें भी सबको प्रतिक्रिया नहीं डालते धन्यवाद सहित शोभा

jlsingh के द्वारा
July 27, 2015

आदरणीया शोभा जी, जागरण जंक्शन की इसी त्रुटि के चलते मैं बहुत सारे लेखों पर अपनी प्रतिक्रिया नई दे पाता हूँ.और कभी कभी क्षोभवश अपनी सक्रियता काम कर देता हूँ. इसीलिये आपका ब्लॉग आज ही पढ़कर प्रतिक्रिया दे रहा हूँ. आप इसे स्पैम से निकालकर प्रकाशित कर लेंगी ऐसी उम्मीद है. अापके हर लेख जानकारी के साथ साथ सरल सहज और प्रवाहपूर्ण भाषा में होते हैं इसमे कोई दो राय नहीं. सदगुरुजी की प्रतिक्रिया वाले ब्लॉग पर भी मैंने अपने विचार रक्खे हैं आपके इस ब्लॉग को मैं काफी सम्मान के नजरिये से देख रहा हूँ. उम्मीद है जागरण जंक्शन हम सब की समस्या पर ध्यान देगा. सादर!

harirawat के द्वारा
July 27, 2015

डाक्टर शोभाजी नमस्कार ! आपका लेख पढ़ा ! बहुत सुन्दर ढंग से आपने ब्लॉग पर आने वाले परिवर्तन पर प्रकाश डाला ! मैं भी कही बार प्रयास कर चुका हूँ की अपनी टिप्पड़ी दे सकूँ लेकिन हर बार असफल रहा ! ये भी मेरी प्रतिक्रिया आप तक पहुँच भी आएगी की नहीं नहीं जानता ! शुभकामनाओं के साथ ! हरेन्द्र

Shobha के द्वारा
July 29, 2015

श्री रावत जी लेख के रूप में मैने अपने विचार इसी लिए लिखे थे आप लोग सब लोग हम सब की मजबूरी से अवगत हों शायद जागरण मंच वालों की चेतना जगे परन्तु ? लेख पढने का बहुत धन्यवाद

Shobha के द्वारा
July 29, 2015

श्री जवाहर जी मुझे हर लेख को पढने अपने विचार देने की आदत हैं आपसे मेरा विचार विनिमय होता रहता हैं जब सब निराश होगये मैने लेख का सहारा लिया सद्गुरु जी ने उसको आगे बढाया अपनी बात रखी देखते हैं आगे क्या करते हैं

Shobha के द्वारा
July 29, 2015

श्री जवाहर जी बहुत कष्ट होता है जब हम प्रतिक्रिया देते हैं वह लेखक तक पहुंचती नहीं मुझे यही उपाय सुझा अपनी बात सब तक पहुँचाने के लिए जवाहर जी ध्यान दें अच्छा है हमने तो लिखना हैं लिखते रहेंगे प्रतिक्रिया न भी जाए फिर भी लिखेंगे जागरण की उदासीनता पर तकलीफ होती है लेख पढने का धन्यवाद समझ नहीं आता कैसे जागरण वालों की उदासीनता हटेगी अब तो रीडर ब्लॉग में एड भरे रहते हैं

Megha के द्वारा
September 29, 2016

so true

Shobha के द्वारा
September 29, 2016

अतिशय धन्यवाद मेघा जी


topic of the week



latest from jagran