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आतंकवादी याकूब मेनन की फांसी पर राजनीति

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आतंक वादी याकूब मैनन की फांसी पर राजनीति
१२ मार्च १९९३ ,मुम्बई बम धमाकों से दहल उठी | भारत में होने वाले पहले बम धमाके थे जिसमें पाकिस्तान का हाथ था यह 13 बम धमाके जिससे देश की व्यवसायिक नगरी मुम्बई दहलती रही | स्टाक एक्सचेंज में 1.30 पर पहला धमाका हुआ उसके बाद एक के बाद एक धमाके होते गये अपने घरों से रोजगार या खरीदारी के लिए निकले निर्दोष लोग हादसों के शिकार हुए | इन धमाकों में 257 लोगों की मौत और 713 लोग घायल हुए , लोग आज भी न्याय का इंतजार कर रहे हैं | द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इतने बड़े पैमाने पर आर डी एक्स का इस्तेमाल हुआ था | यह भारत में पाकिस्तान के समर्थन से पहली बार किये गये धमाके थे जिसके साथ भारत में आतंकवाद की शुरुआत हुई | यह बम विस्फोट मुंबई में सभी प्रमुख स्थानों पर किए गए थे। ये प्रमुख स्थान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज, कालबादेवी का हीरा बाजार, शिवसेना भवन, एयर इंडिया बिल्डिंग, जवेरी बाजार, सेंचुरी बाजार, मच्छीमार कॉलोनी माहिन, फाइव स्टार होटल सी-रॉक, प्लॉजा सिनेमा, फाइव स्टॉर जुहू सेन्टोर होटल, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के बाहर, होटल एयरपोर्ट सेन्टोर और पासपोर्ट कार्यालय वरली थे इनका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों की मौत और मुम्बई की कमर तोड़ना था |
इस योजना को बनाने में प्रमुख भूमिका दाउद इब्राहीम , डी कम्पनी के मालिक की थी | |इस योजना को कार्यान्वित करने में टाईगर मेनन,अयूब मेनन याकूब मेनन बम विस्फोट का सामान लाने वाले तस्करों उनके अनेक साथी और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आई.एस. आई का प्रमुख हाथ था |इसमें आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी शामिल थे जिन्होंने कार और स्कूटरों में लगाये गये बम निश्चित स्थानों पर पहुचाये थे |
बम विस्फोटों का कारण बाबरी ढाचें को तोड़ने का बदला उसके बाद होने वाले दंगों को कारण बताया गया |
याकूब मेनन को 27 जुलाई 2007 को मुम्बई बम धमाकों की साजिश रचने के कारण टाडा कोर्ट में फांसी की सजा सुनाई गई |मेमन के वकीलों ने मुम्बई हाई कोर्ट ,के बाद सुप्रीम कोर्ट में और श्री राष्ट्रपति महोदय से फांसी को आजीवन करावा में बदलने की अपील की परन्तु फांसी की सजा बरकरार रही |जबकि मेनन के वकील चाहते थे सजा आजीवन कारावास में बदल जाए |याकूब मैनन पढ़ा लिखा व्यक्ति हैं वह चार्टर्ड अकाउंटेंट था | वह अपने भाई टाईगर मैनन के गैर कानूनी धंधों का हिसाब रखता था | मुम्बई बम धमाकों के बाद कराची चला गया | वह नेपाल की राजधानी काठमांडू आया था यहाँ से उसे गिरफ्तार किया गया | याकूब के वकीलों ने टाडा कोर्ट में गिरफ्तारी के बाद दलीलें दी इन धमाकों में उसके भाई टाईगर मेनन का हाथ था |जबकि सरकारी वकीलों की दलील थी वह बम काण्ड में बराबर का गुनाहगार है उसने न केवल फंड की व्यवस्था की बल्कि आतंकवादियों को पाकिस्तान जा कर हथियार चलाने की ट्रेनिग देने के लिए उनके जाने के लिए टिकट आदि की व्यवस्था की उसका 12 बमों को बनाने में उसका हाथ था | विस्फोटक उसके घर से दुर्घटना स्थल पर भेजे गये |
निर्दोषों को मौत के अंजाम तक पहुचाने वाले ने अपने बचाव के लिए हर संभव प्रयास किया दया की भी अपीले की | यह मुकदमा वहुत लम्बे समय तक लगभग 22 वर्ष तक चला उसने जेल में अपना आचरण बदला वह अनपढ़ों को पढाता था सबसे मीठा व्यवहार करता था लेकिन इससे उसका संगीन अपराध कम नहीं हो जाता | 30 जुलाई का दिन याकूब मैंनन की फांसी का दिन निर्धारित किया गया हैं |
लेकिन इससे पहले स्वर्गवासी वी रमन काउन्टर टेरिरिज्म डेस्क ‘( ‘रा ‘के पाकिस्तानी डेस्क )के प्रमुख थे याकूब मेनन और उनके परिवार को कराची से भारत लाने के अभियान के वही इंचार्ज थे |उनके अनुसार नेपाल पुलिस के सहयोग से याकूब को काठमांडू से गिरफ्तार कर भारत लाया गया था | याकूब ने जांच एजेंसियों से सहयोग किया उसी के द्वारा बम विस्फोट में पाकिस्तान की भूमिका भी उजागर हुई |उन्होंने 2007 में रेडिफ के लिए लेख लिखा था लेकिन उन्होंने लेख को छापने की अनुमति नही दी थी |इस लेख में उन्होंने लिखा याकूब काठमांडू में अपने रिश्तेदार से मिलने आया | वह एक वकील से समर्पण के लिए क़ानूनी सलाह लेने आया था लेकिन उस रिश्तेदार ने उसे समर्पण के लिए मना कर वापिस कराची जाने की सलाह दी वापिस जाने से पहले ही वह नेपाल पुलिस द्वारा पकड़ कर भारत को सौंप दिया गया | अपनी राय देते हुए उन्होंने कहा याकूब ने जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग किया , इस सहयोग के कारण विभिन्न हालातों पर नजर डालते हुए क्या फांसी की सजा पर अमल होना चाहिए| दोषी होने के कारण मेरे लिखने से क्या वह सजा से बच जाएगा ? यह लेख उनकी व्यक्तिगत राय थी | श्री रमन की जून 2013 में मृत्यु हो गई उनके भाई की स्वीकृति के बाद यह लेख छपा |
इस लेख से एक नई बहस शुरू हो गई देश के मुसलमानों का लीडर बनने की बहस | सबसे पहला ब्यान समाजवादी नेता अबू आजमी का आया | उन्होंने मुम्बई बम ब्लास्ट को बाबरी ढाँचे से जोड़ा बाबरी मस्जिद टूटने के खिलाफ प्रतिक्रिया (रिएक्शन )| फांसी की सजा को मजहब से जोड़ दिया गया , घुमा फिरा कर कहा उन्हें भारतीय न्याय व्यवस्था पर विश्वास है परन्तु सुप्रीम कोर्ट में जांच एजेंसियों ने जो तथ्य दिए उसी पर न्यायालय विश्वास कर न्याय करता हैं |धर्म की राजनीति का कार्ड खेलना शुरू किया |अबू आजमी क्या नहीं जानते ‘बम’ पर हिन्दू या मुस्लिम नहीं लिखा रहता हैं जो भी उसकी चपेट में आ जाता हैं उसकी मृत्यु या अपाहिज होना निश्चित है | मुम्बई में कितना विध्वंस हुआ रही बात रिएक्शन की भारत धर्मनिर्पेक्ष राष्ट्र है अपवाद को छोड़ कर किसी ने भी बाबरी ढाँचे के तोड़े जाने का समर्थन नहीं किया था | गोधरा में दंगाईयों ने बोगियों को जला कर सवारियों को ज़िंदा जला दिया जिसकी प्रतिक्रिया में गुजरात में होने वाले खूनखराबे को मानवता किसी भी तरह से न्याय संगत नहीं ठहरायेगी |
सबसे जोर शोर से उबैसी ने पैरवी की मक्का मस्जिद में ईद के मौके पर इक्कठे लोगों के सामने गरज – गरज कर याकूब की फांसी को मजहबी रंग दिया |उन्होंने कहा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर उन्हें उन्हें विश्वास है ‘लेकिन ‘बयंतसिंह के कातिल को फांसी क्यों नहीं दी गई न क्योंकि उनके साथ अकाली दल की सरकार है अत: विधान सभा में प्रस्ताव पास हो गया | यही नहीं राजिव गांधी के कातिलों को भी सजाये-मौत नहीं दी गई ,उनके पीछे तमिलनाडू की दोनों सियासी पार्टियाँ थी क्योंकि याकूब मेनन मुस्लिम हैं उसके पीछे कोई दल नहीं है उसे फांसी की सजा दी जा रहीं है | इतनी लम्बी प्रक्रिया चली उवैसी साहब का कोई स्टेटमेंट नहीं आया ,आया तब जब वह चाहते हैं | मुस्लिमों की भावनाओं को धर्म के आधार पर भड़काने की कोशिश कर अपने आप को अकेला मुस्लिम हितैषी बतला रहे हैं | क्या न्यायालयों में धर्म देख कर न्याय दिया जाता है ? हाँ उवैसी साहब याकूब मेनन के नाम पर उनके खैर ख्वाह बन गये और मुस्लिम वोट बैंक की नीति करने की कोशिश कर रहे हैं | कुछ नेताओं ने भी बिहार चुनाव को सामने रख कर गोल मटोल स्टेटमेंट दिए परन्तु आतंकवादी घटना के परिणाम स्वरूप फ़ासी का विरोध नहीं किया, भारतीय न्यायव्यवस्था का समर्थन किया |
मुस्लिम क्या चाहते हैं ? इन दोनों पैरोकारों नें नहीं पूछा मुस्लिम भी आतंकवाद के साये में जीना नहीं चाहते हैं वह विकास चाहते हैं रोजगार चाहते हैं अपने बच्चों की शिक्षा उनका सुरक्षित भविष्य चाहते हैं | चैन से जीना चाहते हैं घर का हर सदस्य सांझ होते ही सुरक्षित घर लौटें चाहते हैं |
मुम्बई बम काण्ड पहला काण्ड जरुर था आखिरी नहीं हैं इसके बाद कई धमाके हुए 26 /11 को क्या भूला जा सकता है? संसद पर भी हमला हुआ | याकूब मेनन के कुछ समय रहे वकील श्याम केशवानी ने फांसी का विरोध करते हुए कहा आज हर देश में फांसी की सजा का विरोध हो रहा है मेनन की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाना चाहिए |यह तो अपराधियों के अधिकार की बात है परन्तु जो जीना चाहते थे उनको असमय मौत के मुहं में धकेल दिया गया बच्चों से उनके अपने छिन गये कई अपाहिज और लाचार हो गये उनके अधिकारों का क्या ? कानून को भी धर्म में बांटना जैसे देश में हर धर्म के लिए अलग कानून हैं क्या उचित है ?





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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajuahuja के द्वारा
July 25, 2015

माननीया शोभा जी , कानून एक व्यवस्था है और धर्म एक विचारधारा ! व्यवस्था का पालन सभी के लिए अनिवार्य है, किन्तु विचारधारा से सहमत होना अनिवार्य नहीं ! अतः धर्म का कानून के आड़े आना कहीं से भी न्याय संगत नहीं कहा जाएगा !

rameshagarwal के द्वारा
July 25, 2015

जय श्री राम शरद यादव और सीता राम येचुरी ने भी मुस्लिम वोट बैंक के लिए फंसी का विरोध किया.बाकी सेक्युलर नेता चुप हैं यही देश है जहां आतंकवादियों पर राजनीती होती हमारी न्याय प्रतिक्रिया बदलनी चैये जिससे २ साल से ज्यादा का से न लगे.राष्ट्रपति द्वारा फंसी माफी के बाद राज्यपाल के पास कैसे अपील की जाती है और दुबारा सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई क्यों.बहुत अच्छा लेख.

sadguruji के द्वारा
July 26, 2015

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! सार्थक और विचारणीय प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ! बहुत अच्छा और विस्तृत विवरण ! सबसे ज्यादा अफ़सोस मुझे सलमान के ट्वीट पढ़कर हुआ ! ये देश का हीरो नहीं विलेन है ! काले हिरन से लेकर फुटपाथ पर सोते हुए कई लोंगो की इसने ह्त्या की और दूसरे हत्यारे की तारीफ़ कर रहा है ! ऐसे लोंगो को भी कड़ी सजा होनी चाहिए ! सादर आभार !

jlsingh के द्वारा
July 27, 2015

आदरणीया डा. शोभा जी, आपने पूरे तथ्यों के साथ लेख को तार्किक बनाया है. पर आप तो जानते हैं कि हमारे देश मे राजनीति कैसे होती है. अब कुछ जानी मानी हस्तियों ने संयुक्त हस्ताक्षर कर फांसी की सजा को उमर कैद मे बदलने की सिफारिश की जारही है. फैसला तो सुप्रीम कोर्ट का ही मान्य होना चाहिए अगर हम भारतीय न्याय ब्यवस्था और संविधान में आस्था रखते हैं तो… सादर!

Anand के द्वारा
July 27, 2015

जो भी लोग इस फँसी के विरोध में उतरें वो सभी आंतकवादी हैं क्यूंकि जब यह हमले हो रहे थे, उस समय कोई भी नहीं बोला न किसी ने कोई कमेंट किया अब सब अपनी अपनी राजनीती झाड़ रहे हैं, इन हादसों के जो लोग शिकार हुए हैं उनसे जाकर कभी मीडिया ने या उन लोगों ने पुछा के वो क्या चाहते हैं, अपने देश में कानून को हर कोई पाने हिसाब से चलना चाहता है, लेकिन यह सही है की कानून से ऊपर कोई नहीं, आज भी इतने भयंकर हादसों के बाद भी लकीर के फ़क़ीर हैं, कानून को और सख्त होना चाहिए ताकि ऐसे हादसों को अंजाम देने वालों एक सबक मिले, क्या मेमन ने यह सब करने से पहले इसके अंजाम के बारे में सोचा था, नहीं उसने किया और अब सब उसका बचाब कर रहे हैं,

कृष्ण कुमार पाण्डेय के द्वारा
July 28, 2015

प्रणाम शोभा जी, बहुत सुन्दर शब्दो के साथ आपकी प्रस्तुति अच्छी लगी

Shobha के द्वारा
July 29, 2015

श्री राजू जी आपने बड़ी सार गर्भित बात लिखी है “कानून एक व्यवस्था है और धर्म एक विचारधारा ! व्यवस्था का पालन सभी के लिए अनिवार्य है, किन्तु विचारधारा से सहमत होना अनिवार्य नहीं ! अतः धर्म का कानून के आड़े आना कहीं से भी न्याय संगत नहीं कहा जाएगा !” आपके विचारों ने सोचने फिर से विवश कर दिया बहुत अच्छे विचार

Shobha के द्वारा
July 29, 2015

श्री रमेश जी कैसा प्रजा तन्त्र हमारे देश के बुद्धिजीवी हत्यारे को फ्फंसी देने का विरोध कर रहे हें अभी पंजाब में क्या हुआ अब तो इस देश की संसद में आतंकवादी के अधिकारी की जायेगी आपने लेख पढ़ा धन्यवाद

Shobha के द्वारा
July 29, 2015

श्री कृष्ण कुमार जी लेख पढने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
July 29, 2015

श्री आनन्द जी बुद्धिजीवियों के एक आतंकवादी की फांसी के पर दिए गये विचार जान कर बहुत दुःख होता हैं पंजाब में हुए आतंकवादी हादसे के बाद भी आँखे नहीं खुलती एक बात सबके समझ में आती है वोट बैंक की राजनीति यह तो सुरक्षा में रहते हैं मरण हम जैसे आम नागरिक का है लेख पढने का बहुत धन्यवाद

Shobha के द्वारा
July 29, 2015

श्री सद्गुरु जी बड़े दुःख की बात हैं याकूब मेनन जैसा आतंक वादी जिसने बम काण्ड के लिए फाईनेंस अरंज किया उसके भर में बम बने और स्कूटर कारों में लगा कर मौत का सामान उन जगहों में पहुंचाया गया जहां से निर्दोष लोग गुजरते हैं उस पर रहम की बात की जा रही हैं |इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है

Shobha के द्वारा
July 29, 2015

श्री जवाहर जी अपने देश के बुद्धिजीवी और मानवाधिकार वादियों पर हैरानी होती है एक आतंकवादी गतिविधि में लिप्त अपराधी को दी गई फांसी की सजा का विरोध हो रहा है लेख पढने के लिए धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
August 8, 2015

नमस्ते शोभा जी ,सामयिक और तथ्य परक लेख पर बधाई मेरे कमेंट्स जाते नहीं पता नहीं ये भी मिलेगा या नहीं

Shobha के द्वारा
August 10, 2015

प्रिय निशा जी केख पढने के लिए धन्यवाद हम अच्छे लेख पढ़ के उन पर अपने विचार दे कर एक दूसरे से सम्पर्क बनाते थे अब तो जरूरी नहीं है हमारा कमेन्ट पहुंचे पूरा प्रयत्न कर लिया अब मजबूरी है


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