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प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी का राष्ट्र के नाम संदेश

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प्रधान मन्त्री नरेंद्र मोदी जी का लाल किले से देश के नाम संदेश
लाल किले से आज तक पन्द्रह अगस्त के भाषण के लिए हुंकार शब्द का प्रयोग किया जाता रहा है लेकिन मोदी जी ने अपने 86 मिनट के लम्बे भाषण में अपने काम काज का लेखा जोखा दिया |वह क्या कर चुके हैं क्या करना चाहते हैं उन्होंने किसानों , मजदूरों, असंगठित मजदूरों के दर्द समझा निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग से जुड़े परन्तु कार्पोरेट जगत की बात नहीं की | असंगठित श्रमिकों का जमा फंड सरकारी खजाने में पड़ा रह जाता है अब कोशिश की जायेगी उनका एक एक पैसा उन तक पहुंचे | आजकल आतंकवाद के साये में प्रधानमन्त्री का भाषण होता है 4०००० जवान दिल्ली की सुरक्षा के लिए चप्पे चप्पे पर तैनात थे बिना किसी व्यवधान के लाल किले पर कार्य क्रम सम्पन्न हुआ|
प्रधान मंत्री जी नें 125 करोड़ की जनता को सम्बोधित किया उनकी नजर में इंडिया एक टीम के रूप में है | टीम इंडिया में न हिन्दू थे न मुस्लिम न सिख ईसाई सब केवल भारतीय थे उन्होंने कहीं भी मजहब के आधार पर किसी को अपना वोट बैंक बनाने की कोशिश नहीं की न किसी ख़ास वर्ग के लिए लुभावनी घोषणायें की ,केवल वह चाहते हैं सरकारी बैंको द्वारा एक आदिवासी और एक दलित को लोन दिया जाए जिससे वह पहली बार अपना काम शुरू कर सकें एक बात और कहनी चाहिए थी यह दलित किसी बड़े आदमी या अधिकारी की सन्तान नहों होना चाहिए गरीब होना चाहिए | छोटी – छोटी नौकरियां जैसे चपरासी या ड्राईवर की नोकरी में आनलाइन फ़ार्म भरा जाये मेरिट से नोकरी मिले इंटरव्यू न हो क्योकि इसमें ही पैसा चलता है किसी भी गरीब या विधवा के बेटे या बेटी को पैसा लेकर नौकरी दी जाती है सबसे ज्यादा रिश्वत का चलन यहीं हैं, लोगो के मन में धारणा बन चुकी हैं बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता |
किसानों को सबसे अधिक फर्टलाइजर की जरूरत पड़ती है इसे नीम कोटेड बनाना चाहिए जिससे यह खेती के ही काम आये | ज्यादातर फैक्ट्रियां इसका उपयोग करती जिससे गरीब किसान को यह मिल नहीं पाता हैं |यह सुझाव पहले की सरकारों को भी दिए गये थे उन्होंने सलाह पर अमल करने की पहल नहीं की |
मोदी जी ने किसी भी प्रकार की साम्प्रदायिकता के ज्वार और जातिवाद का विरोध किया | यह हमारे समाज में जहर बन कर ऐसा घुसा है यहाँ तक चुनावों में जातीय समीकरण बिठाए जाते हैं |साम्प्रदायिकता देश को आगे बढने नहीं देती | 22 वर्ष बाद न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद याकूब मेनन को फांसी दी | सब जानते थे याकूब मेनन आतंकवादी था मुम्बई बम कांड में पूरी तरह लिप्त था | देश में यह पहला आतंकवाद कांड था जो पकिस्तान समर्थित था फिर भी इसे कुछ लोगों ने साम्प्रदायिकता का रंग दे कर अपनी नेता गिरी चमकने की कोशिश की |
सैनिक देश के लिए शहादत देते हैं वह सीमा और देश की सुरक्षा करते हैं | उनकी काफी समय से माँग थी वन रैंक वन पेंशन ,जिसे भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में शामिल किया था उसके लिए मोदी सरकार बचन बद्ध हैं | रिटायर सैनिक आशा करते थे शायद लाल किले से उन्हें सुखद समाचार मिलेगा क्योंकि इसे कानून के रूप में परिवर्तित करने में कुछ अडचनें हैं जिनको दूर कर पूर्व सैनिकों को उनका अधिकार मिलेगा | घोषणा न होने से पूर्व सैनिक बहुत निराश हुये |
मोदी जी ने आज के दिन अपने आप को हर राजनीति से अलग कर कहा उनकी सरकार ने कोल ब्लॉग का आबंटन इस तरह किया जिससे देश के खजाने में लाखो रुपया आया |यही नही काले धन को विदेश जाने से रोकने के लिए सख्त कानून बनाये गये विश्व की हर सरकार काले धन पर रोक लगाना चाहती है | जो पैसा जा चुका है उसे सब जानते हैं लाना आसान नहीं है जाने से रोक लिया जाये वही बहुत है |
जन धन योजना में 17 करोड़ 20 लाख लोगों के खाते खुले इससे पहले खाता खुलना आसन नहीं था गरीब कामगार और महिलाएं बैक में खाता खुलवाना चाहते थे परन्तु उसमें अनेक अडचने थी वह भविष्य के लिए अपनी बचत कहाँ रखे समस्या थी खास कर महिलाये उनके पति उनकी कमाई को भी अपने अधिकार में रखते हैं कई काम ही नहीं करते केवल शराब पीना पत्नी की कमाई पर आराम करना मेरी खुद की काम वाली इस बात से बहुत खुश थी अब उसका अपना खाता है |हालाकि आलोचक कहते है 30% खातों में कोई धन नहीं आया | जन धन योजना यदि सफल रही गरीबो को बीमा द्वारा सुरक्षा देने का वायदा किया गया ऐसा किया गया उनका जीवन सुरक्षित हो जाएगा |
प्रधान मंत्री चाहते हैं स्वरोजगार योजनाओं के अंतर्गत नोजवान रोजगार शुरू करे दूसरों को भी काम दें देश तरक्की करेगा |जल्दी ही वह दूरदराज गावों में बिजली पहुचाना चाहते हैं | 2022 तक सबके पास अपना घर हो इसकी विरोधियो ने निंदा की वह पांच वर्ष के लिए चुने गये हैं प्लान 2022 का बना रहें हैं | यदि जनसंख्या इसी रफ्तार से बढती रही सारी योजनायें फेल हो जाएँगी |प्रधानमन्त्री जी को बिहार में होने वाले चुनाव की भी चिंता थी परन्तु उन्होंने पूर्वी राज्यों के विकास की बात कही|
हैरानी की बात है उन्होंने आतंक वाद पर कुछ नहीं कहा जबकि पाकिस्तान द्वारा सीमा पर निरंतर गोला बारी चल रही है |भारी मात्रा में आतंकवादी भारत की सीमा में प्रवेश करने के लिए तैयार खड़े है गुरुदासपुर और उधमपुर में आतंकवादी घटनाएँ हुई पाकिस्तान से आया आतंकवादी ज़िंदा पकड़ा गया परन्तु आतंक वाद पर कुछ नहीं बोले | कश्मीर में आई एस आई एस का कुछ लोगों ने झंडा फहराया |उन्होंने न पाकिस्तान पर कुछ कहा न अपनी विदेश नीति पर बोले जबकि वह बहुत कुशल राजनीतिज्ञ हैं अंतर्राष्ट्रीय नीति पर भी उनकी पकड़ है उनके विदेशी दौरे बहुत सफल रहे हैं | न जाने प्रधानमन्त्री के मन में क्या है |
उन्होंने हाल में हुई नागा संधि पर कुछ नहीं कहा जिक्र भी नहीं किया यह संधि बहुत महत्व पूर्ण संधि हैं इस एरिया में शान्ति के प्रयत्नों के लिए आवश्यक है जिससे नार्थ ईस्ट में शान्ति होने की सम्भावना बढ़ गई | इसका भी कांग्रेस में विरोध हुआ आरोप लगाया इसके लिए प्रधानमन्त्री ने उस एरिया के मुख्यमंत्रियों को विश्वास में नहीं लिया | बंगला देश से वर्षों से सीमा विवाद चल रहा था यह विषय भी सुलझ गया जिससे दोनों देशों में स्वागत हुआ उसका भी जिक्र नहीं किया जबकि यह मोदी सरकार की उपलब्धि थी |
लालकिले से उन्होंने कहा उनकी पन्द्रह महीने की सरकार पर कोई भी भ्रष्टाचार का दाग नहीं हैं |जबकि पिछली दस वर्ष तक चलने वाली सरकार घोटालों की सरकार के नाम से जानी जाती |संसद का मानसून सत्र मोदी सरकार की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मुख्यमंत्री वसुंधराराजे और शिवराज पाटिल पर कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर अपनी राजनितिक जमीन खोजने के प्रयत्न में कांग्रेस ने सदन को चलने नहीं दिया अन्य दलों ने भी उनका साथ दिया |पहले पन्द्रह अगस्त के दिन हर घर में रेडियो से देश के नाम प्रधानमन्त्री का संदेश सुना जाता था धीरे-धीरे लोग कुंद हो गये काफी समय बाद जनता में प्रधानमन्त्री क्या कहते हैं सुनने की इच्छा जगी हैं ?उनका पहला भाषण बहुत जोशीला था हर दिल में आशा जगाता था अबकी बार के भाषण में किये गये कामों का हिसाब और क्या- क्या करना हैं समझाने का भाव था लेकिन उनका मुद्दा विकास ही था

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Anjana bhagi के द्वारा
August 19, 2015

मोदी जी पंद्रह अगस्त के भाषण में अपने कामों की सफाई देते रहे पाकिस्तान पर कुछ नहीं बोले

abhijat के द्वारा
August 19, 2015

आदरणीय लेख अच्छा है परन्तु हैरानी है हमारे प्रधान मंत्री जी ने सीमा पर गोले दागे जा रहे हैं लोग घरों से पलायन कर रहे हैं तब भी सहानुभूति में कुछ नहीं कहा हमारा देश इतना कमजोर नहीं हैं हम पाकिस्तान को बर्दाश्त करें |

Dr Ashok Bharadwaj के द्वारा
August 19, 2015

देश वासियों को नरेंद्र मोदी जी पर विशवास रखना चाहिए व्यवस्था एक दिन में नहीं सुधरती जबकि कांग्रेस सदन न चलने देने पर तुली है फिर भी मोदी जी काम कर रहे हैं

Shobha के द्वारा
August 19, 2015

डाक्टर साहब कब तक संसद रोकेंगे जनता धन की हानि सहन नहीं करेगी देश रुक नहीं जाएगा

Shobha के द्वारा
August 20, 2015

प्रिय अंजना जी प्रधानमन्त्री जी पन्द्रह अगस्त पर लाल किले से तो नहों हां विदेश में पश्चिम एशिया संयक्त अमीरात की धरती पर अपने ही देश वासियों के सामने जम कर बोले

Shobha के द्वारा
August 20, 2015

प्रिय अभिजात हमारा देश कमजोर नहीं है हाँ शान्ति में विशवास रखता है युद्ध आखिरी विकल्प होता है

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
August 21, 2015

प्रधान मंत्री जी ने अपने कई सराहनीय कार्यों का ज़िक्र नहीं किया जैसे नागा संधि ,आतंकबाद पर बोलने की नहीं करने की ज़रूरत है ,शायद कुछ एसा ही प्लान हो ,बहरहाल श्री नरेंद्र मोदी जी छोटे तबके के लिए सम्वेदनशील हैं यह सराहनीय गुण है ,अच्छा आलेख आदरणीय शोभा जी ,सादर .

Shobha के द्वारा
August 21, 2015

प्रिय निर्मला जी मोदी जी ने हम सबके मन में उठने वाले सवालों का जबाब संयुक्त अरब अमीरात के दौरे पर दुबई में दिए गये भाषण में जम कर दिया आतंक वाद का भी जबाब अपने परदेस में र्र्हते प्रवासी भारतियों के सामने दिया लेख पढने का बहुत धन्यवाद

Neelam के द्वारा
August 22, 2015

मोदी जी के भाषण पर लेख से मुझे बचपन की याद आई पहले पन्द्रह अगस्त के दिन हर घर में रेडियो से देश के नाम प्रधानमन्त्री का संदेश सुना जाता था धीरे-धीरे लोग कुंद हो गये काफी समय बाद जनता में प्रधानमन्त्री क्या कहते हैं सुनने की इच्छा जगी हैं ?उनका पहला भाषण बहुत जोशीला था हर दिल में आशा जगाता था अबकी बार के भाषण में किये गये कामों का हिसाब और क्या- क्या करना हैं समझाने का भाव था लेकिन उनका मुद्दा विकास ही था मेरे फादर बड़े ध्यान से भाषण सुनते थे परन्तु बाद में लोग उदासीन हो गए

Shobha के द्वारा
August 22, 2015

सब लोग बड़े उत्साह से 15 अगस्त का भाषण सुनते थे उन्हें आजादी की यादगारें ताजा थी धीरे – धीरे आशाएं टूटती गई जनता भाषण सुनने के बजाय सो कर छुट्टी का आनन्द लेना चाहते रहे हैं


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