Vichar Manthan

Mere vicharon ka sangrah

219 Posts

2960 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15986 postid : 1178401

एक थी रानी पद्मावती

Posted On: 17 May, 2016 Junction Forum,Politics,Social Issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मशहूर फिल्म निर्माता ने रानी पद्मावती पर फिल्म बनाने का एलान किया |मुझे इतिहास के पन्नों में अंकित चितौड़ की रानी पद्मावती की गाथा याद आ गयी |यह परी कथा नहीं है चितौड़ के राजा रतन सेन की रानी पद्मावती जो रूप और गुणों में अपूर्व थी जिसे पाकर राजा धन्य हो गये की गाथा है |रानी के रूप और गुणों की चर्चा दूर – दूर तक फैली हुई थी ,चर्चा दिल्ली के सुलतान अलाउद्दीन के कानों में भी पहुंची वह रानी को अपने हरम में शामिल करने के लिए उतावला हो गया| उसे चितौड के किले पर हमला करने का उचित बहाना भी समझ में आ गया वह पहले भी देवगिरी के राजा कर्ण को हरा कर उनकी बेशुमार दौलत और पत्नी कमला देवी को जीत लाया था |उसने राजा रत्न सेन को संदेश भिजवाया चितौड की रानी रूपवान और गुणी उसे उसके हवाले कर दिया जाये |संदेश पढ़ कर राजपूतों का खून खौल गया अपनी आन और सम्मान की रक्षा के लिए जीवन उत्सर्ग करने को तैयार हो गयें |सुलतान की सेना ने चितौड के आसपास मारकाट मचा दी और किले को घेर लिया लेकिन सुलतान के लिए देर तक राजधानी छोड़ना भी सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं था उसने राजा के पास संदेश भिजवाया उसने रानी के अपूर्व सौन्दर्य के चर्चे सुने हैं वह केवल रानी को देखना चाहता है |राजा ने कूटनीति से काम लिया उन्होंने संदेश का उत्तर देकर कहा चितौड़ में सुलतान का स्वागत है लेकिन रानी किसी के सामने नहीं आती है | चितौड़ के किले में सुलतान का विधिवत स्वागत किया गया अलाउद्दीन ने देखा किला में पूरा शहर ही बसा हुआ है, किला पूरी तरह सुरक्षित है | रानी उसे कहीं भी नजर नहीं आई दबाब देने पर अलाउद्दीन को तालाब के किनारे बैठी रानी का प्रतिबिम्ब शीशे में दिखाया गया अपूर्व सौन्दर्य देख कर सुलतान की आँखे फट गयी वह पद्मावती की कामना और चितौड़ के दुर्गम किले पर अधिकार की इच्छा मन में लेकर लौट गया दूसरी बार सुलतान विशाल सेना लेकर आया और किले पर घेरा डाल दिया |
धीरे- धीरे किले की रसद खत्म होने लगी बाहर भयंकर मारकाट मची थी अब कोई चारा न देख कर रानी ने सुलतान के हाथों पड़ने से उचित जौहर करने की ठानी राजपूतों ने अंतिम युद्ध की तैयारी की केसरिया पाग पहनी एक – एक राजपूत कट मरने को तैयार था |दुर्ग के मैंदान में विशाल चिता सजाई गयी रानी के लिए वहीं बंद स्थान पर चिता बनाई गयी | 16000 राजपूतानियों ने जौहर का व्रत लिया सौलह श्रृंगार से सजी राजपुतानियाँ जिनके खुले केश हवा में लहरा रहे थे कुमकुम उडाती , नारियल उछालती हुई वीरता के गीत गाती अपने निवासों से निकलीं उनके चेहरे पर मौत का भय नहीं था उनका नेतृत्व स्वयं रानी पद्मावती कर रहीं थी उनके मुख पर अपूर्व तेज था |सबसे पहले अपने लिए बनाये स्थान पर रानी चिता में कूदीं उसने साथ ही राजपुतानियाँ चिता में कूद गयीं चितायें धूं-धूं कर जलने लगीं | चिताओं की ऊँची लपटें देख कर अपना सब कुछ खो चुकी राजपूतों की सेना गढ़ का द्वार खोल कर बाहर निकलीं अब वह जीवन मरण का अंतिम युद्ध ,हर सैनिक कटने को तैयार खून की होली खेली गयी दुश्मन की विशाल सेना को काटने और कटने लगे भयंकर रक्त पात हुआ | युद्ध की समाप्ति के बाद सुलतान अलाउद्दीन ने किले में प्रवेश किया सामने सुलगती हुयी चितायें उनकी गर्म राख थी सब कुछ समाप्त था किले मे कोई नहीं था रानी ने जिस बंद स्थान की चिता में प्रवेश किया था वहाँ हड्डियाँ भी राख हो चुकी थीं | सामूहिक जौहर को देख कर सुलतान सहम गया चितौड़गढ़ अवश्य हासिल हुआ बाकी राख ही राख थी | सम्मान की रक्षा के लिए जौहर कर रानी इतिहास के पन्ने पर अमर हो गयीं आज भी गाईड चितौड के किले को दिखाते हुए रानी की गौरव गाथा गाते हुए जौहर स्थल की और इशारा करते हुए कहता है यहाँ रानी चिता में कूदी थी ऐसी थी रानी पद्मावती और राजपुतानियाँ जिनके जीवन काल में दिल्ली का सुलतान जीते जी किले में प्रवेश नहीं कर सका था | यह उस समय का महिला सशक्तिकरण था |1857 में अंग्रेजों के खिलाफ क्रान्ति में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई दोनों हाथों में तलवार ले कर लड़ी थीं उनकी बहादुरी को अंग्रेज जरनल ने प्रणाम किया था |
आज के युग में बगदादी के इस्लामिक स्टेट के जेहादियों द्वारा घेर कर पकड़ी गयी यजीदी हर उम्र की लड़कियाँ नारकीय जीवन भोगती है उनके ऊपर होने वाले जुल्मों की दास्तान समाचार पत्रों में पढ़ कर आज के सभ्य समाज की आँखों में पानी आ जाता है | बगदादी के इस्लामिक स्टेट के जेहादियों के खिलाफ खुर्द महिलाओं की ब्रिगेड तैयार की गयी हैं यह जांबाज जेहादियों को बहादुरी का असली मतलब समझा रहीं हैं जिनका मानना है औरतों के हाथों मरने से दोजख मिलता है बहिश्त नसीब नहीं होता जैसे ही इनसे लड़ने आती है यह जेहादी इनको अपनी तरफ हथियार लेकर आते देखते ही डर कर भागते हैं |
डॉ शोभा भारद्वाज

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (3 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

25 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pravin kumar के द्वारा
May 17, 2016

अति प्रेरक और महिला सशक्तिकरण का अनुपम उदाहरण किन्तु फिल्म में जौहर को ये कभी नहीं समझा पाएंगे वो केवल आग में जलना ही दिखा पाएंगे और नयी पीढ़ी के लिए यही फिल्म ही सत्य इतिहास बनजएगा

Shobha के द्वारा
May 18, 2016

श्री प्रवीन जी इसी लिए मैने यजीदी समाज का जिक्र किया है जेहादियों के हाथ में पांच वर्ष की बच्ची भी सुरक्षित नहीं है लेख पढने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
May 18, 2016

राजपुतानियाँ युद्ध कला में प्रवीण थीं वः भी अपनी सेना में अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए युद्ध कर सकती थी लेकिन 30000 राजपूतों की सेना दिल्ली के सुलतान की विशाल सेना यदि रानी या राजपुतानी सैनिकों के हाथ लग जाती उनका सम्मान सुरक्षित नहीं रहता अत :उन्होंने जौहर का निश्चय किया मरना आसान नहीं होता लेकिन सम्मान संकट में था मैने इसी लिए जेहादियों के हाथ में पड़ी यजदियों की बेटियों का जिक्र किया है

Shobha के द्वारा
May 20, 2016

धन्यवाद डॉ कुमारेन्द्र जी

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
May 20, 2016

शोभा जी रानी पदमावती पर बहुत ही सुंदर जानकारीपूर्ण आलेख के लिए धन्यावाद ।

rameshagarwal के द्वारा
May 21, 2016

जय श्री राम शोभाजी बहुत अच्छा सटीक लेख आजादी के बाद भी बच्चो को अंग्रेजो वाली इतिहास पढ़ाया जा रहा जिससे वे महापुरषो के बारे में नहीं जानते हमने एक दिन की यात्रा चितौड़गढ़ को देख उदैपुर से श्रीनाथजी जाते हल्दी घाटी देखी देख कर सर गर्व से भर जाता.आजकल के लोग उसवक्त के वीर लोगो के बारे में सोच नहीं सकते अब कुछ कार्य इस दिशा में हो रहा है आप के लेख पढने के बाद बहुत अच्छा लगता.६ बार प्रतिक्रिया भेजने की कोशिश की असफल रहा.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 21, 2016

दुर्ग के मैंदान में विशाल चिता सजाई गयी रानी के लिए वहीं बंद स्थान पर चिता बनाई गयी | 16000 राजपूतानियों ने जौहर का व्रत लिया सौलह श्रृंगार से सजी राजपुतानियाँ जिनके खुले केश हवा में लहरा रहे थे कुमकुम उडाती , नारियल उछालती हुई वीरता के गीत गाती अपने निवासों से निकलीं उनके चेहरे पर मौत का भय नहीं था उनका नेतृत्व स्वयं रानी पद्मावती कर रहीं थी उनके मुख पर अपूर्व तेज था.. बहुत सुन्दर आलेख शोभा जी बचपन से इनके शौर्य की गाथा ..किस्से कहानिया हम सुनते रहे हैं ..जिससे अपनी संस्कृति पर हमें गर्व और शरीर के खून में उबाल आ जाता है ..अच्छा लेख भ्रमर ५

harirawat के द्वारा
May 21, 2016

शोभाजी,. नमस्कार ! आपने चौदवीं सदी में तुर्कों द्वारा हिन्दुओं पर किये गए अमानविय व्यवाहार पर तथा चित्तौरगढ़ की महारानी पद्मावती के सौन्दर्य के चर्चे सुनकर चित्तौड़ गढ़ पर आकर्मण की घटना पर प्रकाश डाला ! १६००० राजपूत्नियों ने अपनी लाज और भारतीय संस्कृति को दागदार होने से बचाने के लिए जौहर की अग्नि में कूद कर इतिहास में अपने को अमर कर दिया ! साधुवाद कहता हूँ !

Shobha के द्वारा
May 21, 2016

श्री बिष्ट जी लेख पढने के लिए भुत धन्यवाद वर्षों पहले चितौड़ का किला देखा था रानी और उस समय की शहीद राजपूतानियों पर गर्व हुआ था और टुकड़े-टुकड़े में बटे देश की हालत पर दुःख

Shobha के द्वारा
May 21, 2016

श्री रमेश जी एन समस्त स्थानों की यात्रा हमने भी की थी चितौड के उस स्थान को देखा यहाँ 16000 रानियों ने जौहर किया था उस समय की बेबसी पर दुःख हुआ था देश बटा हुआ था सबको अपनी आफत से खुद लड़ना था यदि राजपुताना एक होता यह दिन नहीं देखने पड़ते |जौहर के बाजाये राजपूतानियों के हाथ में भी तलवार होती

Shobha के द्वारा
May 21, 2016

श्री शुक्ला जी मैने एस स्थान को देखा मुझे देश के दुर्भाग्य पर दुःख हुआ देश छोटे-छोटे टुकड़ों में बटा था वही हाल जब अहम आजाद हुए अंग्रेज रियासतों को हक दे गये वः हिंदुस्तान या पाकिस्तान में विलय क्र सकती हैं या स्वतंत्र रह सकती हैं लेख पढने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
May 21, 2016

श्री रावत जी लेख पढने के लिए धन्यवाद इसके साथ मैने बेबस यजीदी लडकियों के बारे में लिखा है जो इस्लामिक स्टेट की विचारधारा के लिए लड़ने वाले दरिंदों के हाथ में हैं रानी जोहर का निर्णय नहीं लेती उस समय का इतिहास क्या लिखता

jlsingh के द्वारा
May 22, 2016

आज के युग में बगदादी के इस्लामिक स्टेट के जेहादियों द्वारा घेर कर पकड़ी गयी यजीदी हर उम्र की लड़कियाँ नारकीय जीवन भोगती है उनके ऊपर होने वाले जुल्मों की दास्तान समाचार पत्रों में पढ़ कर आज के सभ्य समाज की आँखों में पानी आ जाता है | बगदादी के इस्लामिक स्टेट के जेहादियों के खिलाफ खुर्द महिलाओं की ब्रिगेड तैयार की गयी हैं यह जांबाज जेहादियों को बहादुरी का असली मतलब समझा रहीं हैं जिनका मानना है औरतों के हाथों मरने से दोजख मिलता है बहिश्त नसीब नहीं होता जैसे ही इनसे लड़ने आती है यह जेहादी इनको अपनी तरफ हथियार लेकर आते देखते ही डर कर भागते हैं आदरणीया शोभा जी, आपने रानी पद्मावती और लक्ष्मीबाई का उदहारण देकर और खुर्द महिलाओं के बारे में बताकर बहुत ही सही सन्देश देने का काम किया है. हमारी हर माताओं बहनों को अपनी इज्जत की रक्षा आप करनी होगी तभी अन्याय कम होंगे. सादर!

Shobha के द्वारा
May 23, 2016

जवाहर जी हमारे देश का दुर्भाग्य रहा है टुकड़ों में बटा था सीमाएं सुरक्षित नहीं थी उसका फायदा हमलावरों ने उठाया देश गुलाम होता गया खुर्द महिलाओं से लड़ने के लिए बगदादी ने भी एक ब्रिगेड बनाई हैं लेकिन खुर्द महिलाएं सब पर भारी हैं लेख पढने के लिए धन्यवाद

sadguruji के द्वारा
May 25, 2016

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! हार्दिक अभिनन्दन ! बहुत अच्छी रचना है ! इसे अन्य जगह पर पहले ही पढ़ लिया था, अब दुबारा मौका मिला है ! अच्छी प्रस्तुति हेतु सादर आभार !

Shobha के द्वारा
May 26, 2016

श्री सद्गुरु जी आपने पद्मावती की कहानी पढ़ी आपको पसंद आई धन्यवाद

Rajeev Varshney के द्वारा
May 28, 2016

आदरणीय शोभा जी महारानी पद्मावती का त्याग और उनकी वीरता कभी भुलाई नहीं जा सकती. सम्मान की रक्षा के लिए उनका अमर बलिदान इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए. दुर्भाग्य है की आज की पीडी को इस प्रकार की वीरता के किस्से नहीं पढाये जाते. महारानी पद्मावती की अमर गाथा भारत के हर प्रदेश के पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल होनी चाहिए. राजीव

Shobha के द्वारा
May 28, 2016

श्री राजिव जी हमारे इतिहास को सदैव दबाने की कोशिश की गयी है जो भी चितौड़ ka किला देखने जाते हैं वहाँ बलिदान का स्थल देखते है उन राजपूतानियों के पास मरने के अलावा चारा ही क्या था ?

Ashish Kumar Trivedi के द्वारा
July 14, 2016

स्त्री की वीरता और साहस का सुंदर उदहारण।

Shobha के द्वारा
July 14, 2016

पद्मावती अदभुत थीं

Asha Lillich के द्वारा
March 23, 2017

After it seems like weeks of rain, we are having a week of clear skies and temperatures increasing as the end of the week approaches into the 80s and night temperatures that started the week in the upper 30s climbing into the upper 50s. I’ve been busy potting on seedlings that I’m still growing mostly indoors (and under lights, argh) mostly because everything I started inside is a couple weeks behind where it should be. I hope to start hardening off some of the tomatoes this weekend when I’m around to monitor. We’re harvesting herbs, lettuce, chard and probably this weekend kale. Meanwhile on the seed to seed front, last year I grew a large leafed shiso plant last year from a nursery start and, though supposedly less invasive than ordinary shiso (perilla, rattlesnack weed to those of you out west), it self seeded in a number of containers and my herb bed. Which is great for us, we love it; and the shiso I’m growing from seed is probably going to be tasty but doesn’t have the desirable big leaf. And the bareroot perilla that a friend sent me last year (which we knew to be invasive and planted in a contained place) didn’t come back (selfseed). Oh, and the weed taking over any untended space in my yard turns out to be mustard garlic, which although it may be taking over the world, is the kind of green we like to eat. No more on the compost heap.

Delila के द्वारा
July 25, 2017

big chested milf

Shobha के द्वारा
July 26, 2017

धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran