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'फादर्स डे' पर पिता का बेटी को लिखा पत्र "जागरण जंगशन मंच "

Posted On: 19 Jun, 2016 पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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बोस्टन ( यूएस ) में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के नोटिस बोर्ड पर सुंदर हैंडराईटिंग में हाथ से लिखा पत्र लगा था | फादर्स डे बीते पांच दिन हो चुके थे इंटरनेट के जमाने में हाथ से लिखा पत्र उत्सुकता वश स्टूडेंट्स पत्र देखने के लिए रुके पढ़ा अपने सेल पर उतार लिया एक पापा ने भारत से अपनी बेटी को फादर्स डे के दिन बेटी द्वारा दी शुभकामनाओं के जबाब में लिखा था | विदेशी प्राध्यापक और छात्र उस लड़की को ढूंढने लगे जिसका निक नेम राजू था लड़कियों में यह नाम नहीं मिलता पापा ने बड़े प्यार से लिखा था माई डियर रानी बेटी राजू उस पर एक दो आंसुओं के निशान भी थे | पिता के सर नेम से ढूंढा ,ढूंढने पर पता चला उन्हीं के बिजनेस स्कूल में पढ़ने वाली मेघावी छात्रा थी इसलिए उसकी पूरी फ़ीस माफ़ थी | पत्र की एक कापी उसकी पढ़ने वाली टेबल के सामने लगी थी |उसे सबने चारो तरफ से घेर लिया | सब भारतीय संस्कति के बारे में जानने के उत्सुक थे वह भारतीय माता पिता और बच्चों के आपसी सम्बन्धों के बारे में जानने के उत्सुक थे| बेटी नें अपने पिता को father’s day के दिन धन्यवाद देने के लिए फोन किया था पिता ने धन्यवाद का जबाब लिख कर दिया था उसका कुछ अंश लिख रही हूँ |
हम भारतीय हैं हमारी संस्कृति में रोज अपने माता पिता और बड़ों के चरण छू कर उन्हें सम्मानित करते हैं बदले में वह आशीर्वाद देते हैं |तुम्हारी माँ ने कहा था बेटे और बेटी में कोई फर्क नहीं होता है बेटी माता पिता के पैर छू कर प्रणाम क्यों नहीं कर सकती ? जब तुम बहुत छोटी थी तुम्हारी माँ कहती थी अपने पापा के पैर छूओ तुम बैठ कर अपने नन्हे हाथों से पहले एक पैर फिर दूसरा पैर छू कर मेरी गोदी में चढ़ती थी | अपने हर जन्म दिन पर सबसे पहले मेरे पैर छूती थी मेरी आत्मा से अपनी बच्ची के लिए आशीर्वाद निकलते थे | जब भी तुम पेपर देने जाती मेरा आशीर्वाद लेना नहीं भूलती थी | कम्पीटीशन के लिये पेपर देने जाती साथ के कम्पटीटर देख कर घबरा जाती मैं तुम्हे कहता बेटो न इधर देखो न उधर मेरा हाथ पकड़ो और तुम्हें सेंटर के अंदर तुम्हारी सीट तक छोड़ आता तुम अपना पेपर पूरा कर बाहर आती फिर मेरे पैर छू कर गले लगती मैं समझ जाता मेरी बेटी अपने पेपर से संतुष्ट हैं मैने कभी नहीं पूछा बेटा पेपर कैसा हुआ ? तुम आज जिस मुकाम पर हो मेरे लिए गर्व की बात है | यही भारतीय संस्कृति है हर घर में माता पिता और बड़ों का सम्मान करना सिखाया जाता है | हमारे शास्त्रों में माँ,और पिता की तुलना देवताओ से की गई है जबकि हर कल्चर माँ को महत्व देता है पिता का केवल फर्ज माना जाता हैं हम माँ को धरती पिता को आकाश मानते हैं दोनों के संरक्षण से बच्चा बड़ा होता है माँ के रक्त से बच्चा पलता है ,स्वस्थ बच्चा जन्म ले यह यत्न करना पिता अपना कर्तव्य समझता है वचपन में गोद में उठाना फिर कंधे की सवारी कराना हर दुख सुख का ध्यान रखना अपनी पॉकेट का ध्यान न रखते हुये बच्चों का अच्छे स्कूल में एडमिशन कराना ,बच्चे के कैरियर का ध्यान रखना ,अपनी सन्तान में अपने स्वप्न पूरे करने की चाह भी रखना ,सन्तान को कैरियर की उन उचाईयों तक ले जाने की कोशिश करना जहाँ तक वह पहुँचना चाहते हैं |निस्वार्थ भाव से बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने की कोशिश करना सपने टूटने पर भी अपने प्यार में कोई कमी न आने देना | हर अच्छे बुरे में अपनी सन्तति का ध्यान रखना | पश्चिमी सभ्यता में ज्यादातर बच्चे अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश करते हैं कई बार उनकी शिक्षा बीच में ही छूट जाती है वह पहले पैसा इकट्ठा करते है फिर दुबारा अपनी पढ़ाई शुरू कर कैरियर बनाते हैं |
हमारे बच्चे भी अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं आज तो बेटियां भी अपने माता पिता का ध्यान रखना अपनी ड्यूटी समझती हैं | हमारी संस्कृति में माता पिता को मरने के बाद भी नहीं भूलते उनकी पुण्य तिथि पर उन्हें याद करना ब्राह्मणों को भोजन कराना या उनके नाम पर सद्कर्म करना | श्राद्ध के दिन शायद ही कोई हिन्दू घर होगा जो अपने माता पिता को भूलता होगा यही नहीं अमावस्या की शाम को उत्तर दिशा की एक ‘दिया’ रख कर मीठे के साथ जल की धारा डालते हुये अपने पित्तरों को विदा देते हुये उदास हो जाते हैं | हम किसी भी तीर्थ स्थान पर जाते हैं वहाँ अक्सर लोग अपने पुरखों के बारे में पूछते हैं उनसे पहले कौन आया था पंडे भी बही खाते में माता पिता और पितामह का नाम लिखते हैं|कहते हैं बंश बेटों से चलता है मैं नहीं मानता, बेटी भी माता पिता का नाम रोशन करती है वह उनके नाम को दूर तक ले जाती है| हमारा हर दिन माता पिता का आशीर्वाद है | हमारे संस्कारों में कहीं भी फादर्स डे नहीं है रानी बेटी तुम मेरा अभिमान हो |

समय न जाने कैसे बीत गया बेटी का ब्याह हुआ वह माँ बनी अपनी नन्हीं बेटी को लेकर मायके आई उसकी बेटी ने नाना पापा कह कर अपने नाना की तरफ बाहें फैला कर गले से लग गयी समय जैसे ठहर गया पिता की आँखों में आंसू आ गये |
डॉ शोभा भारद्वाज

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
June 20, 2016

डाक्टर शोभा जी, नमस्कार ! आपके पत्र ने, ‘पिता का खत पुत्री के नाम’ ने तो आँखें नाम कर दी ! मैं आजकल यहीं अमेरिका में ने न्यू यॉर्क में हूँ ! अमेरिका में बहुत सारे आई आई टी वाले इंजिनियर बच्चे सर्विस कर रहे हैं, लड़के भी हैं, लडकियां भी है, वहीं यहां के हर तकनीकी कालेजों में भी बड़ी संख्या में भारतीय बच्चे पढ़ रहे हैं ! ज्यादा तर बड़े घरों से तालुक रखने वाले बच्चे हैं जिनके मान बाप ऊंची उड़ान भरने वाले हैं उन्हें भारतीय संस्कृति परम्पराएं और आचार विचार से कुछ लेना देना नहीं है लेकिन इस पत्र को पढ़ कर मेरी विचार धरा बदल गयी ! आपको इस जानकारी शेयर करने के लिए धन्यवाद देता हूँ !

Shobha के द्वारा
June 20, 2016

श्री रावत जी आपने लेख पढ़ा पसंद आया धन्यवाद आज पाश्चात्य संस्कृति का भारत में रहने वाले जवानों पर बहुत असर है अमेरिका में तो तेजी से असर होता है आप आजकल न्यूयार्क में हैं जान कर ख़ुशी हुई | मेरी बेटी हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में पढ़ती थी मेरे पति ने बेटी को पत्र लिखा था मुझ याद था | मेरी बेटी आज जिस पोजीशन पर है अपने पिता की मेहनत का फल है मुझे उस पर गर्व है मेरा भाग्य मैं ऐसी बेटी की माँ हूँ आज वः बोस्टन कंसल्टेंसी में उच्च पद पर है योरोप में टूर करती है आज भी पिता के निर्देश पर चलती है जबकि विवाह हो गया नन्हीं बच्ची की माँ है |

Rajesh Dubey के द्वारा
June 20, 2016

वाकई आज की युवा पीढ़ी मदर डे और फादर डे तक ही सिमित हो गई है. अब नई पीढ़ी के लिए रोज-रोज पैर छूना फालतू का काम लगता है. “प्रातःकाल उठी रघुनाथा, मातु पिता गुरु नावही माथा”. आज के दिन के लिए प्रासंगिक नहीं है.

Shobha के द्वारा
June 21, 2016

श्री राजेश जी बहुत अच्छी बात लिखी है यह पंक्तियाँ रामायण में सीमित हो क्र रह गयी है अब चरण स्पर्श एक रस्म अदायगी रह गयी है लेख पढने पसंद करने के लिए धन्यवाद

Anil Bhagi के द्वारा
June 21, 2016

शोभा जी पिता का महत्व बच्चों के जीवन में बहुत महत्व है मैने इंटर किया इंजीनियरिंग में एडमिशन हुआ अचानक पिता चल बसे पिता ने मुझे मैथ पढ़ाया था जिससे मेरे पूरे नंबर आते थे आज में अपनी बच्चियों को जब भी मैथ पढ़ाता हूँ पिता का आशीर्वाद मानता हूँ पिता के बिना बड़े दुःख से हम सब भाई बहन गुजरे हैं | आपका लेख पढ़ा मेरी पुरानी यादें ताजा हो गईं

rameshagarwal के द्वारा
June 22, 2016

जय श्री राम शोभाजी बहुत भावपूर्ण लेख लिखा विदेशो में भी ज्यादातर लोग अपनी संस्कृति संस्कार और धर्म को मानते है हमारी एक लडकी अमेरिका में है उसके दोनों बच्चे बहुर संस्कारित है हमेशा जय श्री कृष्णा कहते और बहुत आदर करते.हमारी लडकी ने घर में ही एक मंदिर बना किया.फादर्स डे  ह्हर्तिया संन्स्कृत नहीं लेकिन आजकल आधुनिकता में संयुक्त परिवार ख़तम होते जा रहे आज देश में भी लड्के अपनी संस्कृत भूलते जा रहे माँ बाप के पास समाया नहीं वातावरण ख़राब शिक्षा दूषित ऐसे में संस्कार कहा आये तब भी ऐसे दिन व्यप्पर के लिए प्रचलित है बहुत भावुक लेख पढ़ कर अच्छा लगा हमारी दोनों लडकियां बहुत अच्छी बड़ा ख्याल रखती हमारा ८० व जन्मदिन मानाने अमेरिका से खास कर आई लेकिन हम अच्छे पिता नहीं बन सके.कल से प्रतिक्रिया डालने की कोशिश कर रहे नहीं जा रही थी.

Shobha के द्वारा
June 23, 2016

पिता घर काधार होता है उसके स्वर्गवास से पूरा घर हिल जाता है | लेख पढने पसंद करने के लिए बहुत धन्यवाद

Shobha के द्वारा
June 23, 2016

श्री रमेश जी मेरी बेटी हार्वर्ड में पढ़ती थी मैने उसी को लिखे उसके पापा के पत्र का जिक्र किया था आपकी बेटी अमेरिका में है जैसे संस्कार आपकी बेटी आपसे लेकर गयी है उसी से वः अपने बच्चों को संस्कारित कर आप ऐसा क्यों कहते हैं आपका प्रेम और त्याग है आपकी बच्चियों को आपके जन्मदिन पर खींच लाया मेरे पति ने तीनों बच्चों को बड़े अनुशासित ढंग से पाला बेटी तो उनकी हुबहू कापी है वः अपनी नन्हीं सी बच्ची को पूरे अनुशासन से बड़ा कर रही है | जबकि अभी ढाई बरस की है आपने लेख पढ़ा अच्छा लगा |

Anjana bhagi के द्वारा
June 29, 2016

 शोभा जी फादर अपनी बढ़ोत्तरी सेअधिक अपने बच्चों की तरक्की से खुश होते हैं सही लिखा है आपने बच्चों के लिए खुद तकलीफ सह कर भी सन्तान की हर जरूरत पूरी करना चाहते हैं अच्छा लेख मुझे मेरे पिता याद आ गये जो अब दुनिया में नहीं है 

Shobha के द्वारा
June 29, 2016

प्रिय अंजना जी दुनिया में सबसे अपने मातापिता होते हैं लेख पढने के लिए धन्यवाद

Ashish Kumar Trivedi के द्वारा
July 2, 2016

बहुत सुंदर

Shobha के द्वारा
July 3, 2016

श्री त्रिवेदी जी लेख पढने के लिए अतिशय धन्यवाद यह लडकी मेरी बेटी हैं


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