Vichar Manthan

Mere vicharon ka sangrah

237 Posts

3077 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15986 postid : 1193926

दिल्ली के मुख्य मंत्री केजरी वाल की राजनैतिक कार्य शैली " जागरण जंगशन फोरम"

  • SocialTwist Tell-a-Friend

श्री केजरीवाल विवादित बयानों के नाम से जाने जाते हैं प्रधान मंत्री को हाथ में कागज ले कर अक्सर बहस के लिये ललकारते रहते है | विवादों के सहारे मोदी जी से अपने को श्रेष्ठ सिद्ध करने की होड़ में लगे रहते हैं |कैबिनेट मंत्री अरुण जेटली और नितिन गडकरी पर खुले आम घोटालों के आरोप लगाये जिससे उनको अदालत का दरवाजा खटकाना पड़ा किसी का भी चरित्र हनन करना शायद उनकी राजनीतिक कार्य शैली है अब उन्होंने सांसद महेश गिरी और ऍनडीएमसी के उपाध्यक्ष करण सिंह तंवर पर ऍनडीएमसी के लीगल एडवाईजर श्री एम-एम खान की हत्या पर एलजी को पत्र लिख कर सीधा आरोप लगाया |एक तीर से दो शिकार दिल्ली सरकार के पास पुलिस विभाग नहीं है केजरी वाल दिल्ली पुलिस को अपने अधिकार में चाहते हैं |केजरीवाल ने बिना कानून बनाये 21 संसदीय सचिवों की नियुक्ति की थी यह असंवैधानिक था आफिस आफ प्रौफिट मामले में इनविधायकों की सदस्यता जा सकती है , विषय को भटकाने की चाल खेली है | कानून कहता है जब तक न्यायालय में किसी का अपराध सिद्ध नहीं होता आप किसी पर हत्या जैसे अपराध में सहायक होने का आरोप कैसे लगा सकते हैं ?जबकि पुलिस ने उनको संदिग्ध भी नहीं माना है | यह काम पुलिस और न्यायालय का है केजरी वाल की कार्य शैली की तरह महेश गिरी ने पहले केजरीवाल को बहस की चुनौती दी अब उन्ही के अंदाज में मुख्यमंत्री आवास के बाहर अन्नजल त्याग कर धरने पर बैठ गये केजरी वाल जी एक सांसद से बहस करें?
मीडिया को टीआरपी चाहिए वह उनकी कही बातों को हवा देता रही है मुख्यमंत्री जी प्रेस कांफ्रेंस बुला कर आरोप लगाने की कला के माहिर हैं मीडिया के प्रश्नों के उत्तर देने की जरूरत भी नहीं समझते उनके प्रवक्ता आगे उनकी बात को बढ़ाते हैं उसमें भी वह अपनी कहते है दूसरे की सुनना उनकी फितरत नहीं है |आप की सरकार बनने के बाद जून में ही उनके कानून मंत्री जितेन्द्र तोमर पर कानून की फर्जी डिग्री का आरोप लगा जिसे आम आदमी पार्टी के नेताओं ने मोदी सरकार द्वारा बदले की कार्यवाही माना लेकिन जब यूनिवर्सिटी की उनकी रिपोर्ट आई वह उनके यहाँ कभी पढ़े ही नहीं तब पार्टी के तेवर ढीले पड़े उन्हें पद से निकाल दिया | उनके मंत्री आसिफ अहमद खान पर एक बिल्डर से पैसा उगाहने का वीडियो सामने आया अबकी बार केजरी वाल जी ने तुरंत कार्यवाही की लेकिन केजरीवाल जी के सचिव राजेन्द्र कुमार के दफ्तर पर सीबीआई ने छापा मारा केजरी वाल तिलमिला उठे | सोमनाथ भारती पर भी खिड़की एक्सटेंशन निवासी अफ़्रीकी महिलाओं से नियमों को ताक पर रख कर कार्यवाही करने का मामला था केंद्र सरकार ने एसीबी( एंटी करप्शन ब्यूरो ) दिल्ली सरकार से लेकर दिल्ली पुलिस को सौंप दिया जिसके ज्वाईंट कमिश्नर एम के मीणा हैं | केजरीवाल के कार्यकाल में सत्ता ग्रहण करने के कम समय में उठे मामले भी विचारणीय हैं | एक 400 करोड़ का शीला सरकार के समय का टेंकर घोटाला जिसकी जांच उनके मंत्री कपिल मिश्रा द्वारा कर ली गयी थी लेकिन ग्यारह महीने से केस दर्ज नहीं हुआ अब शीला सरकार और केजरीवाल सरकार दोनों पर FIR दर्ज होने से केजरीवाल तिलमिला उठे उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में मोदी जी के खिलाफ जो कह सकते थे कहा, प्रेस कांफ्रेंस में अपनी बात कह कर प्रश्न पूछने का अवसर दिए बिना चले गये |केजरीवाल जी पारदर्शिता की दुहाई देते थे उनके व्यवहार से ऐसा लग रहा था जैसे वह चुनाव सभा को सम्बोधित कर मोदी जी को ललकार रहे हैं |
दिल्ली में हुये अन्ना आन्दोलन के बाद चर्चा में आये केजरीवाल चर्चा में आये |अन्ना जनलोक पाल बिल के पक्ष में मजबूत जन मत का निर्माण करना चाहते थे परन्तु राजनीति में नहीं आना चाहते थे लेकिन केजरी वाल और उनके समर्थक समकालीन परिस्थितियों का पूरा लाभ उठा कर चुनाव लड़ना चाहते थे |कांग्रेस सरकार के काल को यदि घोटालों का काल कहा जाये कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी इस लिए बकायदा आम आदमी पार्टी के नाम से दल बना कर चुनाव घोषणा पत्र जारी किया जिसमें लोक लुभावन वादे थे जैसे 20. 000 लीटर मुफ्त पानी बिजली के आधे दाम सबके दिल में उतर गये | दिल्ली की सत्तर सीटो पर प्रत्याक्षी खड़े किये गये |पूरी दिल्ली में इनका चुनाव चिन्ह झाड़ू लहराया गया भ्रष्टाचार और महंगाई के खिलाफ नारे लगे जिससे देश और विदेशों तक के नौजवान प्रभावित हुए | कई तो विदेशों में नौकरी छोड़ कर आ गये पढ़े लिखों ने इसे देश की सेवा का सुअवसर समझा उत्साही नौजवान आपकी टोपी पहन दिल्ली में घूमने लगे पैसा भी खूब आया अपने चुनाव अभियान को क्रांति कहा और स्वराज का नारा दिया | पहली बार चुनाव में उतरे थे जम कर कुतर्क और आरोप लगाये गये |आज तक की सब सरकारें बेकार और चोर हैं किसी को भी करेक्टर सर्टिफिकेट देने का अधिकार केजरी वाल जी को कब मिल गया पता ही नहीं चला |
पुनर्वास कलोनियाँ के बाशिंदों ने सोचा झुग्गी में रहते थे शीला सरकार ने जमीन दे दी केंद्र की कांग्रेस सरकार ने खाद्य सुरक्षा का अधिकार मिला आधे दाम में बिजली 20000 लीटरमुफ्त पानी केजरी वाल दे देंगे बात एक दम दिल में उतर जाती है |चाणक्य ने कहा था मुफ्त में कभी जल नहीं देना चाहिए वह अनंत नहीं है | दिल्ली से लोकलुभावन वादे कर केजरी वाल जीत’ गये |जनता सरकार से क्या चाहती है ,उसकी क्या इच्छायें हैं यह इसकी जीत थी | उनकी विधान सभा में 28 सीटें थीं |कांग्रेस के बिना शर्त समर्थन दिया नखरे के साथ सरकार भी बन गयी |
महेश गिरी उनके खिलाफ धरना दे रहे हैं धरना प्रदर्शन केजरी वाल की नीति रही है | 26 जनवरी 1950 भारत के लिए गौरव का दिन हैं ,देश का अपना संविधान लागू हुआ था | इस दिन सेनाये राजपथ पर मार्च पास करती हुई राष्ट्रपति को सलामी देती हैं |कदम से कदम मिलाती हुई सेना के कदमों की थाप से पूरा राजपथ गूंज उठता है देश की प्रगति को जनता के सामने दर्शाया जाता हैं | अमेरिकन राष्ट्रपति हमारे मेहमान बन कर आने वाले थे लेकिन 26 जनवरी से कुछ दिन पूर्व दिल्ली के CM आम आदमी पार्टीं के सर्वस्व राज पथ के पास रेल भवन पर धरना प्रदर्शन करने बैठे थे ऐसा करने के लिए उन्होंने यही समय क्यों चुना था , यह वही जानते हैं? वह जमीन पर सोये यही नहीं देश की जनता का आह्वान कर रहे थे जो भी मुझे टेलीविजन पर देख रहें हैं आ जाओ उनके कार्यकर्ता दिल्ली पुलिस द्वारा लगाई बैरिकेट तोड़ने के लिए आतुर थे |आखिर केजरी वाल जी क्या चाह रहे थे ?क्या देश की राजधानी में बैठ कर देश को इजिप्ट बनाने का दिवास्वप्न देख रहे थे ?इजिप्ट को क्या मिला केवल भुखमरी ?आप के इस नेता को 26 जनवरी पर खर्च होने वाला पैसा भी बेकार लग रहा था अजीब हैरानी की बात है |इसे उनके अनुसार गरीबों में बाँट देना चाहिए | वह अपनी ताजा –ताजा ख्याति को भुनाना चाह रहे थे|जब देखा उनका धरना बे असर हो रहा है , पढ़ा लिखा वर्ग पसंद नहीं कर रहा एलजी द्वारा भेजे पराठें खा कर उठ गये|
आजादी की दूसरी लड़ाई पर किसके खिलाफ? यह कहते थे भ्रष्टाचार के खिलाफ है | दिल्ली के लोगों ने इनका ड्रामा देखा भाईचारे और इंसानियत के गाने सुने |मौका देख कर असंवैधानिक ढंग से जनलोकपाल बिल को जनता के खुले दरबार में पेश करने की जिद पकड़ ली ड्रामें के बाद सुअवसर जान कर इस्तीफा दे कर प्रधानमन्त्री बनने चल दिये असफल रहने पर जनता से माफ़ी मांग कर फिर विधान सभा का चुनाव लड़ने आ गये| |बड़े जोर शोर से विधान सभा का चुनाव लड़ा गया जनता को ऐसा लग रहा था जैसे कोई मसीहा आ गया लोग बड़ी संख्या में घर से निकले कुछ ने आईआईटियन हैं, कुछ अबकी गर्मी में जम कर ऐसी चलाएंगे बिल तो आधा आना है कुछ मुफ्त पानी के नाम पर कुछ ने बदलाव के नाम पर वोट दिया |
केजरीवाल जी कुतर्क के माहिर हैं वे कहते थे मैं अराजकता वादी हूँ | अपनी तुलना गांधी जी से करने लगे |गांधी जी विदेशी सत्ता ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अहिंसा और सत्याग्रह के शस्त्र से लड़े थे जबकि आप सत्ता के लिए |उनको मतदाता ने 67 सीटों के साथ विधान सभा में भेजा | केजरी वाल ने मुफ्त पानी का वादा निभाया लाभ केवल जिनके यहाँ मीटर थे को मिला अधिकांश को पानी का पैसा देना पड़ता है | शीला सरकार के समय जहाँ पाईप लाईन नहीं थे टेंकर जाते थे आज भी जाते हैं | 400 यूनिट तक आधे दाम बिजली जैसे ही एक यूनिट भी बढ़ेगा बिजली महंगी हो जायेगी सर्दी में फायदा हुआ परन्तु आधे दाम में ऐसी और कूलर नहीं चल सकते | दिल्ली वालों को फर्क नजर नहीं आरहा| केजरी वाल जी को पंजाब गुजरात और गोआ में चुनाव लड़ना है पहले विवादित बयानों द्वारा अपनी पब्लिसिटी अवश्य कर रहे हैं देखते हैं उनकी नीति कितनी सफल होती है |
डॉ शोभा भारद्वाज

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

10 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhagwandassmendiratta के द्वारा
June 22, 2016

सत्ता के गलियारों में कुछ कुर्सियाँ खाली होंगी ये भाँप गये थे केजरीवाल तभी अन्ना हज़ारे नामक सीढ़ी का सहारा लेकर सत्ता के भूखों के बीच एक और सत्ता लोलुप ने अपनी जगह बनाने में देर नहीं की फ़ौरन मौके का फ़ायदा उठाया| दिल्ली की जनता ने अंगुली क्या पकड़ाई पहुंचा थामने में ज़रा भी देर न की इसने पॉलिटीशियन और भारत की जानता, दर्द की इंतेहा और इसे सहन करने के रिश्ते के सिवा कुछ और भी है क्या? | गीता में लिखा है “अपरिहार्ये अर्थे न त्वम शोचितुमर्हसि”|| २-२७ अर्थात what can’t be cured must be endured” हालाँकि आज के दिन आईना दिखाना मुसीबत मोल लेने के जैसा है पर क्या करें आप जैसे कुछ लोगों की फ़ितरत ही ऐसी है की जाती ही नहीं| धन्यवाद|

rameshagarwal के द्वारा
June 22, 2016

जय श्री राम शोभाजी बहुत सही कहा केजरीवाल भ्रष्टाचार के नाम पर और लोगो को मुफ्त बिजली पानी देने के नाम पर कुर्सी पर आ गया और आते ही प्रधानमंत्री बन्ने का सपना देखने लगा.लगता है रात में भी मोदीजी को देखकर चिल्लाने लगता है ये समझता सब बुरे वही ईमानदार और सही राष्ट्रपति तक पर तो उंगली उठा दी.इसने लोकतंत्र को आराजकता की राह पर ला दिया शर्म भी नहीं आती हर एक पर गलत आरोप लगा देता.इसने तो योग का भी बहिस्कार किया लगता है फोर्ड फाउंडेशन के इशारे पर काम कर रहा.लेख के लिए साधुवाद लेकिन केजरीवाल सुधरने वाला नहीं जबतक चुनाव न हार जाए.इसके दोस्त है नितीश,लालू ममता.कल से प्रतिक्रिया डालने की कोशिश कर रहे सफल नहीं हो रहे.

harirawat के द्वारा
June 22, 2016

शोभाजी विस्तृत लेख के लिए धन्यवाद ! आज केजरीवाल शब्द ही इतना अशुद्ध लगता है की डर लगने लगता है की “मेरे भगवान किस बेशर्म, बेहया, झूठे आदमी का नाम कणों से टकरा गया, पता नहीं आज खाना पानी नसीब भी होगा की नहीं ” ! ये अपने को होशियार और पूरी जनता को असभ्य और गंवार समझता है ! सुबह शाम मोदी मोदी कहता है, ताकि नाम के सहारे नया पार हो जाय ! अब महशगिरी के चंगुल में फंस गया है, बाहर निकलने के रास्ते बंद, जनता इसकी चाल बाजी से वाकिफ हो चुकी है, सब थू थू कर रहे हैं ! ये हटे दिल्ली का ग्रहण हटे !

Shobha के द्वारा
June 23, 2016

श्री भगवानदास जी आपको काफी समय बाद जागरण ब्लॉग में देखा अपने लेख पढ़ा आपको पसंद आया धन्यवाद गीता में लिखा है “अपरिहार्ये अर्थे न त्वम शोचितुमर्हसि”गीता ऐसी महान पुस्तक हैं जिसमे हर बात का जबाब है केजरी वाल जी को मतदाताओं ने बहुत उत्साह से वोट दिया था अब समझ में आ गया उन्हें अन्य की तरह सत्ता का लालच है |

Shobha के द्वारा
June 23, 2016

श्री रमेंश जी बहुत अच्छा लिखा है किसी को कुछ भी कह देना आरोपित कर देना उनकी कार्य शैली में आता है हाँ कम सोच बालों की समझ में आ जाता है केजरी वाल किसी से नहीं डरते यह तो प्रजातंत्र है प्रधान मंत्री की छवि खराब क्र सकते हैं परन्तु यह राजनीति अधिक समय तक नहीं चलती लेख पढ्न के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
June 23, 2016

श्री रावत जी अपने आप को मोदी जी के समकक्ष सिद्ध करने की कोशिश कर रहा है कभी काम नहीं किया अब भी केवल मेनेजमेंट और अपना विज्ञापन ही कर रहे हैं देखते हैं पंजाब में क्या करते हैं जोश तो सबमें बहुत ज्यादा है हमारे यहाँ एक वर्ग ऐसा है जिसे देश समझ नहीं आता बीएस चुनाव में क्या वादे दिए जायेंगे क्या मिलेगा लेख पढने के लिए धन्यवाद

Anil Bhagi के द्वारा
June 26, 2016

शोभा जी केजरीवाल की रोज की नौटंकी से तंग आगये हैं जब भी समाचार सुनना चाहो केजरी वाल पुराण सुनों काम करने वालों के पास इतना समय कहाँ हैं वह अपना बखान करते रहें|अब तो सीरियल देखने में रूचि बढ़ गई है

Shobha के द्वारा
June 27, 2016

अनिल जी सही लिखा है आपने अच्छा है लोगों का मोह चैनलों से भंग हो रहा है अब वः अखबार पढ़ेंगे अच्छे सम्पादकीय और आर्टिकल पढने को मिलेंगे

Anjana bhagi के द्वारा
July 3, 2016

मैं जब केजरी वाल राजनीती मैं आएं मै उनकी फैन थी उनके पक्ष मैं बहस करती थी अब उनका भेद खुल गया वह दूसरों की तरह नेता ही निकले

Shobha के द्वारा
July 3, 2016

अंजना जी अधिकतर लोग उनको समझ गये हैं लेख पढने के लिए धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran