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साउथ अफ्रीका 'महात्मा गाँधी से प्रधान मंत्री नरेद्र मोदी तक का सफर'

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हीरे और सोने की खानों के लिए मशहूर प्रदेश साऊथ अफ्रीका की धरती पर डच और ब्रिटिशर अधिकार जमा कर अपने प्रभाव क्षेत्रों के विस्तार करने के लिए ललायित रहते थे यहाँ का एंग्लो-बोअर संघर्ष जिसमें दोनों तरफ अश्वेतों का खून बहा था लेकिन डच और ब्रिटिशर के बीच समझोता होने से अश्वेतों की हालत नही सुधरी यह क्षेत्र रंगभेद की नीति के नाम से भी जाना जाता है गोरों से सत्ता लेने अपने अधिकार समझने के लिए लगातार संघर्षों की लम्बी दास्तान है आखिर में 1994 के चुनाव हुये अश्वेतों की सरकार बनी नेल्सन मंडेला देश के राष्ट्रपति चुने गये लेकिन बर्षों के रंगभेद सहने की टीस आज भी निवासियों के दिलों से खत्म नहीं हुई |दक्षिण अफ्रिका विविधताओं वाला देश है यहाँ अन्य अफ्रीकन देशों से अधिक गोरे रहते हैं एशियाई देशों के प्रवासियों में भारतीयों की संख्या अधिक है | 21 वर्ष यहाँ के इतिहास के पन्नों में गाँधी जी के नाम दर्ज है, उनकी पहली कर्मभूमि दक्षिणी अफ्रीका बनी थी | सौभाग्य से एक भारतीय व्यापारी, अब्दुल्ला सेठ के वित्तीय विवाद सुलझाने के लिए एक वर्ष के अनुबंध पर गाँधी जी को नियुक्त किया|, यहाँ आते ही वह भारतीओं और अश्वेतों के साथ होने वाले व्यवहार को समझ गये भारतीयों को कुली कह कर पुकारा जाता था ,वह दुर्व्यवहार के आदि हो चुके थे |
भारत से आये हिन्दु, मुसलमान, पारसी, ईसाई, गुजराती, पंजाबी, सिन्धी आदि समुदायों के लोगों में आपस में वैमनस्य था गाँधी जी ने स्थिति को समझ कर सभी भारतीयों की सभा बुलाई और आपस के मतभेद भुला कर मिल कर रहने का सन्देश दिया|वह अब्दुल्ला सेठ का समझौता तैयब जी से करा चुके थे अब वह भारत लौटने के लिए प्रिटोरिया से डरबन आये अचानक उन्होंने एक अखबार में ‘इंडियन फ्रेंचाईज’ शीर्षक से छपी एक खबर पढ़ी जिसके अनुसार भारतीयों का नेटाल कौंसलिंग में सदस्य चुनने के अधिकार को वापस लेने के लिए असेम्बली में बहस चल रही थी| इससे भारतीयों की स्थिति कमजोर पड़ जाती गांधी जी भारतीय समाज के हर प्रवासी को एकत्रित किया खाली नेटाल में दस हजार हस्ताक्षर के साथ आवेदन पत्र तैयार किया उसकी अनेक प्रतियाँ बना कर अधिकारियों, प्रशासन के मंत्रियों और अखबारों के दफ्तरों में भिजवाईं. अखबारों ने इसे महत्वपूर्ण समाचार समझा जीविका चलाने के लिए कुछ काम करना था |उन्होंने नेटाल के सर्वोच्च न्यायालय में वकालत करने की इजाजत मांगी| विरोध के बाद भी उन्हें इजाजत मिल गयी |उन्होंने भारत की भूमि और दक्षिण अफ्रिका में न्याय व्यवस्था को देख कर समझ लिया था गोरों के विरुद्ध भारतियों को न्याय नहीं मिलता भारतीय की हत्या पर अंग्रेज को मृत्यु दंड नहीं दिया जाता | एक बार एक निर्दोष नीग्रो को अंग्रेज ने पीटा अपराध भी सिद्ध हो गया परन्तु मामूली सजा देकर बात आई गई कर दी गई यह कहाँ का इंसाफ था ?
गाँधी जी ने 22 मई 1894 में नेटाल इंडियन कांग्रेस की स्थापना की साथ ही इंडियन ओपिनियन साप्ताहिक पत्रिका का प्रकाशन भी किया | इंडियन कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य, अफ्रीका में जन्मे और शिक्षा पाए भारतीयों की सेवा करना और उनकी दशा सुधारना था साथ ही फीनिक्स आश्रम की स्थापना की अफ्रीका में भारतीय मजदूरों को 5 साल के एग्रीमेंट पर बुलाया जाता था | उनको अफ्रीका में गिर्मिटिया कहा जाता था| अधिकतर गिर्मिटिया भारतीय, एग्रीमेंट पूरा होने पर वहां रुक कर खेती या व्यवसाय करना चाहते थे. वह अंग्रेजों के लिये चुनौती बनने लगे थे अतः वहां की सरकार ने इस प्रकार रुकने वाले हर भारतीय पर 25 पौंड (375 रूपए) वार्षिक कर लगाना तय किया. गाँधी जी द्वारा स्थापित नेटाल कांग्रेस के जबरदस्त विरोध करने पर यह कर 3 पौंड वार्षिक कर दिया गया | गाँधी जी ने इस 3 पौंड के कर का भी घोर विरोध किया| अफ्रीका में उनकी लडाई लम्बी चलने वाली है. अतः उन्होंने भारत से अपने परिवार को अफ्रीका ले आने का निर्णय लिया| इस प्रकार गाँधी जी वर्ष 1896 के मध्य में भारत के लिये रवाना हुए |अंग्रजों के विरोध में चल रहे आन्दोलन पर पुस्तक छपवाई इससे भारतीयों की दशा को भारत और इंग्लैंड तक पहुंचाया |
1899 में बोअर युद्ध की शुरुआत हो गई गाँधी जी पूरी सहानुभूति बोअरों के साथ थी | सेवा के कार्य में मदद के दौरान गाँधी जी को गिरमिटियों से मिलने का अवसर मिला उनके दुःख दर्द को जाना जिनमें हिदू मुस्लिम ईसाई मद्रासी गुजरती सिन्धी सभी भारतीय थे | 1901 तक युद्ध शांत हो गया | 1906 में जुलू विद्रोह (एंग्लो जुलू संग्राम )यह ब्रिटिश साम्राज्य और जुलू किंगडम के बीच लड़ा जाने वाला युद्ध था जुलू सीधे सादे माने जाते थे इनकी झोपड़ियाँ पहाड़ों की घाटियों में थीं | जुलू में नये कानून के विरोध में दो अंग्रेज अधिकारियों को मार डाला बदले में अंग्रेजों ने जुलुओ के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया यह युद्ध बोअर युद्ध से भी अधिक भयानक था ऐसा लगता था मानो आदमियों का शिकार हो रहा है बन्दूकों की आवाज निरंतर आती रहती थी | लेकिन गाँधी जी उनकी स्वयं सेवकों की सेना ने अपना कार्य बड़ी तत्परता से किया |
1901 में ‘भारतीयों के नेटाल कौंसलिंग में सदस्य चुनने के अधिकार’ की लड़ाई जीतने के बाद उन्होंने भारत लौटने का निश्चय किया. प्रवासी भारतीयों को लगा कि अब वह नेता विहीन हो जाएँगे इस पर उन्होंने आश्वासन दिया जब भी उन्हें उनकी जरूरत महसूस होगी वह उनके पास दक्षिण अफ्रीका लौट आयेंगे |
यहीं पर उन्हें एक तार द्वारा फिर से दक्षिण अफ्रीका से बुलावा आ गया | वहाँ प्रवासी भारतीयों की परेशानी का अंत नहीं था वापिस लौटने पर उन पर गोरों ने जन लेवा हमला कर दिया| वह बच गये |यहाँ उन्होंने 21 वर्ष तक संघर्ष किया प्रवासियों के जीवन स्तर में बहुत से सुधार किये| अपने समय के महान दार्शनिक टालस्टाय से भी सम्बन्ध स्थापित किया गाँधी जी रुसी उपन्यासकार के बहुत बड़े प्रशंसक थे वह अपने आप को उनका एक छात्र मानते थे जोहन्सबर्ग में उन्होंने टालस्टाय फार्म नाम से सहकारी कालोनी की स्थापना की यह आश्रम 1100 एकड़ जमीन पर बना है |
1907 का ‘ब्लैक एक्ट’ भारतीयों तथा अन्य एशियाई लोगों के ज़बरदस्ती पंजीकरण के विरूद्ध सत्याग्रह। दक्षिणी अफ्रीका में अपने निवास की अवधि के बीच उन्होंने अनेक कानूनों का विरोध किया | एक कानून द्वारा व्यस्क भारतियों को चालीस रूपये वार्षिक कर के रूप में अदा करने पड़ते थे | |ब्लैक एक्ट द्वारा प्रत्येक भारतीय को हमेशा अपने पास अपनी दसों उँगलियों के निशान वाला एक प्रमाण पत्र रखना पड़ता था इस अन्याय का अहिंसात्मक प्रतिरोध किया | गाँधी जी पांच हजार निहत्थे अनुशासित सत्याग्रहियों की शन्ति पूर्वक मार्च करती टोली के साथ वह पैदल चलते थे खुले आकाश के नीचे सोते थे भोजन पकाने और परोसने में हाथ बटाते पानी जैसी दाल अधपका भात खाते ,उनका अदभुत मनोबल कभी कमजोर नहीं पड़ा| उनकी मदद के लिए स्वयम रवीन्द्रनाथ टैगोर ने झोली फैला क्र भिक्षा मांगी | इन पांच हजार की अहिंसक सत्याग्रहियों सेना में ढाई हजार को सरकार ने जनवरी 1908 में कठोर श्रम के साथ सजा दी इनमें कई सत्याग्रही मर गये कई बर्बाद हो गये लेकिन अनिवार्य पंजीकरण कानून रद्द कर दिया गया |सत्याग्रह की गूंज लन्दन और भारत तक सुनाई दी|1909: जून –को भारतीयों का पक्ष रखने वह इंग्लैण्ड रवाना हुये नवम्बर में दक्षिण अफ्रीका वापसी के समय जहाज़ में ‘हिन्द-स्वराज’ लिखा | सत्याग्रह की मशाल जला कर उन्होंने भारत लौटने का निश्चय किया उनकी जन्म भूमि को उनकी जरूरत थी |
अब अगली कमान स्वतन्त्रता संग्राम के महानायक नेल्सन मंडेला जिन्हें दक्षिण अफ्रिका का गाँधी माना जाता है ने सम्भाली |वह गांधी जी के विचारों और सत्याग्रह के तौर तरीके से बहुत प्रभावित थे उन्होंने आन्दोलन को जन आन्दोलन बनाया | उनका संदेश था डर पर विजय पाना सबसे बड़ी बात है | बहादुर व्यक्ति वह नहीं है जो डरता नहीं है, वह है जो डर को भी जीत ले| स्वतन्त्रता का मतलब गुलामी की जंजीरों को उतार फेकना नहीं है सही अर्थ दूसरों की स्वतन्त्रता की भी रक्षा करना है | शिक्षा को वह सबसे शक्ति शाली हथियार मानते थे जिससे आप दुनिया को बदल सकते हैं
गाँधी जी की कर्मभूमि और मंडेला की जन्म और कर्म भूमि पर प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने यात्रा की यहाँ मोदी मोदी का नारा गूंजा भारतीय प्रवासियों और सरकार ने उनका स्वागत किया यहाँ 15 लाख भारतीय जिसमें सबसे अधिक डरबन में रहते हैं |दोनों देशों ने चार समझौतों पर हस्ताक्षर किये यह समझौते टूरिज्म ,कल्चर, कोआपरेशन और ग्रास रूट इनोवेशन से जुड़े हैं भारत का निर्यात बढ़ रहा है अनेक भारतीय कम्पनियां यहाँ काम करती हैं | मोदी जी ने बताया विश्व के देशों में मंदी है परन्तु हमारी ग्रोथ रेट बढ़ी है 7.6 फीसदी है भारत के विकास को उन्होंने HOPE कहा समरसता , आशावाद , क्षमता, और ऊर्जा | उन स्थलों की यात्रा की जो गाँधी जी से जुड़े हैं | 15 किलोमीटर की ट्रेन यात्रा कर उस स्टेशन पर उतरे यहाँ ऐतिहासिक दिन 7 जून 1893 बापू के पास प्रथम श्रेणी का टिकट होते हुए भी सामान सहित ट्रेन से उतार दिया था यहाँ वह गाँधी से महात्मा बन गये |वह फिनिक्स आश्रम भी गये | डॉ मनमोहन सिंह भी 2006 में यहाँ आये थे | मोदी जी ने साउथ अफ्रिका की सरकार को एनएसजी में सपोर्ट करने के लिए भी धन्यवाद दिया |
डॉ शोभा भारदवाज

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
July 10, 2016

जय श्री राम शोभा जीआपने तो साउथ अफ्रीका में गांधी जी से सम्बंधित पूरा इतिहास बता दिया पढ़ कर बहुत अच्छा लगा पुरानी जानकारी याद आ गयी.साउथ अफ्रीका ने ही मोहन दास को महात्मा गांधी बना दिया जो देश की स्वंतंत्रता के लिए बहुत उपयोगी हुआ.मोदीजी के ऐतिहासिक रेल यात्रा ने पुराने जख्मो को जिन्दा कर दिया परन्तु बड़ा अच्छा लगा.मोदीजी जहाँ जाते भारतियो का दिल जीत लेते और मोदी मोदी की आवाज़ भारतीय समुदाय से सुनने को मिलती.इस सुन्दर लेख के लिए आभार.

harendra के द्वारा
July 12, 2016

शोभाजी नमस्कार ! आपके लेखों में हमेशा नया विषय, नया विचार, नए देश और सबसे बड़ी बात नवीनता झलकती है ! प्रस्तुत लेख ‘गांधी जी से मोदीजी तक’ का दक्षिण अफ्रीका बहुत ही विस्तृत नयी जानकारियों से लबालब है ! मैंने गांधी जी की जीवन कथा में पढ़ा था की किस तरह से उन्होंने बिगड़े और क्रूर ब्रिटिशर्स से अहिंसात्मक ढंग से साउथ अफ्रीका में अपना आंदोलन चलाया ! नई नई जानकारियां प्रसाद रूप में बितरण करने के लिए आप धन्यवाद के पात्र हैं ! हरेंद्र जागते रहो !

Shobha के द्वारा
July 13, 2016

श्री रमेश जी आपने लेख पढ़ा पसंद आया धन्यवाद साउथ अफ्रिका आजाद हो गया परन्तु उनके दिल में गोरों के प्रति नफरत है गांधी जी ने हमें नफरत से दूर रखा यह भारत भूमि की विशेषता है हमने माउंटबेटन को गवर्नर जर्नल बनाया सम्मान पूर्वक देश से विदा किया

Shobha के द्वारा
July 13, 2016

श्री रावत जी आपका धन्यवाद करती हूँ आपने मेरा लेख ढूंड निकाल जागरण क्या कहूँ मोदी जी की साउथ अफ्रिका यात्रा पर सामयिक लेख लिखा था लेखों को भी समय बीत जाने पर कुछ समय के लिए हाई लाईट करते हैं मोदी जी अफ्रीका की यात्रा कर वापस लौट भी आये ख़ैरआपने लेख को पसंद किया गांधी जी ने सत्याग्रह द्वारा प्रवासी भारतियों में चेतना जगाई उसी शस्त्र का भारत में प्रयोग किया भारत आजाद हुआ जब तक आप लोग पढ़ते रहेंगे लिखती रहूंगी नये लेखक आ रहे हैं उनको उत्साहित करती रहूंगी

achyutamkeshvam के द्वारा
July 13, 2016

शोभाजी नमस्कार ! दक्षिण अफ्रीका का भारतीय सम्बन्धों के लिहाज से एतिहासिक सम्बन्धों ज्ञान और आधुनिक परिवेश में उसका महत्व …गाँधी से मोदी तक की यात्रा ……सम्पूर्ण वृतांत आपके सूक्ष्म विवेचन शक्ति और लेखकीय मेधा को दर्शा रहा है . बधाई

Anil Bhagi के द्वारा
July 14, 2016

 गांधी जी का साउथ अफ्रिका में बसे भारतीय प्रवासियों के लिए किया गया सत्याग्रह दक्षिण अफ्रिका के इतिहास के पन्नों में अमर है धीरे-धीरे गाँधी जी के बताये रास्ते पर चल क्र दक्षिण अफ्रिका में राजनितिक चेतना जगी अच्छा लेख

Shobha के द्वारा
July 14, 2016

लेख पढने और पसंद करने के लिए अतिशय धन्यवाद

Shobha के द्वारा
July 14, 2016

अनिल जी लेख पढने और पसंद करने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
July 15, 2016

डॉ कुमारेन्द्र जी धन्यवाद

meenakshi के द्वारा
August 20, 2016

शोभा जी , आपने बहुत विस्तृत और बेहतरीन चर्चा की अपने उपरोक्त पोस्ट पर , बधाई !

Shobha के द्वारा
August 21, 2016

प्रिय मीनाक्षी जी बहुत बहुत धन्यावाद लेख पढने और पसंद करने के लिए गाँधी जी को ऐसे ही महान नहीं कहते


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