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दिल्ली के मुख्य मंत्री श्री अरविन्द केजरी वाल जल्दी मे 'जागरण जंगशन फ़ोरम '

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kejrivaal modi

केजरीवाल ने दिल्ली के चुनाव में शीला दीक्षित की पन्द्रह वर्ष की सरकार को उखाड़ दिया था लेकिन अपने बल पर सरकार बनाने का बहुमत नहीं मिला था .कांग्रेस के साथ मिल कर सरकार बनाई लेकिन 49 दिन के बाद इस्तीफा दे दिया और बनारस में मोदी जी के खिलाफ चुनाव लड़ने चले गये वह सोच रहे थे यदि उन्होंने भाजपा के प्रधान मंत्री पद के उम्मीदवार को हरा दिया उनका कद सबसे ऊंचा हो जाएगा परन्तु ऐसा हो न सका वह हार गये .दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लग गया था अब केजरी वाल को लगा उन्होंने दिल्ली में अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर कहीं गलती तो नहीं की उनकी रोज केन्द्रीय सरकार से ख़ास कर मोदी जी से शिकायत थी चुनाव क्यों नहीं हो रहे मोदी जी आप पार्टी की लोकप्रियता देख कर डर रहे हैं . कांग्रेस के माथे पर भ्रष्टाचार का दाग था , इनकी एकमात्र प्रतिद्वंदी पार्टी भाजपा थी. भाजपा की दिल्ली इकाई में आपस में बहुत फूट थी ऊपर से किरन बेदी जी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना कर केजरीवाल के मुकाबले चुनाव मैदान में उतारा गया रास नहीं आया लोकल कार्यकर्ताओं नें सहयोग नहीं दिया जबकि केन्द्रीय नेतृत्व ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी .

केजरी वाल जी के अनेक वादे थे जिनमें बिजली पानी का वादा सबसे आकर्षक था. वादों ने दिल्ली की कहानी ही बदल गयी जोशीले प्रचार, वादे ,खास कर मुफ्त पानी आधे दाम पर बिजली ,दिल्ली के पास बहुत पैसा है बस सरकार की नीयत ठीक नहीं है ,उनका आईआईटियन होना और ईमानदारी का दम भरना जनता को रास आया . चुनाव में ,दिल्ली का मतदाता जिन्होंने कभी मतदान क्षेत्र का मुंह भी नहीं देखा था वह वर्ग भी मतदान क्षेत्र पूछते पूछते वोट देने आ रहे थे. केजरी वाल जी को विधान सभा में 70 में से 67 विधायक दिये .केजरीवाल ,उनके दल की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था जनता अपना काम कर चुकी थी अब केजरीवाल जी की बारी थी .बिजली पानी का वादा तुरंत पूरा किया लेकिन लिमिट के साथ हर माह 20000 लीटर पानी ज्यादा होने पर पूरे पानी का पैसा देना पड़ेगा .अधिकांश लोगो के यहाँ मीटर नहीं थे न ही आगे लगने की आशा है वाकी जहाँ पानी की पाईप लाइन नहीं बिछी हैं वहाँ पहले की तरह टेंकर जाते हैं जिन लोगों में जरा भी सामर्थ थी उन्होंने ऐसी  खरीदे अब वह गर्मी में भुनना नहीं चाहते थे लेकिन बिजली में 400 यूनिट की शर्त है उससे एक यूनिट भी आधिक हो जाने पर पूरा और अधिक बिल भरना पड़ता है.  ख़ैर सर्दी के दिनों में बिल कम आया .अब केजरी वाल जी अपना कद बढाना चाहते थे वह अपने आप को मोदी जी से कमतर नहीं समझते है . संविधान क्या कहता है वह जानना और समझना नहीं चाहते .विधान सभा में बिना एलजी नजीब जंग की स्वीकृति से विधेयक पास करना ,नियुक्तियां करना .शिकायत यह है की कोई उन्हें काम नहीं करने देता नजीब जंग LG उनको मोदी जी के कहने पर परेशान करते हैं बिना नियमों का पालन किये कानून बनाते हैं उनके अनुसार उन्हें जनता ने हक दिया . राष्ट्रपति महोदय की अस्वीकृति की आशंका पर ही शोर मचाना  राष्ट्रपति महोदय स्वीकृति नहीं देते उनके विधायकों पर केस चलाए जाते हैं जिनमें एक विधायक नकली डिग्री के चक्कर में जेल में हैं सोमनाथ भारती पर उनकी पत्नी ने केस चलाया है .उन्होंने 21 विधायको को नियमों को ताक पर रख कर संसदीय सचिव नियुक्त किया भूल का अहसास होने के बाद विधान सभा में कानून पास किया आज उनकी सदस्यता खतरे में है . मुख्यमंत्री जी का तर्क है बिना कोई लाभ का पद लिए उनके विधायक दिल्ली की सेवा कर रहे हैं . एक विधायक पर इनकम टैक्स की रेड पड़ी लेकिन जिसको भी केजरीवाल जी ने ईमानदारी का सर्टिफिकेट दे दिया वह ईमान दार हो गया उनके अधिकारी राजेन्द्र गुप्ता पर संकट आया केजरीवाल आपे से बाहर हो गये .उनके एक विधायक पर पंजाब में पवित्र कुरआन को लेकर दंगा भड़काने की कोशिश का आरोप है . पंजाब के लिए घोषित चुनाव घोषणा पत्र की तुलना आशीष खेतान ने पवित्र धार्मिक ग्रन्थों से की उनमें गुरुग्रन्थ साहब भी हैं .सब जानते हैं चुनाव घोषणा पत्र वादों का पिटारा होता है जिनको जीतने के बाद अमल में लाया जा सकेगा. केजरीवाल गोल्डन टेम्पल में बर्तन धो कर अपना प्रचार करने पहुँच गये .

केजरी वाल टेलीविजन चैनलों पर अपनी बात रखने के शौकीन हैं चैनलों पर छा कर  अपना प्रशस्ति पत्र पढ़ना और आरती उतरवाना चाहते हैं अपना विरोध उन्हें पसंद नहीं है उन्होंने अपने पुरानी साथ प्रशांत भूषण और योगेन्द्र यादव को बर्दाश्त नहीं किया था .अब प्रेस कांफ्रेंस बुलाते हैं अपनी बात कहते हैं उसमें भी फ़िल्मी डायलोग बोलते हैं मोदी जी हमें काम करने दीजिये –बिना प्रेस का जबाब दिए चले जाते हैं .अबकी बार उन्होंने अपना वीडियो बना कर यू ट्यूब पर डाला जिसमें अपनी बात कह रहे है थे खुद से सवाल और जबाब भी स्वयं दे रहे थे मोदी जी पर बड़े –बड़े इल्जाम लगा रहे थे .अपने विधायकों की गिरफ्तारी पर उन्होंने प्रधान मंत्री पर तीखे वार किये हमारे 11 विधायक गिरफ्तार कर उनकी पार्टी के खिलाफ तमाम हथकंडे अपनाए जा रहे हैं इस समय पंजाब गुजरात और गोआ में चुनाव हैं उनका यहाँ प्रभाव बढ़ रहा जिससे घबरा कर उनके और कार्यकर्ताओं को भी जेल भेजा जा सकता है .कार्यकर्ता जेल जाने और मरने के लिए कमर कस लें . उन्होंने राज बताने के अंदाज में कहा मोदी जी उनको मरवा भी सकते हैं .भारत के प्रजातंत्र के इतिहास में पहली बार नाम लेकर ऐसा इल्जाम लगाया गया है .केवल केजरीवाल में ही मोदी जी के खिलाफ आवाज उठाने कि हिम्मत है . मोदी जी ‘आपकी सरकार’ की तरह अपने चुनावी वादे पूरे करने में समर्थ नहीं हैं इसलिए तनाव ग्रस्त हैं. उन्होंने मोदी जी की पड़ोसी देशों के साथ नीति पर भी सवाल उठाये यदि मोदी जी जल्दबाजी में इसी तरह फैसले लेते रहे तो देश सुरक्षित नहीं रह सकेगा . आप दल के एक सांसद भगवंत मान ने संसद का वीडियो बनाया जिसमें संसद के सुरक्षा तन्त्र की तस्वीर और प्रश्नोत्तर काल में संसद की कार्यवाही कैसे होती है नेट में डाल दिया इसकी सभी सांसदों ने निंदा की पहले उन्होंने बिना शर्त माफ़ी मांगी लेकिन बाद में आप की शह पर उलटा भगवंत मान ने पठानकोट को लेकर मोदी जी पर ही प्रश्न उठा दिया .केजरीवाल जी के अभी नये विधायक जल मंत्री भी देश के प्रधानमन्त्री का मजाक उड़ाते हैं आप के विधायक आज भी चुनाव मूड में ही हैं .

केजरी वाल जी का टॉक टू ऐ.के. दो घंटे का शो में मोदी जी पर वार ही वार थे .उनके विज्ञापन भारत के दूसरे राज्यों में दिल्ली की तरक्की का बढ़ा चढ़ा कर ब्योरा देते हैं . सभी मुख्य मंत्री अपने प्रदेशों में काम करते है लेकिन इनका विश्वास है हम विज्ञापन द्वारा बतायेंगे वह दिल्ली की कितनी तरक्की कर रहे हैं.केजरी वाल की नजर देश की सत्ता पर है यदि कभी मोदी जी के खिलाफ गठबंधन हो उन्हें उसका मुखिया समझा जाये. जिस सत्ता को मोदी जी ने गुजरात में तीन बार चुनाव जीत कर काम से नाम कमा कर पाया था. यह मोदी जी पर आये दिन कटाक्ष कर अपने आपको मोदी जी से श्रेष्ठ देश में एकमात्र विकल्प सिद्ध कर पाना चाहते हैं. दिल्ली की सत्ता इनकी सीढ़ी है इरादे बहुत ऊँचे हैं इसी लिए केजरीवाल जल्दी में हैं .जर्मनी में हिटलर का सूचना प्रसारण मंत्री गोयबल कहता था एक ही बात को बार-बार बोलो सच बन जाता है उस समय का मीडिया सरकारी रेडियो था . आज कई मीडिया हॉउस हैं सभी सशक्त है दूध का दूध पानी का पानी कर देते हैं जनता भी अधिक समय तक मूर्ख नहीं बनाई जा सकती.

डॉ शोभा भारद्वाज

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अभिजात के द्वारा
August 2, 2016

दिल्ली के मुख्य मंत्री द्वारा मोदी जी पर हर वक्त मौका मिलते हैं ब्लेम लगाना कभी अच्छा नही लगता वह देश के प्रधान मंत्री हैं दुनिया में उन्होंने देश का सम्मान बढाया है

Shobha के द्वारा
August 3, 2016

प्रिय अभिजात जी उनका राजनीति अपनी राजनीती चमकाने का यही तरीका है . लेख पढने के लिए धन्यवाद

drashok के द्वारा
August 4, 2016

दिल्ली के मुख्य मंत्री दिल्ली से सन्तुष्ट नहों है उन्हें और भी प्रदेशों में पंजाब गोआ गुजरात में आप पार्टी की बहुमत की सरकार बनाने की इच्छा है अत उन्हें सन्तोष नहीं मिलता केजरी वाल जी की जल्दबाजी को दर्शाता लेख

harirawat के द्वारा
August 4, 2016

जो इंसान खुले आम संविधान का उल्लंघन करता हुआ, देश के राष्ट्रपति को भी नहीं छोड़ता है, लेकिन बकरे की मेंआखिर कब तक खैर मनाएगी ! हो सकता है विपक्ष वाले केजरीवाल की बात रखने के लिए संविधान में ही कोइ फेर बदल की वकालात करदें ! भगवान् केजरीवाल को बुद्धी दे ! बहुत अच्छा विस्तार से लिखा लेक है, बधाई देता हूँ ! हरेंद्र ! आप मेरे ब्लॉग में आकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करके मनोबल बढ़ाते हो डॉक्टर शोभा जी, धन्यवाद !

Shobha के द्वारा
August 4, 2016

श्री मुख्यमंत्री जी राज्यों के मुख्य मंत्री पद से संतुष्ट नहीं होने वाले उन्हें दिल्ली का तख्त चाहिए लेख पढने के लिए बहुत धन्यवाद

Shobha के द्वारा
August 4, 2016

संविधान में श्री रावत जी फेर बदल करना आसान नहीं हैं पहले संसद का दो तिहाई बहुमत चाहिए फिर आधे से अधिक राज्यों का बहुमत केजरीवाल जी ट्रबल क्रिएटर हैं पहले दिल्ली में कुछ नया क्र दिखाएँ लेख पढने के लिए धन्यवाद

Anjana के द्वारा
August 8, 2016

मैं केजरी वाल जी की बहुत फैन थी उनकी चुनाव रैलियों मैं तो नहीं गयी परन्तु खुल कर उनकी प्रशंसा की जब से उन्हें केवल संविधान की अवहेलना की बात करते , और आत्म प्रशंसा करते देखा है उनका यह तरीका प्रजातांत्रिक नहीं है जनता जब प्रशंसा करती है वही सच्ची प्रशंसा है

Shobha के द्वारा
August 8, 2016

अंजना जी यह आपका ही अनुभव नहीं है अधिकाँश का है नया दल आया है जिसका नेता आईआईटियन अरविन्द केजरी वाल थे सबने सोचा दल अलग होगा परन्तु वही पुराणी घिसीपिटी राजनीति वही सोच लेख पढने के लिए धन्यवाद


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