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अमेरिकन सुरक्षा तन्त्र से आहत शाहरुख़ खान (किंग खान)

Posted On: 14 Aug, 2016 Junction Forum,Politics,Social Issues में

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युनाईटेड स्टेट्स अमेरिका विश्व की महान शक्ति हैं ,  लेकिन अलकायदा के आतंकवादियों ने उसकी सुरक्षा और सम्मान को चुनौती दी थी| 9 /11/2001 अमेरिका के इतिहास में कभी न भूलने वाला दिन है ,आत्मघाती हमले के लिए यात्री विमानों का अपहरण कर न्यूयार्क के वर्ड ट्रेड सेंटर के ट्विन टावर्स से दो विमानों को टकरा दिये दो घंटों में टावर धराशायी हो गये तीसरा विमान पेंटागन से टकराया चोथे विमान को वाशिंगटन डी सी से पहले ही कुछ चालकों और यात्रियों द्वारा नियन्त्रण में लेने के प्रयास में विमान एक खेत में टकरा कर नष्ट हो गया एक भी यात्री नहीं बचा ‘महान शहादत’ | इसके बाद अमेरिकन सुरक्षा तन्त्र इतना मजबूत कर दिया गया , सिक्योरिटी में जरा भी चूक नहीं होती | अपने देश की कितनी भी बड़ी हस्ती क्यों न हो जरा सी बात पर एयर पोर्ट पर बैठा किया जाता है शाहरुख खान के साथ कई बार हुआ है अपने देश में  किंग खान बादशाह खान का अमरीकी सुरक्षा तन्त्र व्यवस्था के सामने कुछ भी अस्तित्व नहीं है |अबकी बार शाहरुख येल यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में भाग लेने गये थे उनके साथ नीता अम्बानी भी थी वह निजी विमान से लास एंजिल पहुंचे लेकिन उन्हें एयर पोर्ट से बाहर जाने नहीं दिया वहीं पर ही रोक लिया | यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को जैसे ही सूचना  मिली उन्होंने तुरंत प्रयत्न किया  |दो  घंटे बाद ही उन्हें जाने की इजाजत मिल  गयी | भारत के अमेरिकन राजदूत रिचर्ड वर्मा ने उनसे माफ़ी भी मांगी |शाहरुख ने लास एंजिलस के एयर पोर्ट से ट्वीट किया “दुनिया के हालात के मद्देनजर मैं अमेरिकन सुरक्षा व्यवस्था का सम्मान करता हूँ लेकिन अमेरिका में हर बार आने पर हिरासत में लिया जाना परेशान करने वाला है ‘लेकिन इंतजार करने के दौरान कई बढ़िया पोकेमॉन देखने को मिले’ |यहां शाहरुख एक मशहूर वेब गेम के बारे में बात कर रहे थे|

शाहरुख खान के साथ ऐसा सात वर्षों में तीन बार हुआ |शाहरुख क्या वास्तव में गेम खेल रहे थे या अपने देश में मिलने वाले प्यार और सम्मान के बारे में सोच रहे थे उनकी फिल्म माई नेम इज खान आने वाली थी जिसकी कहानी का मूल विषय था अमेरिका में जिनके नाम के पीछे खान लगा देखते हैं उनके साथा भेदभाव किया जाता है |फिल्म में सिनेमा के नायक को एयर पोर्ट पर रोक कर उसकी तलाशी ली गयी थी |शाहरुख को अमेरिका के एयर पोर्ट पर रोक कर उनसे पूछताछ की गयी थी जिसे ज्यादातर लोगों ने फिल्म का पब्लिसिटी स्टंट माना फिल्म की पब्लिसिटी भी खूब हुई |यही नहीं शाहरुख का अमेरिकन मैगजीन में लेख प्रकाशित हुआ जिसमें उन्होंने लिखा भारत में मुसलमानों के साथ भी भेद भाव होता है जिसके वह भी शिकार हैं ,पढ़ कर पाकिस्तान में जलजला आ गया पाकिस्तान सरकार के विदेश मंत्री को उनकी फ़िक्र सताने लगी उन्होंने भारत सरकार को पत्र लिख कर उन्हें सुरक्षा देने का आग्रह किया यही नहीं आतंकियों के मुखिया हाफिज सईद को उनकी इतनी फ़िक्र हुई उसने उन्हें पाकिस्तान आ कर बसने की सलाह दे कर उनका सम्मान बढ़ाया था | अब शाहरुख क्या बोलते ?उनकी पत्नी गौरी हिन्दू है यही नही पूरा भारत उन्हें प्यार से किंग खान बादशाह खान कहता है वह जहाँ भी जाते हैं उनके चाहने वालों की भीड़ लग जाती है उनके घर के बाहर भी उनको देखने वाले खड़े रहते हैं जिसे देख कर दिल्ली के बादशाहों के झरोखा दर्शन देने की याद आती है |

अफ़सोस हुआ था भारत में कुछ भी कहने की आजादी है |प्रजातंत्र है शायद देश की निंदा करना संविधान में दिया मौलिक अधिकार होगा ?  भारत को असहिष्णु कहने की बयार चल रही थी भारत में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर भी प्रश्न उठाये जा रहे थे जब मामला शांत हो रहा था शाहरुख खान ने टिप्पणी कर कहा ‘भारत में घोर असहिष्णुता है’ | भारत में वह कहाँ से कहाँ पहुंचे है धन सम्मान और प्यार से उनकी झोलियाँ भर गयीं |सुरक्षा जांच के नाम पर पहली बार न्यू जर्सी एयरपोर्ट पर उनसे पूछताछ की गयी उनका फोन ले लिया उनके कपड़े भी उतरवाए गये , अमेरिकन एयरपोर्ट पर रोककर उनसे सवाल जवाब करने का ये सिलसिला 2009 से चल रहा है|  इस बात का भारत सरकार ने विरोध किया था, लेकिन अमेरिका ने कहा उनकी वांटेड लिस्ट में किसी शाहरुख खान का नाम है इसलिये उनसे पूछताछ की गई|सफलता के बाद न जाने कितने मुस्लिम परिवारों नें अपने बेटों के नाम शाहरुख रखे जिसकी गिनती नहीं है| इंडियन मुजाहिदीन शाहरुख के नाम से सोशल मीडिया में सक्रिय था उसने इस नाम का इस्तेमाल कर लिया जो इनकी परेशानी का कारण बनता है |

मेरा लड़का  बहन के पास मिलने पहली बार न्यूयार्क गया वह हार्वर्ड में पढ़ती थी उसका कन्वोकेशन था बहन उसे लेने आने आई थी एयर पोर्ट पर  अधिकारी ने बेटे का पासपोर्ट  लेकर उसे एक कमरे में बैठा दिया वहाँ एक और अफगानी बैठा था |मेरे लड़के को पसीना आ गया पूछने पर एक ही जबाब था वेट अमेरिका जाते समय मैने उसे हिदायत देते हुए कहा था तुम ईरान में पैदा हुए हो वह भी खुर्दिस्तान में जहाँ ईरान से अलग होने की जंग चल रही थी हो सकता है तुम्हें एयर पोर्ट पर रोका जाये वहाँ शांत रहना | फ्लाईट को पहुंचे तीन घंटे बीत गये सभी बाहर आ गये केवल उसके ,बहन घबरा गयी भी  इंक्वारी काउन्टर पर भी कोई जबाब नहीं था सेल भी  बंद था लेकिन उन्होंने उससे कुछ ख़ास नहीं पूछा बस बार – बार कोई आफिसर आता एक ही प्रश्न करता तुम्हारा नाम क्या है |मेरा लडका नामी एड कम्पनी में अच्छी पोस्ट पर था लेकिन नियम तो नियम हैं  लाचार बैठा रहा |

ईरान का शाह प्रो अमेरिकन था लेकिन आगा इमाम खुमैनी की  इस्लामिक सत्ता आने के बाद अमेरिका के ईरान से सम्बन्ध इतने खराब हो चुके थे अमेरिकन एम्बेसी के लोग होस्टेज बना कर रख लिए गये रोज तेहरान में उनका तमाशा बनाया जाता लेकिन महाशक्ति अमेरिका लाचार था | ईरान के महत्वपूर्ण पूर्ण सार्वजनिक स्थानों पर अमेरिका और रशिया के झंडे जमीन पर बने थे  हजारो लोग उनपर पैर रख कर गुजरते थे |स्कूलों में प्रार्थना के बाद ‘मर्ग बा अमरीका ‘( अमरीका मुर्दा बाद ) मर्ग बा शोरवी( रशिया) नारे लगवाये जाते थे | पूरे देश का शत्रु अमेरिका था जुम्मे नमाज में भाषण में अमेरिका के खिलाफ बड़ी बड़ी बातें कही जाती ईरान के दुश्मन  अमेरिका को हम दिखा देंगे, सुधार देंगे एयर पोर्ट पर बहुत बड़ा बोर्ड लगा था हम क्रांति का निर्यात करते हैं यही नहीं पूरे विश्व को इस्लाम करने का सब्ज बाग़ भी दिखाया जाता एक स्वप्न था | ऐसे देश में जन्मा लड़का ? |यह स्थिति उसने दुबारा लास एंजिल के एयर पोर्ट पर भुगती थी | जब भी अमेरिका जाएगा इस स्थिति का सामना करना ही पड़ेगा और लोगों को भी गुजरना पड़ता है| जबकि हम हिंदू हैं यह तो एक उदाहरण है | शाहरुख खान एक हस्ती हैं अमेरिका में उनके चाहने वाले अनगिनत हैं |

अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री ने भी असुविधा के लिए खेद जताया जताया |उन्होंने कहा कई बार तो अमेरिकन राजनयिकों को भी विशेष सुरक्षा जाँच से गुजरना पड़ता है| भारत के गृह मंत्री को जुलाई में अमेरिका जाना था यहाँ ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम के तहत भारत और अमेरिका में समझौता होना था जिसमें भारत के उद्योग जगत , फिल्म जगत राजनीति और अन्य क्षेत्रों से जुड़े 2000 महानुभावों की सूची सौंपी जायेगी इनको प्रवेश के लिए सामान्य विदेशियों की लाइन में नहीं लगना पड़ेगा जिनमें शाहरुख का नाम भी होगा ,ऐसा समझौता करने वालों में भारत आठवां देश होगा | समझ लीजिये सम्मानित भारतीय जिनको देश प्यार और गर्व करता है किंग खान को अब आहत नहीं होना पड़ेगा |

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
August 14, 2016

जय श्री राम शोभाजी बहुत अच्छा बिस्तार में लिखा कुछ लोग होते जिन्हें छाए जितना प्यार मिले ह्मेशा देश के विरोध में बोलेगे बॉलीवुड में एक लाबी है महेश भट्ट के नेतृत्व में जो मोदी विरोधी है मोदीजी के पहले आमिर.शाहरुक खान ने कभी ऐसा नहीं कहा मोदी विरोधी मीडिया ने खूब उछाला जबकि अमेरिका में सामन्य प्रक्रिया है जिन लोगो को भारत में अच्छा नहीं लगता उन्हें पकिस्तान चले जाना चाइये.ये देश गद्दारी है.

harirawat के द्वारा
August 15, 2016

शोभा जी, क़ानून के दायरे में कोई बड़ा छोटा नहीं होता ! शाहरुख खान जब तक ईमानदार था, लोग उसकी तारीफ़ करते थे, उसकी फ़िल्में भी बड़ी दिलचस्पी से देखते थे लेकिन जिस दिन उसने असहिष्णुता की बात कही, उसकी भारतीयता होने पर उसी दिन से प्रश्न चिन्ह लग गया ! अमीर खान की पत्नी को भारत में असुरक्षा का अहसास हो रहा है, क्यों ? रमेश जी ने सही कहा है, जिनको भारत में परेशानी हो रही है उन्हें पाकिस्तान चला जाना चाहिए ! लेकिन क्या करेंगे वहां जाकर, वहां से बीमार, इलाज के लिए, कलाकार, कला का प्रदर्शन करने के लिए, दरिकेटियर पैसा कमाने के लिए भारत आते हैं ! लेख के लिए साधुवाद !

pravin kumar के द्वारा
August 15, 2016

मैम इस बार वे ज्यादा दुखी है क्योंकि कोई फिल्म भी नहीं आने वाली है जो आयी भी वो ज्यादा चली नहीं, ये स्टंट बन जाता अगर और काम आता अगर कोई फिल्म अभी रिलीज कर देते, वैसे इस बार फिर अमेरिका असहिष्णु हो गया जिसका दोष भारत पर जरूर कभी न कभी आने वाले दिनों में लगाया जायेगा

Shobha के द्वारा
August 16, 2016

श्री रमेश ही आउट लुक मैगजीन को दिया गया इंटरव्यू लोग भूल गये परन्तु मोदी जी के विरुद्ध वक्तव्य था भारत में असहिष्णुता बढ़ रही है जब एयर पोर्ट पर बाहर निकलने का इंतजार कर रहें होंगी समझ में आया होगा असहिष्णुता होती क्या है लेख पढने के लिए बहुत धन्यवाद

Shobha के द्वारा
August 16, 2016

श्री रावत सर नौजवान तबका इनकी फिल्म का पहले दिन पहला शो देखते थे इतना सम्मान इन्हें मिला शायद ही किसी को मिला हो फिर भी देश पर कटाक्ष करना सोच कर हैरानी होती है अजरुद्दीन क्रिकेट कैप्टन को लोग कितना प्यार करते थे उसने भी मुस्लिम कार्ड खेला पाकिस्तान अपने लोगों को सम्भाल नही प् रहा है आयेदिन आतंकवादी घटनाएँ कितनी दुखद हैं और कौन देश इन्हें लेगा

Shobha के द्वारा
August 16, 2016

प्रिय प्रवीन पूरी दुनिया आतंकवाद से त्रस्त है अमेरिका में एयरपोर्ट की सुरक्षा सदैव से सख्त है जो अमेरिका जाते हैं वह जानते हैं अब हमारी सरकार का समझौता हो रहा है शाहरुख खान को भी राहत मिल जायेगी लेख पढने के लिए अतिशय धन्यवाद

sinsera के द्वारा
August 19, 2016

आदरणीय शोभा जी, असहिष्णुता का अनुभव करने की बात कहने वालों को , मुझे लगता है, हमेशा गलत ढंग से लिया गया है. अगर वो कहते हैं कि भारत में असहिष्णुता है तो इसका मतलब ये नहीं लेना चाहिए कि यहाँ 100 % लोग असहिष्णु हैं. यहाँ पर, मैं तो इस बात का समर्थन करती हूँ कि हमारे सामाजिक परिवेश में “” अधिकांश “” लोगों में हिन्दू मुस्लिम डिस्क्रिमिनेशन है. लोग आपस में अगर प्रेम से मिलते भी हैं तो “”अधिकांश “” लोग दिखावा करते हैं. मन से नहीं मिलते. आपका क्या कहना है..??

Shobha के द्वारा
August 19, 2016

प्रिय SINSERA जी आपने लेख पढ़ा बहुत धन्यवाद मुझे वर्षों मुस्लिम समाज में रहने का मौका मिला भारतीय के अलावा ईरानी अरब पाकिस्तानी और बंगला देशी ईरानी बहुर अच्छे थे भारतियों की बेहद इज्जत करते थे अरब हिन्दुओं को पसंद करते थे लेकिन पाकिस्तानी बंगला देशी बाबा आदम के जमाने की बातें करते थे ऐसे सिद्ध करते उनके सारे दुखों का कारण हम हैं शाहरुख़ खान ने आउट लुक मैगजीन में लिखा भारत में मुस्लिमों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता में भी इसका शिकार हूँ हर बुद्धिजीवी को दुःख हुआ था हिन्दू मुस्लिम भारत में प्रेम से रहते हैं अपने दुःख सुख बांटते हैं पर मुस्लिम कट्टरता जब उभरती है अजीब लगता है |

sadguruji के द्वारा
August 19, 2016

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! आपने अच्छा लिखा है ! मुझे तो ये समझ में नहीं आता है कि चार बार अपमानित होने पर भी वो अमेरिका क्यों भागते हैं? सादर आभार !

nishamittal के द्वारा
August 20, 2016

मेरे विचार से जो शाहरुख खान भारत को अवसर मिलने पर बदनाम करने में कोई कसर नही छोड़ते उनके प्रति उन्हें विशिष्ठसूची में सम्मिलित करवा इतना औदार्य दिखाने की क्या आवश्यकता ,टी वी धारावाहिक से फिल्मी दुनिया में शीर्ष पर पहुंचाने वाले ये भारतवासी और भारत ही है . आज बड़ी मुश्किल से मेरी ओर से जागरण की साईट खुली है अतः कमेन्ट कर रही हूँ.कुछ लोगों ने बधाई दी है ब्लागर ऑफ़ द वीक  बनने की ,लेकिन मुझको कहीं भी नही मिल रहा है कृपया मुझको लिंक देने का कष्ट करें

Shobha के द्वारा
August 21, 2016

श्री आदरणीय सद्गुरु जी शाहरुख खान धन डालर के लिए अमरीका जाते हैं विश्व के फ़िल्मी हीरो में चोथे धनी व्यक्ति हैं

Shobha के द्वारा
August 21, 2016

प्रिय निशा जी देश में कमाते भी हैं हिन्दू बीबी है देश की बुराई भी करते हैं लेख पढने के लिए अतिशय धन्यवाद

sadguruji के द्वारा
August 21, 2016

आदरणीया सरिता सिन्हा जी ! सादर अभिनन्दन ! आपकी बात सौ प्रतिशत सही है ! एक सज्जन पन्द्रह अगस्त को मुझसे मिलने आये थे ! तिरंगे की बात चली तो वो बताने लगे कि आज वो एक वर्ग विशेष के क्षेत्र से गुजर रहे थे तो एक बच्चे की बात सुन सन्न रह गए ! एक जगह पर बच्चे तिरंगा झंडा खरीद रहे थे ! एक छोटा बच्चा झंडा खरीदना चाह रहा था, किन्तु उसका बड़ा भाई उसे मना करते हुए समझा रहा था कि झंडा मत खरीदो, हम लोंगो का तो चौदह अगस्त को होता है न ! वो सज्जन छोटे बच्चे के मुंह से ये सुन सन्न रह गए ! वो बच्चे से पूछे, ‘क्यों बेटा, तुम भारत में नहीं रहते हो क्या ?’ लड़का बोला, ‘हम भारत में नहीं अपने घर में रहते हैं !’ बताइये धर्म के नाम पर कितना जहर मासूमों के दिल में घोला जा रहा है ! उन्हें हमारे देश से जोड़ने की बजाय धर्म और पाकिस्तान से जोड़ा जा रहा है ! हिन्दू धर्म की बजाय देश को सर्वोपरि मानते हैं, यही भारत जैसे देश में हिन्दू-मुस्लिम मतभेद का मूल कारण है ! धार्मिक नेता और बुद्धिजीवी इसका कोई सर्वमान्य हल ढूंढें ! सादर आभार !

Shobha के द्वारा
August 22, 2016

यह आपने सरिता जी के लेख की प्रतिक्रिया के जबाब में लिखा है लेकिन आपके उत्तरसे मुझे भी जानकारी मिली बिहार में तो पकिस्तान का झंडा लहराया गया कुछ मुस्लिम संगठनों को इसमें बुराई ही नजर नहीं आई

drashok के द्वारा
August 22, 2016

अमेरिका महाशक्ति है अपनी सुरक्षा के लिए चौकस रहना अच्छी बात है सुरक्षा तन्त्र किसी की परवाह नहीं करता आप उनके देश में घूमने नहीं आये हो प्रोग्राम करने आये हो उसके लिए मोटी रकम मिलेगी नाराजगी कैसी न जाने कितने लोग जबर्दस्त चेकिंग से गुजरते हैं आपका महत्व अपने देश में देश के साथ है यही आपकी पहचान है आप भारत वासी हैं

Shobha के द्वारा
August 22, 2016

डाक्टर साहब जब हम अपने देश से दूसरे देश जाते हैं देश के अलग कायदे कानून होते है सबके लिए बराबर लेख पढने के लिए अतिशय धन्यवाद

sadguruji के द्वारा
August 22, 2016

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! SINSERA आदरणीया सरिता सिन्हा जी का ही यूजर नाम है ! उनकी प्रतिक्रिया पर मैंने विचार व्यक्त किया था था ! आपकी प्रतिक्रिया से मुझे लगा कि शायद आप उनके यूजर नाम से ही परिचित हैं ! सादर !

Shobha के द्वारा
August 23, 2016

जी आदरणीय सद्गुरु जी बहुत अच्छी लेखिका हैं उनकी भाषा बहुत अच्छी है अब पता चला वह सरिता जी हैं


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