Vichar Manthan

Mere vicharon ka sangrah

199 Posts

2776 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15986 postid : 1237890

कश्मीर सुलग- सुलग कर शांत हो रहा है ? मोदी सरकार की बदली नीति (जागरण जंगशन फोरम)

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जम्मू कश्मीर 11 वीं विधान सभा के चुनाव में प्रदेश की जनता ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया भयानक सर्दी में भी वोटरों की लम्बी कतारें देख कर समझ में आया था कश्मीरी शांति से जीना चाहते हैं प्रजातांत्रिक प्रक्रिया द्वारा अपनी सरकार चुनने के लिए कितने उत्सुक हैं |केवल अलगाव वादियों के अलावा किसी ने चुनाव का विरोध नहीं किया| बीजेपी ने नरेंद्र मोदी जी के विकास के मुद्दे को चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनाया लेकिन किसी दल को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला |नेशनल कांफ्रेंस को केवल 15 सीटें मिली जबकि उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री थे 910 वोटों से अपनी सीट बचा सके | आज के बिगड़े हालात में बढ़ चढ़ कर बोल रहे हैं हैरानी होती है | पीडीपी ने 28 सीटें जीती परन्तु सरकार बनाने के बहुमत से दूर ,भाजपा को 25 सीटें  कांग्रेस चौथे नम्बर पर पहुंच गयी |जम्मू में भाजपा को बढ़त मिली थी एक दूसरे के विरोधी होते हुए भी पीडीपी और भाजपा की मिली जुली सरकार बनी | जम्मू कश्मीर में मुफ़्ती मुहम्मद सईद ने मुख्यमंत्री पद शपथ ली भाजपा को उपमुख्य मंत्री का पद मिला |प्रधान मंत्री ने कश्मीर के विकास के लिए बड़े आर्थिक पैकेज का एलान किया कश्मीर ने पिछले वर्ष भयानक सैलाब आया सुरक्षा बलों ने कश्मीर के लोगों की मदद कर संकट से उबारा | कश्मीर की वादियाँ और डल झील सैलानियों की चहल पहल से आबाद होने लगीं |उनकी मृत्यु के बाद उनकी बेटी महबूबा मुफ़्ती  मुख्य मंत्री बनी |कश्मीर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों लिए कालोंनी बनाने की चर्चा होने लगी जिससे अलगाव वादियों का भारत विरोध बढ़ने लगा |

कश्मीर के हालात पहले भी खराब होते रहे हैं 1989 में कश्मीरी पंडितों को घाटी से निकाल दिया गया लेकिन पंडितों ने क्रोध में आकर हाथों में हथियार नहीं उठाये वह भी कश्मीर के बाशिंदे थे अपना घर द्वार सब कुछ छोड़ कर पलायन कितना दुखद है | अलगाववादी पाकिस्तान के झंडे लहराते नजर आने लगे थे | 2010 में इस्लामिक स्टेट की विचारधारा के बढ़ने के साथ कश्मीर के कुछ लोग आईएस के झंडे लहराने लगे अर्थात जेहादी मनोवृत्ति नजर आने लगी दीनी सियासत के सामने कश्मीर के विकास का मुद्दा गौण हो गया पाकिस्तान भी धर्म के आधार पर कश्मीर पर अपना हक जमाने लगा | पीओके पहले से बर्बाद था अब वहाँ आतंकवादी कैंपों में कश्मीरी नवयुवकों को बहला फुसला कर आतंक की ट्रेनिग देने लगे |सीमापार से आतंकवादी घाटी को खून से रंगने लगे भारत विरोध की भावना बल पकड़ने लगी |कश्मीर ने बहुत बुरा दौर झेला था |

कश्मीर में कई स्वयंभू कमांडर पनप रहे हैं | उनमें से एक था बुरहान बानी जिसने फेस बुक के जरिये अनेक युवकों को हिजबुल से जोड़ा ,जेहाद और आतंकवाद के लिए प्रेरित किया |वह सेना की वर्दी में रहता था उस पर 10 लाख का इनाम घोषित था |सुरक्षा बलों द्वारा मारे जाने के बाद बड़ी संख्या में लोग उसके जनाने में शामिल हुए |कश्मीर घाटी जलने लगी बुरहान की असमय मौत पर दुःख है एक युवा गुमराह नहीं किया जाता तो अपने समाज और देश के लिए कुछ करता |पाकिस्तान ने अवसर का लाभ उठाया बुरहान को शहीद का दर्जा दे कर कश्मीर की आजादी के मुद्दे को गरमा दिया| अब सीमा पर घुसपैठियों का दबाब बढ़ने लगा| घाटी में रैलियां होने लगीं जिसमें महिलाओं बूढ़ों बच्चों और किशोरों को शामिल किया जाता |पहले लाउडस्पीकर से ऐलान किया जाता फिर बच्चों और किशोरों के हाथों से ईंटे और पत्थर सुरक्षा बलों पर चलावाये जाते हैं पीछे से पेट्रोल बम और हथगोले आतंकवादी फेकते  साथ में अलगाव वादी चलते | इन बच्चों से स्थान बदल-बदल कर पथराव कराया जाता है |सुरक्षा बल कम उम्र के बच्चों के आगे मजबूर हैं समय बीतता जा रहा है लेकिन घाटी शांत होने का नाम नहीं ले रही थी | यह देख कर बगदादी की बाल सेना याद आती हैं जिन्होंने अभी जीवन की शुरुआत भी नहीं की उन्हें खतरनाक आतंकी बना दिया हमारे यहाँ के बच्चों को हाथ में रूपये देकर उन्हें पत्थरबाज बना दिया |यह आतंकवाद की पहली शिक्षा है शैतान को पत्थर मारो शैतान कौन हैं सुरक्षा सैनिक|

अलगाव वादियों के अपने बच्चे भारत के पब्लिक स्कूलों और विदेशों में पढ़ते हैं उन्हें आगे ‘राज’ करने के लिए तैयार किया जाता है| गरीब मासूम कश्मीरी बच्चे पत्थर बाज| महबूबा मुफ़्ती ने शान्ति की कई अपीलें की समझाने की कोशिश की बच्चे हाथ में पत्थर लेकर क्या सुरक्षा सैनिकों के कैम्पों के पास टाफी या दूध लेने जाते हैं ?बड़ी संख्या में 4500 सुरक्षा सैनिक जख्मी हुए कई थाने फूक दिए गये है सुरक्षा बलों को भी जबाबी कार्यवाही में पेलेट गन का इस्तेमाल करना पड़ा जिससे निकलने वाले छरे घाव करते हैं| राजनैतिक रूप से पाकिस्तान बुरहानी की मौत को भुनाने की पूरी कोशिश कर रहा था | अटल बिहारी बाजपेयी ने इंसानियत कश्मीरियत और जम्हूरियत की नीति अपना कर कश्मीर में शांति भाल थी |

लेकिन अब हालात बदल गये हैं |पकिस्तान घाटी में धन और बल दोनों का जम कर प्रयोग कर रहा है |15 अगस्त को मोदी जी ने दुनिया का ध्यान पीओके गिलगित ,बाल्टिस्तान और बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना  अपने लोगों पर जुल्म कर रही है | कैसे यह प्रदेश तरक्की से मरहूम हैं | इन प्रदेशों में शिया भी निवास करते हैं  मस्जिदों में इबादत करते समय अक्सर सुन्नी मौलवियों के आदेश पर बम फाड़ते हैं |यहाँ के बाशिंदे मोदी जी की तरफ आशा भरी नजरों से देखने लगे हैं| परेशान नवाज शरीफ ने कश्मीर का राग अलाप कर उस पर अपना हक जताया हाफिज सईद जैसे आतंकवादी सरगना चीख चिल्ला रहा है उसने चिंघाड़ते हुए सरकार को जिन्ना की याद दिलाई वह कश्मीर को पाकिस्तान के गले की नस मानते थे |हाफिज मन ही मन शायद खलिफेट के सपने बुन रहा है भूल गया अब तो इस्लामिक स्टेट के लिए लड़ने वालों के घुटने टूट रहे है  कश्मीर तो भारत का भाल है| उसने पकिस्तान को आदेश देते हुए कहा मंत्री मंडल और सरकार विश्व में भारत की विदेश नीति के बदले सुरों की निंदा करे दुनिया में कश्मीर का अपने हक में प्रचार करे|

कश्मीर की भूगोलिक स्थित पर द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त होने के बाद एंग्लो  अमेरिकन ब्लॉग की नजर थी माउंटबेटन चाहते थे कश्मीर या तो पकिस्तान के साथ जाये या स्वतंत्र रहे जिससे उनका प्रभाव बना रहेगा|  माउन्ट बेटन की नजर गिलगित पर थी उनकी नजर में यह दुनिया की छत, पांच राज्यों की सीमा के बीच का क्षेत्र है सोवियत लैंड अब टूट चुका है, अफगानिस्तान भारत ,चीन की सीमाएं यहाँ मिलती है| आज स्थिति बदल चुकी हैं चीन की क्षेत्र पर नजर है ग्वादर बन्दरगाह बनाने के कारण बलूचिस्तान पर उसका प्रभाव क्षेत्र बढ़ गया है गिलगित और बल्तिस्तान से सड़क बना कर चीन अरब सागर में आ गया है रेल लाइन बिछाने की तैयारी है उसका बहुत पैसा लगा है |जबकि अमेरिका और रशिया की भी क्षेत्र पर नजर है | सुरक्षा की दृष्टि से वह चीन को साउथ ईस्ट एशिया में घेरना चाहते हैं |मोदी जी के विदेश नीति में बदलाव के संकेत देते ही पाकिस्तान में हलचल मच गयी | मोदी जी भी पीछे हटने वाले नहीं हैं |अब पत्थर बाजों पर मिर्च बम का इस्तेमाल किया जाएगा | नवाज ने 22 सांसदों को 11 देशों में कश्मीर के हालात को बढ़ा चढ़ा कर समझाने के लिए भेजा है लेकिन दुनियाँ पाकिस्तान को अच्छी तरह समझ चुकी है | भारत सरकार ने भी पाकिस्तान की कमजोर नस बलूचिस्तान की आजादी का बिगुल बजा दिया है | 

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

14 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
August 31, 2016

शत्रु क्षत्रु मित्र होता है, चाणक्य ने कहा था. मोदी जी ने ठीक समय पर यह मुद्दा छेड़ कर पाकिस्तान को झकझोर दिया है. अब पाकिस्तान में विरोध के आवाज बुलंद होने लगे हैं. कश्मीर में शांति स्थापना के हर सम्भव प्रयास किये जा रहे हैं. अब सर्वदलीय समिति भी वहां जानेवाली है. उम्मीद करनी चाहिए कुछ अच्छे परिणाम निकालेंगे. सादर आदरणीया डॉ. शोभा जी!

JITENDRA HANUMAN PRASAD AGARWAL के द्वारा
August 31, 2016

बहुत अच्छा माताश्री !

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
August 31, 2016

शोभा जी सुलग रहे कश्मीर पर बहुत ही विस्तार से आपने अच्छा लिखा है । वाकई आप बहुत मेहनत से लिखती हैं इसक लाभ यह मिलता है कि मुद्दा विशेष पर पूरी जानकारी मिल जाती है । बस यूं ही लिखती रहें । सादर्

Shobha के द्वारा
August 31, 2016

श्री डॉ कुमारेन्द्र जी लेख पसंद करने और ब्लॉग बुलेटिन में स्थान देने के लिए धन्यवाद

rameshagarwal के द्वारा
August 31, 2016

जय श्री राम शोभाजी कश्मीर पर आपका सुन्दर भावात्मक लेख लिखने पर बधाई.कोइ भी दल खुले आम कश्मीर देश का अभिन्न अंग है इससे मूह नहीं मोड़ सकता हालांकि मन में पत्थर मारने वालो से साहनभूति एअखते यही देश का दुर्भाग्य की देश के विरुद्ध नारे और झंडे फहराने वालो से सहानभूति पर देश की रक्षा करने वाली सेना के प्रति कोइ नहीं मोदीजी के द्वारा बलूचिस्तान और पाक का मामला उठकर पकिस्तान की हालत ख़राब बेचारा बुरा फंस गया विरोध में जगह जहः से आवाजे उठने लगी है .देखि आगे क्या होता.आप तो बहुर गंभीरता से लिखती

Shahid Naqvi के द्वारा
August 31, 2016

लेकिन अब हालात बदल गये हैं |पकिस्तान घाटी में धन और बल दोनों का जम कर प्रयोग कर रहा है |15 अगस्त को मोदी जी ने दुनिया का ध्यान पीओके गिलगित ,बाल्टिस्तान और बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना अपने लोगों पर जुल्म कर रही है | कैसे यह प्रदेश तरक्की से मरहूम हैं | इन प्रदेशों में शिया भी निवास करते हैं मस्जिदों में इबादत करते समय अक्सर सुन्नी मौलवियों के आदेश पर बम फाड़ते हैं |यहाँ के बाशिंदे मोदी जी की तरफ आशा भरी नजरों से देखने लगे हैं| परेशान नवाज शरीफ ने कश्मीर का राग अलाप कर उस पर अपना हक जताया । शोभा मैम क्या आपको नही लगता कि ये कदम नई दिल्ली की तरफ से बहुत पहले उठायाजाना चाहिये था।शायद अब तक नापाक पाकिस्तान मजबूर हो जाता । अच्छा लेख ।

Shobha के द्वारा
September 1, 2016

श्री नकवी जी मुझे विदेश में पाकिस्तान के बुद्धिजीवी समाज के साथ रहने का अवसर मिला वह अक्सर कहते थे नार्थ वेस्ट फ्रंटियर पठान बार्डर को नहीं मानता बलूचों ने कभी पाकिस्तान से अपने को नहीं जोड़ा उनका प्रदेश समृद्ध है पर उनको उसका कोई लाभ नहीं मिलता आर्मी में भी बहुत कम बुलोच हैं सिंध ने मुहाजरों को बसाया है लेकिन पंजाबी पहले पंजाबी है रावी के पार किसी को जाने नहीं देते वही अपने आप को असली पाकिस्तान का हक दार समझते हैं हमारा देश पंचशील के सिद्धांत पर तटस्थता की नीति पर चलता रहा है बंगला देश भी इस लिए बना वहाँ के लोगों का सहयोग था फिर रशिया के साथ इंदिरा सरकार ने संधि की थी अब पाकिस्तान आतंकवाद की और इतना बढ़ चुका है वहाँ तीन सत्ताएं चल रही हैं जो आतंकवाद में विशवास करते हैं अब नहीं तो कभी नहीं कश्मीर ऐसे ही सुलगता रहेगा |मोदी जी ने कुटनीतिक चाल चली है हाँ पीओके में इसका असर होगा सिंध भी सिर उठाएगा बलूच तो पहले ही दबाए हुए हैं वह अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पीड़ित के रूप में जाने जायेंगे |वहाँ का पढ़ा लिखा ही अभी तक इस्लामियों (हाफिज सईद इस्लाम ) से बचाए हैं प्रश्न भी करते हैं भारत इतना तरक्की कर गया हम क्यों पिछड़ रहे हैं आप पत्र कार हैं इसलिए आपको अपना अनुभव लिख रही हूँ देश ऐसे ही चलते हैं

Shobha के द्वारा
September 1, 2016

श्री जवाहर जी मोदी जी के कदम से चीन भी परेशान है उसका बलूचिस्तान में बहुत पैसा लगा है ग्वादर बन्दरगाह उसकी जरूरत है |अमेरिका रशिया भी चीन के बढ़ते प्रभाव से सोच में हैं |कश्मीर ऐसे ही कभी शांत कभी सुलगता रहेगा जब तक आतंकवादियों का पकिस्तान पर प्रभाव रहेगा लेख पढने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
September 1, 2016

प्रिय जितेन्द्र लेख पढने के लिए अतिशय धन्यवाद |

Shobha के द्वारा
September 1, 2016

श्री बिष्ट जी मेरा रिसर्च का विषय Anglo -American Impact on the Indo-Pak Relations जिसमें शीत युद्ध का सन्दर्भ विशेष रूप से लिया था इसलिए मेरा रुचिकर विषय है आप ने लेख पढ़ा पसंद किया आभार

Shobha के द्वारा
September 1, 2016

श्री रमेश जी मोदी जी द्वारा उठाये कदम पर सभी खुश हैं हैरानी एस बात पर होती है अलगाव वादियों के वच्चे अपना कैरियर बनाने में लगे हैं लेकिन गरीब और गुमराह बच्चों के हाथ में पत्थर पकड़ा दिए गये उन्हें पत्थर बाज बना दिया उनका भविष्य अन्धकार में धकेल दिया लेख पढने के लिए अत धन्यवाद

drashok के द्वारा
September 6, 2016

शोभा जहां तक पाकिस्तान को समझा है वह भारत के लिए ट्रबल क्रियेटर बना रहेगा भारत की राजनीति वोट बैंक के इर्द गिर्द घूमती रहे या पाकिस्तान का अगला कदम क्या होगा इसी में विशेषज्ञ लगे रहें या मित्र राष्ट्रों की खोज में घूमती रहे उसका यह हाल है हम तो डूबे है सनम तुमको भी ले डूबेंगे लेकिन मोदी जी ने पाकिस्तान के मर्म पर चोट की है असर देखते हैं क्या होता है |

Shobha के द्वारा
September 6, 2016

आपका हर शब्द सही है लेख पढने के लिए धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran