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पाकिस्तान कब और कैसे सुधरेगा ? 'जागरण जंगशन फोरम '

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उरी में आर्मी के कैंप पर बड़ा हमला भारत के सम्मान पर चोट है |भारत में तुरंत आपतकालीन बैठकों का दौर चला कोशिश है मोदी सरकार सकारात्मक कदम उठा कर पाकिस्तान को सबक सिखाये | वह कौन से कदम होंगे जिनसे पाकिस्तान भयभीत होगा – 1.भारत की भूमि से पाकिस्तान जाने वाली नदियों का पानी रोक दिया जाये अर्थात सिंधु जल संधि भंग की जाये|   विभाजित भारत में नदी जल विवाद बहुत बड़ा प्रश्न था विवाद सुलझाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय वर्ड बैंक के प्रेसिडेंट मिस्टर ब्लैक की अध्यक्षता में दोनो पक्षों के बीच अनेक बैठके हुई अंत में ब्लैक की मध्यस्ता से 19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु नदी समझौते पर भारत के प्रधानमन्त्री नेहरु और राष्ट्रपति जरनल अयूब खान ने हस्ताक्षर किये | समझौते के अनुसार सिन्धु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया सतलज ब्यास और रावी पूर्वी नदियां है पूर्वी नदियों का पानी कुछ अपवादों को छोड़ कर भारत में इस्तेमाल किया जाता है| पश्चिमी नदी झेलम चेनाब और सिन्धु नदियों के पानी के प्रयोग पर भारत को सीमित अधिकार दिया है जैसे बिजली बनाना कृषि के लिए प्रयोग, बाकी पानी का प्रयोग पाकिस्तान करता हैं यह जल बटवारा विश्व में सबसे उदार जल बटवारा है| 6 भरी नदियों का पानी लगभग 80.52% पाकिस्तान को दिया जाता है यह बड़े भाई की तरफ से छोटे भाई के लिए दरियादिली थी , नेहरु जी की विश्व नेता बनने की चाह थी वह पकिस्तान के लिए उदार रहे लेकिन पाकिस्तान को जो मिल जाता है उसे अपना हक मानता है फिर भी रोता रहता है | रावी,ब्यास और सतलज से पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान ) की 11मिलियन एकड़ धरती ,सिंध की 5 मिलियन एकड़ और बहावल पुर और खैरपुर की 3 मिलियन एकड़ धरती सिंचित होती है| दिल्ली से अमृतसर जाने वाले यात्री ट्रेन या बस से ब्यासा जी का पुल पार करते हैं जल से लबालब भरी ब्यास नदी पाकिस्तान की ओर जाते देखते हैं |पाकिस्तान में आज भी जागीरदारी सिस्टम का बोलबाला है प्रभावशाली लोग पहले अपने फ़ार्म हॉउस में पानी का इस्तेमाल करते हैं तब अन्य खेतों को मिलता है |

1965 ,1971 और1999 करगिल युद्ध के समय भी भारत द्वारा संधि को तोड़ा नहीं गया |जबकि विशेषज्ञों की राय है वियाना समझौते के लॉ ऑफ़ ट्रीटीज़ की धारा 62 के तहत भारत संधियों से पीछे हट सकता है |अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अनुसार बदली परिस्थितियों में किसी भी संधि को रद्द कर सकते हैं | लेकिन कुछ की राय है यह समझौता दोनों देशों में तीसरे पक्ष अंतर्राष्ट्रीय बैंक की मध्यस्तता से किया गया था पानी बंद किये जाने पर पाकिस्तान के शोर मचाने पर फिर से मध्यस्तता की बात हो सकती है| भारत को मुस्लिम देशों का समर्थन प्राप्त है उनके पास रो सकता है भारत एक मुस्लिम देश को प्यासा मार रहा है | पाकिस्तान भारत के खिलाफ छद्म युद्ध से बाज नहीं आ रहा| विरोध में ‘जल रोकना बिना रक्त पात का पाकिस्तान के विरुद्ध अघोषित युद्ध होगा |’
2. कुछ विचारक पाकिस्तान में चलने वाले आतंकवादी कैम्पों को नष्ट करने की बात करते हैं पीओके में लगभग 50 चलते फिरते आतंकी कैंप हैं जैसे ही भारत में आतंक के अड्डों को समाप्त करने की आवाज उठी पाकिस्तान इन्हें सिविलियन बस्तियों और सुरक्षित स्थानों पर स्थान्तरित कर रहा है | इनमें पाकिस्तान के नागरिकों को छद्म युद्ध के लिए प्रशिक्षित कर सीमा पार करायी जाती है उन्हें कवर देने के लिए पाकिस्तानी रेंजर गोले दागते हैं | आतंकवादी पाकिस्तान से आये थे उनके पास पाकिस्तानी हथियार और अन्य सामान था पश्तो में सारे निर्देश लिखे थे लेकिन आतंकी गतिविधियों में भारत द्वारा लगाये आरोपों पर पहले की तरह ही पाकिस्तान मुकर गया | आतंकवादी सरगना परमाणु शक्ति का युद्ध में प्रयोग करने की खुले आम धमकी देते है परिणाम भयानक भी हो सकते है पाकिस्तान की सीमा में जाकर आतंकवादी कैंपों पर हमला युद्ध की चुनौती बन सकता है |

3.खुला युद्ध- देश चाहता है परिणाम कुछ भी हो एक बार युद्ध से फैसला हो जाये लेकिन युद्ध सदैव आखिरी विकल्प होता है युद्ध की स्थिति में दुनिया के सभी देश क्या हमारा साथ देगें परमाणु युद्ध के भय से बट भी सकते हैं ? 4.कूटनीतिक उपायों द्वारा पाकिस्तान को घेर कर अलग थलग किया जाये |विश्व बिरादरी पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करे |अमेरिका की संसद में पहले ही ऐसी कोशिश जारी है|क्या ऐसा सम्भव है ?यूएन में चर्चा के दौरान चीन और सउदी अरब पाकिस्तान का समर्थन करेंगे| संयुक्त राष्ट्र जनरल असेम्बली में नवाज शरीफ ने कश्मीर का मसला उठा कर इसे मानवाधिकार हनन का मुद्दा बनाया लेकिन उनके हाथ निराशा ही लगी नवाज शरीफ ने 19 मिनट के भाषण में 8 मिनट तक कश्मीर का राग अलापा |भाषण शरीफ पढ़ रहे थे, ऐसा लग रहा था जैसे भाषण आर्मी चीफ ने लिखा है ISI ने डिक्टेट किया है | यहाँ तक आतंकी बुरहान बानी को कश्मीरियों का लीडर बता कर आतंकी को हीरो बनाया स्पष्ट है पाकिस्तान आतंक की पाठशाला ही नहीं आतंकियों को सम्मानित भी करता है|  भारत सरकार का प्रयत्न होगा विश्व समुदाय पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित कर अलग थलग करे ऐसा होना क्या सम्भव होगा ?मोदी जी से देश को बहुत आशाएं थी विश्व के अनेक देशों से उन्होंने समर्थन जुटाया है | उनकी पाकिस्तान के प्रति नीति अब क्या होगी कितना समर्थन जुटा सकेंगे ?पाकिस्तान चाहता है भारत सरकारें आतंकवाद में ही उलझी रहें विकास थम –थम कर चले | केरल की जनसभा में भाषण के दौरान मोदी जी ने जोर शोर से पाकिस्तान के खिलाफ कार्यवाही का भरोसा दिया है |अबकी बार उन्होंने पाकिस्तान के आवाम को सम्बोधित कर कहा उन्हें भी भारत की तरह विकास की जरूरत है |  क्या शठ के साथ शठ जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिये ?

पाकिस्तान अपने नागरिकों (आतंकियों) के शव लेने से साफ़ इंकार करता है अत: उनके शव को सेना ने पुलिस को सौंप दिया | मारे जाने पर ओसामा के शव को अमेरिका ने समुद्र में डाला था लेकिन हमारे यहाँ मौलवियों द्वारा विधिवत् अंतिम संस्कार कराया गया यहाँ हमारी संस्कृति आड़े आ गयी | क्या ऐसे वहशी, धर्म के नाम पर आतंक फैलाने वालों को भारत की भूमि  में जगह मिलनी चाहिए ? आतंकियों को उकसा कर भारत भेजा जाता है वह जेहाद के लिए जा रहे हो इंसानों का कत्ल करते जेहाद की राह पर शहीद हो जाने पर सीधी जन्नत मिलेगी वहाँ 72 हूरे इंतजार कर रही हैं| पकिस्तान के आतंकवादी आका अपने उद्देश्य में सफल हो गये | क्यों न शवों की अंतिम क्रिया विद्युत् शव गृह दाह में की जाये | उन्हें जन्नत का ख़्वाब दिखाया था वह अधूरा अधर में लटका रह जाता इस्लाम के अनुसार वह जन्नत से महरूम रह जाते | फ़ारसी में पिदर सुकते गाली है अर्थात तेरा बाप जले काफिर जलते हैं | जन्नत का ख़्वाब आतंक का रास्ता अपनाने वाले और बेटों के कृत्य को शहादत का नाम दे कर गर्वित होने वाले माता पिता वलीमा खिलाते हैं उनकी भी रूह कांप जाती | फिदायीन बनाये गये आतंकी डर जाते मर जाने पर उनके शव को उनका देश लेने से मना कर देता है उनके लिए जन्नत का दरवाजा दुश्मन मुल्क बंद कर रहा है जेहादी विचलित हो जाते| हाँ दुश्मन सेना के वर्दी धारी की मरने के बाद उचित ढंग से अंतिम क्रिया होनी चाहिए क्योंकि वह अपने देश के लिए लड़ा था उसका इज्जत के साथ अंतिम संस्कार इंसानियत का कानून है |

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इस्लाम में मान्यता है महिलाओं के हाथों मारे जाने वालों को जन्नत नहीं मिलती आईएसआईएस के जुल्मों के  शिकार होने के बाद खुर्दों ने इनसे लड़ने के लिए लेडी ब्रिगेड बनाई परिवार की जिम्मेदारियों से बाहर निकल कर बुलेट प्रूफ जैकेट पहने और हाथ में खौफनाक हथियार लेकर लेडी ब्रिगेड की दुनिया भर के लिए एक विस्मय और अचरज की कहानी बन चुकी हैं, ईराक और सीरिया में खुर्द लेडी फाइटरों को अपनी तरफ आता देखकर ही आतंकवादी भागते हैं| आतंकवादियों को लगता है अगर वो इन औरतों के हाथों मारे गए, जन्नत से मरहूम रह जायेंगे | उन्होंने भी इन महिलाओं से लड़ने के लिए महिला ब्रिगेड बनाने की कोशिश की है लेकिन यह जांबाज औरतें धर्म भीरुओं पर भारी हैं| क्या उनकी इस सोच का हम लाभ नहीं उठा सकते|

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
September 26, 2016

आदरणीया डॉ. शोभा जी, अन्य सुझावों के साथ आपका दिया गया महिला ब्रिगेड का सुझाव भी सराहनीय है. हमारी सरकार को अवश्य ऐसे कदम उठाने चाहिए. हाल में कश्मीर में सेना में भर्ती के लिए जो कैंप लगाए गए थे उनमे काफी महिलाओं ने भी रूचि दिखाई थी. हमें उन्हें प्रोत्साहन देना ही चाहिए. महिलाएं अब किसी से कम नहीं हैं. आपके आलेख सदा पूर्ण और समाधान के साथ रहते हैं आपका अभिनन्दन !

Shobha के द्वारा
September 27, 2016

श्री जवाहर जी खुर्द मलीशिया में महिलाएं बहुत हिम्मती होती हैं ईराक और सीरिया में इस्लामिक स्टेट वालों के जुल्मों के विरोध में 10000 महिलाएं लड़ाका सक्रिय हैं इन्होने बगदादी के आतंकियों को नाको चने चबवा दिए मैने एक और भी सुझाव लिखा था | लेख पढने के लिए अतिशय धन्यवाद

rameshagarwal के द्वारा
September 27, 2016

जय श्री राम शोभाजी  आपका विस्तृत  लेख पढ़ा आप बहुत आची तरह अपनी बात रखती है अब समय आ गया जब पकिस्तान को सबक सिखाना है.कल सुष्माजी का संयुक्त राष्ट्र संघ में भाषण बहुत अच्छा था खूब कवाब दियायुद्ध के पहले नदियो का पानी बंद कर दे,सभी तरह के सम्बन्ध तोड़ दे,अपने स्पेस से पाकिस्तानी हवाई जहाज़ प्रतिबंधित कर दे,बस रेल सेवा बंद कर विशिष राष्ट्र दर्ज़ा रद्द कर दे संसद से पाकिस्तानी को आतंकवादी राष्ट्र घोषित कर फिर दुसरे राष्ट्र को भी ऐसा करने के लिए परित करे.महिला ब्रिगेड तो हमारी सेना ने शुरू की है कश्मीर में भी लोग आ रहे है.जब पूरा देश आक्रोशित है अब भी कांग्रेस,जद(यू) शिव सेना राजनीती कर रहे है.कुछ लोग अभी भी बातचीत की बात करते ऐसे लोगो की निंदा करनी चाइये.सुन्दर लेख के लिए बधाई.

Shobha के द्वारा
September 28, 2016

श्री रमेश जी आप कितने पाकिस्तान के प्रति क्रोध में हैं आपके विचारों से पता चलता है केवल नदी का उतना पानी जितना उनका अधिकार है पहले हम लेंगे फिर देंगे पाकिस्तान की जान निकल जायेगी नेहरु जी ने जम कर दरियादिली दिखाई थी परन्तु इससे हमारा अधिकार कम नहीं हो जाता |पाकिस्तान कितना भी एटमी ताकत बन जाये उसे पता है वह खत्म हो जाएगा आखिरात के लिए भी नहीं बचेगा |वही रह जायेंगे जो विदेशों में हैं

Megha के द्वारा
September 29, 2016

बहुत ही अच्छा लेख शोभा जी

Shobha के द्वारा
September 29, 2016

धन्यवाद मेघा जी

Anjana Bhagi के द्वारा
October 3, 2016

 प्रिय शोभा महिला ब्रिगेड की हिम्मत पढ़ के बहुत अच्छा लगा एक महिला लड़ाका नें 100 इस्लामिक स्टेट के लडाके मारे थे बाद में शहीद हुई

sangeetasinghbhavna के द्वारा
October 3, 2016

सराहनीय सुझाव

Shobha के द्वारा
October 3, 2016

प्रिय अंजना जी जब देश पर संकट आता है हर नागरिक का कर्त्तव्य है वह अपने देश के लिए अच्छे नागरिक का फर्ज अदा करे लेख पढने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
October 3, 2016

प्रिय संगीता जी लेख पढने के लिए अतिशय धन्यवाद

अभिजात के द्वारा
October 5, 2016

 आदरणीय शोभा जी आतंकवादी कभी हमारे लिए सहृदय नहीं रहे वह हमारे लिए मौत लेकर आते हैं हमारी सेना पर छुप पर हमला करते हैं हम उन्हें सम्मानीय ढंग से अपनी धरती पर दफनाते हैं यह हम हमारी समझ में नहीं आता कहते हैं मृत से घृणा मत करो लेकिन जब आतंकवादी ज़िंदा था उसके इरादे कितने घृणित थे

Shobha के द्वारा
October 6, 2016

प्रिय अभिजात भारत की संस्कृति में संवेदन शीलता है हम पापी से नहीं उसके पाप से घृणा करते हैं |पाकिस्तान हमारा दुश्मन है फिर भी हम अच्छे पड़ोसी की तरह उसके साथ रहना चाहते हैं |

sadguruji के द्वारा
October 9, 2016

अच्छा लेख और महिला ब्रिगेड बनाने का बहुत अच्छा सुझाव ! आतंकियों की धर्मभीरु सोच का लाभ उठाना चाहिए ! वैसे भी ये लोग जन्नत नहीं बल्कि जहन्नुम जाने के लायक ही हैं ! अच्छी प्रस्तुति हेतु हार्दिक आभार !

Shobha के द्वारा
October 11, 2016

श्री आदरणीय सद्गुरु जी खुर्द महिलाये बहुत बहादुर होती हैं उनकी ब्रिगेड जब इस्लामिक स्टेट के आतंकियों को चैलेंज करती हैं वह भागते हैं उन्होंने पहली बार उनसे मर्दों के समान टक्कर की हमारी महिलाएं भी कम नहीं है


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