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क्यूबा के जननायक,साम्यवादी, तानाशाह पूर्व राष्ट्रपति फिदेल कास्त्रो

Posted On: 30 Nov, 2016 Junction Forum,Politics,Social Issues में

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फिदेल कास्त्रो क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति , जननायक तानाशाह साम्यवादी नेता ने शुक्रवार रात 25 नवम्बर   2016, ने सदैव के लिए आँखें मूंद ली | जहाँ से अमेरिका की सीमा खत्म होती है लगभग वहीं छोटा सा द्वीप है क्यूबा जिनका मुख्य व्यवसाय गन्ने की खेती है 1926 अगस्त 13 को स्पेनिश प्रवासी धनिक किसान के घर जन्में कास्त्रो  कुशाघ्र थे लेकिन उनका मन खेल कूद में अधिक लगता था |अपनी ग्रेजुएशन की पढाई पूरी करने के बाद यूनिवर्सिटी आफ हवाना के ला स्कूल में उन्होंने एडमिशन लिया यहाँ उनकी विचार धारा पूरी तरह पूंजीवाद के खिलाफ मार्क्स वाद से प्रभावित समाज वादी होती गयी | अब उनका पूरी तरह रुझान राजनीति में था |फिदेल कास्त्रो ने कई साथियों के साथ 1956 में एक असफल क्रांति लाने का प्रयत्न किया यह क्रान्ति अमेरिकन समर्थित तानाशाह फुल्जेसियो बतिस्ता के खिलाफ थी उनके अन्य साथी मारे गये लेकिन वह पकड़े गये उन्हें 15 वर्ष कारावास की सजा दी गयी लेकिन एक समझौते के अंर्तगत उन्हें छोड़ दिया गया| अबकी बार 1959 मे  सफल हिंसक क्रांति का नेतृत्व कर उन्होंने भ्रष्ट तानाशाह बतिस्ता के हाथों से सत्ता हथिया ली और क्यूबा के प्रधान मंत्री बने | क्यूबा में दमन चक्र की भी शुरुआत हुई जनता के मौलिक अधिकारों में प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर रोक लगा दी विरोधियों को जेल में बंद कर दिया, कट्टर विरोधियों को मृत्यू दंड दे दिया| यही नहीं अमेरिकन स्वामित्व वाले उद्योगों तेल रिफाइनरियों,कारखानों कैसिनों का बिना मुआवजा दिये राष्ट्रीय करण कर दिया | निजी व्यापार समाप्त कर दिए वह समाजवादी व्यवस्था के कट्टर समर्थक थे, पक्ष में लम्बे भाषण देते थे उनका खुला चैलेंज था विश्व का कोई भी देश ऐसा नहीं है जहाँ पूंजी वादी व्यवस्था को सफल होते देखा जा सके उनका नारा था समाजवाद या मौत |अब कास्त्रो के अनुसार कानून की दृष्टि से सभी समान हैं | ग्रामीण क्षेत्रों के उत्थान के लिये बिजली की सुविधा और पूर्ण रोजगार देने की कोशिश की सबके लिए शिक्षा ,आज क्यूबा में लगभग सभी शिक्षित हैं सबके लिए उत्तम चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था की  लेकिन पेशेवर टेक्नीशियन डाक्टर क्यूबा छोड़ कर यू एस पलायन करने लगे प्रतिभा का पलायन देश की तरक्की के लिए ठीक नहीं था | कास्त्रो के खिलाफ अमेरिकन राष्ट्रपति आईजनहावर ने 1960 में 1400 क्यूबन की भर्ती कर उनको सैन्य प्रशिक्षण देकर कास्त्रो को जड़ से उखाड़ने की कोशिश की लेकिन कास्त्रो ने मई 1960 में अमेरिकन रुख को भांप कर सोवियत संघ के साथ राजनयिक संबंधों की स्थापना की, अमेरिका के लिए अवमानना जाहिर करते हुए कास्त्रो ने कई मार्क्सवादी-लेनिनवादी राज्यों के साथ संबंध बनाये संयुक्त राज्य अमेरिका ने चीनी के आयात पर रोक लगा कर क्यूबा की अर्थव्यवस्था को हानि पहुँचाने की कोशिश की लेकिन सोवियत संघ क्यूबा की  80 प्रतिशत चीनी खरीदने के लिए सहमत हो गये । चीनी का  निर्यात सोवियत रशिया में होता रहा है  हैरानी की बात हैं इतनी दूर चीनी का निर्यात जबकि अमेरिका पास पड़ता है सोवियत यूनियन ने दूर से महंगा पड़ने पर भी चीनी का निर्यात कर क्यूबा की आर्थिक स्थिति को बरकरार रखा आयल का आयात भी होता रहा कैस्ट्रो ने टूरिज्म को भी बढावा दिया अमेरिकन और अफ़्रीकी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए क्यूबा की प्राकृतिक सुन्दरता के विज्ञापन दिये |

कैस्ट्रो और चे ग्वेरा अपने समय के गुरिल्ला युद्ध हीरो थे| चे गवेरा अर्जेन्टीना के मार्क्सवादी क्रांतिकारी ने क्यूबा की तख्ता पलट क्रांति में मुख्य भूमिका निभाई थी यह डाक्टर थे अपनी क्रांति को आगे बढ़ते हुए बोल्वियन सिपाहियों द्वारा पकड़ लिए गये इन्हें मृत्युदंड दिया गया उनका म्यूजियम सांता कलारा क्यूबा में बनाया गया गया है उन्हें गुरिल्ला हीरो से भी सम्मानित किया गया है| राष्ट्रपति कनेडी ने जनवरी में सत्ता ग्रहण करने से पहले कास्त्रो के खिलाफ बनाये प्लान को सहमती दी उनके अनुसार कास्त्रो लैट्रिन अमेरिकन देशों के लिए भी खतरा है यदि उन्हें रोका नहीं गया वह धीरेधीरे सब- को अपने प्रभाव में लेगें  इसलिए सीआईए द्वारा ऐसा प्लान बनाया गया जिसमें  निर्वासित प्रशिक्षित क्यूबन कास्त्रो का तख्ता पलट करेंगे | 17 अप्रैल 1961 में ‘बे आफ पिग’ में दो दिन संघर्ष हुआ कास्त्रो नेतृत्व में क्यूबा की सेनाओं ने जीत  हासिल की |कास्त्रो की हत्या के अनेक प्रयास हुए लेकिन वह सदैव बच निकले |

क्यूबा पर फ़ूड आईटम और चिकित्सा सम्बन्धी जरूरत के सामान के अलावा अन्य वस्तुओं के आयात पर रोक लगा दी | राष्ट्रपति कनेडी ने सत्ता सम्भालने के बाद फरवरी में ट्रेड एम्बार्गो और भी सख्त कर दिये | फल, फाइबर,, खाल, कच्चा तेल, उर्वरक, औद्योगिक माल, और एक  100 मिलियन डालर का ऋण सोवियत लैंड ने दिया | कास्त्रो ने ओने कार्यकाल में 10 प्रभावशाली अमेरिकन राष्ट्रपतियों का कार्यकाल देखा उनकी मौनोपोली को टक्कर दी है ।  कभी उनके प्रभाव में नहीं आये एक समय ऐसा भी आया जब कास्त्रो के क्यूबा में अमेरिका के लिए रशिया से परमाणु मिसाइलें लगा दीं लेकिन अमेरिकन राष्ट्रपति कनेडी अड़ गये विश्व में  परमाणु युद्ध का खतरा मंडराने लगा अक्तूबर 1962 शीत युद्ध तृतीय विश्व युद्ध में न बदल जाए सोवियत संघ के प्रधानमन्त्री ख्रुश्चेव ने समझदारी का फैसला लेते हुए मिसाइलें वापस हटा ली जबकि फिदेल कास्त्रो अमेरिका के विरोध में मिसाईल हटवाना नहीं चाहते थे लेकिन क्यूबा पर हमला न करने का बचन लिया पहली बार दुनिया ने जाना यह दोनों शक्तिया कितनी भी बड़ी बातें करें लेकिन परमाणु युद्ध में विश्व को कभी नहीं झोंकेगीं अभी जापान के हिरोशिमा नागासाकी की बर्बादी की याद बाकी थी |1976 में  क्यूबा की नेशनल असेम्बली ने उन्हें राष्ट्रपति चुना| कास्त्रो अधिकतर आर्मी की वर्दी में दिखयी देते थे क्यूबा का सिगार उनकी पहचान बना परन्तु उन्होंने सिगार पीना छोड़ दिया था | अपनी बात पर सहमत कराने के लिए वह लम्बे भाषण भी देते थे |

1990 में सोवियत संघ का विघटन होने लगा पूर्वी योरोप के देश रशिया से अलग होते रहे लेकिन क्यूबा एकमात्र देश है यहाँ कम्युनिज्म बना रहा | रशिया के विघटन के बाद क्यूबा की स्थिति दयनीय हो गयी ऐसे समय में भारत के कम्युनिस्ट कामरेडों ने क्यूबा को दस हजार टन गेहूं और 10.000 टिकिया साबुन की मदद भेजी उस समय की बड़ी मदद थी कास्त्रो नेहरु जी से बहुत प्रभावित थे उनके मन में उनकी बेटी प्रधान मंत्री इंदिरा जी के लिए भी बहुत सम्मान था| 1983 में नई दिल्ली में गुटनिरपेक्ष सम्मेलन इंदिरा जी के नेतृत्व में भारत में हो रहा था उसकी अध्यक्षा इंदिरा जी को उन्होंने मंच पर गले लगा लिया इंदिरा जी झेंप गयी परन्तु उनके इस गेस्चर का सभी ने ताली बजा कर स्वागत किया |

उनका स्वास्थ्य खराब रहने लगा 24 फरवरी 2008 को पीपल्स पावर की नेशनल असेम्बली उनके छोटे भाई राउल कास्त्रो को उनका उतराधिकारी चुना |उन्होंने सत्ता अपने छोटे भाई , उनका क्रांति का साथी था सौंप दी |

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
December 1, 2016

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! बहुत अच्छा लेख ! सादर अभिनन्दन और हार्दिक बधाई ! क्यूबा के तानाशाह फिदेल कास्त्रो ने अपने देश और दुनिया के लिए एक तरफ जहाँ कुछ अच्छे और अविस्मरणीय कार्य किये, वहीँ दूसरी तरफ 35000 से भी ज्यादा महिलाओं का यौन शोषण भी किया ! बेहद विवादित नेता रहे ! ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति और सद्गति दें ! अच्छी प्रस्तुति हेतु सादर आभार !

JITENDRA HANUMAN PRASAD AGARWAL के द्वारा
December 2, 2016

अति सुंदर लेख माता श्री !

Shobha के द्वारा
December 4, 2016

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपको लेख पसंद आया धन्यवाद कास्त्रो डिक्टेटर था महिलाओं के विषय में उसका नजरिया अच्छा नहीं था सत्ता का वह मुख्य केंद बिन्दू था वैसा ही था जैसे डिक्टेटर होते हैं

Shobha के द्वारा
December 4, 2016

प्रिय जितेन्द्र लेख पढने पसंद करने पर अतिशय धन्यवाद

ashasahay के द्वारा
December 5, 2016

नमस्कार डॉ. शोभाजी।एक जानकारी भरे लेख के लिए बधाई।यहआपके  लेखों की विशेषता है।

Shobha के द्वारा
December 5, 2016

प्रिय आदरणीय आशाजी लेख पढने पसंद करने के लिए बहुत धन्यवाद

Bhola nath Pal के द्वारा
December 6, 2016

आदरणीय डॉ शोभा जी ! यू पी का समाजबाद समझ नहीं आता .अच्छा लेख …सादर

Shobha के द्वारा
December 7, 2016

श्री भोला नाथ ही लेख पढने के लिए धन्यवाद

achyutamkeshvam के द्वारा
December 11, 2016

महत्वपूर्ण आलेख क्या इन लोगों को क्रांतिकारी कहा जा सकता है

Shobha के द्वारा
December 12, 2016

प्रिय अच्युत जी बिलकुल नहीं हाँ यह लोग कम्यूनिस्ट थे |साम्यवादी क्रांति में विशवास करते थे |


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