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श्री ओबेसी को राष्ट्रीय नेता बनाने पर तुला मीडिया (टी.वी.चैनल )

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पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के जन्म दिन के शुभ अवसर श्री ओबेसी हैदराबाद से तीन बार चुने गये सांसद ने जन सभा को राजनीतिक रंग देते हुए प्रधान मंत्री पर नोट बंदी के सन्दर्भ में अभियोग लगाते हुए कहा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार मुसलमानों को परेशान कर रही है, मुस्लिम इलाकों में नये नोट पहुंच ही नहीं रहे हैं एटीएम खाली हैं आज मुसलमान एक-एक पैसे के लिए तरस रहे हैं उनके इलाकों में न बैंक खोले जाते न उन्हें लोन दिया जाता है |यदि इस मौके पर ‘हजरत पैगम्बर साहब की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते अवसर का सदुपयोग होता’ उन्होंने कहा ‘जैसे आज लोग पैसा लेने के लिए कतारों में लगे हैं ऐसे ही चुनाव में उनके खिलाफ वोट देने के लिए कतारों में मतदाता खड़े होंगें’ नोट बंदी का फैसला जल्दी में लिया गया है इससे अर्थ व्यवस्था डूब जायेगी | सभी विरोधी दल कह रहे हैं अपने एरिया में नेता अपने लोगों को अपने पक्ष में लेने के लिए कुछ भी कहते हैं बड़े सम्मानित दल जिनकी अपनी साख थी वह भी किसी तरह की ब्यान बाजी से परहेज नहीं कर रहे है लेकिन किसी ने नहीं कहा मुस्लिम इलाके मे बैंक नहीं खोले जाते एटीएम में नये नोट नहीं डाले जाते |नये नोटों के लिए सभी  परेशान हैं जबकि काला बाजारियों द्वारा कमिशन देकर नये नोट हासिल किये जा रहे हैं, बड़ी संख्या में वह पकड़े भी जा रहे हैं यदि वह कहते लगता उन्हें देश की चिंता है लेकिन जल्दी ही वह अपने मन्तव्य पर आये मुस्लिमों के हित चिंतक बनने लगे | |बीजेपी के प्रवक्ताओं ने ओबेसी जी के ब्यान पर पलट वार करते हुए कहा पहले नोट बंदी का राजनीतिकरण किया जा रहा था अब सांप्रदायीकरण हो रहा है| बात वहीं खत्म हो जाती लेकिन मीडिया ख़ास कर चैंनल काफी समय से बैंको और एटीएम के बाहर लगी कतारों को दिखाते – दिखाते, काला धन कैसे गुलाबी हो गया किस्से गाते थक गये थे उन्हें चटपटा मसाला मिल गया ओबेसी का कथन सुर्ख़ियों में आ गया  |

प्रिंट मीडिया किसी भी खबर या किसी नेता के कथन को छापते समय ध्यान रखते हैं उसका आशय क्या है| यदि खबर में तथ्य होता है’ उस पर लिखे लेखकों के विचारों को पहले पढ़ते हैं, ध्यान रखा जाता है लेखक बायस तो नहीं है ,अपनी बात लिख कर कोई हित तो नहीं साध रहा तब प्रकाशित करते हैं|यही वजह है अखबारों में बहुत कुछ पढने को मिलता है | इलेक्ट्रोनिक मीडिया, अर्थात अपनी टीआरपी बढ़ाने और अधिक से अधिक विज्ञापन लेने के चक्कर में ‘ऐसे ब्यान जो सनसनी फैला दे’ न्यूज की सुर्खियाँ बनाते हैं उस पर बहस करवाते हैं बात को जिधर ले जाना चाहते हैं उसी दिशा में मोड़ने की कला में भी माहिर हैं |ऐसे ही चैनलों की उपज है ओबेसी जैसे नेता कुछ ऐसा कहो जिसे चैनल ले उड़ें| श्री ओबेसी जानते थे उनकी बात में सनसनी है ,मुस्लिम समाज को भड़काया जा सकता है ‘मुस्लिम जनता भड़केगी या नहीं यह बाद की बात हैं’ लेकिन कोशिश करने में हर्ज ही क्या है ? कुछ चेनलों ने विषय को उठाया बहस शुरू |ओबेसी जी के पास भी आजकल मुद्दा नहीं था यूपी का चुनाव पास आ रहा है वह अपनी भड़काऊ नीति से मुस्लिम समाज में छाना चाहते है मुस्लिम वोट बैंक को अपने पक्ष की में करने की जुगाड़ में लग गये | बिहार चुनाव के समय में भी वह अचानक सक्रिय हो गये थे | मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में अपने उम्मीदवार खड़े किये परन्तु सफल नहीं हुए ,मतदाता समझदार है |

ओबेसी जी चैनलों में चर्चा के लिए हैदराबाद से बुलाये गये उनके विरोध में सत्तारुद्ध दल के नेता को बुला कर बहस करवायी आश्चर्य की बात है मुस्लिम समुदाय को भी इकठ्ठा कर अधिकतर एक ही स्थान पर बिठाया महिलाओं के हिजाब से समझ आ रहा था एक ही कम्युनिटी के लोग है| बहस शुरू हुई श्री ओबेसी भड़काने आते हैं साथ में तथ्य भी लाये बात कुछ और करते हैं प्रमाण कुछ और ऐसा माहोल बन जाता है लोग उत्तेजना में आ जाते हैं भावुक क्षणों में समझ नहीं आता चैनल अपनी टीआरपी के लिए सब कर रहे हैं उत्तेजना से उनका कार्यक्रम चटपटा बनता है वह इतना ही चाहते हैं इससे अधिक होने पर आने वाले मेहमानों पर बुरी तरह झल्लाना हम आगे से नहीं बुलायेंगे जैसे दर्शक अपना हित साधने आये हैं या चाबी से चलने वाले गुड्डे हैं| मुस्लिम समाज भी इन जुगनू की तरह कभी कभार चमकने वाले नेताओं को समझ चुका है वह साफ़ कहते हैं हमारा भला इन नेताओं ने कभी नहीं किया हमें सीढ़ी बना कर सरकार को डरा लेते हैं | उन्हें पता है राष्ट्रीय दल उनके हित चिंतक हैं देश संविधान से चलता हैं संविधान की रक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय हैं | क्या ओबेसी जी ने पहले अपने ही क्षेत्र के अशिक्षित मुस्लिम समाज को जन धन योजना में अकाउंट खोलने के लिए समझाया ,अकाउंट खुलवाने के लिए बैकों तक ले कर गये |सही है मुस्लिम समाज का प्रतिशत जन धन योजना अकाउंट खुलवाने में कम है | कारण अशिक्षा और नासमझी भी हो सकता है |

ओबेसी दो भाई हैं स्वर्गीय सांसद सलाहुद्दीन के बेटे |छोटे भाई अकबरुद्दीन बहुसंख्यक समाज और हिन्दू देवी देवताओं का मजाक उड़ाने में माहिर हैं|  बड़े भाई असदुद्दीन ओबेसी इंग्लैंड से ‘ला’ डिग्री के धारक हैं लम्बा कद आकर्षक व्यक्तित्व, अवध के नबाबों की तरह पहनावा मंझे हुये राजनेता की तरह बात करते हैं अपनी बात में फंस जाने पर प्रश्न पर प्रश्न करते हैं केवल अपनी बात कहते हैं सामने वाले के तर्कों के सामने जल्दी ही पटरी से उतर कर धमकाने वाली भाषा का प्रयोग करते हैं अपने समर्थकों के सामने उनकी जुबान जहर उगलती है |कानून की पढाई की है अत: जम्हूरियत ,न्यायव्यवस्था, संविधान और मौलिक अधिकारों की आड़ लेते हैं हैदराबाद में मजलिसे –ए इत्तेहादुल मुसलमीन का प्रभाव रहा है यह 80 वर्ष पुरानी संस्था है 1957 में संगठन पर ओबेसी परिवार का कब्जा है उन्होंने संगठन के नाम के साथ आल इंडिया जोड़ दिया था | श्री जावेद अख्तर साहब ने राज्यसभा में अपने विदाई भाषण में ओबेसी का नाम लिए बगैर उनके वक्तव्य का जम कर विरोध किया था ‘वह (ओबेसी )किसी भी कीमत पर भारत माता की जय नहीं बोलेंगे’ | जावेद साहब ने सदन में कहा ‘आंध्रप्रदेश में एक शख्स है जिन्हें गुमान हो गया है कि वह राष्ट्रीय नेता हैं जिनकी हैसियत एक शहर या एक मुहल्ले के नेता से अधिक नहीं है उन्होंने कहा भारत माता की जय बोलना मेरा कर्तव्य नहीं अधिकार है|’ तीन बार भारत माता की जय कहा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा इन्हीं ओबेसी साहब को चैनल वाले बहस चटपटी करने के चक्कर में राष्ट्रीय नेता बनाने पर तुले हैं जबकि भारत को वह मेरा देश न मान कर इस देश से सम्बोधित करते हैं | अमेरिकन चैनलों की हर सम्भव कोशिश थी हिलेरी क्लिंटन अमेरिका की राष्ट्रपति बने वह हार गयी, ट्रम्प जीत गये |

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Anil bhagi के द्वारा
December 20, 2016

प्रिय शोभा दी समझ नहीं आता ओबेसी जैसे व्यक्ति को चैनल में डिस्कशन में बुलाते ही क्यों हैं ओबेसी की बातें हीं तनाव से भरी हैं उससे मुकाबला करने के लिए नेता भी क्यों आते हैं

Shobha के द्वारा
December 20, 2016

प्रिय अनिल सनसनी पैदा कर अपने चैनल की टीआरपी बढाने के लिए

rameshagarwal के द्वारा
December 21, 2016

जय श्री राम माननीया शोभा जी आप ने बिलकुल सही फ़रमाया हमारे मीडिया गलत लोगो को ज्यादा महत्व दे रहे अब ओवेसी भटकल और 4 अन्य की फांसी की सजा पर सवाल उठा रहा लोकतंत्र में मर्यादा होती है इसीतरह ममता की हर बात को बड़ा चढ़ कर दिखाते बंगाल में 3 दिन से दंगे हो रहे हिन्दू मारे जा रहे उनके घर जलाये जा रहे मीडिया छुओ बुद्दिजीवी छुओ कोइ अवार्ड वापसी नहीं मीडिया ही विलेन को हीरो बना देता है

Shobha के द्वारा
December 21, 2016

श्री आदरणीय रमेश जी चैनलों का बस चले तो ओबेसी जैसे लीडर को जो भारत को इस देश कहता है बहस के लिए ले आयें उसके कथनों को ग्लोरिफाई करे लेख पढने मेरे विचारों से सहमती जताने का आभार

anjana bhagi के द्वारा
December 22, 2016

सम्पूर्ण लेख पढ़ा चैनल पर ओबेसी जैसे लोग हर समस्या को हिन्दू मुसलमान के चश्में से तोल कर मुस्लिम वोट को अपनी पीछे लाना चाहते हैं पिछले दिनों उन्हें दलितों की भी चिंता थी हैरानी होती है

Shobha के द्वारा
December 22, 2016

सही है अंजना जी राष्ट्रीय नेता में सबके लिए एक सा भाव हो भारत के लिए मेरा देश शब्द का प्रयोग करे लेख पढने के लिए धन्यवाद

Vishnu Mohan के द्वारा
December 23, 2016

ये हमेशा से रहा है. पत्रकारिता के नाम पर सनसनी फैलाकर और लोगो में घृणा भर कर ओवेसी या अब्दुल्लाह जैसे लोगो का महिमा मंडन करना आजकल सबसे कारगर तरीका बन गया है. कभी कन्हैया तो कभी हार्दिक पटेल जैसे लोग इनका टारगेट होते है और इस बात के काफी पैसे भी मिलते है.

Shobha के द्वारा
December 23, 2016

श्री मोहन जी आपका लेख पढ़ा था वहुत अच्छा लगा था आपने मेरा लेख पढ़ा सही लिखा है पत्रकारिता ख़ास कर चैनलों में सनसनी लाने वाली बहसें कराई जा रहीं है जिससे उनकी टीआरपी बढ़े लेख पढने के लिए धन्यवाद

jlsingh के द्वारा
December 24, 2016

आदरणीया शोभा जी, सादर अभिवादन! बड़ी विनम्रता से कहना चाहूँगा, जिस चीज से आपको ऐतराज है आपने उसपर क्यों अपनी कलम चलायी?

Shobha के द्वारा
December 24, 2016

श्री जवाहर जी मैं बुद्धि जीवी वर्ग को बताना चाहती थी किस तरह केवल टीआरपी बढाने के लिए ऐसे लोगों को चैनल वाले अपने उनके किसी भी कथन को लेकर बहस के लिए बुलाते हैं जबकि नेशनल अखबार कभी इन लोगों को भाव नहीं देते जिनमें दैनिक जागरण भी है जिसे हिंदी भाषी बहुत शौक से पढ़ते हैं अंजना ओम कश्यप एंकर थीं आज तक में बहस के दौरान हिन्दू मुस्लिम समाज एकत्रित कर ओबेसी और सम्पत महापात्रा की बहस कराई क्या यह शख्स देश जो भारत को मेरा देश अपना देश नहीं समझता उसे राष्ट्रीय नेता बनाने की कोशिश चैनल करते रहते हैं जबकि मुस्लिम समाज भी इन दो ओबेसीभाईयों को अपना नेता नहीं मानता |लेख पढने के लिए धन्यवाद

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
December 24, 2016

आदरणीय शोभा जी ,एक चिंतनीय सवाल ,किंतु राजनीति मैं यही होता आया है ।चैनल का तो धर्म ही यही है ।लादेन ,जिन्ना , भिंडरवाला ,बनाये जाते रहे हैं । ओम शांति को विचलित लेख

jlsingh के द्वारा
December 25, 2016

आदरणीया शोभा जी, रीडर ब्लॉग पर देख लीजिये, अबकी बार ओबैसी सरकार! यह कौन कर रहा है? यहाँ भी हैकिंग?

Shobha के द्वारा
December 25, 2016

जवाहर जी में भी देख कर हैरान हुई सम्पादक महोदय को ध्यान देना चाहिए में इतनी दुखी हुई बता नहीं सकती यूपी का चुनाव आने वाला है ओबेसी पार्टी हाथ अजमाना चाहती है |यह शख्श भारत को अपना देश नहीं कहता कुछ भी बोलता है और संविधान का नाम लेकर मोलिक अधिकारों की बात करता है

Shobha के द्वारा
December 26, 2016

श्री हरीश जी सही लिखा है आपने इन्हें केवल अपनी टीआरपी बढाने की चिंता रहती है लेख पढने के लिए अतिशय धन्यवाद


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