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उत्तर प्रदेश में नेता जी मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव में चुनावी संघर्ष

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मुलायम सिंह यादव के मजबूत किले में सेंध लग गयी उनके पुत्र प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश ने पिता   के खिलाफ बगावत कर दी| आग धीरे – सुलग रही थी लेकिन ऊपरी मेलमिलाप भी दिखाई दे रहा था लेकिन सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव नेता जी के भाई ने उम्मीदवारों की लिस्ट में 325 उम्मीदवार घोषित किये जिसमें अखिलेश समर्थकों और कई मंत्रियों के नाम के नाम काट दिए लेकिन अभी 78 बाकी थीं जिनपर बातचीत हो सकती थी अखिलेश जी ने भी उम्मीदवारों की लिस्ट बनाई थी और लीक हो गयी उसमें शिवपाल समर्थकों और बाहुबलियों का नाम काटा गया यहाँ तक मुलायम सिंह यादव की छोटी पुत्रवधू लखनऊ छावनी से चुनाव लड़ना चाहती थीं लिस्ट में उनका नाम गायब था परन्तु सीट खाली थी |यह परी कथा नहीं हकीकत है |मुलायम सिंह ने अपने चचेरे भाई रामगोपाल को 6 वर्ष के लिए पार्टी से निकाल दिया उनके छोटे भाई शिवपाल ने एक टाईप किया कागज अपने भाई को पकड़ा दिया उसमें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को भी 6 वर्ष के लिए निकाल दिया|नेता जी ने अपनी महानता और निष्पक्षता का भी बखान किया उन्होंने पार्टी हित में अपने बगावती बेटे को भी नहीं बख्शा |

इतिहास याद आया भारत के मुगल कालीन इतिहास में बादशाह अकबर के जीवन काल में उनके पुत्र जहांगीर ने बगावत की थी जिसे फिल्मों में अनारकली और सलीम की मुहब्बत का जामा पहना दिया | जहांगीर के बड़े पुत्र खुसरो मानसिंह की बेटी जोध बाई से जन्में थे ने विद्रोह किया असफल होने पर पिता के आदेश पर खुसरो की आँखें निकाल दी उसने आखिरी दिन जेल की कालकोठरी में काटे, जहांगीर की मृत्यू के बाद खूर्र्म आगे जा कर शाहजहाँ कहलाये ने भी बगावत की मलकाये हिन्द नूरजहाँ को कैद कर ली गयी उनके अंतिम दिन कश्मीर में बीते और शाहजहाँ की कहानी सभी जानते हैं ओरंगजेब ने पिता को कैद कर लिया लेकिन ओरंगजेब को भी कहाँ चैन मिला अंतिम समय में दक्षिण में वह दम तोड़ रहे थे उनके बगावती पुत्र बहादुरशाह प्रथम और मराठों के जीत के नगाड़े बज ने रहे थे |अंतिम मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर के साथ ही बादशाहत का अंत हो गया | “जिसके हाथ में सत्ता होती है सब उसी का साथ देते हैं|अखिलेश जी के पक्ष में जम कर ड्रामा हुआ रोना गाना, नारे बाजी ,एक कार्यकर्ता इतने जोश में आ गया उसने अपने को आग लगा ली | |अब मुस्लिम वोटों के ठेकेदार आजम खान की बारी थी उन्होंने पिता पुत्र में सुलह कराने की कोशिश की कुनबे और पार्टी के मुखिया नेता जी ने पार्टी से चाचा और उनके भतीजे अर्थात अखिलेश का निलम्बन वापिस ले लिया कहते हैं राजनीति में सब कुछ सम्भव है लेकिन इससे पहले राम गोपाल ने पार्टी का अधिवेशन बुला लिया यह असम्वैधानिक था उन्होंने कहा आपतकालीन स्थिति में सब कुछ सम्भव है सम्मेलन में कार्यकर्ताओं ने अखिलेश जी को अपना समर्थन दिया सारा घड़ा अमर सिंह पर फोड़ा गया जो नेता जी के दिल में बसते थे यही नहीं चाचा शिव पाल को पार्टी से निकालने की शर्त रखी गयी |

अब पार्टी के अध्यक्ष सर्वे सर्वा अखिलेश हैं उनके अनुसार उन्हें 90 प्रतिशत विधायकों का समर्थन हासिल है | भाजपा ने जैसे अपने वयोवृद्ध नेताओं को मार्ग दर्शक का पद दे कर किनारे कर दिया उसी तर्ज पर मुलायम सिंह यादब को भी पथ प्रदर्शक के पद से सम्मानित कर हाशिये पर लगा दिया |अब तो चुनाव चिन्ह भी नहीं बचेगा मुलायम सिंह जी को पार्टी का नाम मिल जाए यह भी सम्भव नहीं है | दोनों पक्ष चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटा चुके हैं |बाप बेटे में सुलह की कोशिशे जारी हैं परन्तु दोनों अड़े हुए हैं |अखिलेश सपा की पुरानी छवि से निकलना चाहते हैं वह विकास और अपनी छवि के मुद्दे पर चुनाव लड़ कर सत्ता हासिल करना चाहते हैं जनता में संदेश देने की कोशिश भी कर रहे हैं वह उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बना देंगे जानते हैं जानते हैं अब विकास  का नारा ही मतदाता को आकर्षित करता है| चुनाव के नजदीक आने पर जम कर घोषणायें और उनका प्रचार किया जिता देने पर कई ईनाम दिए जायेंगे | पहले पिता के आज्ञाकारी पुत्र की छवि दर्शायी सार्वजनिक रूप से पिता की डांट भी मुस्करा कर खायी है, राजनीतिक चिंतक कारणों और आगे क्या होगा का विश्लेषण कर रहे है| प्रदेश में गुंडा राज बढ़ता ही जा रहा है महिलायें असुरक्षित हैं जनता में विरोध की हिम्मत नहीं रही, भय से जीने की आदत पड़ गयी है अखिलेश जी ने मजबूर की छवि बना कर मतदाता तक संदेश दिया सारे गुंडों, अपराधियों  और माफिया किस्म के लोगों को शिवपाल और नेता जी ने संरक्षण दे रखा था |

वैसे मुलायम सिंह भी अपने आप को भ्रष्टाचार मुक्त बेदाग़ कहते हैं उनका दावा है उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी है| मुख्यमंत्री अखिलेश के खिलाफ कोई हवा नहीं है वह अच्छे प्रशासन का दम भरते हैं अपने आप को बेदाग़ मानते हैं | अब कुनबा भी बट गया दिल भी बट गये हैं |बड़े – बड़े कयास लगाये गये अंदर से नेता जी चाहते हैं सपा शिवपाल के साये से निकल जायें अखिलेश की शक्ति बढ़े सुअवसर है अभी नहीं तो कभी नहीं | 1967 में नेता जी ने विधान सभा का चुनाव जीता था तब समाजवाद बनाम लोहियावाद का जमाना था लेकिन अब पूरी राज शाही, देश का सबसे बड़ा राजनीतिक परिवार है | परिवार के अधिकाँश बालिग़ सदस्य नेता हैं चुनाव लड़ते हैं या तो किसी सदन के मेम्बर है या पंचायतों के प्रधान| कोशिश थी कुनबा एक रहे जिससे कितनों का भाग्य बदलेगा नेता जी सच्चे परिवार वादी हैं| एक कहावत याद आती हैं यदि हमारे कुनबे के लोग नहीं मरते लन्दन तक खाट बिछती|  मुख्यमंत्री जी और नेता जी में मीटिंगों का दौर चल रहा हे अखिलेश जी को समाजवाद के नाम पर एकता का पाठ पढाया जा रहा है मिल कर चलोगे वसुंधरा तुम्हारी है राज सुख भोगोगे यदि टूट गये तो मुस्लिम वोट बट जाएगा| अधिकाँश मुस्लिम वोटर नेता जी के साये तले था| बसपा की सुप्रीमों मायावती को सुअवसर जान पड़ा वह मुस्लिम वोटरों को रिझा रहीं है |अगड़ों और ब्राह्मणों की सीटें कम कर मुस्लिम की बढ़ा दीं हैं | सपा ने चुनाव ‘माई’ मुस्लिम ,यादव तथा अन्य जातियों के समीकरण के आधार पर जीता था सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में जाति, धर्म ,समुदाय और भाषा के नाम पर चुनाव लड़ना प्रचार करना  जनप्रतिनिधि कानून के तहत गैर कानूनी माना जाएगा चुनाव कानून की धारा 123 (3 )के दायरे में होगा |लेकिन मायावती जी ने जाति धर्म समुदाय के नाम पर बकायदा प्रेस कांफ्रेंस कर वोटरों को रिझाया उनके पास एक तुरप भी है यदि चुनाव आयोग कार्यवाही करेगा तो दलित कार्ड खेल देंगी जिसमें वह माहिर हैं  वैसे मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए ओबेसी बेताब हैं जिनकी नेताजी ने अब तक दाल नहीं गलने दी थी |अखिलेश जी का कांग्रेस से भी गठ्बन्धन हो सकता है कांग्रेस कमजोर है उसके साथ चुनाव लड़ने के विकल्प खुले हैं |चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी 11 फरवरी से सात चरणों में चुनाव होंगे मोदी जी की रामाबाई स्टेडियम में रेली में आई जबर्दस्त भीड़ से भाजपा भी उत्साहित है |

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

absb के द्वारा
January 10, 2017

श्री मुलायम सिंह यादव ने बड़ी मेहनत समाज वादी पार्टी बनाई थी परिवार को भी समाज में सम्मानित स्थान दिलाया आज उन्हीं के सामने उनके पुत्र ने पार्टी में अपने आप को सर्वेसर्वा बना लिया राजनीती में ऐसा होता होगा अजीब लगता है

ashasahay के द्वारा
January 10, 2017

राजनीति मे बेटे पुत्र की लड़ाई तो होती ही रहती है। ईतिहास की गवाही प्रस्तुत कर  आपने प्रसंग को प्रभावशाली बना दिया है। वैसे यह गृहयुद्ध प्रतीत होता है। सुन्दर विश्लेषण डॉ. शोभा जी। नमस्कार।

Shobha के द्वारा
January 10, 2017

प्रिय आदरणीय आशा जी सही लिखा है आपने पारिवारिक युद्ध है देखते हैं क्या फैसला होता है लेख पढने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
January 10, 2017

सही लिखा है आपने मुलायम सिंह यादव लोहियावादी थे मेहनत से पार्टी को परिवार की पार्टी बना दिया अखिलेश ने अपनी पार्टी परन्तु नाम समाजवादी ही होगा

achyutamkeshvam के द्वारा
January 10, 2017

सदैव की तरह ज्ञानप्रद महत्वपूर्ण आलेख

Shobha के द्वारा
January 11, 2017

प्रिय अच्युत जी लेख पढने पसंद करने के लिए धन्यवाद

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
January 11, 2017

आद्रणीय शोभा जी उत्तरप्रदेश की राजनीति पर बहुत अच्छा लिखा है । मुगल कालीन इतिहास के अच्छे उदहरण पेश किये हैं । यही होता रहा है सत्ता के लिए । वैसे कोई नई बात भी नही । चलिए देखते है आगे होता है क्या ।

Shobha के द्वारा
January 12, 2017

श्री बिष्ट जी सत्ता का यह हाल है चढ़े तो चाखे प्रेम रस गिरे तो चकनाचूर उत्तर प्रदेश की राजनीती देखते हैं किस करवट बैठती है |लेख पढने के लिए धन्यवाद

anjana bhagi के द्वारा
January 14, 2017

प्रिय शोभा दी उत्तर प्रदेश की राजनीती और मुलायम सिंह और अखिलेश यादव जी के झगड़े पर दिलचस्प लेख

Shobha के द्वारा
January 14, 2017

प्रिय अंजना जी आपको पसंद आया धन्यवाद

harirawat के द्वारा
January 28, 2017

शोभाजी नमस्कार ! बेटा बाप के खिलाफ झंडा लेकर खड़ा होगया और फिर अचानक पटाक्षेप बदल गया, पिताजी बेटे के खेमें में आगया छोड़ गए अपने प्रिय भाई शिवपाल सिंह को ! चाहे कोई माने या न माने लेकिन असलियत में ये केवल एक ड्रामा था अखलेश और मुलायम का शिवपाल यादव और अमरसिंह से पीछा छुड़ाने का ! लेख काफी शिक्षाप्रद था !

Shobha के द्वारा
January 31, 2017

श्री रावत जी आप सही समझे थे सब राजनितिक दाव था पूरे समय चैनलों और मीडिया में छाए रहे अंत में दर्शकों को इनके समाचारों से अरूचि हो गयी लेख पढने और पसंद करने के लिए धन्यवाद


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