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समाजवादी पार्टी में टूटन' मुस्लिम वोटर 'दुविधा में 'जाएँ तो जायें कहाँ?'

Posted On: 14 Jan, 2017 में

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समाजवादी पार्टी में दो फाड़ होने से मुस्लिम समाज मुश्किल में है वह किस पक्ष में जायें ? अधिकांश  मुस्लिम उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के साईकिल चुनाव चिन्ह पर मोहर लगाते थे | इन्हें अपना संगठित वोट बैंक बनाने के लिए सपा ने अनेक सब्जबाग दिखाये जैसे 18% आरक्षण, रंगनाथ मिश्रा और सच्चर कमेटी की सिफारिशों को लागू करवाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाब डालेंगे| सच्चर कमेटी के अनुसार आजादी के बाद मुस्लिम समाज की हालत में विशेष सुधार नहीं आया है |उच्च प्रशासनिक सेवाओं में और सरकारी नौकरियों में उनका औसत कम है बच्चों एवं महिलाओं की शिक्षा के प्रति भी समाज उदासीन है उनके लिए आरक्षण के बिना सरकारी नौकरियां पाना सम्भव नहीं है |मुस्लिम समाज के लिए मेडिकल कालेजों में आरक्षण की व्यवस्था के साथ यूनानी पद्धति के दवाखाने खोले जायंगे | मुस्लिम समाज को सरकार से सदैव शिकायत रहती है पुलिस उनके युवकों को झूठे आतंकवाद के आरोपों में फंसा कर जेल में बंद कर देती है | मुलायम सिंह ने उन्हें आश्वस्त किया था नवयुवकों को केवल बरी ही नहीं किया जाएगा उन्हें आर्थिक सहायता देकर रोजगार का अवसर देंगे| मुस्लिम समाज ने वादों पर विश्वास किया था |अब उन्हें सपा से शिकायत है उन्होंने अपने चुनावी वादे पूरे नहीं किये| अखिलेश सरकार के दौरान मुज्जफर नगर में दंगे हुए दोषियों को दंडित करने के बजाय पहले की सरकारों के समान पीड़ितों को मुआवजा दे कर संतुष्ट करने की कोशिश जारी रही | अब जब सपा के दो हिस्से होने जा रहे हैं उनका हितचिंतक होने का दोनों पक्ष दावा करेंगे या कोरे आश्वासन ही दिए जायंगे |

भारत का संविधान लिखित एवं विशाल है जिसके अनुसार देश चलता है| संविधान में मौलिक अधिकारों का वर्णन है अंतिम अधिकार संविधानिक उपचारों का अधिकार है जिसे संविधान निर्माता डॉ अम्बेडकर ने संविधान की आत्मा कहा है अर्थात सर्वोच्च न्यायालय अधिकारों का संरक्षक है| अनुच्छेद 32 के अनुसार बंदी प्रत्यक्षीकरण ,परमादेश ,प्रतिषेध लेख ,उत्प्रेष्ण और अधिकार पृच्छा लेख अर्थात प्रत्येक नागरिक के मौलिक अधिकारों को अतिक्रमण से बचाना| आरक्षण के भी नियम हैं धर्म के आधार पर आरक्षण सम्भव नहीं है |संविधान की किसी भी धारा में परिवर्तन करने के लिए संसद के दोनों सदनों का दो तिहाई बहुमत और आधे से अधिक राज्य विधान सभाओं का बहुमत जरूरी है इसके बिना संबिधान की किसी भी धारा में संशोधन सम्भव नहीं हैं | यदि संविधान का कठोरता से पालन करने का विधान नहीं होता तो संविधान को नेतागण वोट के लिए अपने हिसाब से तोड़ मरोड़ देते जैसे पाकिस्तान में हो रहा है |

आजादी के बाद मुस्लिम समाज शक्ति शाली वोट बैंक बन कर कांग्रेस के पीछे खड़ा था उनकी नेहरू जी में आस्था थी उनके बाद उनकी बेटी इंदिरा जी के पीछे खड़े रहे लेकिन नसबंदी का सख्ती से पालन करवाने के कारण मुस्लिम समाज बिफर गया|अब अन्य दल इस वोट बैंक को लुभाने लगे | अनेक मुस्लिम नेता भी उनका वोट बैंक की तरह इस्तेमाल कर मुस्लिम हितों की चिंता के नाम पर चुनाव लड़े, सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे लेकिन अपने समाज का भला नहीं किया हाँ सत्तारुद्ध दल में अपना प्रभाव बढ़ा कर फायदे उठाते रहे | जब से राज्यों में क्षेत्रीय दलों का महत्व बढ़ा है उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं की समस्याओं को उठा कर अपना प्रभाव बढाया है सत्ता उनके हाथ में आई | संसद में स्पष्ट बहुमत न होने पर क्षेत्रीय दलों के सहयोग से केंद्र में मिली जुली सरकारें बनीं मंत्री पद मिले महत्वकांक्षायें भी बढ़ी जिससे स्थानीय नेता प्रधान मंत्री पद के इच्छुक हो गये | जब से संसद में बहुमत प्राप्त कर मोदी जी की सरकार आई है क्षेत्रीय दलों की महत्वकांक्षा पर कुठारा घात हुआ|

उत्तर प्रदेश में कई सीटों को मुस्लिम वोट बैंक प्रभावित करता हैं|बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने ‘माई’ मुस्लिम और यादव के बल पर लालू 15 वर्ष तक सत्ता सुख भोगा | मुलायन सिंह यादव ने माई के साथ और भी जातीय समीकरण बिठाये जिससे उनके दल को पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ अखिलेश कुमार मुख्यमंत्री बने उन्होंने मुस्लिम हित में कई काम किये लेकिन ‘आरक्षण’ के मामले में वह मजबूर थे |अब सपा में सत्ता का संघर्ष चल रहा है अखिलेश यादव ने अध्यक्ष पद सम्भाल कर मुलायम सिह जी से विनती की वह केवल चुनाव तक अर्थात तीन माह यह पद उनके हाथ में रहनें दे चुनाव जीत कर उन्हें अध्यक्ष पद सौंप देंगे मुलायम अडिग हैं लेकिन उनके साथी उन्हें छोड़ कर सत्ता की तरफ जा चुके हैं |मुस्लिम समाज की समझ में नहीं आ रहा वह क्या किस और जायें उनके सामूहिक वोट चुनाव जीतने में सहायक रहे हैं |मुस्लिम  समाज में फतवे की राजनीति भी चलती है जबकि फतवे का अर्थ ‘राय’ है चुनाव से पहले मौलाना फतवे देते हैं अमुक को वोट दो पढ़े लिखे मुस्लिम को छोड़ कर बाकी समाज फतवों पर गौर करते हैं इसे हुक्म मानते हैं| मुस्लिम क्षेत्रों में प्रभावशाली मुस्लिम नेता कोशिश करते हैं अपने उम्मीदवार खड़े कर उनको एक मुश्त वोट दिलवाया जायें लेकिन आसाम में यह फार्मूला फेल हो गया वहाँ के प्रभावी मुस्लिम नेता की बात किसी ने नहीं सुनी|

सपा के प्रभाव शाली मुस्लिम नेता आजम खान पिता पुत्र में सुलह कराने के लिए लगातार प्रयत्नशील हैं वह जानते हैं उनकी ताकत संगठित वोट बैंक से बचेगी यदि वोट बिखरा उनका महत्व कम हो जायेगा| यह वहीं महाशय हैं दादरी में अख़लाक़ काण्ड पर संयुक्त राष्ट संघ को पत्र लिखा जबकि आरोपियों को सजा देने के मामले में सरकार सख्त थी | क्या उन्हें ज्ञान नहीं है भारत सम्प्रभुता सम्पन्न राष्ट्र है? एक मौलाना साहब तो चैनल में बहस के दौरान कह रहे थे हम तो देश से ऊपर मजहब मानते हैं उन्हें इतना भी नहीं पता था ‘देश है तो मजहब बचता है’ उन्होंने सीरिया ईराक में मुस्लिम शरणार्थियों की हालत नहीं देखी हाँ भारत में कुछ भी कह सकते हैं | पारिवारिक कलह का फायदा बसपा भी लेने की इच्छुक है मायावती का साथ उनके प्रभाव शाली नेता छोड़ कर चले गये यदि मुस्लिम पक्ष उनके साथ आ जाए तो दलित और मुस्लिम के सहारे वह अपना जनाधार मजबूत कर लेंगी |मुस्लिम समाज को अब तक की सबसे अधिक सीटें दी हैं |ओबेसी मुस्लिम हितों के नाम पर कैराना से जनसभा कर सक्रिय हो रहे हैं | अबकी बार मजहबी नेतागीरी न कर हाथ में संविधान की प्रति लेकर मुफलिस समाज के हितों का दम भरा है | वह बहुसंख्यक समाज के खिलाफ जहर उगलते हैं हैरानी हैं मुस्लिम समाज ने उनका जोशीला भाषण सुन कर तालियाँ भी बजायीं लेकिन कभी उनके झांसे में नहीं आये| मोदी जी विकास की राजनीति करते हैं उन्होंने सदैव अपने भाषणों में 125 करोड़ भारत वासी कह कर मतदाता को सम्भोधित किया है लेकिन आधिकांश मुस्लिम उन पर विश्वास करने को तैयार नहीं है|   भारत एक ऐसा गुलदस्ता है जिसमें सभी धर्म जाति और संस्कृति के लोग अपने को सुरक्षित महसूस करते हैं |

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anjana bhagi के द्वारा
January 18, 2017

शोभा दी अब सारी दुविधा खत्म हो गयी अब पिता पुत्र में फैसला हो गया अब मुस्लिम को परेशान होने की जरूरत नहीं है |

Shobha के द्वारा
January 18, 2017

काफी समय से समाजवादी दल में चलने वाला ड्रामा खत्म हो गया आल इज वेल पिता पुत्र में समझौता हो गया अब समझ में आता है झगड़ा ही नहीं था सब कुछ अभिनीत था कोशिश की गयी है अखिलेश सबसे अच्छे हैं उनके संरक्षण में यूपी का विकास होगा आप सब उन्हें ही वोट दें

Shobha के द्वारा
January 19, 2017

प्रिय अंजना जी सही लिखा है आपने| कब से सारे मीडिया में बाप बेटा छाए रहे चुनाव से पहले सुलह कर ली

Anil bhagi के द्वारा
January 20, 2017

प्रिय शोभा जी नॉएडा निवासी हूँ पिछले दिनों मुलायम सिंह जी और अखिलेश का जम कर ड्रामा हुआ अब सब ठीक हो गया अखबारों और चैनल की सुर्खियां भी बनीं सब जानते थे सब कुछ सतही है

Shobha के द्वारा
January 22, 2017

अनिल जी अब तो कांग्रेस से गठ्बन्धन हो रहा है समाजवादी सब एक हैं हाँ पिता पुत्र के अलग होने का जम कर प्रचार हुआ चैनलों में एक ही चर्चा टी

Shobha के द्वारा
January 26, 2017

अबकी बार कोमी एकता दल से अखिलेश जी ने किनारा कर लियी वह अपनी छवि सुधारने के इच्छुक है एक समय था मुस्लिम वोट के लिए सपा ने मुस्लिम को लंबेचौड़े वादे कर लगभग एक मुश्त वोट हासिल करने की कोशिश की थी मायावती जी मुस्लिम वोट को आकर्षित कर रही है समाजवादी पार्टी का ड्रामा काफी समय चला लेकिन सपायी एक हो कर चुनाव लड़ रहे हैं देखना है अबकी बार मुस्लिम किधर वोट देते हैं या वोट बटेंगे उनका लेकिन मुख्तार अंसारी उनके भाई और उनके पुत्र को बहन जी ने टिकट दे दिया

Shobha के द्वारा
February 13, 2017

कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ी सब समाजवादी दल को एक मुश्त वोट देते हैं जबकि मायावती जी ने उन्हें लुभाने की बहुत कोशिश की नोएडा में ज्यादातर वोटर बोत देने के लिए नहीं आया बस ४९.२ % वोटिंग हुई हम सरकारों से कितनी आशाएं करते हैं लेकिन वोटिंग के नाम पर घर से निकलने से कतराते हैं


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