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ट्रिपल तलाक एवं बहुविवाह के खिलाफ मुस्लिम महिलाओं की उठती आवाज अब दबेगी नहीं

Posted On: 20 Jan, 2017 में

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Hijab

भारत में ट्रिपल तलाक एवं बहुविवाह पर बहस छिड़ी है |मौलवी व उलेमाओं ने इसे मौलिक अधिकारों का हनन माना है वह कहते हैं अपने पर्सनल ला में किसी तरह की मदाखलत बर्दाश्त नहीं करेंगे | महिला संगठन तलाक और बहुविवाह का विरोध कर रहे हैं | अनेक महिलाओं ने ट्रिपल तलाक के विरोध में कोर्ट का दरवाजा खटकाया है | कुरान में तलाक का नियम है लेकिन महिलाओं को शर्तों के साथ तलाक का अधिकार दिया गया है वह भी शौहर की इच्छा पर निर्भर है |तलाक का अधिकार प्रमुख रूप से मर्दों को है जिसका विरोध हो रहा है |कुरान में  तलाक का नियम आसान नहीं है इसकी तीन स्टेज हैं पहले महीने मर्द एक तलाक दे, शौहर और बीबी के बीच में दोनों के परिवार बीच बचाव कर समझायें बुझायें यदि राय बदल गयी तलाक वापिस लेकर फिर दोनों साथ रह सकते हैं यदि तलाक वापिस नहीं लिया दूसरा तलाक ,दूसरा महीना, तीसरा तलाक तलाक की तीसरी स्टेज में तीसरे महीने कहा तलाक ,तलाक माना जायेगा तलाक के इस ढंग पर शिया और सुन्नियों में कोई झगड़ा नहीं है लेकिन एक साथ तीन बार शौहर द्वारा तलाक कहने पर मिया बीबी का रिश्ता खत्म होने पर विरोध है यदि फोन पर तीन बार तलाक कह दिया , एसएमएस से तलाक का मेसेज दिया ,पत्र द्वारा तलाक लिख कर भेज दिया, और गुस्से में तलाक ,तलाक तलाक कह दिया रिश्ता खत्म| भारत में  नब्बे प्रतिशत सुन्नी मुस्लिम आबादी है नियम कुछ भी हो शौहर के तीन बार तलाक कहने से मियां बीबी का रिश्ता खत्म मानते हैं | यदि शौहर को लगता है उससे गलती हो गयी तो ‘हलाला’ औरत का फिर से निकाह होगा  दूसरे शौहर के पास रहना पड़ता है वह यदि तलाक दे दे ऐसी स्थित में पहले शौहर से दुबारा निकाह हो सकता है | इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ट्रिपल तलाक के एक केस में अपनी टिप्पणी करते हुए कहा यह महिलाओं के साथ बेइंसाफी है कोई भी पर्सनल ल़ा संविधान से ऊपर नहीं हैं महिलायें मौलानाओं के रहम करम पर नहीं रहेंगी | भारत में मुस्लिम पर्सनल ला के झगड़े की नीव ब्रिटिश काल 1765 में पड़ी अनेक मुस्लिम देशों में  ट्रिपल तलाक के नियमों में परिवर्तन हो रहें है सबसे पहले ईजिप्त ने तलाक को गम्भीरता से लिया था |

शिया समाज के विचारकों के अनुसार उनके यहाँ ट्रिपल तलाक का नियम नहीं है तलाक के लिए शौहर को पहले अदालत में अर्जी देनी पडती है | ईरान में कई वर्ष तक प्रवास के दौरान तलाक और बहुविवाह की परम्परा को पास से जाना वहाँ ऐसा नहीं था शौहर ने गुस्से में आकर तीन बार तलाक कह दिया शादी खत्म उसी क्षण महिला अपने सजाये घर संसार से मरहूम हो गयी उसके अपने बच्चे पराये हो गये |इस्लामिक सरकार से पहले शाह की हकूमत थी उस समय तलाक आसान नहीं था महिला के अधिकार सुरक्षित थे हिजाब अपनी मर्जी पर था लेकिन बहुविवाह का चलन तब भी था | शाह की हकूमत में अदालत में तलाक पर बकायदा बहस होती थी लेकिन इस्लामिक सरकार आने के बाद तलाक थोड़ा आसान हो गया फिर भी तलाक लेने से पहले अदालत में अर्जी देनी पडती है | ईरान में 1986 में बने 12 धाराओं वाले तलाक कानून के अनुसार ही तलाक होता था। 1992 में इस कानून में कुछ संशोधन किए गये लेकिन कोर्ट की अनुमति से ही शिया और सुन्नी समाज में तलाक सम्भव है। कट्‍टरपंथी समझे जाने वाले ईरान में भी झगड़े निपटाने के लिए पारिवारिक अदालतें हैं |काजी की अदालत में पति पत्नी का जोड़ा पेश होता है उनकी शिकायतें सुनने के बाद काजी अपना फरमान सुनाते हैं जाओं खानम तुम आजाद हो गयी| वहाँ भीं महिलाओं को यह फरमान नापसंद था वह अक्सर कहती थी शादी करो परन्तु शौहर से दिलो जान से मुहब्बत मत करो दर्द मिलेगा घर छूटते समय तकलीफ होगी |

हाँ बहुविवाह का चलन था रईस मोटी मेहर देकर खूबसूरत लड़कियों से शादी करते थे |जिसकी जितनी इनकम उतनी ही आकर्षक बीबी और कई बीबियाँ| मेहर की रकम अधिकतर सोने के सिक्कों की शक्ल में शादी के समय दी जाती है उधार कम ही चलता है| शादी की दावत शौहर की तरफ से दी जाती थी एक तरह से शादी का रिसेप्शन समझ लें| पुरुष विवाह से पहले पैसा इकठ्ठा करते थे तब शादी के विषय में सोच सकते थे विवाह के बाद माता पिता से उनके सम्बन्ध औपचारिक मात्र ही रह जाते थे | तलाकशुदा की मेहर अधिक नहीं होती थी कम आमदनी वाले उनसे विवाह कर अपना घर बसा लेते थे परन्तु मन में हसरत रह जाती थी काश वह अनब्याही से विवाह कर सकते | दूसरी शादी के लिए पत्नी से इजाजत का नियम था लेकिन वह विरोध नहीं कर सकती थी इसे धर्म का जामा पहना दिया जाता |कभी भी दूसरी खानम लायी जा सकती है इसलिए महिलायें बहुत खर्चीली थीं |इस्लामिक सरकार आने के बाद जनसंख्या भी बढ़ी यदि किसी मर्द के अधिक बच्चे हैं उसको दूसरी बीबी बढ़िया नहीं मिलती थी | ईराक ईरान युद्ध में एक मिलियन लोग मरे जनसंख्या दो मिलियन बढ़ गयी थी आगे जाकर जनसंख्या नियंत्रित करनी पड़ी |लोग अपने घर बुलाते थे प्यार से कहते थे हमारे घर आईये उसका अर्थ अपना सजा घर दिखाना और बताना उसकी पत्नी कितनी सुंदर सलीकेदार है यही स्टेट्स सिम्बल था |कई बार बाजरों में अलग ही नजारा नजर आता था शौहर दूसरी खानम से निकाह कर लाया पहली पत्नी मजबूर है उसे समझौता कर गुजारा करना है तलाक की सूरत में बच्चे छूट जायेंगे |इस्लाम के अनुसार सभी पत्नियों से समान व्यवहार करना जरूरी है शौहर दोनों पत्नियों को लेकर घूमने निकलता कम उम्र की नई पत्नी आगे थोड़ा गुस्से में मुहँ फुला कर चलती थी और पहली खानम शौहर के पीछे चलती एक बार नई नवेली को मनाता ‘तुम मेरा प्यार हो’ की दुहाई देता फिर थोड़ा पीछे हो कर पहली पत्नी की तरफ मुस्करा कर देखता वह बेचारी उससे भी अधिक मुस्कराती थी|

बड़े घरों में अपार्टमेंट की कई मंजिलें थीं हरेक में अलग-अलग पत्नियाँ अपने बच्चों के साथ रहती थी उन सबके बच्चे अपने पिता की पत्नियों को माँ नहीं कहते थे| पिदर जन (पिता की औरत| सौतेले भाई बहनों को पिदर जन बच्चहा  (पिता की औरत के बच्चे )कहते | गावों, कस्बों में देखने को मिला कम उम्र की लडकी किसी बड़ी उम्र के मर्द को ब्याह दी जाती जल्दी ही तलाक हो जाता कैसे? मेहर में मोटी रकम मिलती थी तलाक हो जाने पर दुबारा शादी में लड़की के योग्य वर तलाशते | ऐसी लड़किया बहुत दुःख से कहती थी हमारी माँ को ‘सोना’ प्यारा था | सूना था इराक में सद्दाम के समय यदि शौहर दूसरा ब्याह करता था या पत्नी को तलाक देता था सरकार महिला का ध्यान रखती थी | भारत में कई ऐसे विषय कोर्ट में आये जरा सी बात पर पत्नी को घर से बाहर का रास्ता दिखा दिया कारण इतने छोटे हैं हैरानी होती है तलाक को धर्म की आड़ में जायज ठहराया जाता है |इस्लाम में कुरान को अल्लाह की जुबान मानते हैं , व्याख्या हदीस में दी गयी है सामाजिक नियमों के लिए शरीयत है |उलेमा तर्क देते हैं हमारे यहाँ शादी पति और पत्नी के बीच जन्म जन्मान्तर का बंधन नहीं है एक पक्का समझौता है हाँ जिसे अंत तक निभाना चाहिए | हमारे यहाँ औरत को बहुत अधिकार दिए गये हैं जैसे विधवा विवाह स्वयम पैगम्बर साहब ने अपने से बड़ी उम्र की विधवा हजरत खजीजा से विवाह किया था पैतृक सम्पत्ति में अधिकार है |विशेष परिस्थितियों में औरत को भी तलाक का हक है |भारतीय मुस्लिम महिलायें खुले तौर पर हिजाब का विरोध नहीं करती हैं लेकिन ट्रिपल तलाक और बहुविवाह के खिलाफ है पढ़ा लिखा मुस्लिम समाज भी उनके साथ है सब चाहते है सुप्रीम कोर्ट से जो भी फैसला आये उसको मानना चाहिए जब निकाह काजी और गवाहों की उपस्थिति में होते हैं तो तलाक भी सम्मानित लोगों की उपस्थिति में नियमानुसार क्यों न  हो ? जिसके लिए उलेमा किसी भी तरह तैयार नहीं हैं उनको लगता है इससे उनके अधिकार और महत्व कम हो जायेंगे|

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Anil bhagi के द्वारा
January 20, 2017

सही लिखा है आपने महिला को तीन बार तलाक कह कर घर से बाहर कर दिया जाता है इस लिए घर टूट न जाए वह डरती रहती हैं और यदि महिला तलाक देना चाहे तो की शर्तें हैं

Shobha के द्वारा
January 20, 2017

इस्लामिक विचारक अक्सर तर्क देते हैं हिन्दुओं में तलाक शुदा स्त्रियाँ अधिक हैं वह भूल जाते हैं मुस्लिम औरत के लिए तलाक लेना कितना मुश्किल है इसे ख़ुलअ कहते हैं अगर औरत को लगता है कि वो शादीशुदा जिंदगी की जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर सकती है या मर्द के साथ उसका निबाह नहीं हो सकता है तो वो अलग होने के लिए औरत को मैहर वापस देनी होगी. और उसके बदले मर्द उसे तलाक दे देगा. यहां भी एक पेंच है अगर मर्द राजी नहीं हुआ तो ‘खुलअ’ नहीं हो पाएगा. तो फ़स्ख़-ए-निकाह औरत को इस्लामी अदालत या मुस्लिम काज़ी की मदद लेनी होगी. इस तरीके में औरत को काजी के सामने निकाह तोड़ने की मुनासिब वजहें साबित करने होगी. जैसे मर्द नामर्द है, खाना खर्चा नहीं देता. बुरा बर्ताव करता है, शौहर लापता है, पागल हो गया है आदि… काज़ी मामले की जांच पड़ताल करेगा. अगर काज़ी को लगता है कि वजहें सही हैं तो वो खुद ही औरत का निकाह काजी खत्म करेगा | अन्य समाज में स्त्री पुरुष दोनों को कोर्ट का दरवाजा खटकाने और अपने हक की लड़ाई लड़ने का अधिकार है कई बार शर्तों के साथ महिला कोर्ट के संरक्ष्ण में फिर से अपने पति के घर लौट सकती है |

Noopur के द्वारा
January 21, 2017

शोभा जी आके विचार बहुत अच्छे है .आपने मुस्लिम महिलायों की दुर्दशा का अपने लेख में बिलकुल सही खाक के बनाया है .इसको मुसिम समाज को सुधरने की जरूरत है लेकिन मुस्लिम समाज ये मानने को तैयार ही नहीं होता है की उसके यंहा महिलयों के साथ गलत बेहेवियर होता है.

Noopur के द्वारा
January 21, 2017

शोभा जी माफ़ कीजियेगा आपके लेख के लिए मैंने जो कमेंट लिखा है उसमे गलती से ख़ाका की जगह ख़ाक हो गया है

Shobha के द्वारा
January 22, 2017

प्रिय नूपुर जी आपने लेख पढ़ा पसंद किया अपनी प्रतिक्रिया दी मेरे लिए ख़ुशी की बात है |

sadguruji के द्वारा
January 22, 2017

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी. मुस्लिम महिलाओं की ज्वलन्त समस्या पर विस्तृत चर्चा के लिए सादर अभिनन्दन. अब तो लेख पढ़ना मुश्किल हो गया है. कम्प्यूटर की लगभग आधी स्क्रीन नीली पट्टी से ढक दी गई है. ये प्रयोग सही नहीं है. इसे हटा देना चाहिए.

Shobha के द्वारा
January 22, 2017

श्रे आदरणीय सद्गुरु जी मुस्लिम समाज में महिलाओं के लेकर मुल्ला उलेमा तर्क देते हैं हिन्दू समाज में तलाक अधिक हो रहे हैं भारत में हर धर्मावलम्बी महिला समाज को कोर्ट में तलाक के प्रश्न पर कोर्ट में जाने का अधिकार हैं मुस्लिम महिलाओं के लिए अनेक शर्ते धर्म के सहारे डाली गयीं है महिलाओं को हिजाब तक तो ठीक है लेकिन तलाक और बहुविवाह ?दैनिक जागरण की उदासीनता मेरी भी समझ से बाहर है लेख पढने और पसंद करने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
January 22, 2017

प्रिय नूपुर आपको मेरा लेख पसंद धन्यवाद आया महिलाओं को समाज में महिलाओं की समस्याओं को उठाना चाहिए तभी बुद्धिजीवी पाठक का ध्यान आकर्षित होगा

Shobha के द्वारा
January 22, 2017

अनिल जी जो मुस्लिम समाज से हिले मिले हैं नको यह समस्या अच्छी तरह समझ आती है मुस्लिम समाज कितना भी मुस्लिम महिलाओं को दिए अधिकारों की बात करे लेकिन ट्रिपल तलाक चिताजनक है

yamunapathak के द्वारा
January 31, 2017

आदरणीय शोभा जी सादर नमस्कार बहुत ही विस्तार पूर्वक आपने इस विषय पर चर्चा की है . साभार

Shobha के द्वारा
January 31, 2017

प्रिय यमुना जी लेख पढने के लिए धन्यवाद आप आजकल कम लिखती है आपके विचार पढने के लिए आतुर रहती हूँ

Shahid Naqvi के द्वारा
February 17, 2017

शोभा मैम बीमारी के कारण मै मंच से बाहर था । आपने तीन तलाक पर बहुत अच्छा लेख लिखा है। आप से मै सहमत हँ। अच्छेे और साफ सुथरे लेखन के लिये आपका आभार। ॆ

Shahid Naqvi के द्वारा
February 17, 2017

शोभा मैम बीमारी के कारण मै मंच से बाहर था । आपने तीन तलाक पर बहुत अच्छा लेख लिखा है। आप से मै सहमत हँ। अच्छेे और साफ सुथरे लेखन के लिये आपका आभार।

Shobha के द्वारा
February 18, 2017

श्री शाहिद जी लेख आपको पसंद आया धन्यवाद मैने अपने नजरिये से जो समझा लिख दिया भारत में जो हदीस में तलाक का तरीका दिया गया है उसको मानने पर तलाक कम हो जायेंगे परन्तु यहाँ मोलाना तर्क लाते है यदि तीन बार तलाक कह दिया हो गया | लेख पढने पसंद करने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
February 18, 2017

. श्री शाहिद जी आशा अब आप स्वस्थ होंगे अब आपके लेख पढने के लिए मिलेंगे




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