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‘महिलायें संगठित वोट बैंक बन कर देंखे’ मताधिकार का सही प्रयोग करें

Posted On: 24 Jan, 2017 में

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mahila चुनाव का सीजन चल रहा है देश का पहला चुनाव हुआ महिलायें गाती बजाती वोट देने आयीं| अधिकतर पढना लिखना नहीं जानती थीं केवल चुनाव चिन्ह को समझती थीं सास और बहू दोनों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया लेकिन  घूँघट उठा कर बहू का वोट देना सास को गवांरा नहीं था| महिला और पुरुष दोनों के वोट का मूल्य समान है | क्या मताधिकार का महिलाएं पूरी तरह उपयोग कर सकती हैं ?परिवार का जिधर रूझान होता है महिलायें उसी को वोट दे देती हैं |महिलाओं की सुरक्षित सीटें हैं चुनाव प्रचार के पम्पलेट पर महिला उम्मीदवार से भी बड़ा उसके पति का चित्र और परिचय होता है महिलाओं के लिए सुरक्षित कई पंचायतों में सरपंच के आसन पर पति महोदय आसीन दिखाई देते हैं पत्नी से केवल कागजात पर दस्तखत करवाए जाते हैं | महिला को घर सम्भालने का आदेश दिया जाता है| शिक्षा ने महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया है लेकिन एक सीमा तक | मुस्लिम समाज के वोट बैंक की तरह इस्तेमाल होते हैं उनकी महिलायें झुण्ड बना कर वोट देने आती हैं हिजाब में उनकी लम्बी कतारें देखी जा सकती हैं परन्तु वोट उसी को देती हैं जिसका उन्हें निर्देश मिला है |

महिलाओं की समस्यायें पुरुषों से अलग हैं उनकी सबसे बड़ी समस्या सम्मान और सुरक्षा पाने की है| बालिकाओं की शिक्षा पर जोर दिया गया है अलग सरकारी स्कूल हैं छुट्टी होने पर झुण्ड की झुण्ड लड़कियाँ स्कूल से निकलती हैं मुख्य द्वार पर पुलिस का इंतजाम है लेकिन अपना काम धंधा छोड़ कर लड़कों की कतार खड़ी दिखाई देती है कुछ फब्तियाँ कसते हैं कुछ उस झुण्ड में घुसने की कोशिश करते हैं कुछ घर तक छोड़ने जाते हैं | कई लडकों को देख कर हंसी आती है चिपके गाल पेट और पीठ एक , इतना खराब स्वास्थ्य कि हवा के झोंके से गिर पड़े लेकिन लड़कियों को छेड़ना जैसे उनका विशेषाधिकार है| लड़कियाँ घर में शिकायत करने से डरती हैं माता पिता पढ़ने नहीं भेजेंगे | आजकल इक तरफा प्रेम का चलन बढ़ रहा है एक फ़िल्मी डायलाग है ‘मेरी नहीं तो किसी की नहीं’ | इकतरफा प्रेम में कोई वहशी लड़की के चेहरे पर तेज़ाब डाल कर जिन्दगी मौत से भी बदत्तर कर देते हैं क्या ऐसे अपराधी को जमानत मिलनी चाहिए ? रात बिरात की बात दूर की है बाजार में भी लड़कियाँ सुरक्षित महसूस नहीं करती मौका पड़ते ही लडकी को उठा लेना आपराधिक वृत्ति के लोगों के लिए आम है समस्या केवल बड़े शहरों की नहीं रही है गाँवों और कस्बों में भी लड़की सुरक्षित नहीं है | रात बिरात काम से घर आने वाली लडकियाँ कई बार कैब के ड्राईवरों या राहगीरों की शिकार हो गयी है अपराधी को दंडित करने के लिए लम्बी न्यायिक प्रक्रिया चलती है |

प्यार में फंसा कर शादी का लालच देकर शोषण करना लेकिन शादी से मुकर जाना | लड़की को अकेले बुला कर अपने दोस्तों में बाँट देना उनका अश्लील वीडियों बना कर प्रसारित करने की धमकी देना आम होता जा रहा | लड़कियाँ जहाँ नौकरी करती हैं वहाँ भी सुरक्षित नहीं है |महानगरों में लडकियाँ अपना कैरियर बनाने आती हैं उच्च शिक्षा टेकनिकल शिक्षा अपने मन पसंद के कोर्स करने के बाद नौकरी करना चाहती हैं जिससे वह स्वावलम्बी बन कर माता पिता का सहारा बनना चाहती हैं | क्या वर्किंग वुमैन हास्टल पर्याप्त हैं ? या सुरक्षित पेईंग गेस्ट हाउस हैं ? एक आम सिर पर ईंटे ढोने वाली स्त्री से लेकर अभिजात्य वर्ग की लड़की भी असुरक्षित हैं| क्या महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के लिये कठोर दंड का विधान है या सब कागज पर ही है ? नन्ही बच्चियों को वहशियों द्वारा जान से मारने की धमकी देकर हवस का शिकार बना कर, मरने के लिए छोड़ देना बच्चियों का जीवन बर्बाद कर उसे खौफ के साये में जीने के लिए मजबूर करना, कई बार अपराध के बाद पकड़े जाने से बचने के लिए मार कर कूड़े की तरह फेंक देते हैं मासूम में जान ही कितनी होती है | घृणित अपराध के लिए शीघ्र ट्रायल कर मृत्यू दंड का विधान क्यों नहीं होना चाहिये ? कोर्ट के चक्कर काटना बच्ची के माता पिता की तकदीर बन जाती है अपराधी को वकीलों की चालों से जमानत मिल जाती है कानून लचर है या अपराधी शातिर| समाज कुछ समय तक सम्वेदना प्रगट करता है तब तक अन्य बड़ी दुर्घटनायें चर्चा में आ जाती हैं |

जब सभी महिलाये एक जुट हों कर संगठित होंगी महिला संगठन उन्हें समझायेंगे संविधान उन्हें बराबरी का अधिकार देता है अत : विभिन्न दलों के घोषणा पत्रों में उनके कल्याण की कौन सी योजनायें हैं ?क्या पहले किये वायदे पूरे किये गये हैं ?महिलाओं को उनके वोट का सही महत्व समझना होगा संसद में आरक्षण की जरूरत ही नहीं पड़ेगी जरूरत है भारत में एक जुट हो कर एक आवाज में शक्ति प्रदर्शन करने की | उनकी आधी आबादी हैं अत : मजबूत मतदाता हैं चाहें तो चुनाव की धारा बदल दें| संगठित स्त्री समाज के आगे नेता वर्ग भी नत मस्तक हो जायेंगे जिस सुरक्षा के लिए बार-बार आवाज उठानी पडती है नेता गन उनके लिए विशेष पुलिस दस्ते जिनमें महिला पुलिस होगी लगा देंगे कानून सख्त हो जायेंगे शीघ्र कठोर दंड दिए जायेंगे लेकिन इसके लिए जाति, धर्म, शिक्षित अशिक्षित ,अभिजात्य गरीब कम उम्र या बड़ी उम्र सभी औरतों को एक मंच पर संगठित आवाज बनना पड़ेगा ट्रिपल तलाक और बहुविवाह का प्रश्न ही गौण हो जाएगा किसी शाहबानों को रोना नहीं पड़ेगा सरकार में बैठे लोग मजबूत कानून बनायेंगे पूरी संसद उसका समर्थन करेगी क्योंकि अगली बार भी तो वोट लेना है अपनी शक्ति को महिलाओं ने समझा ही नहीं है | घरेलू हिंसा की शिकार कोई भी महिला हो जाती है समाज इसे पति पत्नी के बीच का मामला कह कर पल्ला झाड़ लेता है तलाक शुदा या पति द्वारा छोड़ी गयी महिला को महिलायें ही सम्मान की दृष्टि से नहीं देखती माता पिता कन्यादान कर दिया समझ कर अपने दायित्वों से मुक्ति पा लेते हैं महिलाओं की रक्षा के लिए सख्त कानून हैं फिर भी जला कर मारी जाती हैं या आत्महत्या के लिए विवश कर दी जाती हैं | क्या जरूरत नहीं है कानून का सही ढंग से पालन हो लेकिन बेजा लाभ उठाने वालों को दंडित किया जाये |

भारतीय संविधान में महिलाओं के अधिकार दिए गये हैं समय – समय पर कानून बना कर उनके साथ न्याय करने की कोशिश की गयी है | समानता का अधिकार – वोट देने का अधिकार, एक ही काम के लिए समान वेतन,काम के स्थान पर यौन उत्पीडन अपराध है, उत्पीडन की शिकार महिला का नाम नहीं छापा जाएगा ,घरेलू हिंसा अपराध है ,प्रसव के समय अवकाश ,कन्या भ्रूण हत्या दंडनीय अपराध है ,रेप की शिकार महिला को मुफ्त कानूनी मदद , माता पिता की सम्पत्ति पर अधिकार , महिला को रात के समय गिरफ्तार नहीं किया जायेगा उसकी गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाएगा |लेकिन क्या वह इन सभी अधिकारों का उपभोग करना जानती है | जरूरत सही नेतृत्व की है | नेतृत्व का मतलब यह नहीं है नेताओं की बेटियों या बहुयें उनका प्रतिनिधित्व करें |कर्मठ महिलाएं आगे आयें महिला संगठनों के तले सबकी एक आवाज हो|

पढ़ने और कैरियर बनाने के लिए आम घरों में लड़कियों को लड़कों से अधिक संघर्ष करना पड़ता है यदि माता पिता बेटियों की पढ़ाई और कैरियर के लिए भी समवेदन शील है लेकिन अच्छी डिग्री लेकर  नौकरी का इंटरव्यू देती है उसे हतोत्साहित करने वाले प्रश्नों का सामना करना पड़ता है जैसे कम्पनी में देर सबेर आना जाना पड़ सकता टूर भी करना है| आप को हम आज चुन लें आप कम्पनी की जरूरत बन गयीं लेकिन कल आपकी शादी होगी क्या आपका पति या सुसराल पक्ष आपको सहयोग देंगें? अच्छे संस्थान से एमबीए की डिग्री धारण करने वाली लड़की के प्रमोशन में भी दिक्कतें आती है | सर्वे बताते है कई उच्च शिक्षा प्राप्त महिलायें नौकरी नहीं कर पाती क्योंकि पारिवारिक दायित्व उनसे त्याग की उम्मीद करता है महिला के कैरियर के उत्थान के लिए पति कभी त्याग नहीं करते | कह सकते हैं महिला का अपना मामला है सरकार से इसका कोई मतलब नहीं है लेकिन इन सब के साथ सुरक्षा का प्रश्न जुड़ा रहता है घर में बच्चे सुरक्षित नहीं है बाहर माँ नतीजा महिला को ही घर में बैठना पड़ता है |

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
January 28, 2017

शोभाजी नमस्कार ! आपने महिलाओं के सामाजिक दायित्व और उनकी असुरक्षा के बारे में जानकारी देकर समाज के ठेकेदारों को इस विषय में सोचने के लिए वाद्य कर दिया है ! एक लड़की किसी के घर की प्यारी बेटी है तो दूसरे के घर की पत्नी के रूप में इज्जत है ! मनचले लड़कों को भी सोचना पडेगा की जिस लड़की को तुम तंग करने जा रहे हो वह भी किसी की बहिन है और उसी तरह तुम्हारी बहीन को भी कोई दूसरा परेशान कर सकता है ! स्कूल में यह एक लेशन जरूर होना चाहिए ! हर स्कूल में लड़कियों को जुड्डो कराटे की विशेष क्लासें होनी चाहिए ! लेख के लिए साधुवाद

Shobha के द्वारा
January 31, 2017

श्री रावत जी आपने महिलाओं के विषय पर दर्द लिया बहुत धन्यवाद लडकियाँ कैरियर की उचाइयां छू सकती है लेकिन असुरक्षित है शीघ्र मामला निपटा कर कठोर दंड व्यवस्था की इच्छा शक्ति भी नहीं है ख़ास कर नन्हीं बच्चियों के विषय में फांसी होनी चाहिए

Anil bhagi के द्वारा
February 2, 2017

प्रिय शोभा जी सही लिखाहै आपने संगठित वोट की शक्ति अपरिमित होती है जरूरत है संगठित होने की

achyutamkeshvam के द्वारा
February 3, 2017

महत्वपूर्ण आलेख …..यहाँ कुछ समस्याएं हैं ….हमारे यहाँ बैंकों में ….बहुत लडकियाँ आ रही हैं ….काबिल भी हैं …पर कुछ दिक्कते हैं . 1.रोज लेट आना २.घर भागने की जल्दी 3.केवल शहरी क्षेत्रों में काम की इच्छा 4.फील्ड रिकवरी में आनाकानी 5.कार्य समय में फोन पर बात 6.तुनकमिजाज होना इन्हीं के सम्बन्ध में अधिकारी पूँछने लगे हैं .साक्षात्कार में

Shobha के द्वारा
February 4, 2017

श्री अच्युत जी सही लिखा है महिलाओं को भी कर्मठ होना पड़ेगा यदि समान वेतन का अधिकार है तो मेहनत भी बराबर करनी पड़ेगी लेख पढने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
February 4, 2017

प्रिय अनिल जी केवल अधिकार ही नहीं कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक होने की समान वेतन अमां मेहनत

anjana bhagi के द्वारा
February 13, 2017

प्रिय शोभा दी सही लिखा है आपने महिलाओं को संगठित हो कर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना पड़ेगा वह आधी वोट बैंक हैं

Shobha के द्वारा
February 15, 2017

अंजना जी जब तक महिलाएं अपनी वोट की ताकत को नहीं समझेंगी तब तक अधिकारों पर अधिकार नहीं मिलेंगे लेख पढने के लिए धन्यवाद


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