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सांसदों के व्यवहार ,भारतीय संसद की नियति पर हैरानी

Posted On: 10 Feb, 2017 Politics में

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31 जनवरी को राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी ने संसद के दोनों सदनों को संबोधित कर बजट सेशन की शुरुआत की | राष्ट्रपति महोदय का भाषण सरकार की नीतियों पर प्रकाश डालता है |देश का बजट वित्त मंत्री द्वारा लोक सभा में पेश किया जाता है |1 फरवरी को ग्यारह बजे वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट पेश किया| लोक सभा में बजट पर बहस होती है संशोधनों पर विचार किया जाता है ,मतदान के बाद बजट पास होने पर राज्यसभा में 14 दिन के लिए भेजा जाता है| राज्यसभा में बजट पर सांसद बहस कर संशोधन पेश कर सकते हैं मानना न मानना सरकार पर निर्भर हैं 14 दिन बाद बजट राष्ट्रपति महोदय के पास हस्ताक्षर के लिए जाता है जबकि अन्य विधेयकों पर राज्य सभा के अधिकार लोकसभा के समान हैं| सात फरवरी को लोकसभा और आठ परवरी को प्रधान मंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा की |पिछले सदन के सत्रों में नोट बंदी के मुद्दे को लेकर पक्ष और विपक्ष एक दूसरे को ललकार रहे थे बहस की जाये लेकिन विपक्ष की शर्तों पर और किस धारा के तहत हो, विपक्ष अड़ा था| जब तक बहस होगी प्रधान मंत्री सदन में उपस्थित रहेंगे विपक्ष बहस के दौरान सत्ता पक्ष के तर्क सुनेगा या नहीं ? | सदनों की कार्यवाही हंगामें की भेट चढ़ गयी जन हित के नाम पर केवल हंगामा हुआ |

कांग्रेस विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने तीन मुद्दों पर सरकार को घेरा नोट बंदी , सर्जिकल स्ट्राईक और डिजिटलाइजेशन के फैसलों पर सवाल उठाये मोदी जी सदन में जम कर बरसने के मूड में थे उनके पास हर प्रश्न का उत्तर था काफी समय से नोट बंदी पर सरकार सदन में सदन से बाहर हमले झेल रही थी प्रधान मंत्री पर प्रहार करने में प्रजातांत्रिक मर्यादायें तार तार की जा रही थी| उन्होंने नोट बंदी की वकालत करते हुए पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा जी के समय के आईएएस अधिकारी माधव गोडबोले का जिक्र किया 1971 में बनी वांचू कमेटी ने नोट बंदी को आर्थिक जरूरत बताया था |वित्त मंत्री श्री यशवन्तराव चौहान ने इंदिरा जी से नोट बंदी पर बात की उन्होंने उत्तर दिया कांग्रेस को आगे भी चुनाव लड़ना है| मोदी जी ने स्वर्गीय ज्योति वसू का जिक्र किया जो वांचू कमेटी के सुझावों को सदन पटल पर रखवाना चाहते थे अंतिम प्रयास 1981 में कम्युनिस्ट पार्टी के श्री सुरजीत ने भी किया था अब उनकी सरकार ने  हिम्मत की है |कैश लेस पर उन्होंने कहा 2007 से चुनाव सभाओं में और आज तक कहा जाता है स्वर्गीय प्रधान मंत्री राजीव जी देश में कम्प्यूटर क्रान्ति और मोबाईल फोन लाये हैं उन्होंने तो केवल मोबाईल फोन को बैंक में बदला है देश के लोग समझदार हैं बदलाव में रूचि रखते हैं | जिनके पास भी मोबाईल है वह डिजिटल करेंसी को समझ लेंगे जिससे एटीएम की जरूरत भी कम हो जायेगी |इच्छा शक्ति से नेतागण जनता को जागरूक कर सकते हैं |वैसे भी चुनाव जीतने के बाद एक राजनितिक दल स्मार्ट फोन देने का लालच नवयुवकों को दे रहा क्या उसका उपयोग केवल फोटो खींचने में ही किया जाएगा? उन्होंने आम भाषा में भी समझाया ग्राहक या दूकान दार के पास छुट्टे रूपये नहीं हैं किसी को भी नुकसान नहीं होगा कैश लेस में पाई पाई का हिसाब हो जाता है |

उन्होंने अपने भाषण में कहा सांसद  सदन में बहस करने के बजाये टीवी चैनलों में अपनी बात रखने में ज्यादा रूचि दिखा रहे थे उन्हें बैंकों के आगे लगी कतारों पर राजनीति करना रुचिकर लग रहा था जबकि सारी परेशानी अल्प समय की थी |26 वर्षों से कांग्रेस के कार्यकाल में बेनामी सम्पत्ति का कानून बना परन्तु ठंडे बस्ते में डाल दिया गया |मोदी ही ने व्यंग कसते हुये कहा पहले प्रश्न उठता था देश का कितना पैसा बाहर गया अब कितना आया उन्होंने सदन के माध्यम से जनता को बताया (उनका भाषण चैनलों के माध्यम से प्रसारित हो रहा था) पाकिस्तान में जाली नोट छापने वाले को आत्म हत्या करनी पड़ी |जाली नोट बाजार में घूमते हैं बैंकों में कम ही आते हैं |मोदी जी को चार्वाक की याद आई घी पियों ऋण लेकर भी घी पियों आज के सन्दर्भ में चार्वाक होते, कहते कुछ और पियो भगवत मान पर तंज था मोदी जी ने सदन को आश्वस्त किया नोट बंदी का फैसला हड़बड़ी में नहीं लिया गया था |

पीएम मोदी के तीखे बोल- राज्यसभा में मोदी जी ने डॉ मनमोहन सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा लगभग 35 वर्षों तक आर्थिक निर्णयों में उनका महत्वपूर्ण स्थान रहा है उनके काल में इतने घोटाले हुए हैं वह बेदाग़ रहे शायद बाथरूम में भी वह रेनकोट पहन कर नहाते हैं| कबीर दास जी का दोहा है काजल की कोठरी में कितना भी सयाना जाये उस पर काजल की एक आध रेखा जरूर लगती है| शायद यह मनमोहन सिंह के सदन में दिए उस भाषण का जबाब था जिसमें उन्होंने ‘नोट बंदी को संगठित लूट कहा था’ डॉ मनमोहन जी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी लेकिन कांग्रेस और यूपी में नये गठ्बन्धन में बंधे सपाईयों ने शोर मचा कर सदन का बहिष्कार किया | स्पष्ट था चुनाव का समय है अगले दिन सदन में हंगामा होगा लेकिन इससे पहले चुनाव सभाओं में नेता गण जम कर गरजे बाजपेयी जी को याद किया गया वह सदन में कितनी मर्यादित भाषा बोलते थे राहुल गाँधी ने हुंकार भरी डॉ मनमोहन सिंह दस साल तक जनता के चुने प्रधान मंत्री थे| राहुल भूल गये डॉ मनमोहन सिंह अमेरिका में थे उनकी सरकार द्वारा पारित अध्यादेश को चैनल में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान राहुल गाँधी ने फाड़ा था जबकि राहुल सांसद थे |मोदी जी के लिए सांसदों ने अपशब्दों का जम कर प्रयोग किया गया था उन्हें गद्दाफी मुसौलिनी और हिटलर कहा गया सदन के बाहर ममता दी ने विपक्ष का नेतृत्व करने के बहाने सभी मर्यादायें लांघी थी मोदी जी पर निजी कटाक्ष किये थे| सोनिया जी ने चुनावों के दौरान उन्हें मौत का सौदागर सम्बोधित किया,उनके सपुत्र श्री राहुल गाँधी ने सर्जिकल स्ट्राइक को खून की दलाली कहा था  |

मनमोहन सिंह की छवि एक ईमान दार व्यक्ति की छवि रही है |संजय बारू, उनके मीडिया सलाहकार ने अपनी पुस्तक द एक्सीडेंटल प्रधान मंत्री में लिखा है मनमोहन सिंह जी ने उनसे स्वीकार किया था सत्ता का केंद्र कांग्रेस अध्यक्षा थीं उनसे गलतिया तब हुई जब कांग्रेस अध्यक्षा और कांग्रेस ने उनके कार्यों में हस्ताक्षेप करना शुरू किया प्रधानमन्त्री कार्यालय की हर फाईल उनके पास जाती थी |अधिकतर देश में कांग्रेस का शासन या कांग्रेस से टूट कर आये लोगों का शासन रहा हैं बस अटल जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार रही थी |कांग्रेस के लिए विपक्ष में बैठना दुखदायी है | कांग्रेस ने प्रजातांत्रिक व्यवस्था को एक ही परिवार का अधिकार बना दिया उनके प्रति भक्ति दिखाना अपनी नियति बना ली है |

जैसी सम्भावना थी अगले दिन लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों का हंगामा शुरू हो गया स्पीकर सुमित्रा महाजन ने टोका आप लोग दूसरे सदन में दिए गये भाषण का विरोध लोकसभा में नहीं कर सकते सदन भंग कर जब दुबारा शुरू हुआ खड्गे और अन्य सांसद नारे लगाते स्पीकर की कुर्सी तक पहुंच गये| राज्यसभा में भी यही हाल था कांग्रेस और उनके समान विचार वाले सांसद वेल में आकर मांग करने लगे जब तक मोदी जी अपने वक्तव्य पर माफ़ी नहीं मांगते तब तक मोदी जी का बहिष्कार करेंगे हंसी आती है सांसदों के व्यवहार और सदन   की नियति ही हैरानी है जबकि भारत विश्व का सबसे बड़ा प्रजातंत्रिक देश है |

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harirawat के द्वारा
February 11, 2017

शोभा जी आजकल की राजनीति और बजट पर विपक्ष विशेष कर राहुल गांधी (जिसको यह भी याद नहीं रहता की आज उसने नास्ता में क्या खाया था तो भला उसे कैसे याद रहेगा की उसने मनमोहनसिंह की सरकार द्वारा पास किया अध्यादेश संसद में फाड़ा था), ममता बनर्जी, लालू (इनके किये दुष्कर्मों की पुस्तक अगर संसद में बाँची जाएगी, ये मुंह छिपाने के लायक भी नहीं रहेंगे) ये ही वो लोग हैं जो अपना काला दाग मिटाने के लिए संसद में अशोभनीय व्यवहार कर रहे हैं ! लेख के लिए धन्यवाद ! उनके कुकर्मों की लिष्ट मैंने जेब में रखी है, जनता से ली गयी है जानकारी खबर पक्की है, जनता भ्रष्ट नेताओं से सयानी है, गंगा कितने पापियों की गन्दगी को समेटती है फिर भी शुद्ध उसका पानी है ! मोदीजी ने विपक्षियों की नींद उड़ा दी है, देश को ऐसे ही नेता की जरूरत है, भ्रष्टाचार मिटाने के लिए उन्होंने नॉट बंदी की है ! हरेन्द्र

rachna varma के द्वारा
February 11, 2017

मौन मोहन से मुखर मोदी का सजीव प्रसारण देखना अद्भुत है ! अत्यंत सार्थक लेख आभार

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
February 11, 2017

, शोभा जी ,मर्यादा तोडती संसद पर बैचेनी ..किंतु मर्यादायें भगवान राम ने ही स्थापित करनी होती है । जैसा भद्र जन करते है ,उनका अनुकरण साधारण जन करते हैं यही मनुष्य की प्रक्रति है । मनमोहन सिंह का मौन ही शांंति कारक रहा । जबकि मोदी जी का प्रहारात्मक स्वरुप ,एक तु तु मैं मैं मै स्थापित हो गया । राजनीती के शाम दाम दंड भेद विनय पुर्ण हों तो अधिक समय तक शासन कराते हैं । ओम शांति शांति विनय या मौन मार्ग सुगम कर देता है ।

Shobha के द्वारा
February 12, 2017

श्री रावत सही कमेन्ट आज कल चुनाव प्रचार का यह हाल है कुछ भी बोलो किसी की भी मान हानि करो कोई क्या कर लेगा संसद का यह हाल है केवल कैमरे की तरफ मुंह क्र अपना प्रचार करते हैं सुंदर कविता

Shobha के द्वारा
February 12, 2017

प्रिय रचना जी लेख पढने पसंद करने के लिए अतिशय धन्यवाद

Shobha के द्वारा
February 12, 2017

श्री हरीश जी बात आपकी सटीक है मन को छूती है ऐसी ही एक सभा राम राज्य में जुटी थी निरपराध सीता को बिना उन्हें बताये वन भेज दिया था ग्रामीण आदिवासी और बाल्मीकि ऋषि सीता से बिना प्रश्न पूछे सहारा दिया था फिर सभा जुटी सीता धरती में समा गयी आज कल कुछ भी बोलो चलता है यदि मानहानि का दावा कर दिया जाएँ हाईकोर्ट में क्षमा मांग लो सब कुछ माफ़ लेख पढने उत्तम प्रतिक्रिया जिसने सोचने पर विवश कर दिया

sadguruji के द्वारा
February 13, 2017

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! बहुत अच्छा लिखा है आपने ! इसके लिए बहुत बहुत अभिनन्दन और बधाई ! मोदी जी ने रेनकोट पहनकर नहाने की बात करके कांग्रेस की दुखती रग दबा दी ! अब वो दर्द और शर्म दोनों से छटपटा रही है ! सादर आभार !

yatindrapandey के द्वारा
February 13, 2017

हैलो शोभा जी कैसी है आप कई दिनों बाद मैं आपकी रचना पढ़ा हमेशा की तरह बेहतरीन थी पर JJ पर हो गयी भीड़ में कुछ अछि रचनाये गुम हो जाती है जिनसे साछात्कार नहीं हो पता अपना आशीर्वाद बनाये रखे यतीन्द्र

Shobha के द्वारा
February 13, 2017

प्रिय यतीन्द्र जी लेख पढने के लिए धन्यवाद में अपनी सभी रचनाएँ फेस बुक पर भी डालती हूँ बहुत ख़ुशी हुई आपको रचनाएँ पसंद आती हैं

Shobha के द्वारा
February 13, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी विपक्षी दलों ने मोदी जी को क्या नहीं कहा उन्होंने वही कहा जो सत्य था विपक्षी सांसद मौका ही ढूँढ़ रहे थे वह मिल गया संसद फिर ठप लेख पढने के लिए धन्यवाद

anjana bhagi के द्वारा
February 19, 2017

प्रिय शोभा दी चुनाव का समय हैं एक दूसरों पर आरोप ही लगा रहे हैं विकास की बात नहीं करते यही सब संसद में होता है मनमोहन सिंह जी ने तो नॉट बन्दी को संगठित लूट का नाम दे दिया जबकि लूट क्या होती है उनसे अधिक कौन जानता है

Shobha के द्वारा
February 22, 2017

प्रिय अंजना जी विकास की बात करेंगे तो विकास करना पड़ेगा जनता के प्रति जिम्मेदारी बढ़ जायेगी खाली बातों य सब्ज बाग़ दिखाने से काम निकल जाए इससे अच्छी बात और क्या होसकती है


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