Vichar Manthan

Mere vicharon ka sangrah

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सीपी में सागर भर लाऊँ contest

Posted On: 26 Mar, 2017 Junction Forum में

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मेरा सौभाग्य ,मुझे स्कूल या कालेज के दौरान किसी भी भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ा मैं एमए की   क्लास में अकेली लड़की थी मैने विषय ही ऐसा चुना था अंतर्राष्ट्रीय राजनीति ,कानून और सम्बन्ध जैसे शुष्क विषय पढ़ने से ज्यादातर लड़कियाँ बचती थीं| मेरी डेस्क सबसे पहली लाइन में थी कभी बाहर खड़े होकर सर का इंतजार नहीं करना पड़ा क्लास में तन्मयता से लेक्चर सुनती कभी कभी किसी अंतर्राष्ट्रीय समस्या पर सर राय मांगते मेरी राय सबसे अलग होती थी क्योंकि मैं हर समस्या को कूटनीतिक दृष्टिकोण से देखती थी | डिपार्टमेंट में चुनाव होना था मैं भी चुनाव लड़ना चाहती थी मैने स्वयं ही अपना नाम दिया प्रोफेसर सर ने चश्में के नीचे से झांका उन्हें मेरी हिम्मत पर आश्चर्य हुआ |उन्होंने कहा पूरे डिपार्टमेंट में कम लड़कियाँ हैं फिर तुम तो अपने सेक्शन में अकेली हो वोट कौन देगा ?ख़ैर उन्होंने एक हल निकाल कर डिबेट का आयोजन किया मैं तर्क और कुतर्क में सबसे कुशल थी आखिर में बोली और सबके प्वाईंट काटे ख़ास कर जो सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी था उसको टिकने ही नहीं दिया| एक अन्य प्रतियोगिता रखी गयी यदि चुनाव जीत कर रिप्रजेंटेटिव बनें डिपार्टमेंट का क्या भला करोगे | उन दिनों छात्र संघ में राजनीतिक दलों का जोर था प्रचार में धन बल का भी प्रयोग होने लगा मेरी छात्र संघ  की राजनीति में न रूचि थी न हिम्मत मैने अपनी बात कही यदि चुनी गयी मैं अपने विभाग में किसी को छात्र आंदोलनों में हिस्सा लेने नहीं दूंगी कालेज की लायब्रेरी बहुत अच्छी है सबको प्रोत्साहित करूंगी पढ़ें तथा अपने कैरियर को देखें मार्कशीट जीवन भर साथ देती हैं | दूसरे राज्यों से भी विद्यार्थी कालेज में पढ़ने आते हैं किसी को गुमराह नहीं होने दूंगी प्रोफेसर सर की हंसी निकल गयी सूखी साँवली सी लड़की में कितना हौसला है | उन्होंने मुझे मनोनीत कर लिया अब मेरी बारी थी जिसको फ़ीस माफ़ी की जरूरत देखती लेकिन कहने में शर्म महसूस करते थे माफ़ कराती | कालेज में कई आंदोलन हुये दीवारों पर लिखा था सत्ता का जन्म बंदूक की गोली से होता है | सभी दलों से जुड़े छात्र नेता ऐसे ओजस्वी भाषण देते छात्रों के मन के तार हिल जाते ‘छात्र एकता जिंदाबाद ,‘हमारी मांगें पूरी करों’ के जोशीले नारों से कालेज परिसर गूंजता | कालेज के पास ही कचहरी थी वहाँ जलूस की शक्ल में जाकर हाय-हाय करते लेकिन हमारी क्लास लायब्रेरी में पढ़ती दिखाई देती मैने किसी को जलूस में जाने नहीं दिया मेरे पिता जी ने जो हितोपदेश मुझे दिये थे कैरियर ही लक्ष्य समझाया था वही मैने कातर आवाज से सबको समझाया |मेरे जैसी सूखी सी लड़की के लिए आसान नहीं था अब सब लायब्रेरी में बैठ कर नोट्स बनाते हास्टल में रहने वाले छात्र लायब्रेरी बंद होने तक पढ़ते थे कुछ आईएएस की तैयारी करने लगे | पढ़ाई का नशा सबसे ऊँचा होता है यदि कैरियर की उचाईयाँ समझ में आ जायें कहना ही क्या है? सभी कैरियर के प्रति समर्पित थे दो वर्ष कैसे निकल गये पता नहीं चला ?

कालेज के बाद लगभग सभी को अच्छी नौकरी मिली |उस समय का सबसे तेजस्वी छात्र नेता  राजनीति में गया यही उसका ध्येय था उससे उस समय की सबसे शानदार एमएससी टापर उसकी सहपाठी ,बाद में अपने कालेज में लेक्चरर ,दिल्ली के प्रशासनिक अधिकारी की बेटी ने परिवार वालों से विद्रोह कर प्रेम विवाह किया था | चन्द्रशेखर जी की सरकार तीन महीने रही थी उसमें उसे मंत्री पद मिला उसके बाद गुमनामी के अंधेरों में डूब गया एक बार चैनल में दिखायी दिया बहुत पुराना कुर्ता पैजामा पहने था चेहरे पर मायूसी थी |

डॉ शोभा भारदवाज

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhola nath Pal के द्वारा
March 26, 2017

आदरणीय डॉ शोभा जी ! मृगतृष्णा है राजनीति.संतोष और तृप्ति छलावा हैं यहां.बेईमानों को राजनीति बर्जित होनी चाहिए .अनुकरणीय है आपका चिंतन .सादर ………….

jlsingh के द्वारा
March 26, 2017

आदरणीया आपने अपनी छोटी सी कहानी में बहुत कुछ कह दिया. एक बात और मैं कहना चाहूँगा कि राजनीति बिना कुटिलता या कूटनीति के सम्भव हे नहीं. इसीलिए अच्छे लोग राजनीति में नहीं आते, आते हैं तो टिकते नहीं. विद्वता का उपयोग अन्य तरीकों से किए जा सकता है पर राजनीति तो सबके ऊपर हावी रहती है. जो सत्तासीन है या सत्ता के करीब है वही मनचाहा फल पा लेता है पर शाह और मात की खेल वहां भी तो चलती ही रहती है. सादर!

Shobha के द्वारा
March 27, 2017

श्री भोला नाथ जी राजनीती का हाल यह है चढ़े तो चाखे प्रेम रस गिरे तो चकनाचूर लेख पढने के लिए अति धन्यवाद

Shobha के द्वारा
March 27, 2017

श्री जवाहर जी मेरा अपना अनुभव है सबसे अच्छा अपने कैरियर की तरफ ध्यान देकर रोजी रोटी का इंतजाम करना है राजनीती की बहन कूटनीति है सब इस खेल के लिए नहीं बने हैं हाँ जिनके पिता ने पीढ़ी का सही इंतजाम कर दिया है वही सत्ता पाने की सोच सकते हैं |लेख पढने के लिए धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
March 28, 2017

आदरणीय शोभा जी सादर नमस्कार आपके इस ब्लॉग ने आपकी चिंतन औरसमझ के नए पहलू से रूबरू कराया आप हम सब की प्रेरणा हैं. साभार

Shobha के द्वारा
March 28, 2017

प्रिय यमुना जी मेरे पिताजी हम सबके कैरियर के प्रति चिंतित रहते थे वही महत्व मैने सबको समझाया था धन्यवाद है उनका जिन्होंने मेरी बात मानी थी लेख पढने के लिए धन्यवाद

sinsera के द्वारा
March 29, 2017

आदरणीय शोभा जी , शब्द सीमा में बंधे हुए भी आपने बड़ी गहरी बात कही. चार दिन की चांदनी को अँधेरी रात में बदलते देर नहीं लगती. आज वो विस्मृत छात्र नेता आपको भी जब टीवी में देखता होगा तो सोचता होगा ये सूखी सांवली सी लाइब्रेरी में बैठ कर पढ़ने वाली लड़की कहाँ से कहाँ पहुँच गयी.

Shobha के द्वारा
March 29, 2017

सरिता जी मैने जिस छात्र नेता का जिक्र किया है वह एनडी टीवी में मेरे साथ ही बैठा था मेने उससे पूछा आपने क्या खोया क्या पाया आप साइंस स्टूडेंट थे मेघावी थे कालेज में आज प्रोफेसर होते कई प्रोजेक्ट लिखते आपकी पत्नी के रिसर्च पेपर छपते हैं नेशनल जियोग्राफी में रिसर्च छपी है अब उसका जबाब कभी नहीं भूली शोभा’ गुमराही ‘मेरे पास छात्र नेताओं और उनसे प्रेम कर बर्बाद जिन्दगी की पूरी लिस्ट है लेख पढने और विवेचना के लिए शुक्रिया मेरे साथ के कई लडके प्रशासनिक पोस्ट पर है कहते हैं जरा सी थी पर विल पावर गजब की

sadguruji के द्वारा
March 30, 2017

सीपी में सागर भर लाऊँ ! आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! आपने हेडिंग बहुत अच्छी दी है ! आपका अनुभव भी बहुत अच्छा लगा ! सादर आभार !

Shobha के द्वारा
March 30, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी लेख उनके लिए है जो कैरियर के समय गुमराह हो जाते हैं लेख पढने के लिए धन्यवाद


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