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ब्राह्मण समाज के अंदर आपसी ऊंच नीच क्यों ? contest

Posted On: 27 Mar, 2017 Social Issues में

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मेरा विवाह मथुरा निवासी परिवार में हुआ था डाक्टर पति प्रगति शील विचारों के थे परिवार में कभी दहेज पर प्रश्न नहीं उठा सुखद जीवन , मैं नियमित लायब्रेरी जाती अपनी थीसिस पूरी कर रही थी सुसराल सनाढ्य थे हम सारस्वत ब्राह्मण , इनके शादी के विज्ञापन में सभी ब्राह्मण मान्य लिखा था |  मेरा ननिहाल पंजाब में हैं अपना प्राचीन मन्दिर है | मेरी ननदें मेरे सम्पर्क में बहुत महत्व कांक्षी हो चुकीं थी एक का विवाह विदेश में हुआ वहाँ उन्हें ख्याति और अलग पहचान मिली हैं| अम्मा जी गावँ की लेकिन शिक्षित परिवार से थीं |भारत सरकार की तरफ से यह विदेश गये छोटी नन्द की शादी में भाग लेने हम स्वदेश आयें सभी उत्साहित थे |बरात दरवाजे पर पहुंची इनकी मौसेरी बेटी ने मेरा हाथ पकड़ कर वर पक्ष के प्रमुखों  से परिचय ही नहीं कराया गुणगान भी किया| जीजी की गृहस्थी दुखद थी तलाक हुआ लेकिन महिला सशक्तिकरण का अनुपम उदाहरण थीं अमेरिका गयीं वहाँ से गणित में रिसर्च कर अब आईआईटी में प्रोफेसर थी उनके सम्मान में मैं श्रद्धा से नतमस्तक रहती थी कोने में कुछ कुर्सियाँ थीं ले जाकर कहा यहाँ चुपचाप बच्चों को समेट कर यहाँ  बैठ जाओ हमने किसी को नहीं बताया तुम पंजाबन हो मैं गुमसुम हो गयी वहाँ खेलते बच्चों से बच्चे खेलना चाहते थे, खाने की सुगंध आ रही थी भूखे भी थे मम्मा चलो सब खाना खा जायेंगे हम क्या खायेंगे?अंत में कुछ खाने वाले बचे थे इन्होने मुझे देखा अरे तुम यहाँ बैठी हो खाना नहीं खाना बच्चे नींद में थे मुश्किल से उन्हें खिलाया |

फेरे होने वाले थे जीजी वहाँ खड़ी थीं उन्होंने मुझे कहा उस कोने में बैठ जाओ परिवार की अन्य महिलायें मुझे अकेले बैठा देख कर वहीं आ गयी सभी मुझसे बहुत प्रेम करतीं थी| यहाँ कन्यादान सभी परिजन लेते हैं मेरी हिम्मत नहीं हुई |

मेरे  बीमार ससुर अंतिम सांसे ले रहे थे विवाह किसी तरह निपट गया यह उनके पास चिंतित बैठे थे अचानक अम्मा जी ने प्रश्न किया दुल्हन तुम्हारे परिवार से कोई नहीं आया इन्होने जबाब दिया आपने बुलाया कहाँ था ? बस जीजी इन पर बरस पड़ीं क्या लिखूं उन्होंने पंजाबी के साथ और अलंकार लगा कर खानदान पर चलीं गयीं मेरा दर्प जगा अचानक मैने इनकी तरफ देखा दुःख से इनका चेहरा लाल था| मेरे नाना रला राम जोशी मशहूर गणितज्ञ थे उनकी लिखी पुस्तकें जीजी की किताबों के साथ सम्मान से रखी थी वह उनकी प्रशंसक थीं पर अम्मा जी के शब्द बोल रहीं थीं मैं रोने के लिए कोना ढूँढ़ रही थी| यह पहली बार हुआ था, अंतिम बार नहीं सब उच्च कोटि के ब्राह्मण थे मैं ? हर शादी ब्याह में अपने लिए कोना ढूँढ़ लेती थी रिश्तेदार हैरान होते गाँधी वादी हूँ विरोध में एक शब्द नहीं | अम्मा का आपरेशन था उनका मेरा ब्लड ग्रुप एक था खून दिया मरने से पहले वह मथुरा जाना चाहती थी अंतिम दिनों में मुझे और बच्चों को बुलाया यह मुझे उनकी मृत्यू पर भी लेकर नहीं गये |

दो साल पहले ननद की बेटी की शादी थी बरात आने पर इनका भतीजा सबको बुलाने आया मेरे पास विदेश बसी नन्द बैठी थी सब चले गये वह मेरे सामने संकोच से खड़ा था मैने संकेत से कहा कोई बात नहीं पढ़ने वाले इज्जत करते थे | शादी के दो माह बाद दीदी अपनी बेटी दामाद को लेकर घर आयीं अब उन्हें मेरी जरूरत थी|

चार वर्ष पहले ब्राह्मण सम्मेलन में मेरा लेक्चर था मैने ब्राह्मण समाज की स्थिति पर लम्बा भाषण दिया बहुत भीड़ थी उपस्थित गणमान्य स्टेज के पास ताली बजाते आगे आये सम्मानित किया अंत में मेरा प्रश्न था मनु महाराज की वर्ण व्यवस्था में क्या ब्राह्मणों के अंदर भी जाति व्यवस्था थी ब्राह्मण ऊँचा नीचा भी होता है, सभी ब्राह्मणों को एक नहीं होना चाहिए ?

डॉ शोभा भारद्वाज

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Bhola nath Pal के द्वारा
March 27, 2017

“मनु महाराज की वर्ण व्यवस्था में क्या ब्राह्मणों के अंदर भी जाति व्यवस्था थी ब्राह्मण ऊँचा नीचा भी होता है, सभी ब्राह्मणों को एक नहीं होना चाहिए ?”यक्ष प्रश्न आदरणीय डॉ शोभा जी ! कोशिश करूँगा इस पर कुछ लिखूं मेरी पसंद का लेख सादर ……………

Shobha के द्वारा
March 28, 2017

श्री भोला नाथ जी हर ब्राह्मण समाज के गोत्र ऋषियों से हैं पहले आय का मुख्य साधन पंडिताईया आश्रम थे सब अपने को बढ़ चढ़ कर बताते थे जबकि अब बच्चे पढने लगे हैं अच्छे पदों पर आसीन हैं दान में उनकी रूचि नहीं है स्वयं ही दान देते हैं लेकिन पुराने लोग अभी भी उच्च ब्राह्मण हल्के ब्राह्मण की बात करते हैं मनु महाराज ने केवल वर्ण व्यवस्था की बात कर्म से की थी आगे जा कर जन्म से हो गयी

sinsera के द्वारा
March 29, 2017

आदरणीय शोभा जी,यहाँ पर मेरा प्रश्न थोड़ा अलग हो जाता है. वर्ण-व्यवस्था, जाति-व्यवस्था या धर्म-व्यवस्था हो ही क्यों? क्या सभी इंसानों को एक नहीं हो जाना चाहिए?? अब तो हर जाति धर्म के बच्चे हर विषय पढ़ रहे हैं,वेदों पर रिसर्च कर रहे हैं और प्रतिभा के बलबूते पर पद हथिया रहे हैं. फिर भी अभी विवाह के लिए सामान जाति ढूंढी जाती है.बच्चे अपनी पसन्द से कर लें तो फिर उनके प्रोफाइल में क्या भगवान कुंडली वाली फ़ील्ड N/A कर देते हैं?? खैर अभी ये भेद-भाव दूर होने में युगों लगेंगे…

Shobha के द्वारा
March 29, 2017

प्रिय सरिता जी अब तो समय बदल गया है लेकिन एक ब्राह्मण परिवार की लडकी ब्राह्मणों में ही ब्याहे केवल उसको दबाने के लिए इस तरह की सोच का परिचय दिया जाये परिवार की यंग जेनरेशन इतना सम्मान दे अपना आदर्श मान ले परिवार के सम्बन्धी अपने बच्चों ख़ास कर बेटियों से कहें अपनी चाची या मामी जैसा बनना खूब पढना लेकिन घर के खास बुजुर्ग और आगे की उनकी पुत्रियाँ उसी लीगेसी को मान कर चलें कष्ट होता है |लेख पढने और सच्चे अर्थों में समझने के लिए धन्यवाद

sadguruji के द्वारा
March 30, 2017

आदरणीया डॉ शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन ! अच्छा लिखा है आपने ! आपने प्रश्न भी सही उठाया है ! आने वाले समय में तो हिन्दू धर्म से ही जाति-प्रथा ख़त्म होनी चाहिए ! सादर आभार !

Shobha के द्वारा
March 30, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी यह मेरे परिवार का मामला था मेने बहुत सोचने के बाद लिखा में कट्टर ब्राह्मण परिवार से हूँ मेरी माँ पानी तक मुहं में पूजा के बिना नहीं डालती थी घर में प्याज तक से मतलब नहीं था केवल नीचा दिखाने और दबाने के लिए ढोंग शुरू किया गया मुझे मरते दम तक कष्ट रहेगा हमारे ब्राह्मण समाज में ऐसी सोच कभी पूरा लेख लिखूँगी

sinsera के द्वारा
March 31, 2017

आपकी बात पढ़ कर ऐसा लगा जैसे ये मेरी आत्मकथा हो. अगली जेनरेशन के बच्चे सब ऐसे मुरीद कि मेरे कहने पर छत से कूद जाएँ, लेकिन पता नहीं समकालीन और बुज़ुर्ग किस कुंठा के तहत ३६ का आंकड़ा रखते हैं. शादी ब्याह के मौके पर इकठ्ठा होते हैं तो मैं अधिकतर अपना समय बच्चों के बीच ही बिताती हूँ.वे कभी अवॉयड नहीं करते कि यह हमसे इतनी ज़्यादा उम्र वाली चाची मामी हमारे बीच क्यों बैठी हैं लेकिन बड़ों के बीच बैठते ही न जाने क्यों कड़वाहटें शुरू हो जाती हैं.

Shobha के द्वारा
March 31, 2017

प्रिय सरिता जी मैं जागरण की शुक्र गुजार हूँ हमें अपनी बात कहने का अवसर दिया मेरा अपना ख्याल है हमारी जीवन शैली से चिढ़ते थे कमिया निकाल कर दबाने के तरीके ढूंढते थे हम लोगों ने अपनी सन्तान ख़ास कर लडकियों को नई दिशा दी और सपोर्ट किया उन्होंने भी हमें सम्मान और गर्वित होने का मौका दिया बच्चे आज की जेनरेशन हैं मैं छोटे से छोटे बच्चों से खेलती हूँ अपने सुसराल का हर बच्चा मुझे सम्मान देता है इतना स्नेह देते है मैं उनकी हर परेशानी सुनती रही हूँ अम्मा जी चिढ कर कहतीं थीं सब इसके चमचे हैं लगभग हर बुद्धि जीवी महिला का एक ही संघर्ष है |मुझे अपना ब्राह्मण समाज पर लेख लिख कर संतोष मिला अब में विस्तार से लिखूंगी

anjana bhagi के द्वारा
April 4, 2017

प्रिय शोभा दी बड़ी हैरानी हुई हिन्दू धर्म में वर्ण व्यवस्था (जाती व्यवस्था )है लेकिन ब्राह्मणों में भी ऊँचा ब्राह्मण और हल्का ब्राह्मण पढ़ कर हैरानी हुई और एक शिक्षित उच्च संस्थान की प्रोफेसर ऐसे विचार रखतीं हैं आपको बहुत दुःख हुआ होगा

Shobha के द्वारा
April 6, 2017

priy anjnaa ji lekh pdhne or smjhne ke liye dhnyvaad


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