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जंजीरें contest

Posted On: 1 Apr, 2017 Junction Forum में

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बचपन की याद, मेरे पिताजी के मित्र थे पीर मुहम्मद उनकी इकलौती बहन का नाम ? अब उनका नामकरण छुटटो था हम बच्चे छुटटो बुआ कहते थे खूबसूरत थीं परन्तु कभी बावर्ची खाने से नहीं निकलीं| शादी हुई थी शौहर ने एक दिन घर के दरवाजे पर खड़े होकर तीन बार तलाक कह कर नाता तोड़ दिया |

चैनल में ट्रिपल तलाक पर बहस थी मुस्लिम महिलायें बुलायीं गयी मौलाना भी आये थे उन्होंने कहा इस्लाम अबला का रक्षक बन कर आया है, दासता से मुक्ति दिलाई पिता की सम्पत्ति पर अधिकार दिलवाया , हदीस कहती है सही होगा खुदाई जुबान है | महिलायें झुण्ड की तरह लाई गयीं थी सब के मुहँ पर नकाब थे हरेक से अलग – अलग पूछो ट्रिपल तलाक के खिलाफ थीं शौहर दूसरी बीबी लेकर  आता है तकलीफ होती हैं आँखों से पानी बहता है| उन्हें दुःख था वह पढ़ीं लिखी नहीं है हाँ नमाज पढ़ना जानती है एंकर ने पूछा ट्रिपल तलाक ठीक है सब एक साथ बोलीं “नहीं” यदि शौहर दे दे ?उन्होंने कहा हमारी तकदीर , हम विरोध नहीं कर सकतीं अल्लाह का हुक्म बदला नहीं जा सकता “हम नबी के हुक्म और शरीयत को मानती हैं”| उन्हें यही समझाया गया था|

ट्रिपल तलाक पर मौलानाओं के दो पक्ष है एक कहता है ट्रिपल तलाक को एक माना जाये दूसरा पक्ष कहता है तीन बार तलाक कहना गुनाह है परन्तु तलाक तो हो गया अब लौट नहीं सकता यदि शौहर फिर से बीबी को रखना चाहता है हलाला होगा | क्या महिला भी तीन बार तलाक कह कर जंजीरें तोड़   सकती हैं, नहीं मौलाना तय करेंगे किस ग्राउंड पर तलाक चाहिये |इस्लामी हकूमत होती तो तीन बार तलाक कहने पर शौहर को कसूरवार ठहरा कर सजा दे सकते हैं |

कोर्ट में अपनी वकील सहेली से मिलने गयी उस दिन एक मुस्लिम महिला को ब्यान दर्ज कराने थे महिला की खूबसूरती गजब उसने चादर लपेटी थी साथ में 11 साल का लडका था वह माँ को परेशान कर रहा था मेरा जन्म दिन मनाओ नहीं तो मैं अब्बू के पास चला जाऊंगा महिला ने बताया मेरे शौहर ने तलाक लिख कर अपने भाई के हाथों भिजवा दिया बच्चे भी छोड़ गया |20 साल की लडकी से शादी कर ली मैं पढ़ी नहीं हूँ जचगी करवाती हूँ मैने उसको कहा इसे अब्बू के पास जन्म दिन मनवाने भेज दो वह डर गयी बोली वह ले जायेगा ,मैं गारंटी लेती हूँ जैसे ब्यान खत्म हो तुम इसे भेज कर तमाशा देखो और न्याय बाद में मिलेगा हाँ तेरा बेटा अपना हो जाएगा उसने कलेजे पर पत्थर रख लिया कुछ देर में  बालक रोता हुआ आया माँ से लिपट गया अम्मी रिक्शा पर अब्बू और छोटी बैठ कर चले गये मुझे गाली देकर भगा दिया|

ईरान में अधेड़ उम्र के पाकिस्तानी डाक्टर के हाथ में सदैव माला रहती थी सबको पढ़ाते मुसलमीन को खुदा ने जन्नत का वादा किया हैं| उन्होंने इरानी नर्स से निकाह पढ़वा लिया उसका नाम रखा आयशा खानम मेहर सोने के सिक्कों में देनी पड़ी| वह पाकिस्तान गये लौट कर नहीं आये आयशा परेशान थी हर पाकिस्तानी से उनकी बाबत पूछती | पाकिस्तानियों ने हमें बताया उनकी पत्नी सगी खाला की बेटी है इनके रिश्तेदारों की पांच लडकियाँ बीबी के कुनबे में ब्याही हैं इनको धमकी दी है  जल्दी आओं नहीं तो सब को घर बिठा देंगे मजबूरी में गयें हैं परन्तु लौटे क्यों नहीं ?उन्होंने हंस कर कहा भाभी दोनों परिवार वालों ने पिटाई कर खाट पर डाल दिया होगा| डाक्टर साहब काफी समय बाद वापिस लौटे अब उन्हें हंसी नहीं आती थी ईरानी खानम के नखरे, खुला खर्च , घर भी पैसा भेजना पड़ता था |

मुस्लिम महिलाओं ने ट्रिपल तलाक के खिलाफ आवाज बुलंद की हैं मोदी जी से भी न्याय की अपील है 11 मई से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी |

डॉ शोभा भारद्वाज

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sinsera के द्वारा
April 1, 2017

दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच गयी लेकिन हर जगह औरतों के शोषण की कोई न कोई तस्वीर मौजूद है. जागरण ने ऐसा विषय दे दिया है कि सदियाँ बीत जाएँगी लेकिन औरतों के दमन और शोषण कि कहानियां ख़तम नहीं होंगी.दुःखद..

Shobha के द्वारा
April 1, 2017

प्रिय सरिता जी शोषण हमारे यहाँ भी होता है परन्तु तीन शब्द कह कर बच्चों की माँ को घर से बाहर का रास्ता दिखा देना में इस बिषय पर लम्बा लिख सकती हूँ पति डाक्टर है काफी मुस्लिम उनके मरीज हर महिला की कहानी है कई सलाह भी लेती हैं पढने के लिए शुक्रिया दिल में जितने दुःख भर लो कष्ट मिलता है

sadguruji के द्वारा
April 1, 2017

आदरणीय डॉ शोभा भारद्वाज जी ! बहुत मार्मिक चर्चा आपने की है ! सरिता सिन्हा जी ने बिलकुल सही कहा है कि सदियाँ बीत जाएँगी लेकिन औरतों के दमन और शोषण कि कहानियां ख़तम नहीं होंगी ! आपने रचना 1 अप्रेल को पोस्ट क़ि है, जबकि 31 मार्च तक पोस्ट करना था ! बहुत सार्थक और विचारणीय रचना क़ि प्रस्तुति के लिए बधाई !

Shobha के द्वारा
April 1, 2017

श्री सद्गुरु जी मैने वैसे ही आप सब की नजर में समाज के बहुत बड़े वर्ग की महिलाओं की आँखों देखी हालत और सोच डाली है ऐसे किस्सों का पूरा ब्यान मेरे पास है | अपने पढ़ा आपको कष्ट हुआ होगा केवल 70% मर्दों का समाज ही नहीं कई महिलाएं भी ऐसा सोचती हैं अपनी बहु से छुटकारा आसानी से पाया जा सकता है

jlsingh के द्वारा
April 2, 2017

सुरेंद्र शर्मा एक कविता पाठ करते हैं- क्या फर्क पड़ता है राजा रावण हो या राम … अगर राजा रावण हुआ तो सीता हरण कर ली जाएगी और राजा राम हुए तो गर्भावस्था में वनवास के लिए भेज दी जाएगी. क्या फर्क पड़ता है राजा कौरव हो या पांडव … गए राजा करव हुए तो द्रौपदी का सर हरण सभा के बीच किया जायेगा और अगर पांडव हुए तो जुए में दांव पर लगा दी जाएगी… बाकी आप सब समझती हैं! सादर!

Anil bhagi के द्वारा
April 2, 2017

आदरणीय शोभा जी मुस्लिम महिलाओं पर ट्रिपल तलाक कितनी बड़ी ज्यादती है कुछ महिलाएं बताती हैं दो बार चिल्ला -चिल्ला कर तलाक बोलतें हैं इतने में बीबी और बच्चे डर जाते हैं परन्तु निखट्टू कुछ न करने वाले बीबी की मेहनत पर जीने वाले कितना भी बीबी चाहे तलाक नहीं देते वहां मौलवी जी भी इजाजत नहीं देते |

Shobha के द्वारा
April 2, 2017

श्री जवाहर जी आपके लेख का आशय समझ गयी लेकिन अब अधिकतर देशों में प्रजातंत्र है वोट से सत्ता मिलती है वह भी निश्चित वर्षों के लिए अमेरिका में तो चार ही वर्ष हैं महाभियोग से राजा हटाया जा सकता है भारत में संसद में प्रस्ताव पास कर सरकार अल्प मत में आ जाती है आप कहेंगे बहुमत हैं लेकिन देश के संविधान के अनुसार काम होता है सुप्रीम न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है सत्ता मिल जाती है परन्तु एक दायरे में रहना पड़ता है रहा सवाल महिलाओं का आपने अबकी बार चुनाव रिजल्ट देखा इसके पीछे महिलाओं का ऐसा वर्ग है जिसे तीन शब्दों के बाद घर से निकाल दिया जाता है नकाब की ओट में जुबान ने कुछ नहीं कहा परन्तु उनकी उंगलिया बोलीं जिस दिन ओरतें अपना अधिकार समझ कर वोट बैंक बन गयीं सुरेन्द्र शर्मा जी की कविता उलटी पड़ जायेगी द्रोपदी दावं पर जरुर लगी थी परन्तु कोरव कुल खत्म हो गया भीष्म पितामह को अर्जुन के तीखे बानों ने मरने भी नहीं दिया था इतिहास हर बात का गवाह है |रावण की दिया बाती करने वाला अपना कोइ नहीं था श्री राम राम लला खुले में बैठे हैं आंधी बरसात गर्मी झेलते हैं जन्म स्थल पर भी मन्दिर नहीं बन सका सीता धरती में समा गयी लेकिन दुबारा अयोध्या नही गयीं

Shobha के द्वारा
April 2, 2017

प्रिय अनिल जी सही लिखा है तलाक ओरतों को दबाने का साधन है जिस दिन मुस्लिम महिलाएं अपने अधिकार को पहचान जाएँगी पैरों पर खड़ी हो जायेंगी तलाक का भी खत्म हो जाएगा

shakuntla mishra के द्वारा
April 2, 2017

शोभाजी शोषण तो पुरुष परिवार का हमारे हिन्दू में होता हैं लड़की के एक कहने भर से ही लड़के का पूरा परिवार बर्बाद होते और अपमान सहते मैंने देखा है आज हमारा समाज मुस्लिम महिला के दर्द को आवाज दे रहा है और अपने यहाँ की दुधारी तलवार नहीं दिख रही | जो झूठी धरा के बल पर परिवार के सभी लोगों को फंसा देती हैं क्या ये सही है

Shobha के द्वारा
April 3, 2017

शकुन्तला जी मेने अबकी बार मुस्लिम महिलाओं को लिया है पूरी तरह से मजबूर हैं तीन शब्द तलाक के कह कर घर से बाहर कर देते हैं साथ में बच्चे भी पकड़ा देते हैं लडकी को माँ कभी नहीं छोडती |हमारे यहाँ आज कल दहेज कानून का फायदा उठा कर वर पक्ष को पीड़ित करती हैं उस पर भी समाज आज कर आवाज उठा रहा है लेख पढने के लिए धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
April 6, 2017

आदरणीय शोध जी सादर नमस्कार यह वाकई ज्वलंत समस्या है . साभार

Shobha के द्वारा
April 6, 2017

प्रिय यमुना जी मुस्लिम महिलाएं ट्रिपल तलाक़ से परेशान हैंलेख पढने के लिए धन्यवाद

Alka के द्वारा
April 8, 2017

आदरणीय शोभा जी ये वाकई एक अति विचारणीय मुद्दा है | बचपन में में मेरे पड़ोस में भी एक सलीम चाचा थे| चाची बहुत सुन्दर थी पर बच्चे नहीं हुए | चाचा ने दूसरी शादी कर ली और चाची को तलाक दे दिया | उनका वो रुदन आज भी कानो में गूंजता है |

Shobha के द्वारा
April 9, 2017

प्रिय यमुना जी लेख पढने पसंद करने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
April 9, 2017

प्रिय अलका जी मुस्लिम महिलाएं तलाक के भी से डर कर जिन्दगी काटती हैं बहुत दुखदायी है आपने बचपन में जो देखा था आज तक आपके मन पर अंकित हैं लेख पढने के लिए धन्यवाद


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