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सुरक्षा बलों की सहनशीलता

Posted On: 17 Apr, 2017 Junction Forum में

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सीआरपीएफ जवान के साथ कश्मीरी नौजवानों और कम उम्र के बच्चों का व्यवहार पूरे देश ने देखा, लात मार कर जवान को तंग कर विचलित करने के सभी तरीके अजमाये जा रहे थे | जवान की सहनशीलता , उसकी आत्मिक शक्ति , सहिष्णुता ,उसके  संस्कार और भारतीय संस्कृति की महानता की परिचायक थी जबकि वह हथियार से लेस था | एक तरफ हमारे जवान हैं देश की सीमा की सुरक्षा में तत्पर , प्राकृतिक आपदा में कश्मीर के नागरिकों को बचाने की हर सम्भव कोशिश करते हैं कभी आपा नहीं खोते दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना ने अपने ही अंग पूर्वी पाकिस्तान आज का ‘बंगलादेश’ के बाशिंदों पर बर्बरता का व्यवहार किया था |कश्मीर में मुस्लिम बहुल्य का मुद्दा उठा कर कश्मीरी पंडितों को उनकी जन्म भूमि से निकाल कर कश्मीर पर हक जताने वाले भूल गये बंगलादेश मुस्लिम देश था |चुनावों में शेख मुजीबुर्रहमान की आवामी लीग बहुमत में आई थी लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान ने उन्हें सरकार बनाने का हक नहीं दिया शन्ति पूर्ण विरोध को कुचलने के लिए जनता पर इतने जुल्म किये जनता त्राहि –त्राहि कर उठी थी किशोरियों तक को नहीं बख्शा गया था बंगला देश के इतिहास के पन्ने निर्दोषों के खून से रंगें हैं |मुक्ति वाहिनी का गठन हुआ जिसके शौर्य के सामने  पाकिस्तान की विशाल सेना भारत के सामने सरेंडर करने को मजबूर हुई |बंगलादेश का निर्माण एक शूल की तरह पाकिस्तान के सीने में चुभता हैं |

बलूचिस्तान पकिस्तान का पश्चिमी प्रान्त है इसके एक और अरब सागर है यह  भूभाग ईरान के सीस्तान तथा अफ़ग़ानिस्तान से सटा है यहां की राजधानी क्वेटा  है |  बलूच पाकिस्तना के आधीन नहीं रहना चाहते उनकी लीडर शिप मानती है बलूचों पर पाकिस्तान ने जबरन कब्जा किया था |बलूचों को घर से उठा कर ले जाना उनपर असहनीय झुल्म ढाना रोज का काम है कई कभी वापिस नहीं आये हाँ उनके शव मिलते हैं | बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है जिसका क्षेत्र फल सबसे बड़ा है लेकिन आबादी कम है | इनकी जनसंख्या कुल एक करोड़ तीस लाख है भाषा बलूची है | प्रदेश खनिज सम्पत्ति से भरपूर है लेकिन बलूचिस्तान को कभी अपना नहीं समझा केवल दोहन किया गया है| | बलोचिस्तान में महिलाओं बच्चों और अपने ही नागरिकों पर सेना द्वारा होने वाले अत्याचार खून जमा देते हैं | यहाँ 85% जनसंख्या को पीने का साफ़ पानी नहीं मिलता ,बिजली की हालत खराब है 70% बच्चों के लिए शिक्षा की उचित व्यवस्था नहीं है 63% गरीबी की रेखा से नीचें है जिनके पैरों में पहनने को चप्पल भी नहीं है| कहने को पाकिस्तान उन्हें अपना नागरिक कहता है परन्तु हेलीकाफ्टर से उन पर बम बरसाए जाते हैं |बलूचों के नेता जिनका बहुत मान सम्मान था अकबर खान बुगती की राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ के आदेश से पाकिस्तानी सेना द्वारा हत्या कर दी गयी। जिसका दर्द आज भी बलूचों के दिल में है |सत्तर के दशक में पाकिस्तान के खिलाफ आन्दोलन हुआ जिसे पाक सेना ने बर्बरता पूर्वक कुचल दिया गया | पाकिस्तान ने उन्हें कभी अपना नहीं समझा केवल प्रदेश का दोहन किया है यही नहीं आये दिन शिया समुदाय पर हमले होते रहते हैं क्या शिया मुसलमान नहीं हैं फिर उन पर जुल्म क्यों? पाकिस्तान बनने के बाद हिदू और ईसाई समुदाय के लोग वहाँ रह गये थे उनकी दशा भी अच्छी नहीं है

पाक द्वारा अधिकृत कश्मीर में बच्चों और किशोरों का कोई भविष्य नहीं है उनके भाग्य में स्कूल या कालेज में शिक्षा पाने के बजाये आतंकी ट्रेनिंग कैंप में आतंक की ट्रेनिंग लेना हैं गुरु दक्षिणा में जेहाद का पाठ रटा कर भारत की धरती को खून से रंगने के लिए निरंतर भेजा जा रहा है |कश्मीर के आतंकी एक के बाद एक स्कूल जला कर किताबों की जगह बच्चों और किशोरों के हाथ में पत्थर पकड़ा रहे हैं | सुना है पत्थर काफिर या शैतान पर बरसाये जाते हैं |यहाँ तो सुरक्षा सैनिकों और अपने ही पुलिस बल पर पत्थर चलाने का आदेश पाकिस्तान से आता है  जबकि पुलिस में कश्मीरी मुस्लिम भी भर्ती होते हैं |

हैरानी है एक भी अलगाव वादी नेता का बच्चा हाथ में पत्थर लिये दिखाई नहीं देता उनके लिये वह अच्छी शिक्षा उत्तम भविष्य का सपना देखते हैं वह भारत या विदेशों में शिक्षा के बाद शानदार नौकरी करेंगे या अलगावादी लीडरों के जानशीन की गद्दी सम्भाल कर दोनों तरफ से फायदा उठाएंगे  |पकिस्तान से भी पैसा लो ,भारत से फायदा उठाना तो उनका जन्म सिद्ध अधिकार है ताकि अलगाव वाद चलता रहे कश्मीरी मासूम बच्चों के दिमाग में भारत विरोध निरंतर बढ़ता रहे |

9अप्रेल बारामूला में चुनाव के दौरान जम्मू कश्मीर पुलिस के जवान पोलिंग बूथ की निगरानी कर रहे थे अचानक अलगाव वादी नेताओं के आदेश पर भीड़ बढ़ती गयी हरेक के हाथ में पत्थर थे संकट के समय में सिक्योरिटी फ़ोर्स भी पहुंच गयी लेकिन जम्मू कश्मीर के पुलिस बल की मदद करने में मुश्किल आ रही थी पत्थर बाज हिंसक हो रहे थे सुरक्षा बल यदि कार्यवाही करते गोलियां चलती काफी लोग मरते अत : एक पत्थर बाज को पकड़ कर जीप के बोनट पर बिठा कर सुरक्षित निकल गये और उसे पुलिस को सौंप दिया |इजराईल और पेलेस्टीनियन के बीच रोज झड़पें होती हैं सैनिकों पर पत्थर चलते हैं सुरक्षित बचने के लिए इस प्रकार के ढंग अजमाने पड़ते हैं |पूर्व मुख्य मंत्री उमर अब्दूल्ला को अपनी राजनितिक रोटियां सकने के लिए पत्थर बाजों के मानवाधिकार की चिंता हुई उनके कुकृत्य की चिंता नहीं होती | कश्मीर की सुरम्य घाटियों पर इस्लामिक स्टेट के विचारक बगदादी की भी नजर रही हैं यहाँ आतंकवादियों के अड्डे बने जेहाद चलता रहें |

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अनिल भागी के द्वारा
April 20, 2017

आदरणीय शोभा दी सही लिखा है आपने सैनिक ने अलगाववादियों द्वारा चढाये गये गुमराह नौजवानों के सामने शं शीलता का परिचय दिया

Anjana के द्वारा
April 20, 2017

शोभा जी कश्मीर की स्थिति पर प्रकाश डालता लेख पाकिस्तान तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है भारत में आतंक फैलाना चाहता है

sadguruji के द्वारा
April 20, 2017

आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी ! बहुत सुन्दर और विस्तृत ढंग से आपने कश्मीर में सुरक्षाबलों की संघर्षपूर्ण और सोचनीय स्थिति पर प्रकाश डाला है ! उपचुनाव वाले दिन पोलिंग बूथ पर पत्थरबाजों से कड़ाई से नहीं निपटते तो न जाने कितने कमर्चारियों की जान चली जाती ! सार्थक और यथार्थपूर्ण लेखन के लिए बहुत बहुत अभिनन्दन और हार्दिक बधाई ! अब तो एक ही समाधान दिख रहा है कि राष्ट्रपति शासन लगा आतंक और पाकिस्तान दोनों को करारा जबाब दिया जाए ! जबतक पाकिस्तान की स्थिति पीओके में कमजोर नहीं होगी, तबतक कश्मीर समस्या भी हल नहीं होगी ! सादर आभार !

drAKBhardwaj के द्वारा
April 20, 2017

शोभा पाकिस्तान ने अपने पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के साथ जो किया बलूचियों के साथ और पी ो के साथ जो किया दुनिया जानती है फिर भी कश्मीर के लोग समझ नहीं रहे केवल इस्लाम के नाम को समझ रहे हैं

Shobha के द्वारा
April 21, 2017

श्री डॉ भारद्वाज जी अलगाव वादी अपना हित साधने के लिए कश्मीरी बच्चों और जवानों को भडका कर सुरक्षा बलों पर पथराव करवाते हैं अपना भविष्य खराब कर रहे हैं साथ ही कश्मीर भी पिछड़ रहा है

Shobha के द्वारा
April 21, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी कश्मीर के हालात कई बार बिगड़ कर सुधरे हैं इंदिरा जी ऐसे में राष्ट्रपति शासन लगा देती थी इंदिरा जी में हिम्मत थी भाजपा से साथ महबूबा मुफ़्ती की सरकार है भाजपा कश्मीर में सरकार हाथ से निकलने नहीं देना चाहती समय की बात है कश्मीर के हालात बिगड़ते सुधरते रहते हैं लेख पढने पसंद करने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
April 21, 2017

प्रिय अंजना जी पकिस्तान का जन्म ही भारत विरोध में हुआ है वह अपना काम करता रहता है आतंकवाद पाकिस्तान में भी पनप रहा है

Shobha के द्वारा
April 21, 2017

प्रिय अनिल हमारे सैनिक बल बहुत सहनशील है अब तो उनको काफी अधिकार मिले हैं पहले तो उनसे कहा जाता हैं डक करो अपनी तरफ से कुछ नहीं करना है

sinsera के द्वारा
April 22, 2017

आदरणीय शोभा जी, आश्चर्य इस बात का होता है कि ये अलगाववादी किस भाषा के प्रयोग से कश्मीरियों को सही गलत का फर्क भुलवा देते हैं और गलत काम के लिए प्रेरित कर ले जाते हैं. जो बात हम आप समझ रहे हैं वो ये क्यों नहीं समझते, कभी कहते क्यों नहीं कि खुद आगे आओ या अपने परिवार वालों को भी लाओ. ये अब्दुल्लाह फॅमिली खुद सेना की सुरक्षा में रहती है और पत्थरबाजों कीअनुशंसा करती है. ऐसे में यदि किसी सुरक्षाकर्मी का खून खौल जाये और वो इन्हे गोली मार दे तब तो तहलका हो जायेगा.लेकिन धैर्य की परीक्षा ये अलगाववादी कब तक लेते रहेंगे. सरकार को चाहिए कि सेना को खुद निर्णय लेने का अधिकार दे दे.

Shobha के द्वारा
April 22, 2017

प्रिय सरिता जी दीन की सियासत कुछ रूपये जब भीड़ में कहते हैं इस्लाम के लिए क्या किया धर्मभीरू सोचते हैं हम हैं न गुमराह किशोर’ धंधे बंद हो गये सैलानी भय से आते नहीं हैं सब कुछ भारत के नाम पर थोप दो राजनेता तो सदैव से सत्ता सुख के लिए कुछ भी करने को तत्पर रहते हैं लेख पढने के लिए हार्दिक धन्यवाद

harirawat के द्वारा
April 22, 2017

ये तो जग जाहिर है की पाकिस्तान सदा से दैशत गर्द, बर्बर, आतंकवादियों का जन्म दाता रहा है, निर्दोषों को फंसाकर उन्हें फांसी पर चढ़ाता है, आतंकियों को सीमा पार कराकर निर्दोषों का कत्लेआम करवाता है ! कश्मीरियों को नजर नहीं आरहा है की पाकिस्तानी सैनिक पाक एक्यू पाइड काश्मीर में वहां की आम जनता के साथ कितनी दुर्दांतता और शैतानियत से पेश आते हैं फिर भी हमारे काश्मीर के नव जवान आतंकियों द्वारा गुमराह हुए लोग अपनी ही जान की हिपाजात करने वालों पर पत्थर मारते है ! पाकिस्तान के नारे लगाते हैं ! सैनिकों का सब्र जिस दिन जबाब देगा उस दिन आतंकियों के सरगना सहित सारे दैशतगर्द मिट्टी के नीचे दफ़न दिए जाएंगे ! शोभाजी विस्तृत सकारात्मक लेख के लिए साधुवाद !

jlsingh के द्वारा
April 23, 2017

आदरणीया डॉ शोभा भरद्वाज जी, सादर अभिवादन! सब्र का इम्तिहान भी एक दिन ख़त्म हो सकता है. नौजवान के हाथ बंधे नहीं होने चाहिए. हमारे गृह मंत्री रक्षा मंत्री और प्रधान मंत्री निर्णय लेने में सक्षम हैं और हमरे देश की जनता भी इन नौजवानों/सैनिकों के साथ है. सही गलत चाहे जो हो हमारे नौजवान हमारे लिए कीमती हैं यह सभी जानते हैं. बहुत राजनीति हो चुकी… अब तमिलनाडु के किसानों की भी सुन लेनी चाहिए.. योगी जी जैसे यु पी में कर रहे हैं और राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए. सादर!

Shobha के द्वारा
April 27, 2017

श्री जवाहर जी प्रजातंत्र को बचाए रखने की मजबूरी है तमिल नाडू के किसान 40 हजार करोड़ रूपये की मांग कर रहे हैं राज्य सरकारें वोट बैंक बनाने के किये वादे करतेहैं सेंटर दे तो हम आपको दे जवाहर जी मुझे पत्रकारिता पर मेटीरियल चाहिए था मेने सर्च किया आपका लेख भी मिला अधिकतर जो मुझे चाहिए था आपके लेख में था |लेख पढने के लिए धन्यवाद


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