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चुभन पाकिस्तान के कलेजे में कब होगी ?

Posted On: 3 May, 2017 Junction Forum में

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‘शठ के साथ शठ की नीति ही कूटनीति है|’ जम्मू कश्मीर की कृष्णा घाटी से नियन्त्रण रेखा पार करने के लिए सीमा सुरक्षा दल के गश्ती दस्ते का ध्यान बटाने के लिए पहले मोर्टार से गोले गये उसकी आड़ में पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीम शहीद हुये दो सैनिकों के सिर काट कर ले गयी |शत विक्षत शव को अंतिम विदाई देते समय पूरा देश क्षोभ और गुस्से से भर गया | जनेवा समझौते के अनुसार युद्ध के नियम है दुश्मन देश के शहीद सैनिक जिनके शरीर पर अपने देश की वर्दी है उनका दुश्मन की सेना से कोई वैर नहीं था वह  सैनिक धर्म का पालन कर रहे थे अत : युद्ध के दौराने मारे गये या बंदी बनाये गये सैनिकों का अपमान नहीं होना चाहिए |शहीदों के शव का सम्मानित अंतिम संस्कार करना इंसानियत का धर्म है लेकिन सीमा रेखा पार कर शहीदों के शव की बेहुरमती की गयी भारत के शहीद सैनिकों का सिर काटना नई बात नहीं हैं ,उसी दिन हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने पांच पुलिसकर्मियों और दो बैंक कर्मचारियों को मौत के घाट  उतार कर कैश ले जाती वैन लूट ली यह भी महज संयोग नहीं था|

शायद पाकिस्तान उस युग में लौटने की तैयारी कर रहा है जब भूखों की भीड़ घोड़ों की पीठ पर चढ़ कर सीमाओं को रौंदती किसी भी देश में घुस जाती थी दहशत फैलाने के लिए सिर काट कर भाले की नोक पर लगा कर आतंक फैलाते थे शांति प्रिय नागरिक भयानक दृश्य को देख कर डर जाते थे शायद अपने ही नागरिकों को आतंकी बनाते – बनाते पाक नेतृत्व आदिम काल में पहुंच रहा हैं | साफ़ मौसम में दहशत गर्दों को कश्मीर में आतंक फैलाने, इंसानों को काफिर कह कर मारने के लिए लगातार धकेला जा रहा है पाकिस्तान के पास शायद अपने नौजवानों के लिए यही रोजगार  बचा है उनमें जहर भरकर , आतंक की ट्रेनिंग देकर कश्मीर घाटी में निरंतर प्रवेश कराया जाता है जाओ मार काट मचाओ मर जाने पर जन्नत पाने के अधिकारी बनोंगे  अर्थात मुआवजे में जन्नत | पाकिस्तान में आतंकियों की खेती हो रही है दीन के नाम पर किशोरों और नौजवानों को भड़का कर उन्हें काफिर को मारने पर मिलने वाले सबाब का पाठ ,जन्नत का ख़्वाब दिखा कर भारत में कुफ्र खत्म के नाम पर आतंक के आका उन्हें भेजते हैं  ‘जेहाद के लिए जा रहे हो निर्दोष इंसानों का कत्ल करते जेहाद की राह पर शहीद हो जाने पर सीधी जन्नत मिलेगी’? काफिर किसे कहते है ? पाकिस्तानी आतंकियों के मसीहा तय करते हैं |

हैरानी की बात है अपने ही मरे आतंकी नागरिकों के शवों को लेने से पाकिस्तान साफ़ इंकार करता है भारत की संस्कृति विश्व कल्याण और सद्भावना में विशवास रखती हैं आतंकवादियों के शवों के साथ भी दुर्व्यवहार नहीं किया जाता ऐसे वहशी धर्म के नाम पर आतंक फैलाने वालों को भारत  भूमि में एक इंच भी जगह नहीं मिलनी चाहिए उन आतंकियों का मौलवियों से विधिवत संस्कार कराया जाता रहा है आखिरत तक इंतजार करने के लिए अपनी धरती दी गयी यदि इन शवों का विद्युत् शव गृह दाह में अंतिम संस्कार किया जाता उनकी जन्नत का ख़्वाब अधूरा अधर में लटका रह जाता इस्लाम के अनुसार वह जन्नत से महरूम रह जाते क्योकि काफिर जलते हैं | आतंकी बेटों के कृत्य को शहादत का नाम दे कर गर्वित होने वाले माता पिता उनके मरने के बाद दावत देकर गर्वान्वित महसूस करते हैं उनकी भी रूह कांप जाती | फिदायीन बनाये गये आतंकी डर जाते मर जाने पर उनके शव को उनका देश लेने से मना कर देता है उनके लिए जन्नत का दरवाजा दुश्मन मुल्क बंद कर रहा है जेहादी विचलित हो जाते| इस्लाम के नाम पर बना पाकिस्तान और ऐसी नापाक हरकतें देश की सोच बन गयी है भारत के सैनिकों के सिर काट कर ले जाना पाकिस्तान के दीनी मुसलमानों को भी पसंद नहीं आयेगा हाँ अपने लोगों ख़ास कर आतंकवादियों का मौरल बढ़ाने की सोच अवश्य हो सकती है |

भारत की जनता की सोचती है पाकिस्तान की नापाक हरकतों के विरोध में भारत में बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं लेकिन मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाता है उसके बाद और भी बड़ी घटना होती है| भारत की विदेश नीति में पंचशील का सिद्धांत पड़ोसियों के साथ प्रेम सम्बन्ध बढ़ाने की नीति व पाकिस्तान से सदैव मधुर सम्बन्ध बनाने की चाह हर सरकार पर हावी रहती है उसकी कीमत भी देते रहे हैं | क्या पड़ोसी कभी समझता है ?भारत की  सेना की तरफ से सर्जिकल स्ट्राईक की गई | सेना की कार्यवाही की प्रशंसा होनी चाहिए थी उस पर भी प्रश्न उठाये गये थे दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कूटनीतिक ढंग से प्रूफ मांगे गये उसी राह पर कांग्रेस जैसा दल जिसका गौरव पूर्ण इतिहास रहा है चल पड़ा शायद देश से अधिक वोट बैंक अधिक हावी था दुःख होता है काश पूरा देश एक साथ सैनिकों की कार्यवाही पर गर्व महसूस करता हम कुछ समय के लिए राजनीति भूल जाते, नहीं भूले लेकिन जनता ने वोट के ही रास्ते जबाब दिया |

शहीद परम जीत  के भाई ने कहा जब सेना की भर्ती होती है एक इंच कम होने पर सेना में जाने के इच्छुक जवान को रिजेक्ट किया जाता लेकिन शहीद के घरवालों को अंतिम संस्कार करने के लिए एक फुट कम शव क्यों सौंपा गया ? शहीद परिवार और भारत वासी चीख रहा है हमें भी पाकिस्तानी सैनिकों के कटे सिर चाहिए पाकिस्तान की धरती पर भी केवल धड़ को कब्र दी जाये बिना सिर के शहीद का अंतिम संस्कार कितना दुखद है| इतिहास में ऐसे उदाहरण पहले भी पढ़े गये हैं लेकिन सभ्यता के विकास के साथ शवों का सम्मान करने की परम्परा बनी हैं |

अब भारत में पड़ोसी की नापाक हरकतों से पूरा देश आंदोलित है विरोधी दल भी राजनीति भूल कर कड़ी कार्यवाही की मांग कर रहे हैं |बहस पर बहस हो रही हैं पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए किन विकल्पों को अपनाया जाए क्या   युद्ध अंतिम विकल्प है ?क्या अभी हम पाकिस्तान को दंडित नहीं कर सकते ? भारत की भूमि से पाकिस्तान जाने वाली नदियों का पानी रोक दिया जाये अर्थात सिंधु जल संधि भंग की जाये|  इन नदियों का जल सबसे अधिक पाकिस्तान के सेना के उच्च पदाधिकारी सैनिक अफसरों के फ़ार्म हाउसों को सींचता है | पाकिस्तान भारत के खिलाफ छद्म युद्ध से बाज नहीं आ रहा| अभी विरोध में ‘जल रोकना बिना रक्त पात का पाकिस्तान के विरुद्ध अघोषित युद्ध होगा |

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
May 3, 2017

“पाकिस्तान की नापाक हरकतों के विरोध में भारत में बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला जाता है ! उसके बाद और भी बड़ी घटना होती है !” आदरणीया डॉक्टर शोभा भारद्वाज जी, आपने बिलकुल सही कहा है ! हमारा आक्रोश कुछ ही दिनों में ठंडा हो जाता है ! हम लोगों के अंदर यही तो सबसे बड़ी कमी है ! सत्तासीन नेताओं में भी पाकिस्तान के खिलाफ कड़े कदम उठाने की कोई दृढ इच्छाशक्ति नहीं है ! बेशर्म विपक्षी नेता सरकार की कुछ न कर पाने की विवशता पर मन ही मन खुश होते है और न्यूज चैनलों पर अंडबंड बक केवल मुंहजबानी आक्रोश दिखाते हैं और अपने ही देश की सरकार की छीछालेदर करते हैं ! सादर आभार

अनिल भागी के द्वारा
May 4, 2017

प्रिय शोभा दी दुःख होता है जब आतंकवादी बड़ी गटना को अंजाम देकर निकल जाते हैं हम केवल भाषण देते रह जाते हैं एटम से इतना क्या डरना क्या हम एटमी ताकत नहीं है पाकिस्तान क्या बर्बाद नहीं होगा पाकिस्तान् भीं जानता है हम केवल देख लेंगे सबक सिखा देंगे की भाषा जानते है

harirawat के द्वारा
May 4, 2017

डाक्टर शोभाजी नमस्कार ! हर दिलों में अग्नि भड़काने वाला लेख ! एक बार सेना के कमाडंरों को राजनेताओं द्वारा आदेश तो हो की आप अपने तौर तरीके से पाक के नापाक इरादों को ऐसा रौंद दो की उनकी आने वाली कही पीढ़ियां भी संभल न पाए ! १९४८ में तत्कालीन पीएम ने उस कालीन ऑपरेशनल कमांडर पर सीज फायर करने का दबाव न डाला होता तो आज जेएंडजे में कोई पाक ऑक्युपाइड काश्मीर ही न होता !! ज़रा शोभा जी इस पर भेड़े प्रकाश डालें ! साधुवाद ! हरेंद्र

rameshagarwal के द्वारा
May 4, 2017

जय श्री राम आदरणीय शोभा जी बहुत झकझोर करने वाला लेख.इसके लिए हम स्याम जिंदा है.नेहरूजी ने कश्मीर समस्या को पटेलजी से लेकर खुद संयुक्त राष्ट्र संघ में दे दिया नहीं तो आज ये समस्या नहीं होती १फ़िर १९७१ में इंदिराजी ने शीमा समझौता कर के सब ख़राब कर दिया.१इस बार थोडा सभ्र रक्खे जो होगा उसे पकिस्तान्कभी भूलेगा नहीं ये सब टीवी में या बताकर नहीं किया जाता.हमें उम्मीद है मोदीजी देशवशी को निराश नहीं करेंगे.1सुन्दर लेख के लिए बधाई

Shobha के द्वारा
May 5, 2017

श्री सेंगर जी अतिशय धन्यवाद

Shobha के द्वारा
May 5, 2017

श्री आदरणीय रमेश जी लेख पढने के लिए धन्यवाद आपके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हूँ आप इसी तरह प्रतिक्रिया देते रहें लेख लिखते रहें rइंदिरा जी की मजबूरी थी पाकिस्तान उस समय प्रो अमेरिकन था उसका सातवाँ जहाजी बेडा हिन्द महा सागर में खड़ा था इंदिराजी जी ने आखिर में बहुत बड़ा कुटनीतिक कदम उठाया था अब कश्मीर समस्या का अंतर्राष्ट्रीय करन नहीं होगा

drAKBhardwaj के द्वारा
May 7, 2017

शोभा जी पाकिस्तान में तीन पावर हैं लेकिन चुनाव द्वारा चुनी गयी सरकार बीएस अमेरिका से ऐड लेने के लिए दिखावटी है असली आतंकवादियों के शिरमोर हाफिज सईद और सेना है भारत को अपनी निति में कड़ाई लानी चाहिए

Shobha के द्वारा
May 8, 2017

श्री डाक्टर साहब जिस दिन अमेरिका एड देना बंद कर देगा पाकिस्तान की हालत खराब हो जायेगी हाँ चीन की गोद में पूरी तरह चला जाएगा

Shobha के द्वारा
May 8, 2017

श्री रावत जी माउन्ट बेटन के प्रभाव में नेहरू जी ने कश्मीर समस्या का अंतर्राष्ट्रीय करन करने की थी कश्मीर समस्या सुलगती ही रही अब और बढ़ गयी लेख पढने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
May 8, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी पाकिस्तान जनता है भारत में केवल चर्चा होगी बड़ी -बड़ी बातें होंगी आप्जानते ही हैं सर्जिकल स्ट्राईक पर राय रखने की पाकिस्तान को जरूरत ही नहीं पड़ी हमारे दिल्ली के चीफ मिनिस्टर ही प्रूफ मांगने लगे बाकी भी व्ही बोली बोलने लगे लेख पसंद करने विचार रखनेके लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
May 8, 2017

प्रिय अनिल जी दीनी सियासत का कोइ तोड़ नहीं है कश्मीर पर दीन हावी हो गया है श्री नगर में ही समस्या है जम्मू और लद्दाख का सारा बजट श्री नगर खा जाता है

Shobha के द्वारा
May 8, 2017

श्री रावत जी सेना हमारी रक्षक है नेता राजनीती की भाषा समझते हैं हर विषय पर सोचते हैं युद्ध , युद्ध का परिणाम आज कल वोट बैंक परभी सोचते हैं लेख् पढने लेख की आत्मा समझने के लिए धन्यवाद

yamunapathak के द्वारा
May 15, 2017

आदयणीय शोभा JEE अपने देश के सैनिकों की ऐसी बर्बरता से गुज़र कर जाते हुए देख सुन कर बहुत दुःख होता है . साभार

Shobha के द्वारा
May 16, 2017

प्रिय यमुना जी लेख पढने के लिए अतिशय धन्यवाद जवानों को घेर कर मारने का दुःख बहुत है सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए

sinsera के द्वारा
May 17, 2017

आदरणीय शोभा जी, नमस्कार, कहते हैं बुझने से पहले दिए की लौ तेज़ हो जाती है. मुझे तो लगता है पाकिस्तान अब दुनिया के नक़्शे से मिटने वाला है, अफ़सोस ये है कि इन लोगों ने इस्लाम के नाम पर जिहाद जैसा जाहिलाना और अमानवीय बर्बर कृत्य कर के आतंकवाद पैदा किया और इस्लाम को भी दुनिया के आगे शर्मसार कर रखा है . आज हालात ये हैं कि किसी भीड़ भाड़ वाले इलाके में किसी मुस्लिम को देखते ही लोग घृणा और डर से किनारा करने लगते हैं ये मैं ने खुद देखा है. प्रार्थना है कि इस्लाम का नाम मिटाने से पहले इनको अक्ल आ जाये.

Shobha के द्वारा
May 18, 2017

प्रिय सरिता जी सही लिखा है आपने दुःख तब होता है जब इस्लामिक स्टेट की भावना मुस्लिम बच्चों को प्रभावित् कर रही है वह उनकी तरफ झुकने लगते हैं माँ पिता को पता ही नहीं चलता उनका बच्चा गुमराह कर लिया गया


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