Vichar Manthan

Mere vicharon ka sangrah

203 Posts

2846 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 15986 postid : 1330047

जंगल की जड़ें शहरों में पनपती हैं (नक्सली समर्थक सफेद पोश पार्ट -2 )

Posted On: 14 May, 2017 Junction Forum में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जंगलों में सीआरपीएफ पर आदिवासियों के औरतों बच्चों को आगे कर घात लगाते, छिप कर वार करते , सत्ता को चुनोती देते नक्सलियों के बारे में सभी जानते है लेकिन शहरों में बसे समाज का सुखी सम्पन्न सफेद पोश वर्ग देश में ही नहीं विदेशों तक में नक्सलियों के पक्ष में शोर मचा कर उनके लिए समर्थन जुटाते हैं | अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता मानवाधिकार की दुहाई देते हुए खुल कर सामने आते हैं यही नहीं स्वयं पर फर्जी हमले करवाने से लेकर किसी पर भी बलात्कार के आरोप लगाने में निपुण हैं यदि सख्त पुलिस अफसर नक्सलाईट पर सख्ती बरतता हैं उसके पीछे पड़ जाते हैं कुछ चैनल टीआरपी बढ़ाने के लिए ऐसी खबरों को बार-बार चलाते हैं प्राईम टाईम में बहस कराते हैं लेकिन इनकी पुष्टि न होने पर मौन हो जाते हैं|सफेद पोश नक्सली गतिविधियों खून खराबे पर मौन धारण करने में निपुण हैं |यपीए की सरकार के गृहमंत्री पी चिंदबरम  नक्सलियों के खिलाफ एयरफोर्स का इस्तेमाल करना चाहते थे उनका जम कर विरोध हुआ अत: अभियान पर ब्रेक लगाना पड़ा, मोदी जी ने भी सुकमा में हत्या कांड के तुरंत बाद सेना लगाने से परहेज किया|

शहरी सफेद पोश आमतौर पर मानवाधिकारवादी ,सामाजिक कार्यकर्ता ,शिक्षण कार्यों में लगे लोग है कुछ अपने आप को पत्रकार कहते हैं कुछ रिसर्च स्कालर |वह नक्सलियों की खोज खबर के नाम पर उनके गढ़ में जाते हैं उनके बयानों का प्रचार ही नहीं गौरव गान करते हैं लेकिन दुःख से कहते हैं हम तो दोनों तरफ की मार झेलते हैं नक्सलाईट हमें सरकारी जासूस और मुखबिर समझते हैं सरकार शक की नजर से देखती है जेल भेज देती है |हम तो आदिवासियों की हालत सरकार को बताना चाहते हैं |यही आदिवासियों को भड़काते हैं केंद्र और राज्य सरकारें उनके क्षेत्र का विकास करना नहीं चाहती, 70 वर्ष बीत गये आज भी वह मौलिक अधिकारों ,रोटी कपड़ा मकान बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य सेवा और विकास उनका अधिकार था, से वंचित हैं| सुकमा पहुचने के मार्ग में खूबसूरत नजारे घाटियाँ घने जंगल मन को मोहते हैं लेकिन जगह जगह विस्फोटों से टूटी सड़कें हैं अर्द्ध सैनिक बलों के कैंप छावनी जैसे लगते हैं क्षेत्र में जाने की हिम्मत करना बड़ी बात है | यह नक्सलियों का क्षेत्र हैं या उनके मनमाने साम्राज्य की सीमा शुरू हो रही हैं |आदिवासी चाहते हैं सड़कें बने मोबाईल टावर लगें वह शहरों से जुड़ें लेकिन बनती सड़कें सीआरपीएफ  जवानों के खून से रंगी जा रही है |तर्क दिया जाता है तुम्हारे आदि वासी क्षेत्रों से तुम्हे निकाल दिया जाएगा वनों पर तुम्हारा अधिकार है लेकिन तुम शहरों में मजदूरी के लिए विवश हो जाओगे | बस्तर में ईसाई मिशनरियाँ भी सक्रिय हैं आदिवासियों की सेवा के नाम पर इन क्षेत्रों में रहते हैं उनका धर्म परिवर्तन के नाम पर विदेशों से मोटा पैसा मिलता है इनमें भारतीय भी शामिल हैं |

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जी.एन.साईबाबा सफेद पोश माओवादी थे , जेएनयू का छात्र हेम मिश्रा और उसके चार साथी देश के खिलाफ षड्यंत्र रचने तथा देशद्रोह के अपराध में पकड़े गये उनमें से एक अपराधी विजय तिरकी को दस वर्ष की सजा हुई बाकी को उम्र कैद |साईबाबा व्हील चेयर पर था उसका अपराध न देख कर मानवाधिकार वादियों नें उसके पक्ष में देश विदेश तक शोर मचाया ,अपीलें की गयी चैनलों में एक ही चर्चा थी उसे छोड़ने के लिए सरकार को मजबूर किया लेकिन देश द्रोह के गुनाहगार की सजा सुप्रीम कोर्ट ने कम नहीं की |

जेएनयू प्रसिद्ध विश्वविद्यालय है यहाँ सस्ती फ़ीस , कैंटीन में सस्ता भोजन ,हास्टल सुविधा है लेकिन शुरू से ही बाम पंथियों का गढ़ रहा है किसी भी विषय पर बेबाक बहस करना संस्थान की विशेषता है लेकिन अधिकतर बाम पंथी विचार धारा पर बहस होती है| नक्सलवाद के खिलाफ लड़ने वाले 76 अर्ध सैनिक बलों की शहादत पर खुश होकर जश्न मनाया गया था दुखद टैक्स पेयर के पैसे पर पलने वाले बुद्धिजीवियों की मानसिकता पर हैरानी है इसी संस्थान में पिछले वर्ष 9 फरवरी को अफजल गुरु और मकबूल भट का महिमा मंडन ही नहीं किया, देश विरोधी नारे लगे कितने अफजल मारोगे हर घर से अफजल निकलेगा पाकिस्तान जिंदाबाद देश के टुकड़े टुकड़े तक जंग जारी रहेगी यह किसी और प्लेनेट के जीव नहीं थे इसी भारत भूमि में रहते हैं देश स्तब्ध रह गया| दिल्ली यूनिवर्सिटी के राम जस कालेज में होने वाले सेमिनार में जेएनयू के छात्र ‘उमर खालिद’ और  शहला रशीद को सेमिनार में शामिल होने के लिए बुलाया गया लेकिन विरोध होने पर न्योता रद्द करना पड़ा  जिससे पक्ष और विपक्ष के बीच होने वाली झड़पों में दोने पक्ष के छात्र, टीचर और पुलिस कर्मी जख्मी हुये शिक्षण संस्थाओं में पनपती नक्सलवादी विचार धारा की राजनीति शुभ लक्षण नहीं है |सुकमा के शहीदों को दी जाने वाली श्रद्धांजलि का विरोध किया गया |

सोवियत संघ के टूटने के बाद मार्क्सवाद कमजोर पड़ने लगा चीन भी माओ वादी विचार धारा से धीरे-धीरे पीछे हट रहा है लेकिन भारत में नई विचार धारा, क्रान्ति द्वारा व्यवस्था परिवर्तन के नारे ,लाल सलाम ,अलगाव वाद, यही नहीं सुराज का स्थान स्वराज ने ले लिया है |देश के एक सत्तासीन नेता ने अपने आप को अराजकता वादी कहा सब कुछ अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता के नाम पर |यह भारत की अखंडता और सम्प्रभुता को चुनौती है अनेक जाने पहचाने नाम हैं खुले आम नक्सलवाद का समर्थन कर रहे हैं कई संसद और सत्ता में बैठे हैं कईयों ने राजनीतिक पार्टियाँ बना ली हैं लेकिन चंदा विदेशों से भी आता है क्यों ? क्या चंदा देने वाले देश , भारत को तोड़ने का षड्यंत्र रच रहें है ?बंदूक उनकी है कंधे सफेद पाशों के|

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास में तेजी लाने के लिए  ग्रहमंत्री राज नाथ जी ने दस नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों के मुख्य मंत्रियों से मीटिंग कर एजेंडा बनाया सभी राज्य एक साथ नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सहयोग करें | अक्सर जब कार्यवाही एक क्षेत्र में होती हैं विद्रोही दूसरे राज्य में पलायन कर जाते हैं | सबसे पहले नक्सलवादियों तक हथियारों और गोला बारूद पहुंचने का रास्ता रोका जाये उसके बाद आधुनिक तकनीक द्वारा नक्सलवादियों के अड्डों का निरीक्षण कर उनकी गतिविधियों को जाना जाये विशेष कोबरा बटालियन भेजी जाये जो इन क्षेत्रों की अभ्यस्त है भोजन न मिलने पर यहीं से खाने पीने का जुगाड़ कर लेती है | अब जरूरत सरकार की इच्छा शक्ति की है कागज पर योजना तैयार है | 2 अटैचमेंट

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

8 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
May 14, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! सादर अभिनन्दन और अच्छे लेख के लिये हार्दिक बधाई ! इतने अच्छे लेख लिखे जा रहे हैं, लेकिन इस मंच के मुख्य पेज पर जो पोर्टल है, वहां पर अपडेट नहीं होने के कारण नजर ही नहीं आ पा रहे हैं ! लापरवाही की हद हो गई है ! आपने बिल्कुल सही कहा है कि ज्ञगलों मे रहने वाले आदिवासी लोग आज भी जीवन की मूलभूत जरूरतों- रोटी, कपड़ा, शिक्षा, स्वास्थय और मकान आदि के लिये तरस रहे हैं, इसलिये उन्हे भड़काकर हिंसा के मार्ग पर ले जाया रहा है, साथ ही उनका धर्म परिवर्तन भी बहुत हो रहा है ! इस पर रोक लगे तो नक्सली समस्या पर जरूर अंकुश लग सकता है ! सादर आभार !

rameshagarwal के द्वारा
May 15, 2017

जय श्री राम आदरणीया शोभा जी बहुत सुन्दर महत्वपूर्ण लेख के लिए बधाई..देश का दुर्भाग्य की मानवाधिकार कुछ मीडिया और वामदलों के लोग देश के दुश्मनों का समर्थन करते इन्हें मानवाधिकार आतंकवादियो और नक्सलीयो में दिखाई देता लेकिन सेना या पुलिस के जवानों के लिए कोइ हमदर्दी नहीं.उम्मीद है केंद्रीय सरकार इनसे कतोर्ता से निबटेगी .हमारे राजनेता केजरीवाल,ममता राहुल को देश से ज्यादा कुर्सी की फिकर है इसलिए जे एन यू में ऐसे लोगो के समर्थन में चले जाते.जनता ऐसे लोगो को सबक सिखाएगी.

Shobha के द्वारा
May 16, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी आपने मेरा लेख पढ़ा धन्यवाद ज्यादातर लोग नक्सलवाद की समस्याओं से आँखें मूंद लेते हैं लेकिन समस्या पर कंट्रोल करने के अनेक प्लान बनते हैं इसी बीच बड़ी घटना हो जाते हैं हमारे कीमती जवानों को घेर कर मार देते हैं सरकार कोबरा कमांडो लगान की सोच रही है देखते हैं क्या होता है

Shobha के द्वारा
May 16, 2017

श्री आदरणीय रमेश जी जी दुःख होता है हमारे अपने लोग मानवाधिकार के छोले में विदेशों से चंदा लेकर नक्सलियों की चिता करते हैं उन्हें देश की चिंता नहीं है कई राजनेता सफेद पोश नक्सली हैं आपके उत्तम स्वास्थ्य की शुभ कामना करती हूँ आपके विचार पढ़ कर ख़ुशी होती है

shakuntla mishra के द्वारा
May 17, 2017

कही से कुछ सुलझता हुआ नजर नहीं आ रहा देश में |

drAKBhardwaj के द्वारा
May 18, 2017

नक्सलाईट जंगलों में लड़ते रहते हैं लेकिन आन्दोलन चलाने वाले शहरों में रहते हैं यह सफेद पोश मानवाधिकार वादी विदेशों तक से चंदा लेते हैं सरकार धीरे धीरे कोशिश कर रही है विदेशों से आने वाले सन्दे पर रोक लगाई जाए |

Shobha के द्वारा
May 18, 2017

प्रिय शकुन्तला जी सरकार की इच्छा शक्ति हर समस्या का हल निकाल लेती है

Shobha के द्वारा
May 18, 2017

नक्सलवाद के आका सफेद पोश भी दंड के घेरे में आने चाहिए तभी नक्सलवाद पर लगाम कसी जाएगी लेख पढने के लिए धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran