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पत्रकार एवं पत्रकारिता

Posted On: 3 Jun, 2017 में

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पत्रकारिता का इतिहास बहुत पुराना है रोम में दिन भर की घटनाओं और समाचारों को पत्थर या धातु की पट्टी पर अंकित कर प्रमुख स्थानों पर रख दिया जाता था जिससे अधिक से अधिक लोगों का ध्यान आकर्षित हो सकें| इनमें प्रमुख अधिकारियों की नियुक्ति नागरिक सभाओं में लिए गये निर्णय ग्लेडिएटरों की रोमांचक लड़ाईयाँ कब कहाँ होंगी उनके रिजल्ट आदि लिखे जाते थे|

ईस्ट इंडिया कम्पनी ने सबसे पहले बंगाल पर अधिकार किया था |विदेशी शासन के खिलाफ राजनैतिक जागरूकता के साथ समाज में फैली कुरीतियों की और उस समय के समाज सेवियों ने जन समाज का ध्यान आकर्षित करने के लिए समाचार पत्रों का सहारा लिया जिससे सामाजिक चेतना फैली और भारत में पत्रकारिता राष्ट्रीयता से जुडी |ब्रम्ह समाज के संस्थापक सती प्रथा के विरोधी राजा राम मोहन राय ने प्रेस का सामाजिक चेतना के लिए इस्तेमाल किया समाज में व्याप्त अंधविश्वास कुरीतियों पर चोट करने के लिए कई पत्र शुरू किये जिनमें बंगाल गजट का प्रकाशन 1816 में किया गया यह भारतीय भाषा का पहला पत्र था | अब भारत में ,फ़ारसी और बंगाली में समाचार पत्र छपने लगे |30 मई 1826 के दिन भारत में पहला हिंदी अखबार उदन्त मार्तण्ड पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा प्रकाशित किया गया |हिंदी भाषा के समाचारों ने जन मानस को अपने साथ जोड़ा अंग्रेजी के प्रभाव को भी कम किया |

देश आजाद हुआ देश में प्रेस की प्रगति और पत्रकारिता का अभूत पूर्व विकास देखा गया | भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों में अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का प्रमुख स्थान है प्रेस की आजादी के लिए बुद्धिजीवी सदैव जागरूक रहे हैं | अंग्रेजी के साथ हिंदी के अनेक समाचार पत्र हैं छपते हैं उनके पाठकों की संख्या भी बढती जा रही है कई समाचार पत्र स्थानीय हैं |लेकिन फिर भी पत्रकारों का जीवन आसान नहीं हें |अपने शौक और जनून को बचाये रखना आसान नहीं है |आज दो प्रकार के पत्रकार हैं |प्रसिद्ध पत्रकार जिनका राजनैतिक गलियारों में नाम और चर्चा है इनका जीवन सुखद हैं |सरकार से उन्हें जीवन की सही मूल भूत सुख सुविधाए मिली हैं समय-समय पर सरकारी अवार्डों से उन्हें सम्मानित किया जाता है, राजनीतिक दल अपने प्रवक्ता भी नियुक्त करते हैं | कईयों ने अपना स्थान केवल अपनी प्रतिभा से नहीं बनाया है उनकी अपनी सूझ बूझ और कूटनीतिक ह्थकंडों का भी स्थान है | उनकी बात अलग हैं लेकिन पत्रकारिता महंगा शौक व नशा है न जाने कितने पत्रकार कुछ कर दिखाने के जोश में अपना जीवन भी दावं पर लगा देते हैं पत्रकारों का जीवन सुरक्षित नहीं है वह खतरों से खेल कर सनसनी खेज समाचार लाते हैं या स्टिंग आपरेशन करते हैं | जब से अपराधी तत्वों का राजनीति में प्रवेश हुआ है वह अब रंगे सियार की भांति लक झक सफेद कुर्ता पहन कर अपनी चाल ढाल को बदल, सौम्यता का अवतार धर कर अपना गुणगान कराना चाहते हैं प्रिंट मीडिया में उनके चित्र और पक्ष में लेख छपें उन समाचारों को दबाया जाये  जिनमें उनके कुकृत्य उजागर होते हैं|

सच कहना लिखना जोखिम भरा काम है कई पत्रकारों की हत्या भी हुई पता ही नहीं चला हत्या की सुपारी किसने दी गयी थी |सरकार और समाज को चाहिए कि पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करें उन्हें सच कहने से न रोकें क्योंकि यही लोग लोकतंत्र के चौथे खम्भे और जन मत के निर्माता हैं लोकतंत्र में इनका अलग महत्व और पहचान है| यह सरकार के साथ साथ विरोधियों को भी कटघरे में खड़ा करते हैं , हमारी बात को सरकार और जनता तक पहुंचाने के माध्यम हैं | आज महिला पत्रकार भी किसी से कम नहीं हैं, कर्तव्यों को बखूबी से अंजाम दे रही हैं जोखिम उठाती हैं |उनकी सुरक्षा की चर्चाये भी होती हैं उन्हें सुरक्षित अपना काम करने दे| कई पत्रकारों को जेल की हवा भी खानी पड़ी है नक्सलाईट प्रभाव के क्षेत्रों में जाते हैं उन्हें सफेद पोश नक्सलवादियों का पक्षधर माना जाता है| उनका पक्ष जनता की नजरों में लाने की कोशिश करते हैं| नक्सल उन्हें शक की नजरों से देखते हैं सरकारी मुखबिर मानते हैं सरकार उन्हें उनका समर्थक और भेदिया मानती है |कई पत्रकार युद्ध क्षेत्र जहाँ हर पल मौत बरसती है से ताजा खबरों के लिए अपनी जान जोशिम में डालते हैं कुछ तो आतंकवादियों का भी इंटरव्यू ले आते हैं वह भी अपना पक्ष रखने के लिए ललायित रहते हैं |

किसी स्टूडेंट से पूछों आप क्या बनना चाहते हैं वह मुस्करा कर कहते हैं ‘पत्रकार’ मीडिया में जाना चाहते हैं लेकिन माता पिता नें जाने नहीं दिया समझाया अनिश्चित भविष्य है | उन्हें बेबाकी से अपनी बात कहना किसी के भी सामने माईक लगा कर प्रश्न करना मीडिया का चकाचौंध से परिपूर्ण जीवन आकर्षित करता है | सच्चाई में क्या पत्रकार सुखी हैं ?पत्रकार हमारी आप की तरह मनुष्य हैं जिनकी अपनी भावनायें अपने दुःख सुख होते हैं | हर परिस्थिति में वे अपना काम करते हैं कईयों की माली हालत बहुत खराब है कई बार पांच सितारा होटलों के कांफ्रेंस रूम में प्रेस कांफ्रेंस के बाद शानदार दावत दी जाती है लेकिन घर में अपना परिवार विपिन्नावस्था में जीवन बिता रहा है उनके गले से निवाला नहीं जाता फिर भी वह अपना दुःख व आर्थिक स्थिति का किसी से जिक्र नहीं करते कुछ नया करने की धुन में लगे रहते हैं |

चेनल अपनी टीआरपी बढाने के लिए अनेक यत्न करते हैं | उन समाचारों को प्रमुखता देते हैं जिनकों श्रोताओं को सुनाने के लिए चटपटा बनाने के लिए अनेक किस्से जोड़े जाते हैं विवादित व्यक्तियों को बुला कर बहस कराई जाती है जितना शोर शराबा होता है उतना ही दर्शकों की रूचि चैनलों  की तरफ बढती है टीआरपी की जंग निरंतर चलती है | चैनल फेमस हो कर एड (विज्ञापन बटोरते हैं) लेकिन प्रिंट मीडिया उन समाचारों की अंदर की बात देते हैं जिनहें   चैनल छिपा जाते हैं | जब तक सनसनी फैलाई जा सके तब तक समाचारों को चलाते हैं अचानक बिना किसी अंत के बंद कर देते हैं| गरमा गर्म बहसें होती हैं लेकिन बहस का रुख अपने हिसाब से मोड़ते  हैं | मजमा जोड़ा जाता है कई बार बहसों में दर्शकों को भी शामिल किया जाता है उन्हें अपनी बात कहने का अवसर दिया जाता है लेकिन बागडोर अपने हाथ में रखी जाती है बाद में प्रोडक्शन डिपार्ट मेंट अपने हिसाब से काट छांट कर पेश करता है | इसके विपरीत समाचार पत्रों के सम्पादकीय जिस विषय को उठाते हैं उसका विस्तार से सही सटीक विश्लेष्ण करते हैं अंत में सुझाव के साथ निष्कर्ष भी देते हैं | समाचार पत्रों को सफल बनाने उनका खर्च निकालने के लिए के विज्ञापनों की जरूरत पडती है |विज्ञापन भी इतने आकर्षक हों पाठकों का ध्यान खींचे ज्यादातर समाचार पत्र किसी राजनीतिक दल या बिजनेस हॉउस के सम्बन्धित होते हैं वह उनके हितों को साधते हैं| अखबार छापना एक महंगा व्यवसाय है जिसमें लाभ की आशा कम है

आज जरूरत है उत्तम पत्रकारिता की लेकिन समाचार पत्र तभी चलेंगे जब उसके पाठक बढ़ेंगे अखबार खरीद कर पढ़ेंगे |

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12 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

drAKBhardwaj के द्वारा
June 5, 2017

कई पत्रकार बायस होते हैं किसी न किसी दल के विचारों से जुड़े रहते हैं घूम फिर कर उन्हीं की तरफ पाठकों को ले जाते हैं पठनीय लेख

rameshagarwal के द्वारा
June 5, 2017

जय श्री राम देश का दुर्भाग्य है की निष्पक्ष पत्रिकारिता ख़तम हो रही सेकुलरिज्म के नाम पर कुछ पत्रकार और चैनल मोदी हिन्दू विरोध को डांढ़ा बना लिया पत्रकार विदेशी धन से भी प्रभवित हो रहे.ये देश के लोकतंत्र का अपमान है बहुत से पत्रकार केजरीवाल,ममता,कांग्रेस वाम डालो का विरोध न करके राष्ट्र विरोधी कार्यो के लिए भी उनका समर्थन करते.ममता हर बात में केंद्र का विरोध करती जेहादिओं का पक्ष लेती लेकिन पत्रकार चुप.बरखा दत्ता,कारन थापर,राजदीप सरदेसाई कुछ पत्रकार है जो हर बात में मोदीजी का विरोध करते. !आदरणीय शोभा जी सुन्दर लेख के लिए बधाई !

Shobha के द्वारा
June 6, 2017

सही लिखा है आपने राजनितिक दल अपने समाचार पत्र निकालते हैं अपने दल के विचारों तक जनता तक ले जाने के साधन हैं

Shobha के द्वारा
June 6, 2017

श्री रमेश जी चैनलों में डिबेट होती देख कर हैरानी होती हैं मोदी जी ने क्या किया देश को कितना आगे ले गये इस पर बहस कम होती है हाँ कमियां निकालने की पूरी कोशिश की जाती है कई पत्रकार भी बिके लगते हैं लेख पढने के लिए धन्यवाद

sadguruji के द्वारा
June 7, 2017

आदरणीया शोभा भारद्वाज जी ! अच्छी चर्चा के लिए अभिनन्दन और बधाई ! आपका ये लेख फिर देखने का मौका मिला ! पत्रकारिता और मीडिया की आड़ में बहुत से गैर कानूनी कार्य भी हो रहे हैं ! ये लोग ऐसे ही धनवान नहीं बने हैं ! कायदे से जांच हो तो इनकी पोलपट्टी खुले ! पर जांच भी आसान नहीं है ! प्रणव राय पर छापे क्या पड़े, इतना होअल्ला मचाया जैसे आसमान टूट पड़ा हो ! भाई आप ईमानदार और सही हो, फिर क्यों चिखचिल्ला रहे हो ! ये आपकी ईमानदारी पर शक पैदा करता है ! सादर आभार !

ashasahay के द्वारा
June 9, 2017

आदरणीया शोभा जी  नमस्कार। आज कीपत्रकारिता के गिरते स्तर पर आपने बहुत अच्छा प्रकाश डाला है।निष्पक्ष पत्रकारिता का अभाव हो गया है।पत्रकार दिशा निर्देशित करने में असमर्थ हैं।एक अच्छा आलेख।

अंजना के द्वारा
June 9, 2017

शोभा दी में एक प्र्त्कार हूँ लेकिन साथ के उन पत्रकारों का दर्द जानती हूँ जो पत्रकारिता से अपना परिवार पालते हैं एक शौक है और मेहनत आपने पत्रकारों के दर्द को समझा है

Shobha के द्वारा
June 9, 2017

श्री आदरणीय सद्गुरु जी सही लिखा है आपने कई पत्रकारों की कोठियां यूँ ही नहीं बनी है कई तो आतंकवादियों तक का पक्ष पाठकों के सामने रखते है आज प्रणव राय पर छापा पड़ा है कल दूसरों का भी नम्बर आयेगा इन्हें भी है लेख पढने सार्थक ज्ञान वर्धक टिप्पणी के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
June 9, 2017

प्रिय आदरणीय आशा जी आपकी प्रतिक्रिया पढ़ कर बहुत अच्छा लगा आप जैसी विदुषी महिला का लेख पढना मेरे लिए सौभाग्य की बात है

Shobha के द्वारा
June 9, 2017

प्रिय अंजना जी सही लिखा है आपने पत्रकारों के दर्द भी कम नहीं है लेख पढने के लिए धन्यवाद

Rinki Raut के द्वारा
June 11, 2017

शोभा जी, देश में पत्रकारों अलग –अलग श्रणी के है, एक जो राजनातिक पार्टी के लिए लिखते है दुसरे जो सिर्फ अख़बार के लिए लिखते है….. और इन सब में सच छुप जाता है आपको बधाई…

Shobha के द्वारा
June 12, 2017

सही लिखा है आपने राजनितिक दल अपने अखबार निकालते हैं सच्चाई कहने से वैसे ही बचते हैं क्योकि अखबार निकालने वाले अपना लाभ और विज्ञापन देखते हैं लेख पढने के लिए धन्यवाद


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