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शंघाई सहयोग संगठन का विस्तार एवं एजेंडा

Posted On: 14 Jun, 2017 Junction Forum में

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कजाकिस्तान की राजधानी असताना में 9 जून 2017 को मध्य एशिया के क्षेत्रीय संगठन की मीटिंग में भारत और पाकिस्तान को भी सदस्यता प्रदान की गयी पहली बार दक्षिण एशिया के दो देशों को सम्मलित किया गया जबकि ईरान भी सदस्यता का इच्छुक है, अभी वह पर्यवेक्षक की भूमिका अदा कर रहा हैं | यूएन महासचिव ने अपने विचार प्रगट करते हुये कहा ‘भारत और पाकिस्तान को अपने आपसी मतभेद दूर करने के लिए नया प्लेटफार्म मिला’ प्रश्न उठता है क्या पाकिस्तान भारत से आपसी मतभेद दूर करने का इच्छुक ?

एससीओ का इतिहास –( शंघाई फाईव) अप्रैल 1996 में शंघाई में आपसी सहयोग बढ़ाने एवं धार्मिक और नस्लीय विवाद मिटाने के लिए मीटिंग हुई थी इसमें चीन, रूस, कजाकिस्तान , किर्गिस्तान और तजाकिस्तान पांच देशों ने हिस्सा लिया था | 2001 में रूस ,चीन,किर्गिस्तान ,कजाकिस्तान ,तजाकिस्तान ,और उजबेगिस्तान अर्थात मध्य एशिया के राष्ट्रपतियों ने शंघाई में एक शिखर सम्मेलन में एससीओ की स्थापना की |एससीओ  के सम्बन्ध संयुक्त राष्ट्र संघ से ही नहीं योरोपियन संघ , आसियान ,कामनवेल्थ और इस्लामिक सहयोग संगठनों से भी हैं | संगठन का प्रमुख उद्देश्य मध्य एशिया की सुरक्षा का ध्यान रखना है | एससीओ को नाटो के ही समान मध्य एशिया का संगठन बनाने की कोशिश की गयी हैं |भारत ईरान और पाकिस्तान संगठन की सदस्यता के इच्छुक रहे हैं अत: 2005 में अस्ताना में हुये सम्मेलन में इन्हें पर्यवेक्षक के रूप में शामिल किया गया था | जून 2010 में एससीओ के  सम्मेलन में सदस्यता का दायरा बढ़ाने का एक साथ निर्णय लिया गया| पर्यवेक्षक देशों को भी सदस्यता प्रदान की जाये| भारत एससीओ की सदस्यता का सदैव इच्छुक रहा है | जिससे वह बढ़ते आतंकवाद को मिटाने में महत्वपूर्ण रोल निभा सके |चीन पाकिस्तान को भी भारत के समान सदस्यता प्रदान करने का समर्थक रहा है  | कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव ने भारत और पाकिस्तान की सदस्यता का समर्थन किया था उनके अनुसार नये सदस्यों को शामिल करने से संगठन का विकास होगा अंतर्राष्ट्रिय स्तर पर मजबूती मिलेगी

श्री पूतिन ईरान और अफगानिस्तान को भी सदस्य बनाने के समर्थक हैं लेकिन कई देश ईरान की सदस्यता का विरोध कर रहे हैं अफगानिस्तान को भी सदस्यता देने के समर्थक देशों और श्री पूतिन का तर्क है अफगानिस्तान में शान्ति स्थापना में आसानी रहेगी | अफगानिस्तान संगठन में पर्यवेक्षक है अफगानी राष्ट्रपति अफगानिस्तान से होने वाली ड्रग तस्करी पर रोक लगाना चाहते हैं और आतंकवाद को जड़ से मिटाने के लिए रणनीति बना कर एससीओ का समर्थन चाहते हैं अपने देश में शान्ति की बहाली चाहते हैं  |

संगठन के सभी सदस्य मिल कर चलते हैं हर निर्णय में सभी सहभागी हैं | भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी विश्व के हर राजनीतिक मंच पर पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद विश्व का ध्यान खींचते हैं | श्री नरेंद्र मोदी ने पांच मिनट के भाषण में पाकिस्तान का नाम लिये उसके समर्थक चीन दोनों को लपेटा लेकिन अबकी बार उनकी भाषा में पहले के समान उग्रता नहीं थी |उन्होंने कहा  ‘आतंकवाद मानव समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा है सभी राष्ट्रों को आतंकवाद से मिल कर निपटना चाहिए’ क्योकि आतंकवाद धीरे-धीरे हर राष्ट्र को अपनी चपेट में ले रहा है| (हाल ही में ब्रिटेन की आतंकवादी घटनाओं ने पहले से चिंतित योरोप की चिंता बढ़ा दी है)  उन्होंने कहा आतंकवाद के खतरे से निपटा जाए लेकिन किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान का ध्यान रखा जाये| मोदी जी ने रूस दौरे में राष्ट्रपति पूतिन से भी यही कहा था राष्ट्रों के सम्बन्धों में सम्प्रभुता प्रमुख है |

उन्होंने कहा सभी राष्ट्र कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में प्रयत्न करें जिससे व्यापार और निवेश की सम्भावना बढ़ेगी कई ऐसे क्षेत्र हैं जैसे उर्जा, शिक्षा, कृषि, रक्षा, खनिज और विकास,मिल कर बढ़ाया जाये | एससीओ के मंच से सदस्य देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने का सभी सदस्य राष्ट्र प्रयत्न करें | विशेषकर चीन के राष्ट्रपति और पाकिस्तानी प्रधान मंत्री को कहा आपसी  सहयोग से सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा होनी चाहिये आतंकवाद मानवता का शत्रू ही नहीं राष्ट्रों की सीमाओं को लांघ रहा है | कट्टर पंथी विचार धारा वाले संगठन आतंकवाद के लिए नौजवानों को आकर्षित कर उनको ट्रेनिग कैम्पों में प्रशिक्षित कर दूसरे देशों में आतंक फैलाते हैं इसके लिए  आर्थिक मदद करते हैं | अंत में मोदी जी ने भारत की सदस्यता के समर्थन के लिए एससीओ के सभी देशों का आभार व्यक्त करते हुये कहा एससीओ में भारत की सदस्यता ,सदस्य देशों के बीच सहयोग को निश्चित ही नई उंचाइयों पर ले जाएगी। एससीओ आज एक ऐतिहासिक मोड़ है और भारत इस समूह में सक्रिय एवं सकारात्मक भागीदारी के लिए तैयार है।

जब मोदी का भाषण चल रहा था पूरे समय नवाज शरीफ की दृष्टि नीचे थी वह जानते थे मोदी उन्ही को सम्बोधित कर रहे थे| चीन के राष्ट्रपति नवाज से खिन्न थे क्योंकि बलूचिस्तान में दो चीनियों की हत्या की गयी थी लेकिन इसका अर्थ यह नहीं था चीन भारत के नजदीक आ रहा है |कुछ सप्ताह पूर्व भारत ने बीजिंग में आयोजित बेल्ट एंड रोड फॉर्म का बहिष्कार किया था क्योकि जिस गलियारे के लिए सम्मेलन आयोजित किया था इसमें  दुनिया के 29 देशों नें हिस्सा लिया था यह सडक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गुजरती है |यही नहीं चीन से मदद या कर्ज लेने वाले देश भविष्य में कहीं चीन के उपनिवेश ही न बन जायें| नवाज के बोलने से पहले उनके साथ आये सैन्य अधिकारी ने उनके कान में कुछ कहा भंगिमा से ऐसा लगा जैसे नवाज कुछ असहज हुए हें लेकिन सहमत हो गये नवाज शरीफ ने भी मोदी के समान लगभग यही कहा संगठन की पहल पाकिस्तान की सुरक्षा में सुधार करने में मददगार साबित होगी जबकि नवाज नाम मात्र के प्रधान मंत्री हैं सारी शक्ति सेना के पास है | श्री पूतिन ने आतंकवादी खतरों की ओर इशारा करते हुए सबको आगाह किया  इस्लामिक स्टेट संगठन की नजर मध्य एशियाई देशों तथा दक्षिणी रूस में घुसपैठ करने की है।

अस्ताना के अंतिम घोषणापत्र के अलावा, सभी सदस्य देशों ने 10 अन्य दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए, जिसका एजेंडा कट्टरवाद से निपटने के लिए एक सम्मेलन  बुलाया जाये जिसमें अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई के लिए एक घोषणा पत्र शामिल किया अबकी बार 2018 में एससीओ  की मेजबानी चीन करेगा|

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anjana bhagi के द्वारा
June 18, 2017

प्रिय शोभा दी आपने सही लिखा है भारत की विदेश निति का प्रमुख उद्देश्य पाकिस्तान समर्थित आतंक वाद का विरोध करना उसके लिए मंच पर अपने विचार रखना प्रमुख है उपयोगी लेख

Shobha के द्वारा
June 18, 2017

प्रिय अंजना जी आपने नेरा लेख पढ़ा ही नहीं उस पर गहराई से विचार भी किया है आपका धन्यवाद

डॉ अशोक भारद्वाज के द्वारा
June 23, 2017

मोदी जी की आतंकवाद के विरुद्ध राजनीती का अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सफल विवेचन करता लेख

Shobha के द्वारा
June 24, 2017

modi ji sdaev paakistaan ke saath vivaad suljhaanaa chahte haen lekin paakistaan ki raajniti bhaart virodh ki rhi hae

अनिल भागी के द्वारा
June 25, 2017

प्रिय शोभा दीदी मोदी जी हर राजनितिक मंच पर आतंकवाद का विरोध करते हैं

abhijaat के द्वारा
June 27, 2017

आदरणीय शोभा जी मोदी जी ने अमेरिका में भी आतंकवाद की चर्चा की है वह हर मंच पर जहां भी सम्भव होता है आतंकवाद का विरोध करते हैं

ashasahay के द्वारा
June 27, 2017

    डॉ शोभा जी नमस्कार।।        जानकारी से भरा आले ख। आपने सम्पूर्ण घटनाक्रम पर प्रका श डाला है।अच्छा लगा।

Shobha के द्वारा
June 28, 2017

आदरणीय प्रिय आशा जी आपने लेख पढ़ा आपको पसंद आया सादर धन्यवाद

Shobha के द्वारा
June 28, 2017

प्रिय अभिजात जी आपने सही समझा है मोदी जी लगभग हर मंच पर आतंकवाद की चर्चा करते हैं दुनिया के देश भी आतंकवाद से तंग आ चुके हैं |

Shobha के द्वारा
June 28, 2017

श्री अनिल जी आतंकवाद का विरोध करने से विश्व के राष्ट्रों का ध्यान भी आतंकवाद की और जाएगा और जा रहा है |


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