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कश्मीर घाटी में जल्दी ही फिर से बहार आएगी

Posted On: 2 Jul, 2017 Junction Forum में

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मोदी जी और अमेरिकन राष्ट्रपति ट्रम्प की मुलाक़ात से पहले अमेरिकन प्रशासन ने हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सलाउद्दीन को अंतर्राष्ट्रीय  आतंकी घोषित किया गया यह रहता पाकिस्तान में है लेकिन आतंकी गतिविधियाँ जम्मू कश्मीर में चलाता है |भारत की कूटनीतिक विजय है|

रमजान का महीना, आखिरी जुम्मा वह भी शब–ए-कद्र का पवित्र दिन, जम्मू कश्मीर के ईमानदार डीएसपी मुहम्मद अयूब पंडित जामा मस्जिद नोहटटा में सुरक्षा के लिए तैनात थे उनके घर के पास अपना एरिया है वह नमाज अदा कर बाहर आ रहे थे उन्हें भीड़ में आतंकियों ने पहचान लिया उसके बाद मानवता को शर्म सार करने वाला व्यवहार किया गया सच्चे दीनदार ईमानदार पुलिस अफसर के कपड़े फाड़ डाले उन पर पत्थर बरसाये घसीटा, पीट- पीट कर मार डाला कुछ के अनुसार जनूनी लोग जनून में  पाकिस्तान और अलकायदा के आतंकवादी जाकिर मुसा, जाकिर मूसा — चिल्ला रहे थे ड्यूटी कर रहे मोहम्मद अय्यूब नारे बाजी की वीडियो रिकार्डिंग करने लगे उन्हें ऐसा करते देख कर भीड़ उग्र हो गयी उन्हें रा का एजेंट समझते हुए उन पर टूट पड़ी उन्होंने अपनी सर्विस रिवाल्वर उनके पास था उन्होंने  बच कर निकलने की कोशिश की लेकिन भीड़ के सामने वह लाचार हो गये  सिविल ड्रेस में थे मस्जिद में अलगाववादी नेता मीर वाईस की मस्जिद की तकरीर चल रही थी पवित्र दिनों में कैसी तकरीर दे रहे थे?  कश्मीर में अलगाव वादी हिंसा भड़का रहे हैं जबकि वह ,उनके बच्चे भारत और विदेशों में सुरक्षित हैं उनके दिल्ली में अच्छे खासे खरीदे ठिकाने हैं पाकिस्तान अपने लोगों को रोटी नहीं दे पा रहा लेकिन इन्हें कश्मीर में आतंक फैलाने के लिए पैसा दे रहा है | भारत में भी सरकार द्वारा इन्हें सुरक्षा और सुविधायें मिली हुई हैं |

मुझे विदेश प्रवास के दौरान ईरान के ऐसे प्रदेश का अनुभव है जिसके हालात हमारे कश्मीर से बदतर थे   वहां अधिकांश युवा कुछ अधेड़ भी अपना घर परिवार छोड़ कर आजाद खुर्दिस्तान का सपना देख कर संघर्ष कर रहे थे आजादी की जंग को चलाने वाले नेता स्वयं लन्दन में रहते हुए जंग संचालित कर रहे थे |अपना घर द्वार छोड़ चुके खुर्द विद्रोहियों के कई ग्रुप थे कुछ कोमिला कहलाते इन्हें रशिया समर्थित कम्यूनिस्ट मानते थे एक ग्रुप पिशमर्गों का था जिन्होने आजाद खुर्दिस्तान के लिए मृत्यू को गले लगाने का संकल्प ले लिया था कालेज स्टूडेंट का ग्रुप मुजाह्दीन प्रजातंत्र के लिए लड़ रहे थे| उन्हें अफ़सोस था आज के युग में भी वह राजशाही में रहते हैं उनकी जंग प्रजातंत्र के लिए थी लेकिन सत्ता में आयतुल्ला इमाम खुमैनी की इस्लामिक सरकार आई| खुर्दिस्तान की राजधानी सननदाज पर तेहरान में  निजाम के बदलते ही खुर्द विद्रोहियों ने अधिकार कर लिया लेकिन दो दिनों में ही तेहरान से आई सेनाओं ने सन्नदाज पर फिर से कब्जा कर खुर्द विद्रोहियों से खाली करवा लिया अब विद्रोहियों नें गाँवों और जंगलो में ठिकाने बना लिए ,वहाँ से अपना मूवमेंट चलाते थे| इस्लामिक सरकार के पासदार इन्हें पासदाराने इंकलाब (क्रान्ति के रक्षक ) कहते हैं यदि उनकी पकड़ में आ जाते थे उनका गला रेत कर हत्या कर देते थे | सननदाज को आने वाली सड़कों पर शाम छह बजे से आने जाने पर रोक लगा दी जाती | कभी भी गोलिया चलने लगती विद्रोहियों के खिलाफ तोपों का इस्तेमाल किया जाता था | खुर्दिस्तान के निवासियों की आय का साधन बस बाग़ थे अधिकतर फलों और मेवों की खेती होती थी | अक्टूबर के महीने में बर्फबारी होने लगती थी मार्च में जा कर मौसम बदलता था जवान लड़के बेरोजगार थे | युवा कब तक बेकार  बैठे रहते उनके पास दो ही विकल्प थे या सरकार का समर्थन कर पासदार बन जायें, सरकारी नौकरियां करें नहीं तो बंदूक लेकर जंगलों में निकल जायें| स्कूल धीरे-धीरे खुल रहे थे परन्तु कालेज बंद थे| स्थानीय लोग आजाद खुर्दिस्तान का स्वप्न देख रहे थे कब तक स्वप्नों में जीते आजादी की आशा धूमिल होने लगी सफेदपोश समर्थकों और आम खुर्दों का जोश भी ठंडा पड़ने लगा उन्हें पहला विकल्प अच्छा लगा उनके बच्चे पढ़ना चाहते थे डाक्टर, इंजीनियर और सरकारी नौकरियाँ करना चाहते थे बहुत लड़ चुके अब मुख्य धारा से जुड़ना चाहते थे |

विद्रोह का जोश ठंडा पड़ता गया आखिर कब तक इंतजार करते कुछ विद्रोही समर्पण करने लगे वह अपने घर लौटना चाहते थे शादी कर घर बसाना चाहते थे | कुछ विद्रोही सरकारी मुखबिर बन गये |उनको रात के अँधेरे में विद्रोही पकड़ कर ले जाते और गोलियों से भून देते | सफेद पोश इनकी हर संभव मदद करते , किशोरों को भड़का कर विद्रोही तैयार करते , इन्हें अपने घरों में ठहराना, खाना खिलाना, आराम, दवा दारू, पैसे और हथियारों का इंतजाम करते सरकारी हलचल की सूचना देते लेकिन  विद्रोही इनकी शान्ति पूर्ण जिन्दगी से चिढ़ने लगे उन पर हमला करने लगे समर्पण करने वाले पूर्व विद्रोहियों को सरकारी मुखबिर, गद्दार ,काफिर कह कर मारने लगे | यह विद्रोह के खत्म होने की स्थिति होती है| ईरान इराक की लड़ाई खत्म होने पर आयतुल्ला खुमैनी और सरकार की तरफ से ऐलान किया गया यदि अमुक तारीख कर खुर्द विर्द्रोही समर्पण कर देंगे उन्हें आम माफ़ी दे दी जायेगी हजारों लडकों ने भावुकता में बंदूक पकड़ी थी अब वह तंग आ चुके थे उन्होंने समर्पण कर दिया जब भी उन्हें जेंदान (जेलों )में हाजरी देने के लिए बुलाया जाता उनकी रातें भय से काँप कर निकलती थीं वहाँ खुदा जाने उनके साथ कैसा व्यवहार होगा ज़िंदा भी लौट पायेंगे ?

कट्टर विद्रोही खुर्द , सरकार में कार्यरत कर्मचारियों , खुर्दी पुलिस वालों को मारने लगे | अंतिम चरण शुरू हो गया जैसा तानाशाही में होता है पहाड़ों पर तोपें लगाई गयी उनसे रात दिन गोले उन गांवों कस्बों के चारो तरफ बरसायें जहाँ विद्रोही शरण लेते थे जन समर्थन खत्म हो चुका था आम लोगों ने कहा खुदा के वास्ते हमें माफ़ करों | विद्रोही जान बचाने के लिए जंगलों में छिपने लगे यहाँ उन पर गन शिप से बम गिराए गये जिस क्षेत्र को खाली कराना था सेना ने घेर लिया घेरा छोटा होता गया ज़िंदा या मुर्दा विद्रोही नजर आया उसे पकड़ कर जीप में बांध कर घसीट कर ले आये उनमें किसी का भाई ,बेटा या शौहर था लेकिन प्रजातंत्रिक व्यवस्था में ऐसा नहीं होता | खुर्दिस्तान में शांति स्थापित हो गयी|

अब वही खुर्द कभी विद्रोही थे विकास में लग गये देखते –देखते कईयों के विवाह हुए बच्चे हुए वह अपने बच्चों को वैक्सीन लगवाने आते इंजेक्शन बच्चे को लगता दर्द उनको होता | बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते मेरे डाक्टर पति से कहते डाक्टर जान बच्चे को आशर्वाद दो वह आपकी तरह दानिशमंद बने जब उनके खुद के इंजेक्शन लगता कांपते थे उनसे पूछने पर तू तो गोली  खाने से नहीं डरा इंजेक्शन से डर रहा है कहते डाक्टर जान गोली तो कहीं से भी आती है दिखाई नहीं देती सूई दिख रही है | कालेज भी खुल गये खुर्द बच्चे कम्पीटीशन की तैयारी करने लगे | गर्मी की छुट्टियों में स्टूडेंट अपना खर्चा निकालने के लिए काम करते थे पूरा प्रदेश देखते – देखते खुशहाल होता गया |

आज कश्मीर का हाल बेहाल है कश्मीर में रोजगार खत्म हो गये टूरिज्म आय का मुख्य साधन था फ़िल्में बनती थी और अमरनाथ यात्रा उनकी कमाई का सीजन होता था हर कश्मीरी बाशिंदे के पास काम था |अलगाव वादियों ने उनके बच्चों को दिहाड़ी मजदूरी पर पत्थर बाज बना दिया एक ही उद्योग है सुरक्षा सैनिकों पर पथराव करो | कश्मीरियत कहीं खो गयी | अब कश्मीरी समझने लगा है उनके बच्चों का भविष्य अन्धकार मय हो रहा है | वह अपने बच्चों को पढ़ाना चाहते है|बच्चे इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी करते हैं मुश्किल विषयों की तैयारी के लिए ट्यूशन ले रहे है |कश्मीर में भारतीय सेना द्वारा संचालित गुड विल स्कूलों का विरोध कर। हुरियत और अलगाववादी कश्मीरियों को डराते हैं अपने बच्चों को आर्मी स्कूलों में पढने के लिए न भेजे यह स्कूल  बच्चों को उनकी संस्कृति और धर्म से दूर कर देंगे |कई बच्चों ने सिविल सर्विस की परीक्षा पास की आईआईटी में सिलेक्ट हुये | सेना और पुलिस में भर्ती होने वाले नौजवानों की भीड़ बढ़ती जा रही है | पाकिस्तान से आने वाले आतंकियों को   यहाँ के बाशिंदों से क्या दर्द ?कश्मीरी समझने लगे हैं अलगाववाद का राग अलापने वालों के बच्चों का भविष्य अच्छा है वह  स्वयं सुरक्षित हैं| अब दूसरा चरण शुरू हो गया आतंकियों का कश्मीरी पुलिस बल को मारना छह पुलिस कर्मियों के चेहरे पर गोलियां दागी कश्मीरी सेना का अफसर अपनी बहन की शादी में घर आया था वह निहत्था था उसको मारा | जिनकों आतंकी मार रहे हैं उन जनाजों में भीड़ बढ़ रही है |डीएसपी अयूब की रिश्तेदार चीख –चीख कर कह रही थी हाँ में इंडियन हूँ अलगाव वादियों को खुला चैलेंज था | अपनों को मारना आन्दोलन के उग्र होने की निशानी नहीं आतंकियों के आकाओं की हताशा है |वह दिन दूर नहीं जब कश्मीर में अमन शान्ति होगी नौजवानों के हाथ में बंदूक नहीं किताबें होंगी |

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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abhijaat के द्वारा
July 4, 2017

आदरणीय शोभा जी आपका लेख पढ़ कर यह पंक्तियाँ याद आयीं सुबह कभी तो आएगी

अंजना भागी के द्वारा
July 4, 2017

प्रिय शोभा दी आपके लेख द्वारा जाना केवल कश्मीर ही नहीं और भी ऐसे क्षेत्र हैं जहां अशांति थी फिर हालात सुधर गए एक दिन कश्मीर से भी आतंकवाद खत्म होगा

Shobha के द्वारा
July 5, 2017

प्रिय अभिजात कश्मीर के भी दिन जरूर फिरेंगे लेख पढने के लिए धन्यवाद

Shobha के द्वारा
July 5, 2017

प्रिय अंजना जी आतंकवादी गतिविधियाँ अधक समय तक चल नहीं सकतीं एक दिन कश्मीर के हालात सुधरेंगे

Anil bhagi के द्वारा
July 12, 2017

प्रिय शोभा दीदी कश्मीर के विषय में हम पढ़ते रहते हैं आपके द्वारा ईरान के खुर्दिस्तान प्रान्त के बारे में जाना


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