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शियोमेन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की चीन पर कूटनीतिक विजय

Posted On: 7 Sep, 2017 Junction Forum में

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chin bhart15 एवं 16 अक्टूबर 2016 को भारत के गोवा राज्य में हुए शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाना भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की कूटनीतिक विजय थी यहाँ आतंकवादी गतिविधियों की निंदा ही नहीं की गयी थी आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन एकत्रित करने के साधनों जैसे नशीली वस्तुओं के उत्पादन और तस्करी पर रोक, आतंकी गतिविधियों के पक्ष में होने वाले दुष्प्रचारों की रोकथाम , आतंकी ठिकानों नष्ट किये जायें मिल कर आतंकवाद पर अंकुश लगायें संयुक्तराष्ट्र राष्ट्र संघ से भी आशा की गयी थी आतंकवाद की रोकथाम के लिए सक्रिय भूमिका निभाये |घोषणा पत्र में कहा गया था शांति और सुरक्षा से ही आर्थिक विकास सम्भव है |भारत की कोशिश थी आतंकवादी गुटों लश्करे तैयबा और जैश ए मुहम्मद जैसे गुटों को आतंकी कहा ही नहीं माना भी जाये लेकिन तब आम सहमती नहीं बन सकी  थी | तय था 2017 के ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी करेगा चीन के शियोमेन शहर में होने वाले शिखर सम्मेलन में मुख्य एजेंडा राजनीतिक सुरक्षा और सहयोग होगा |

भारत दो तरफा संघर्ष झेल रहा है पाकिस्तान द्वारा बढ़ती आतंकी गतिविधियाँ और चीन द्वारा पाकिस्तान का समर्थन करना और कहना ‘भारत आतंकी घटनाओं का राजनीतिकरण न कर आपसी झगड़े का हल बातचीत से सुलझाये, चीन नहीं चाहता था पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद का मुद्दा उठे उनके अनुसार पाकिस्तान स्वयं आतंकवाद से ग्रस्त है जबकि पाकिस्तान में राज्य समर्थित आतंकवाद पनप रहा है| चीन पाकिस्तान का समर्थन करता है सच्चाई से देखा जाये पाकिस्तान चीन से मित्रता की कीमत दे रहा है ग्वादर बन्दरगाह से चीन अरब सागर तक पहुँच गया पीओके से होते हुए उसे सड़क बनाने का मार्ग मिला | वह चीन के बल पर अकड़ता रहा है| ब्रिक्स सम्मेलन के मंच पर पाकिस्तान का नाम लिए बगैर मोदी जी ने आक्रामक रुख अपना कर आतंकवाद को बहस का प्रमुख मुद्दा बना दिया वह चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग को आतंकवाद के विरुद्ध अपना संदेश देने में सफल रहे सभी राष्ट्र समझ चुके है आर्थिक शक्ति से सम्पन्न चीन सबको आँख दिखाएगा जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिंगपिंग कहते हैं ब्रिक्स देश (ब्राजील चीन ,रूस ,भारत , दक्षिणी अफ्रिका आदि देशों का संगठन है) पाँच उँगलियों की तरह हैं छोटी बड़ी उँगलियाँ बराबर हैं सभी को मिला कर मुठ्ठी बनती है |चीन मुख्यतया आर्थिक विकास को मुद्दा बना रहा था |सम्पूर्ण विश्व आज आतंकवाद से त्रस्त है अत: हर देश समस्या से अकेला क्यों लड़ें क्यों न सभी राष्ट्र मिल पर एक साथ आतंकवाद पर प्रहार करें | जारी घोषणापत्र में कहा गया किसी भी तरह का आतंकी हमला मंजूर नहीं है तालिबान ,आईएसआई लश्कर –ए तैयबा ,जैश, और हक्कानी की निंदा की गयी आतंकवाद को बढावा देने वाले के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है आतंकवाद के खिलाफ बकायदा प्रस्ताव पास किया गया इस पर चीन ने भी हस्ताक्षर किये |अगले दिन पांच सितम्बर को मोदी जी की एक घंटे तक जिंगपिंग के साथ विभिन्न मुद्दों पर बात हुई| दोनों ने गर्म जोशी दिखाते हुए हाथ मिलाये ही नहीं हिलाए भी |

चीन ने पंचशील के अनुसार आपसी सम्बन्ध बढ़ाने की बात कही |पंचशील के सिद्धांत को 29 अप्रैल 1954 में चीन ने भी स्वीकार किया था | 1.दूसरे राष्ट्रों की अखंडता सम्प्रभुता का गुट निरपेक्ष देश सम्मान करेंगे 2.  एक दूसरे पर हमला नहीं करंगे 3.दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्ताक्षेप नहीं करेंगे 4.सबके साथ समानता और दूसरों के हितों का ध्यान रखेंगे 5. शंतिपूर्ण सह-अस्तित्व में विश्वास जबकि चीन विस्तारवादी नीति पर चलता है उसके कई देशों से सीमा विवाद है | चीन में बुद्ध धर्म का प्रचार प्रसार हुआ था |तथागत के संदेश भारत से ही चीन पहुंचे थे इसलिए दोनों देशों में मधुर सम्बन्ध होने चाहिए | चीन और भारत के बीच आर्थिक सम्बन्धों में चीन को फायदा है चीन से आयात अधिक होता है भारतीय बाजार चीन के सामान से पटे हुये है निर्यात कम तब भी चीन ने भूटान के डोकलाम पर हस्ताक्षेप कर एक बार युद्ध की स्थिति बना दी लगभग 73 दिन कर दोनों देशों में तनाव रहा |

चीन का सरकारी मीडिया भारत के विरुद्ध धमकी की भाषा का प्रयोग करता रहा जबकि वहाँ की लीडर शिप की भाषा अलग थी |भूटान के क्षेत्र डोकलाम पठार पर चीन ने सड़क बनाने की कोशिश की , क्षेत्र भारत के लिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है चीनी सैनिक सिक्किम सेक्टर में चुम्बी वैली के डोकलाम में जबरन घुसी जबकि यहाँ भारत के सिक्किम ,भूटान और तिब्बत की सीमाएं मिलती हैं यदि भूटान भारत का सहयोग न करता तो भारत चीन के खिलाफ कैसे अड़ सकता था यह क्षेत्र चिकन नेक कहलाता है |चिकननेक से भारत नार्थ ईस्ट से जुड़ता यदि यहाँ चीन प्रभाव बढ़ा लेता है भारत चीन  युद्ध की स्थिति  में हमारा अपने नौर्थ ईस्ट से सम्पर्क टूट जाता एक तरह से चीन भूटान को चारो तरफ से घेर लेता |वह सदैव तिब्बत की तरह भूटान पर कब्जा चाहता है | चीन भारत के बीच में स्थित म्यनमार पर भी अपना प्रभाव जमाता है | श्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन के बाद मयनमार की यात्रा पर गये | हमारी विदेशी नीति सफल रही चीन ने कई करवटें बदली भारत के सैनिक विरोध करते रहे धक्कामुक्की, पथराव भी हुआ, चीनी सेना ने सैनिक प्रदर्शन किये | 40 वर्ष से दोनों देशों के बीच  एक भी गोली नहीं चली एकबार लगा युद्ध होगा भारत युद्ध के लिए तैयार था लेकिन मोदी सरकार ने विषय को ऐसे लिया जैसे कुछ भी नहीं है अंत में चीन को पीछे हटना पड़ा|

चीन में जिनपिंग का कार्यकाल समाप्त हो रहा है | 18 अक्टूबर को चीन में कम्यूनिस्ट पार्टी  की बैठक में उनको दूसरा कार्यकाल देने का निर्णय होगा| जिंगपिंग अपने आपको माओ की तरह मजबूत सिद्ध करना चाहता है |चीन नार्थ कोरिया के प्रशासक को भी चढ़ा रहा है इससे राष्ट्रपति ट्रम्प चीन से नाराज है, चीन साऊथ सी में भी पैर पसार रहा है |भारत का अमेरिका और जापान ने भी साथ दिया चीन को जतला दिया भारत अकेला नहीं है भारत के विश्व के देशों के साथ भी मधुर सम्बन्ध है |जिनपिंग समझ गये ब्रिक्स सम्मेलन का यदि भारत ने बहिष्कार किया शिखर सम्मेलन फेल हो जाएगा अत : चीन ने अपना कदम वापिस ले लिया मोदी जी और जिनपिंग के बीच एक घंटे तक कई विषयों पर द्विपक्षीय वार्ता हुई |डोकलाम को भुला कर सम्बन्धों को मजबूत करने की बात की गयी |चीन किसी कीमत पर भारत के विशाल बाजार को खोना नहीं चाहता ट्रम्प पहले ही कह चुके है चीन के साथ व्यापार में वह आर्थिक बैलेंस बराबर रखेंगे| भारतीय जन समाज में भी चीनी बस्तुओं के बहिष्कार की भावना बढ़ रही है | पहले चीन ने सैनिक जमावड़ा कर धमकी से डरा कर कोशिश की फिर पंचशील याद आ गया | अगले माह संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में जैश ऐ महम्मद को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव आयेगा देखना है क्या पकिस्तान के पक्ष में चीन वीटो करता है ? चीन पर विश्वास नहीं किया जा सकता वह पहले भी 1962 में हिंदी चीनी भाई भाई का नारा, पंचशील पर सहमती जता कर धोखा दे चुका है कूटनीति भी कहती है दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखो  |

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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Anil bhagi के द्वारा
September 7, 2017

प्रिय दी ाओंके लेख द्वारा बहुत कुछ जान्ने को मिला चीन हमारे देश से कमाता भी है और धौंस भी दिखाता है

Shobha के द्वारा
September 8, 2017

अतिशय धन्यवाद डॉ साहब

Shobha के द्वारा
September 8, 2017

प्रिय अनिल चीन की विदेश नीती का यही हाल है हमें चीन के मुकाबले अपने देश को मजबूत करना है

Rinki Raut के द्वारा
September 10, 2017

प्रिय शोभा जी,आप को बहुत बधाई सुन्दर लेख के लिए

Shobha के द्वारा
September 11, 2017

प्रिय रिंकी लेख पढने पसंद करने के लिए धन्यवाद


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