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श्री ट्रम्प का कूटनीतिक कदम येरुसलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देना

Posted On: 15 Dec, 2017 Junction Forum में

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अमेरिकन राष्ट्रपति ट्रम्प ने येरुसलम को इजरायल की राजधानी के तौर पर मान्यता देते हुए तेल अबीब से अपने दूतावास को येरुसलम स्थानांतरित करने की घोषणा की है इसके खिलाफ मुस्लिम वर्ड में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं | फिलिस्तीन में चरम पंथी समूह हमास का विरोध चरम पर है | श्री ट्रम्प ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान येरुसलम को इजरायल की राजधानी बनाने का जिक्र ही नहीं वादा भी किया था उनके अनुसार मिडिल ईस्ट इजराईल के जन्म के बाद से अशांत क्षेत्र है उनके निर्णय से क्षेत्र में शांति प्रक्रिया तेज होगी एक स्थाई हल का मार्ग निकलेगा इजरायल और फिलिस्तीनियों के विवाद के हल होने की नजर से देखा जायेगा | इजरायली प्रधान मंत्री नेतन्याहू ने घोषणा का स्वागत करते हुए कहा येरुशलम यहूदियों का पवित्र धर्म स्थल रहा है यहाँ हमारे पैगम्बरों ने उपदेश दिए थे |

इजरायल सम्पूर्ण येरुसलम को अपना क्षेत्र मानता रहा है फिलिस्तीनी भी चाहते हैं उनका अलग राज्य बने लेकिन पूर्वी येरुसलम उनकी राजधानी बने | मिश्र इराक सउदी अरब सीरिया जोर्डन एवं लेबनान ने मिल कर इजरायल पर हमला किया था केवल छ: दिन के युद्ध में अरबों की हार हुई यही नही 1967 येरुसलम के पूर्वी हिस्से पर इजरायली सेना ने कब्जा कर लिया था इससे इजरायल को अपने राज्य में बसे फिलिस्तीनियों का विरोध भी झेलना पड़ा था |1980 में इजरायल ने येरुसलम को अपनी राजधानी घोषित किया लेकिन यह अरब समुदाय को स्वीकार नहीं था वह नाराज हो गये

ट्रम्प के इस कदम का सुरक्षा परिषद के स्थायी और 14 अस्थायी सदस्यों और योरोपियन संघ के देशों में विरोध हो रहा है मुस्लिम देश भडक रहे हैं अरब देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में श्री ट्रम्प को फैसला वापिस लेने का दबाब डाला गया |संयुक्त राष्ट्र में मिश्र के स्थायी प्रतिनिधि अब्देलातीफ़ ने येरुसलम पर ट्रम्प के फैसले का विरोध करते हुए अन्य देशों से अपने दूतावास तेल अबीब से येरुसलम न ले जाने का प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा अमेरिकन फैसला इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों की मान्यता के सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उल्लंघन है  लेकिन अमेरिका की स्थायी प्रतिनिधि निकी हेली ने राष्ट्रपति के फैसले को समाप्त करने वाले यू.एन सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर वीटो के अधिकार का प्रयोग किया|भारत से अमेरिका की नजदीकियाँ बढ़ रही हैं अत :भारत तटस्थ है उसके अनुसार समस्या का हल शान्ति पूर्ण ढंग से होना चाहिए |

israel-jerusalem-the-flag-of-israelयेरुशलम–  भूमध्य सागर और डेड सी  ( यहाँ के समुद्र में इतना नमक है जिसके कारण स्नान करने वाला डूबता नहीं है ) के बीच में इजरायल की सीमा पर बसा खुबसूरत धार्मिक शहर सेलानियों के आकर्षण का केंद्र रहा है | येरुसलम में यहूदी बहुसंख्यक हैं इसके अलावा ईसाई मुस्लिम और आर्मीनियन ( यह ईसाईयों का एक वर्ग है लेकिन संख्या में कम हैं ) अर्थात दुनिया का सबसे प्राचीनतम आर्मेनियाई केंद्र है |येरुसलम का इतिहास यहूदियों ,ईसाईयों और मुस्लिमों के विवाद का केंद्र

यहाँ किंग डेविड का पवित्र टेम्पल था– अब केवल उसकी दीवार बची है यहूदियों और ईसाई विचारकों का विश्वास है यहाँ पहली बार एक शिला की नीव रखी गयी थी यहीं से दुनिया का निर्माण हुआ था अत :यह धरती का केंद्र है यहीं पर अब्राहम ने अपने बेटे इसाक की कुर्बानी दी थी | 198 ई.पू में यूनानी परिवार के ही सेल्यूकस राजवंश के अंतीओकस चतुर्थ ने सत्ता ग्रहण करते ही यहूदियों ने उसके विरुद्ध जेरूसलम में विद्रोह किया |विद्रोह का दमन करने के लिए हजारो यहूदियों को मार डाला यहूदियों के पवित्र डेविड टेम्पल को लूट लिया उनके ‘तौरेत’ (धर्म ग्रन्थ ) की जो भी प्रति मिली उसे जला दिया| यहूदी धर्म के पालन पर रोक लगा कर यहूदियों के धर्म ,आस्था और आत्म सम्मान पर गहरी चोट लगी थी |येरुसलम ने अनेक उतार चढाव देखे 142 ई.पू .में ही यूनानियों से लड़ कर यहूदियों के नेता ने उनको आजाद करवा दिया लेकिन आजादी अधिक समय तक चल नहीं सकी रोमन ने फिर से उस पर अधिकार ही नहीं किया अबकी बार एक-एक यहूदी की हत्या कर दी| पश्चिमी दीवार उस टेम्पल की निशानी है यह दीवार  होली आफ होलीज  के सबसे करीब हैं | यहाँ यहूदी प्रार्थना कर सकते हैं. पश्चिमी दीवार को विलाप की दीवार भी कहते हैं) टेम्पल की यादगार है लाखो तीर्थ यात्री दीवार के पास खड़े होकर रोते और इबादत करते दिखाई देते हैं  |इसका क्षेत्र पवित्र माना जाता है यह ओल्ड सिटी का हिस्सा है | यहूदी दुनिया में कहीं भी रहते हों वह येरुसलम की और मुहं कर प्रार्थना करते हैं दीवार  का प्रबंध पश्चिम दीवार के रब्बी करते हैं

क्रिश्चियन समाज का विश्वास है यहाँ ईसा को सूली (सलीब) पर चढ़ाया गया था इस स्थान को गोल गोथा भी कहते हैं यहाँ ईसा का पुन: जन्म हुआ यहीं उन्होंने सरमन दिये थे |ईसाई समाज यहाँ के लिए बहुत संवेदन शील है अत : दुनियाभर के लाखों ईसाइयों का मुख्य तीर्थस्थल है, जो ईसा के खाली मकबरे की यात्रा करते हैं और यहां प्रार्थना कर सुख शान्ति की कामना करते हैं |

मस्जिद अक्सा –| इस्लाम में मक्का ,मदीना की मस्जिदों के बाद यह इस्लाम धर्म की तीसरी मस्जिद पश्चिम दीवार के ऊपरी हिस्से में डोम आफ रॉक और मस्जिद अक्सा स्थित है| मुस्लिम समाज का विश्वास है पैगम्बर मुहम्मद क्रिश्चियेनिटी में फरिश्ते का नाम गैब्रियल (अरबी में जिब्रियल) के साथ घोड़े ‘बराक’ पर एक रात में मक्का गये यहाँ वह अन्य धर्मों के पैगम्बरों से मिले थे| मान्यता है यहीं से पैगम्बर मुहम्मद स्वर्ग में खुदा के पास गये थे यह दिन मुस्लिम समाज में पवित्र दिन माना जाता है | मुस्लिम समाज रमजान के हर जुमे को इकठ्ठे होकर नमाज पढ़ते हैं |

इजरायल पर कभी मिश्र और प्रथम विश्व युद्ध के समय टर्की का कब्जा था लेकिन 1917 में प्रथम विश्व युद्ध के समय इजरायल पर ब्रिटिश सेनाओं ने कब्जा कर लिया यहूदियों को आश्वासन दिया ब्रिटिश सरकार उन्हें इजरायल को बसाना चाहती है यहूदियों का अपना एक देश हो दुनिया से यहूदी यहाँ शरण मांगने और आ कर धीरे-धीरे बसने लगे| हिटलर ने जर्मनी की सत्ता सम्भालने के बाद यहूदियों को आर्थिक मंदी का कारण बता कर उन्हें प्रथम विश्व युद्ध की हार के बाद जर्मनी के हर कष्ट का कारण यहूदी हैं ऐसा प्रचार कर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया उनकी नस्ल की नस्ल नष्ट करने के लिए जानवरों की तरह उन्हें ठूस-ठूस कर ट्रकों में भर कर लाया जाता फिर मरणासन्न स्त्री पुरुषों को गैस चेम्बरो में मरने पर विवश किया जाता | केवल जर्मनी ही नहीं फ़्रांस, इटली ,रूस ,और पौलेंड में अत्याचार ही नहीं उनके धर्म पर बैन लगा दिया गया देख कर आश्चर्य होता है |  नर संहार से बची यहूदी नस्ल पत्थर बन गयी |अब वह उस धरती पर लौटना चाहते थे जहाँ से उनको निकाला गया था |

द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र राष्टों की धुरी राष्ट्रों पर विजय हुई लेकिन ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ भी कुछ अरब संगठन हिंसात्मक बिद्रोह कर रहे थे योरोप में अपनी कौम के संहार से त्रस्त बसे यहूदी शरणार्थी और वहाँ के बाशिंदों में संघर्ष बढ़ते जा रहे थे| ब्रिटिशर ने ऐसा उपाय निकालने की कोशिश की जिससे अरब और यहूदी दोनों सहमत हो सकें| संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा फिलिस्तीन को बाँट दिया जाये विभाजन दो राज्यों में होना था संयुक्त राज्य संघ ने 1947 में विभाजन का प्रस्ताव पास हो गया  इसे इजरायल ने तुरंत स्वीकार कर लिया लेकिन येरुसलम पर फैसला नहीं हो सका वह संयुक्त राष्ट्रसंघ के आधीन रहा |

14 मई 1948 को इजरायल ,एक यहूदी राष्ट्र की स्थापना हुई| प्राचीन कहानियों में वर्णित इजरायल क्या वैसा था धूल भरी आंधियाँ आभाव ही अभाव तम्बुओं में लोग पड़े थे लेकिन उनके मन में उत्साह की कमी नहीं थी मजबूत राष्ट्र के निर्माण की इच्छा शक्ति थी |सीरिया ,लीबिया और ईराक ने संयुक्त रूप से नव निर्मित इजरायल पर हमला कर दिया सउदी अरब ,मिश्र और यमन भी युद्ध में शामिल हो गये एक वर्ष बाद युद्ध विराम की घोषणा हुई 11 मई 1949 में संयुक्त राष्ट्र ने  इजरायल को मान्यता दी लेकिन अरब और इजरायल के बीच संघर्ष की कहानी चलती रही 1980 में इजरायल ने येरुसलम को अपनी राजधानी घोषित किया यह अरब समुदाय को स्वीकार नहीं था वह नाराज हो गये येरुसलम का महत्व तीनों धर्मावलम्बियों के लिए बराबर था |

ट्रम्प की घोषणा पर इजरायल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे ऐतिहासिक दिन बताया |उनके अनुसार येरुसलम 3000 बर्षों से यहूदियों की राजधानी रहा है यहाँ यहूदी धर्मावलम्बियों के पवित्र धर्मस्थल हैं, अनेक प्रतापी राजों की सत्ता रही है ,पैगम्बरों ने प्रवचन दिए हैं दुनिया भर में फैले यहूदी अपने स्थान येरुसलम में लोटे हैं

राष्ट्रपति ट्रम्प से पहले भी अमेरिकन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ऐसा वादा कर चुके हैं लेकिन क्रियान्वित करने की घोषणा श्री ट्रम्प ने की उनके  फैसले का विरोध भी जम कर हुआ है इसे खतरनाक कदम बताया कुछ इस्लामिक देशों में विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं|  ट्रम्प का कूटनीतिक दाव ऐसे समय में चला गया है जब अधिकाँश अरब मुल्कों में तानाशाही के विरुद्ध जन समाज में हवा है और संघर्ष हो रहे हैं मुस्लिम समाज शिया सुन्नी में बटता जा रहा है ईरान की इस्लामिक सरकार अपने आपको शियाओं का हित चिंतक मानती है हर प्रदेश जहाँ शिया निवास करते हैं शियाओं की समस्या में हिजबुल्ला (ईरान) दखल देते है | पैगम्बर मोहम्मद के जन्म दिवस पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर ईरान के राष्ट्रपति रूहानी और देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला खुमैनी ने इस्लामिक जगत को ऐसी साजिश के खिलाफ खड़ा होना चाहिए ईरानी राष्ट्रपति ने इस सन्दर्भ में टर्की से भी सम्पर्क किया |सद्दाम हुसेन के पतन के बाद पर्शियन गल्फ के दूसरे किनारे पर बसे इराक शिया बहुमत क्षेत्र में शिया प्रभाव वाली सरकार हैं शियाओं प्रभाव बढ़ता जा रहा है मिडिल ईस्ट की हर समस्या में शिया सुन्नी का संघर्ष देखा जा सकता है विश्व आतंकवाद से भी त्रस्त है |

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
December 16, 2017

देखना है श्री ट्रम्प अडियल रुख अपनाते हैं या अपने फैसले पर फिर से विचार करते हैं एक बात स्पष्ट है अब मिडिल ईस्ट में हथियारों की खरीद बढ़ने लगेगी ईरान की इस्लामिक सरकार का प्रभाव भी बढ़ेगा वह अरबी वर्ड के हितचिन्तक के रूप में अपने आप को प्रस्तुत करेगी लेकिन भारत ने ट्रम्प की घोषणा पर अपना रुख साफ़ नहीं किया है भारत इजराईल से नजदीकियां चाहता है लेकिन साथ ही फिलिस्तीनियों के पक्ष का भी समर्थन करता है |

rameshagarwal के द्वारा
December 16, 2017

जय श्री राम शोभा जी आपके लेख से पूरा इतिहास की जानकारी हो जाती.इस फैसले पर भी मुस्लिम जगत २ भागो में बाँट गया है देखना है की ट्रम्प कितनी मजबूती से अपने फैसले पर अडिग रह पाते है लेकिन यही सबसे अच्छा हल होगा,अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगा.

Shobha के द्वारा
December 16, 2017

श्री आदरणीय रमेश जी लेख पढने पसंद करने के लिए अतिशय धन्यवाद आपको फिर से ब्लॉग में लिखते देख कर ख़ुशी होती है |आप स्वस्थ रहें ऐसे ही लिखते रहें

अनिल भागी के द्वारा
December 16, 2017

प्रिय शोभा दीदी इजरायल और येरुसलम के इतिहास के बारे में विस्तार से जाना धन्यवाद

harirawat के द्वारा
December 19, 2017

शोभा जी नमस्कार ! आप अपने ब्लॉगों में पाठकों दो हर दूसरे तीसरे दिन नयी नयी जानकारियां देते रहते हो, इसके लिए साधुवाद ! भारत का रुझान इजराइल की और है ! कुछ पीछे जाकर अगर देखें तो एक ऐसा भी समय आया था जब तमाम मुस्लिम अरब देशों ने इजराइल को चारों ओर से घेर लिया था, लेकिन अकेला इजराइल ने तमाम अरब देशों की नाकों में नकेल डाल दिया था और उन्हें हार झक मार कर अपनी अपनी सेनाओं को वापिस बुलाना पड़ा था, काफी धन जन के नुकशान की कीमत चुकाकर !

Shobha के द्वारा
December 19, 2017

आदरणीय रावत जी लेख पढने के लिए अतिशय धन्यवाद एक समय था सभी अर्ब देश एज्राल के विरोधी थे अब हालात बदल गये सबसे पहले इजिप्ट ने इजरायल से सम्बन्ध जोड़ा अब इजरायल एक ताकत बन गया है भारत की जनता इजरायल को सम्मान की दृष्टि से देखती है |

anjna bhagi के द्वारा
December 19, 2017

प्रिय शोभा जी इजरायल का भारत में बहुत सम्मान करते हैं बड़ी मुश्किल से इजरायल एक मजबूत देश बना है लेकिन भारत सरकार की नीति फिलिस्तीनियों के हितों का भी समर्थन करती है ट्रम्प की इजरायल निति पर बहुत अच्छा लेख |

Shobha के द्वारा
December 20, 2017

प्रिय अनिल लेख पढने के लिए धन्यवाद इजरायल का इतिहास संघर्ष पूर्ण है

Shobha के द्वारा
December 20, 2017

प्रिय अंजना जी सही है भारतीय जनता इजरायल का सम्मान करते हैं अब हमारी विदेश नीति भी इजरायल के साथ मधुर सम्बन्ध बढाने की है

Shobha के द्वारा
December 20, 2017

प्रिय अनिल जी इजरायल ने अपने आप को यहाँ तक पहुचाने में बहुत मेहनत की है इजरायल का इतिहास स्म्घर्ष पूर्ण रहा है आज भी वहाँ शांति नहीं है |


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